सख्त आदेश जारी:राज शाला संबलन एप से अब निजी स्कूलों का भी होगा डिजिटल निरीक्षण, अधिकारियों को मौके से ही दर्ज करनी होगी जानकारी
प्रदेश के सभी गैर-सरकारी (निजी) स्कूलों का निरीक्षण अब पूरी तरह डिजिटल होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इसके लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। अब सरकारी स्कूलों की तरह ही निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं को भी ‘राज शाला संबलन’ एप के जरिए परखा जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस नई व्यवस्था को तुरंत और प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्कूल परिसर में मौजूद रहना अनिवार्य होगा। उन्हें मौके से ही एप पर लाइव जानकारी दर्ज करनी होगी, जो ओटीपी आधारित होगी। इस दौरान स्कूल की पढ़ाई, प्रशासनिक व्यवस्था, फीस, और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी। इस नई व्यवस्था में निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की गई है। हर अधिकारी को अपने मासिक लक्ष्य का कम से कम 75 प्रतिशत निरीक्षण अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। शिक्षा विभाग हर 15 दिन में इन निरीक्षणों की वर्चुअल समीक्षा करेगा। खत्म होगा कागजी निरीक्षण: अब तक विभाग को शिकायतें मिलती थीं कि कई बार अधिकारी स्कूल जाए बिना ही दफ्तर में बैठकर ‘टेबल इंस्पेक्शन’ (कागजी रिपोर्ट) तैयार कर लेते थे। स्कूल प्रबंधन और निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से कई कमियां छुपा ली जाती थीं। ‘राज शाला संबलन’ एप इसी भ्रष्टाचार को खत्म करने का हथियार है। यह एप ‘जियो-फेंसिंग’ तकनीकपर काम करता है। इसका मतलब है कि जब तक अधिकारी स्कूल की सटीक लोकेशन (जीपीएस कोऑर्डिनेट्स) के दायरे में खड़ा नहीं होगा, तब तक एप में निरीक्षण का फॉर्म ही नहीं खुलेगा। इससे फर्जी रिपोर्टिंग और सेटिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी। मोनोपोली पर रोक: अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या स्कूल बैग खरीदने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा।n किताबों का बदलाव: स्कूल प्रबंधन हर साल बेवजह पाठ्यपुस्तकें तो नहीं बदल रहा।n फीस नियमन: राजस्थान विद्यालय (फीस विनियमन) अधिनियम-2016 और 2017 के तहत फीस कमेटी बनी है या नहीं। इसके दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड हैं या नहीं।n बुनियादी सुविधाएं व सुरक्षा: फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र, खेल का मैदान, लैब, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय और रैंप जैसी सुविधाओं की जांच।n आरटीई: शिक्षा के अधिकार से जुड़े नियमों का सही से पालन हो रहा है या नहीं। डेटा से तय हो सकेगी स्टार रेटिंग इस डिजिटल लाइव मॉनिटरिंग का लॉन्ग-टर्म फायदा सीधे अभिभावकों को मिलेगा। शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो एप के जरिए जो रियल-टाइम डेटा इकट्ठा होगा, उसका इस्तेमाल भविष्य में प्राइवेट स्कूलों की ग्रेडिंग के लिए किया जा सकता है। जिन स्कूलों में सुरक्षा, आरटीई और फीस नियमों का शत-प्रतिशत पालन मिलेगा, उन्हें बेहतर ‘स्टार रेटिंग’ दी जा सकेगी। इस डेटा को शाला दर्पण पोर्टल से लिंक किया जा सकता है, ताकि नए सत्र में एडमिशन के समय पैरेंट्स आसानी से देख सकें कि कौन सा स्कूल नियमों के मामले में कितना पारदर्शी और सुरक्षित है। बता दें कि ‘राज शाला संबलन’ एप ‘जियो-टैगिंग’ तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि निरीक्षण अधिकारी किसी दफ्तर या घर में बैठकर खानापूर्ति नहीं कर सकते, उन्हें स्कूल की वास्तविक लोकेशन पर जाकर ही एप में डेटा दर्ज करना होगा। यह पूरी तरह से पेपरलेस प्रक्रिया है।

