डॉक्टर बोले-हम उनके कलेजे पर कटर नहीं चला पाएंगे:मोर्चरी के जिस टेबल पर हर दिन अनजान शवों की चीरफाड़ करते थे, वहां लेटे थे गुरु
प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल की मोर्चरी ने अपने इतिहास में कई भयानक और वीभत्स मंजर देखे हैं, लेकिन सोमवार का दिन यहां के डॉक्टरों के लिए सबसे कठिन और रूह कंपा देने वाला रहा। रोजाना अनजान शवों का पोस्टमार्टम करने वाले फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों के सामने जब उनके अपने मार्गदर्शक, गुरु और विभागाध्यक्ष डॉ. नंदलाल डिसानिया का शव आया, तो पूरी मोर्चरी चीखों और आंसुओं में डूब गई। जूनियर से लेकर सीनियर डॉक्टरों ने एक सुर में कह दिया-‘आज हमसे मत कराइए… हम अपने गुरु के कलेजे पर कटर या छुरी नहीं चला पाएंगे।’ जाते-जाते नई मोर्चरी और प्रदेश की पहली आधुनिक लैब दिला गए ‘डॉ. डिसानिया की खुदकुशी से पूरा मेडिकल कॉलेज स्तब्ध था लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा फॉरेंसिक विभाग की थी…। सीनियर प्रोफेसर डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया, ‘जब मोर्चरी में पोस्टमार्टम करने को कोई भी डॉक्टर तैयार नहीं था। एक बार विचार आया कि पोस्टमार्टम किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में ट्रांसफर कर दें। फिर दिल पर पत्थर रखकर साथियों को समझाया।’ इसके बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। इसमें डॉ. दीपाली पाठक, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. ज्ञानप्रकाश गौड़ और डॉ. श्वेता गोयल थीं। डॉ. दीपाली ने बताया कि ‘हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने ही एचओडी पर हमें कटर और छुरी चलानी पड़ेगी। पहली बार हमारे हाथ कांप रहे थे। नम आंखें लिए बोर्ड के डॉक्टरों ने कहा कि पोस्टमार्टम टेबल पर सामने मरीज नहीं, उनके एचओडी थे। ऐसे में हाथ कांप गए। 1 करोड़ की लैब उनकी अंतिम देन…उन्होंने प्रयासों से 1 करोड़ से प्रदेश की पहली ‘पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब’ तैयार करवाई थी। संबंधित खबर पेज 4 पर

