आधा-अधूरा बजट मिला:शेरगढ़ किले के विकास कार्यों के लिए चौथी बार में भी फर्म नहीं आई, 3 ऐतिहासिक बावड़-कुंडों की डीपीआर तक के लिए कोई नहीं आया

पर्यटन के लिहाज से ‘आइकॉनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ में शामिल शेरगढ़ किला (बारां) की आभा लौटाने के लिए कोई फर्म नहीं आ रही। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग इस काम के टेंडर कर करके थक गया। अक्टूबर 2025 के बाद से 4 बार निविदा आमंत्रित की जा चुकी। जैसे ही इसको खोला जाता है किसी फर्म का नाम नहीं दिखता। एक बार फिर विभाग ने रिकॉर्ड पांचवीं बार निविदा आमंत्रित की है। ऐतिहासिक शीतला माता कुंड (वल्लभनगर), मेडतानी बावड़ी (झुंझुनूं) और सुंदर विलास कुंड (नाथद्वारा) की डीपीआर के लिए भी 5 बार टेंडर निकाले जा चुके, लेकिन किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे हालात क्यों उपजे? पड़ताल में आया कि विभाग में पहले से जो कामकाज चल रहे हैं, उनके लिए ही बजट का भारी टोटा है। जो काम चल रहे हैं, उनके लिए बजट नहीं आ रहा। ऐसे में काम रेंग रहे हैं या रुक चुके हैं। अब विभाग जब नए कार्यों की निविदा जारी कर रहा है तो उनके लिए कोई फर्म दिलचस्पी नहीं दिखा रही। अफसर-इंजीनियर फर्मों को दिलासा देकर निविदा में भाग लेने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात के आगे ये सब फीका पड़ रहा है। फर्में जारी कार्यों के पेमेंट मांग रही है, इसका संबंधित अफसर-इंजीनियरों के पास कोई जवाब नहीं। वहीं उच्चाधिकारी केवल मीटिंग-मीटिंग खेल रहे हैं। हाल देख 10 से ज्यादा स्मारकों की सालभर पहले की घोषणाओं पर जीर्णोद्धार कार्यों की निविदा ही नहीं लगाई जा रही। बजट घोषणाओं का हाल…2024-25 और 2025-26में सरकार ने 32 ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के जीर्णोद्धार और विकास की घोषणाएं की थीं। 45.5 करोड़ के बजट के बाद उम्मीद थी कि इनकी रौनक जागेगी। इनमें से केवल 4 के लिए ही आधा-अधूरा बजट मिल पाया। उधर काम आगे बढ़ाने के लिए बजट नहीं मिल पाया। फर्में विभाग पर दबाव बना रही हैं तो विभाग ऊपर सरकार का मुंह ताक रहा है। 16 स्मारकों में बिना बजट काम शुरू किया, अब डांवाडोल…
विभाग ने 16 पर काम शुरू करा दिए, लेकिन अब वो या तो रेंग रहे हैं या फिर रुक गए हैं। इनमें मांजी की बावड़ी-आमेर, रैवासा बावड़ी-खाटूश्यामजी मार्ग, हाड़ी रानी की बावड़ी-स.माधोपुर, शोरती की बावड़ी-खंडार पाली घाट, खिलचीपुर की बावड़ी-स.माधोपुर, बाईजी की बावड़ी, गोगुंदा, छोटा गोपालपुरा की बावड़ी-नाथद्वारा, मूसी महारानी की छतरी-अलवर जैसे स्मारक हैं। 4 के लिए ही बजट मिला, वह भी आधा
करणी माता मंदिर (उदयपुर), वीर हनुमान मंदिर (सामोद), खेड़ापती बालाजी मंदिर (माधोपुराजपुरा) और वैर किला एवं सफेद महल के लिए ही बजट मिला है। इनमें भी केवल खेड़ापती को छोड़कर किसी के लिए पूरा बजट आवंटित नहीं हुआ। काम चल रहे हैं। हां, बजट रहेगा तो स्पीड रहेगी। कुछ में है, कुछ में मांगा हुआ है। बजट आ जाएगा। शेरगढ़ किले की लोकेशन आदि के चलते फर्म नहीं आई होगी, फिर से टेंडर लगाए हैं।
-आशीष गर्ग, एक्सईएन, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग

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