पांचना विवाद भड़का:30 स्थानों पर हाईवे जाम, वाहनों के पहिए थमे… हजारों लोग रास्तों में फंसे; किसानों ने कहा…48 घंटे में पानी नहीं तो आंदोलन
20 साल बाद करौली और सवाई माधोपुर के लिए उम्मीद लेकर खत्म हुआ ‘पांचना जल विवाद’ फिर उबल उठा है। एक ओर कमांड क्षेत्र के किसान नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने पर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर टिप्पणी से आहत गुर्जर समाज ने आंदोलन शुरू कर दिया है। दोनों पक्षों ने नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य मार्गों पर 30 स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए जाम लगा दिया है। बुधवार को राजस्थान रोडवेज और निजी बसों के पहिए थम गए। करीब 20 हजार से अधिक यात्री रास्तों में फंसे रहे। मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सके। कमांड क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि समझौते का पालन नहीं हुआ, जबकि दूसरी ओर गुर्जर समाज कथित अभद्र टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज है। बुधवार देर रात तक पुलिस-प्रशासन से बातचीत जारी रही लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 6 जुलाई को जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, डॉ. किरोड़ी मीणा, करौली और सवाई माधोपुर जिला प्रशासन, सचिव कृष्ण कुणाल तथा दोनों पक्षों की समितियों के बीच लिखित सहमति बनी थी। दिन में …बांध पर तकनीकी सुधार हुआ; देर रात…वार्ता का नतीजा नहीं निकला दोषियों को गिरफ्तार करो, आमजन को परेशान मत करो…: बैंसला गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि समाज के लोगों और महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं। कमांड क्षेत्र की नहरों में टेस्टिंग के लिए पानी छोड़ा गया था और यदि कोई तकनीकी गड़बड़ी आई है तो प्रशासन उसे ठीक भी कर रहा है। ऐसे में जाम लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि अभद्र टिप्पणी करने वालों को गिरफ्तार किया जाए तथा 24 घंटे में जाम खत्म हो, अन्यथा पूरे देश में आंदोलन करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर नियंत्रण की भी मांग की। तकनीकी खामी थी तो पानी क्यों छोड़ा गया, रोकना था कटकड़ मोड़ पर जाम पर बैठे किसानों का कहना है कि कमांड क्षेत्र की नहरों में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि तय समय में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो आंदोलन पूरे राजस्थान में करेंगे। किसानों का तर्क है कि अगर कमांड क्षेत्र में नहरों से पानी छोड़ने में तकनीकी परेशानी आई थी, तो शासन व प्रशासन को पांचना लिफ्ट से बांध का पानी छोड़ने की प्रक्रिया को रोकना चाहिए था। इधर, पांचना संघर्ष समिति के सदस्य अशोक सिंह धावाई ने कहा कि यह समझौता 39 गांवों के किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया था। समझौते के तुरंत बाद एक नेता विशेष के समर्थकों द्वारा उनकी दिवंगत माता के बारे में सोशल मीडिया पर अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त होने से पानी का प्रवाह कम भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने की टेस्टिंग के दौरान बांध के गेटों के संचालन के लिए बनी ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण गेट पूरी क्षमता से नहीं खुल सके और पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ। जानकारी के अनुसार 6 जुलाई की रात को ही मथुरा और देवली से तकनीकी टीम बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया। पूरी रात काम चलता रहा और 7 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे दोबारा गेटों का संचालन शुरू किया गया। पानी धीरे-धीरे आगे बढ़ा और 8 जुलाई की शाम तक कमांड क्षेत्र के अंतिम छोर तक पहुंच पाया।

