केंद्रीय मंत्री बोले- लोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए एआई:जितेंद्र सिंह ने कहा- इस तकनीक से लोगों को हर सेक्टर में मिल रही मदद

जयपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। 29वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह कहा। इससे पहले ‘AI इन पुलिसिंग’ सेशन में पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, डेटा सिक्योरिटी और नई टेक्नोलॉजी की चुनौतियों पर चर्चा हुई। एक्सपर्ट्स ने बताया कि AI से इन्वेस्टिगेशन, लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम एनालिसिस और पब्लिक सर्विस बेहतर हो सकती है, लेकिन संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजस्थान कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी और डीआईजी (BPRD) डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने कहा कि पुलिस विभाग ने AI को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित और जवाबदेह होना चाहिए, क्योंकि पुलिस के पास सबसे संवेदनशील डेटा होता है। क्रिमिनल डेटा प्राइवेट कंपनियों के पास जाना खतरनाक डॉ. कपूर ने कहा कि आज पुलिस के पास ऐसा कोई अपना AI प्लेटफॉर्म नहीं है, इसलिए कई बार बाहरी कंपनियों के टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “हम पुलिस का डेटा, क्रिमिनल रिकॉर्ड और इंटेलिजेंस से जुड़ी जानकारी प्राइवेट कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा खतरा है। इस डेटा पर प्राइवेसी के कानून लागू होते हैं और इसका लीक होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जोखिम बन सकता है।” पुलिस को अपने AI टूल्स खुद बनाने होंगे उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध AI टूल्स डेटा कहां से लेते हैं, इसकी पूरी जानकारी किसी के पास नहीं होती। डेटा प्रोटेक्शन के नियम पूरी तरह लागू होने के बाद ऐसे कई टूल्स बंद भी हो सकते हैं। इसलिए पुलिस को अपनी जरूरत के हिसाब से इन-हाउस AI टूल्स तैयार करने होंगे और कंसल्टेंट्स पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। डेटा सिक्योरिटी भी पुलिस की जिम्मेदारी होगी डॉ. कपूर ने कहा कि आने वाले समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल लोगों की जान-माल की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। अगर किसी थाने से क्रिमिनल डेटा लीक होता है तो उसकी जवाबदेही भी पुलिस की होगी। इसलिए डेटा सिक्योरिटी को भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाना होगा। दिल्ली पुलिस का ‘ई-चिट्ठा’ बना उदाहरण उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस में ‘ई-चिट्ठा’ सॉफ्टवेयर के जरिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी ऑटोमैटिक तरीके से अलॉट होती है। इससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी, तेज और प्रभावी बना है। AI कभी पुलिस की जगह नहीं ले सकता डॉ. कपूर ने कहा कि AI से सीए, वकील और हेल्थ सेक्टर जैसे कई प्रोफेशन प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन पुलिसिंग में ऐसा संभव नहीं है। थाना और पुलिसकर्मी हमेशा पुलिसिंग की सबसे अहम यूनिट रहेंगे। AI केवल उनकी एफिशिएंसी बढ़ाने का काम करेगा, उनकी जगह नहीं ले सकता। ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी की समझ जरूरी उन्होंने कहा कि AI का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए पुलिसकर्मियों को नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग देना जरूरी है। भविष्य की स्मार्ट पुलिसिंग के लिए टेक्नोलॉजी की समझ और डेटा सिक्योरिटी दोनों पर बराबर फोकस करना होगा। एआई से आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा शासन केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। प्रधानमंत्री के “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” के विजन के तहत पिछले 10 साल में शुरू की गई हर डिजिटल पहल का उद्देश्य लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना रहा है। तकनीक ऐसी होनी चाहिए, जो प्रक्रियाओं को आसान बनाए, अनावश्यक औपचारिकताएं खत्म करे और लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करे। डिजिटल गवर्नेंस अब नए दौर में पहुंचा डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- जयपुर में दो दिनों तक चली नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस ने दिखाया कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा अब सिर्फ सेवाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है। अब देश एआई, डेटा आधारित निर्णय, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रशासन का नया मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार तभी सफल माने जाएंगे, जब उनका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। इसी दिशा में सीपीग्राम्स (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली) जैसी व्यवस्था ने शिकायतों के निस्तारण का समय कम किया है और देशभर में लोगों की पहुंच को आसान बनाया है। दो दिवसीय सम्मेलन में 80 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 28 राज्यों तथा 8 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी प्रदर्शनों और अनुभव साझा करने के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस के सफल मॉडलों पर भी चर्चा की जा रही है।

15 साल बाद पूरा होगा राजस्थान में रिफाइनरी का सपना:2 बार शिलान्यास, 2 बार उद्घाटन की तारीखें, सियासी हाईवोल्टेज ड्रामे का भी गवाह बनी

डेढ़ दशक का लंबा इंतजार, दो बार शिलान्यास, दो बार उद्घाटन की तारीखें और जमीन के खेल से लेकर अपनों की बगावत तक… राजस्थान के रेगिस्तान में देश की पहली BS-6 मानक वाली हाईटेक ‘HPPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड’ (HRRL) बनकर तैयार है। आगामी 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे। माना जा रहा है कि बालोतरा के पचपदरा में बनी इस रिफाइनरी की वजह से पूरे राजस्थान की तस्वीर बदल जाएगी। 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) की क्षमता वाली यह रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। आइए जानते हैं 2012 से 2026 तक के इस सफर की पूरी कहानी… आग लगने के कारण टल गया था PM का दौरा देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी के लिए राजस्थान की सियासत में ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ हुआ था। 2012 से 2026 तक का सफर इतना आसान नहीं था। इस प्रोजेक्ट ने न केवल दो बार शिलान्यास देखा, बल्कि जमीन के फेर में अपनों को अपनों के खिलाफ लड़ते भी देखा। संयोग से दो बार उद्घाटन की तारीख की घोषणा भी हुई। 21 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले 20 अप्रैल को सीडीयू-वीडीयू यूनिट में लीकेज होने से आग लग गई। इससे पीएम का उद्घाटन दौरा स्थगित हो गया था। लीलाना से पचपदरा कैसे पहुंची रिफाइनरी शुरुआत में रिफाइनरी बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) के बायतु के लीलाना गांव में लगनी तय थी। जैसे ही घोषणा हुई, राजनीतिक रसूख वाले लोगों और भूमाफिया ने वहां हजारों बीघा जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। जब सरकार जमीन अवाप्त (कब्जा लेने) करने पहुंची, तो किसानों ने हाथ खींच लिए। कुछ ने 1 बीघा जमीन के बदले 1 करोड़ रुपए की मांग रख दी। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने पचपदरा का रुख किया, जहां सरकारी जमीन उपलब्ध थी। रिफाइनरी शिफ्ट होते ही लीलाना में करोड़ों के ख्वाब देख रहे भूमाफिया और नेता अर्श से फर्श पर आ गए। कर्नल सोनाराम का विद्रोह बाड़मेर के राजनीतिक मामलों के जानकार शिव प्रकाश सोनी बताते हैं- रिफाइनरी शिफ्ट होने पर राजनीति में भूचाल आ गया था। बायतु के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी (स्वर्गीय) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अशोक गहलोत काकाणी में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स लगाकर अपने गृह जिले जोधपुर को फायदा देना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था- जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा। उस समय राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी इस्तीफा तक दे दिया था। देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी यह रिफाइनरी HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है। 15 साल के लंबे इंतजार और ₹42,229 करोड़ की अतिरिक्त लागत (शुरुआती लागत से तुलना) के बाद अब यह रेगिस्तान की तस्वीर बदलने को तैयार है। पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 है। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, निम्न गुणवत्ता (लो क्वालिटी) वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण देते हुए इस रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। इसका दिमाग यानी कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का सहारा लिया गया है। इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के तकनीशिय ने पचपदरा की तपती धूप में पसीना बहाया है। खास हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई कच्चे तेल की प्रकृति वैक्सी (मोम जैसी) होती है। इसे पाइपलाइन में जमने से रोकने के लिए मुंद्रा (गुजरात) से पचपदरा तक एक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें जगह-जगह हीटिंग स्टेशन, थर्मल इंसुलेशन लगाया गया है। इससे तेल का तापमान बना रहेगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग काम कर रहे हैं। इंजीनियर्स इंडिया इसकी कमान संभाल रही है। लमस टेक्नोलॉजी, यूओपी, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी ग्लोबल कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक प्रदान की है। लाखों टन स्ट्रक्चरल स्टील और विशेष एलॉय स्टील से स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। हजारों किलोमीटर की केबलिंग और मोटरों में कॉपर का अधिक उपयोग किया गया है, जिससे वायरिंग फ्रिक्वेंसी मजबूत रहे। रिफाइनरी शुरू होते ही राजस्थान भी मजबूती से आर्थिक क्षेत्र में उभरेगा। रिफाइनरी से प्रोडक्शन शुरू होने के बाद राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। वह उसे प्रोसेस कर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट (जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलिमर) बनाने वाला हब बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक, केमिकल उद्योगों की बाढ़ आएगी। —- ये खबरें भी पढ़िए… 1- राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग, कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। पढ़ें पूरी खबर… 2- राजस्थान की रिफाइनरी से देश बनेगा एनर्जी सुपरपावर; एक्सपर्ट बोले- जामनगर और भटिंडा की तरह बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना अब अंतिम चरण में है। दैनिक भास्कर ने करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से बनी रिफाइनरी की स्टेट्स रिपोर्ट को खंगाला। पढ़ें पूरी खबर…

लोकलसर्किल्स सर्वे- OTT के 80% यूजर्स डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार:61% पुरुष और 39% महिलाएं शामिल; कार्रवाई की मांग

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न (डिजिटल धोखाधड़ी) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लोकलसर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 यानी 80% भारतीय यूजर्स ने माना कि वे ओटीटी एप्स पर ऐसी भ्रामक रणनीतियों का शिकार हुए हैं। सर्वे में देश के 324 जिलों से 1.18 लाख से अधिक लोगों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं। इनमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं। बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार से ओटीटी कंपनियों पर सख्ती और डार्क पैटर्न जैसी भ्रामक प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। अमेजन प्राइम वीडियो पर ऑस्ट्रेलिया में मुकदमा ऑस्ट्रेलिया में अमेजन के खिलाफ प्राइम वीडियो में विज्ञापन शुरू करने और अतिरिक्त फीस लेने पर मुकदमा दर्ज हुआ है। नियामक का आरोप है कि अमेजन ने प्राइम सब्सक्रिप्शन की शर्तों में मनमाने बदलाव किए। 2024 में विज्ञापन शुरू होने पर पहले ही सालाना फीस दे चुके 8.5 लाख से अधिक ग्राहकों को विज्ञापन-मुक्त सेवा के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़े। ऐसा न करने वाले ग्राहकों को कंपनी ने कम सुविधाओं वाली सर्विस दी। भारत में क्या हैं नियम भारत में 30 नवंबर 2023 से डार्क पैटर्न रोकथाम एवं विनियमन दिशानिर्देश लागू हैं। नियम ई-कॉमर्स, एप, ओटीटी, ट्रैवल, फूड डिलीवरी समेत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू होते हैं। दिशानिर्देशों में 13 तरह के डार्क पैटर्न पर रोक लगाई गई है। इनमें फॉल्स अर्जेंसी, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, ड्रिप प्राइसिंग, डिस्गाइज्ड एड, कन्फर्म शेमिंग और बैट एंड स्विच शामिल हैं। यूजर्स खुद को कैसे बचाएं सब्सक्रिप्शन लेने से पहले और बाद में ऑटो-रिन्यूअल बंद करें, भुगतान अलर्ट रखें, ट्रायल की शर्तें पढ़ें और कैंसिलेशन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। डार्क पैटर्न का मकसद यूजर को उसकी मर्जी से नहीं, बल्कि डिजाइन और मनोवैज्ञानिक तरीकों से ऐसा फैसला लेने के लिए प्रेरित करना होता है, जिससे कंपनी को अधिक लाभ हो। —————- ये खबर भी पढ़ें… दावा- सरकार ने वॉट्सएप से यूजरनेम फीचर रोकने को कहा:मेटा को नोटिस, 3 दिन में जवाब मांगा; कहा- टेलीग्राम की तरह गलत इस्तेमाल की आशंका केंद्र सरकार ने भारत में वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं करने को कहा है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के मुताबिक बताया, सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर पर बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे भारत में शुरू न किया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

भाजपा नेता को घेरकर लोहे के सरिए से पीटा:सिर पर गहरा घाव, हाथ में फैक्चर; आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर रात 11 बजे तक धरना

एक भाजपा नेता और वकिल पर बुधवार की देर शाम को कुछ अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोट आई। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें सिरोही रेफर किया गया। घटना के विरोध में सियाणा क्षेत्रपाल व्यापार संघ और राजपुरोहित समाज के लोगों ने सियाणा पुलिस चौकी के बाहर रात 11 बजे तक धरना देकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। दरअसल, वह कचहरी से अपना काम निप्टाकर शाम को अपनी कार से सियाणा गांव जा रहे थे। इसी दौरान गांव के आसपास सामने से आ रही गाड़ी में अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। यह घटना जालोर जिले के बागरा थाना क्षेत्र के सियाणा गांव में बुधवार शाम की है। आकोली और सियाणा के बीच कार रुकवाकर किया हमला बिशनगढ़ थाने के सीआई मोहनलाल गर्ग ने बताया कि सियाणा निवासी भाजपा युवा मोर्चा के जिला प्रवक्ता और वकील नटवर सिंह राजपुरोहित (37) बुधवार को जालोर कचहरी से काम खत्म कर अपनी कार से सियाणा लौट रहे थे। शाम करीब 6 बजे आकोली और सियाणा के बीच आडवाडा गांव के पास सामने से आई एक गाड़ी में सवार अज्ञात लोगों ने उनकी कार रुकवाई और धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले के दौरान आसपास अन्य लोगों को आता देख हमलावर मौके से फरार हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने एम्बुलेंस की मदद से घायल नटवर सिंह राजपुरोहित को सियाणा के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सिरोही रेफर कर दिया गया। जहां उनका इलाज जारी है। सिर में गहरा घाव, हाथ में फ्रैक्चर हमले में नटवर सिंह राजपुरोहित के सिर पर धारदार हथियार से वार किया गया। हमले से उनके सिर में गहरा और लंबा चीरा लग गया, जिससे काफी खून बहा। घाव इतना गंभीर था कि सिर पर कई टांके लगाने पड़े। इसके अलावा उनके एक हाथ में भी फ्रैक्चर हुआ है। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त कार को जब्त कर जांच शुरू कर दी। गिरफ्तारी की मांग को लेकर रात 11 बजे तक धरना घटना की सूचना मिलते ही सियाणा क्षेत्रपाल व्यापार संघ और राजपुरोहित समाज के लोग सियाणा पुलिस चौकी के सामने जमा हो गए। उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। धरना रात करीब 11 बजे तक चला। बाद में बागरा थाना प्रभारी मोहनलाल गर्ग के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर गुरुवार शाम 5 बजे तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। पुलिस कर रही मामले की जांच बागरा थाने के सीआई मोहनलाल गर्ग ने बताया कि रात में हुई मारपीट के मामले में जांच की जा रही और टीमें बनाकर आरोपियों के पकड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं।

जयपुर- टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ा लेपर्ड, कुत्ते का शिकार,VIDEO:12 सेकेंड में मारा, कुछ देर डॉग के पास बैठा, फिर घसीटकर ले गया

जयपुर की झालाना सेंचुरी में लेपर्ड ‘बहादुर’ ने अचानक तीन टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ लगा दी। इससे कुछ देरी के लिए जिप्सी में सवार 10 से ज्यादा पर्यटक डर गए। हालांकि, लेपर्ड के निशाने पर एक जिप्सी के नीचे बैठा डॉग था। करीब 12 सेकेंड में बहादुर ने डॉग को गर्दन से दबोचकर मार दिया। घटना बुधवार दोपहर को वॉच टावर के पास बने वाटर पॉइंट की है। शिकार के इस नजारे को एक टूरिस्ट ने कैप्चर किया। सबसे पहले देखिए- ‘बहादुर’ ने कैसे किया शिकार शिकार के पास बैठा, फिर जंगल में ले गया टूरिस्ट रोहित गंगवाल ने बताया शिकार के बाद लेपर्ड कुछ देर तक वहां रुका और फिर उसे लेकर घने जंगल की ओर चला गया। जंगल में शिकार की यह पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि वहां मौजूद पर्यटक केवल उसे देखते ही रह गए। बता दें कि लेपर्ड अवसरवादी शिकारी होता है। ऐसे में अगर उसे आस-पास आसान शिकार दिखाई देता है, तो वह बिना समय गंवाए हमला कर देता है। ऐसे में झालाना लेपर्ड रिजर्व में सामने आए इस घटनाक्रम ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। जयपुर के झालाना में 50 से ज्यादा लेपर्ड जयपुर में पिछले कुछ वक्त से लेपर्ड की संख्या लगातार बढ़ रही है। झालाना, आमागढ़ और नाहरगढ़ सफारी में लगभग 75 लेपर्ड रह रहे हैं। इनमें सबसे अधिक लगभग 50 लेपर्ड झालाना में है। वहीं, 20 से ज्यादा लेपर्ड आमागढ़ के जंगलों में है। जयपुर देश का पहला ऐसा शहर है जहां 2 लेपर्ड सफारी, एक लॉयन सफारी, एक टाइगर और एक एलिफेंट सफारी है। राजस्थान के इन जिलों में हैं लेपर्ड की मौजूदगी राजस्थान में जयपुर, अलवर, सीकर, भरतपुर, करौली, बूंदी, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, पाली, सिरोही, जालोर, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, टोंक और दौसा जिलों में लेपर्ड की मौजूदगी है। इनके अलावा बाड़मेर और जोधपुर में कभी-कभी अजमेर, पाली, राजसमंद, सिरोही के जंगलों से लेपर्ड का मूवमेंट होता है। …. लेपर्ड के शिकार करने की ये खबर भी पढ़िए… होटल की छत पर सो-रहे कर्मचारी के पास पहुंचा लेपर्ड;VIDEO:कुत्ते का शिकार किया माउंट आबू (सिरोही) के एक होटल में लेपर्ड घुस गया। उसने होटल की छत पर सो रहे कर्मचारी (युवक) के पास बंधे कुत्ते का शिकार किया। इसके बाद लेपर्ड युवक की तरफ बढ़ा। पूरी खबर पढ़िए…

जयपुर में बिना जांच बसों में रखे जा रहे पार्सल:यात्रियों की जान से खिलवाड़; दौसा अग्निकांड के बाद ग्राउंड पर भास्कर का रियलिटी चेक

दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार (30 जून) देर रात हुए बस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। भीषण हादसे के बाद यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बस की डिक्की में सिगरेट के कार्टन (बॉक्स) समेत भारी मात्रा में पार्सल ठसाठस भरे हुए थे। इसी दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ की टीम बुधवार को जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंची। वहां जो तस्वीरें और लापरवाही के नजारे सामने आए, उन्होंने यात्री बसों में अवैध रूप से चल रहे पार्सल ढुलाई के खेल को उजागर करने के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर के रियलिटी चेक में सामने आए ये 4 बड़े खुलासे… 1. बसों की डिक्की में धड़ल्ले से लोड हो रहे पार्सल रियलिटी चेक के दौरान कई निजी स्लीपर बसों की डिक्कियों में बड़े पैमाने पर पार्सल लोड होते मिले। कहीं गत्ते के बड़े बॉक्स रखे जा रहे थे, तो कहीं प्लास्टिक की बोरियां और अन्य पैकेट। कई जगह इस व्यावसायिक सामान को बिना किसी सुरक्षात्मक अलगाव के यात्रियों के निजी सामान (लगेज) के साथ ही ठसाठस भरा जा रहा था। पार्सल लोडिंग का यह खेल खुलेआम और लगातार चलता नजर आया। 2. न सामान की जांच, न सुरक्षा की कोई व्यवस्था भास्कर टीम ने देखा कि ज्यादातर बसों में पार्सल रखने से पहले उनकी कोई सुरक्षा जांच नहीं की जा रही थी। सामान किस श्रेणी का है, उसमें कोई ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री तो नहीं है, या उसे सुरक्षित तरीके से पैक किया गया है या नहीं- इसकी पुष्टि करने वाली कोई व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दी। बिना किसी रोक-टोक के पार्सल सीधे बस की डिक्की में सरकाए जा रहे थे। 3. बेखबर यात्री, खतरे में जान बस में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों को यह भनक तक नहीं होती कि जिस डिक्की में उनका कीमती सामान रखा है, उसी में किस तरह के कमर्शियल पार्सल भी ले जाए जा रहे हैं। यदि किसी पार्सल में ज्वलनशील या जोखिमपूर्ण सामग्री हो, तो किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 4. हादसे के बाद फिर खड़े हुए गंभीर सवाल दौसा हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यात्री बसों का इस्तेमाल पार्सल ढुलाई के लिए तय सुरक्षा मानकों के अनुसार हो रहा है? क्या हर पार्सल की उचित जांच और स्क्रीनिंग की जाती है? क्या प्रतिबंधित सामग्री को रोकने का कोई सिस्टम है? और यदि नहीं, तो यह लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा टाइम बम साबित हो सकती है? अधिकारियों से नहीं मिला जवाब मामले में दैनिक भास्कर टीम ने संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया। सबसे पहले राजस्थान के परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने न तो कॉल रिसीव किया और न ही भेजे गए संदेश का कोई जवाब दिया। इसके बाद परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा से भी इस मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया गया। मंत्री ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी लेकर अपना पक्ष देंगे। ———— दौसा हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर की भिड़ंत हो गई। एक्सीडेंट में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने से और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। पढ़ें पूरी खबर

TMC बागी गुट आज चुनाव आयोग से मिलेगा:नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग; 80 में से 58 विधायक ममता से अलग हो चुके

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बागी गुट आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलेगा। 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) को मान्यता देने की मांग करेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा- 22 जून को कोलकाता में प्रतिनिधि बैठक हुई। इसमें नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। चुनाव आयोग (कोलकाता और नई दिल्ली) को इसकी जानकारी भेजी गई। ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हुए 58 विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद 3 जून को TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए थे। इसके अलावा 15 जून को टीएमसी के 20 सांसदों ने भी पार्टी छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया था। बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसी बगावत 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं ———————— ये खबर भी पढ़ें… TMC बागी गुट की 47 पूर्व पार्षदों के साथ बैठक: ममता गुट ने शिकायत दर्ज कराई, कहा- पार्टी के नाम-सिंबल का गलत इस्तेमाल हुआ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने 27 जून को एक हफ्ते में दूसरी बार मीटिंग की थी। इसमें 47 पूर्व पार्षदों शामिल हुए थे। बैठक पूर्वी कोलकाता के टॉपसिया इलाके में हुई। इससे पहले 22 जून को न्यू टाउन में भी बागी गुट की बैठक हुई थी। दोनों बैठकों में TMC का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल किया गया, लेकिन ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाई गई। पूरी खबर पढ़ें…

रायपुर एयरपोर्ट की जमीन पर दावा, किसान सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:बोला- 1942 में अंग्रेजों ने जमीन युद्ध के लिए ली थी, 3500 करोड़ मुआवजा दें

रायपुर के 53 वर्षीय किसान अश्विनी बांधे का दावा है कि जिस जमीन पर आज स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग और गार्डन बने हैं, वह उनकी है। बांधे के मुताबिक यह जमीन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने अस्थायी तौर पर ली थी। उनका कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद यह जमीन लौटाई जानी थी। इसी दावे के आधार पर वे 35 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। साल 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोबारा जांच करने के आदेश दिए। वहीं किसान का कहना है कि सक्षम अधिकारी पहले ही जांच कर चुके हैं। इस आधार पर जून 2026 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और करीब 3500 करोड़ के मुआवजे की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस दावे को सही या गलत नहीं माना है। मामला विचाराधीन है। पहले देखिए ये तस्वीरें- 35 साल…और फाइलें ही बन गईं जिंदगी अश्विनी बांधे के लिए सरकारी फाइलें ही उनकी जिंदगी बन चुकी हैं। पिछले 35 साल से वे रिकॉर्ड रूम, दफ्तरों, लाइब्रेरी और कोर्ट के चक्कर काटकर एक-एक दस्तावेज जोड़ रहे हैं। 1990 के दशक में जब उन्होंने जमीन के रिकॉर्ड तलाशना शुरू किया, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी का सबसे लंबा सफर बन जाएगा। आज उनके पास ऐसे अहम दस्तावेज हैं जो गूगल पर भी नहीं मिलेंगे। 3 दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। अब उनकी पूरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। उनका कहना है कि इस मामले की पैरवी में अब तक उनके 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें अदालतों के चक्कर, वकीलों की फीस, देश भर से पुराने रिकॉर्ड जुटाने और लगातार यात्रा का खर्च शामिल हैं। कहानी की शुरुआत 1942 से होती है द्वितीय विश्व युद्ध और ब्रिटिश काल का कनेक्शन: इस कहानी का पहला चैप्टर साल 1942 में शुरू होता है, जब दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की आग में जल रही थी और भारत पर अंग्रेजों का राज था। युद्ध के दौरान अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने ‘डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट’ लागू किया। इसके तहत देशभर में एयरफील्ड और सैन्य ठिकाने बनाने के लिए करीब 17.5 लाख हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। उसी दौर में छिनी बांधे परिवार की जमीन: अंग्रेजों की इसी देशव्यापी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का हिस्सा रायपुर का माना एयरपोर्ट इलाका भी बना। इसी दौरान बांधे परिवार के पूर्वजों की माना एयरपोर्ट इलाके में स्थित 30 एकड़ 18 डिसमिल जमीन भी सरकारी कब्जे में चली गई। यही वह शुरुआत थी, जिसने दशकों लंबी कानूनी लड़ाई की बुनियाद रखी। ब्रिटिश कानून से रखी गई विवाद की नींव:इस विवाद की जड़ साल 1939 में शुरू हुए द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी है। तब ब्रिटिश सरकार ने सैन्य जरूरतों, हवाई पट्टियों और शरणार्थी शिविरों के लिए ‘डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1939’ लागू किया था। इसी सख्त कानून के तहत देशभर में करीब 17.5 लाख हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जो इस पूरे मामले की मुख्य वजह बनी। जमीन के बदले ₹1300 सालाना किराया अश्विनी बांधे के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, तत्कालीन सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार क्षेत्र में करीब 15,539.49 एकड़ जमीन 4 एयरफील्ड परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई। इनमें माना (रायपुर), चकरभाठा (बिलासपुर), मोहानभाठा एयरस्ट्रिप (जगदलपुर) और बिरसी (तत्कालीन मध्य प्रदेश का भंडारा क्षेत्र, वर्तमान महाराष्ट्र) शामिल थे। माना एयरफील्ड के लिए उनके पूर्वजों की जमीन भी इसी दौरान ली गई थी। उनके पास मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार, यह अधिग्रहण स्थायी नहीं था, बल्कि युद्धकालीन जरूरतों के लिए अस्थायी व्यवस्था थी। दस्तावेजों में जमीन के बदले ₹1300 सालाना किराया देने का भी जिक्र है। लेकिन न तो उनके परिवार को कभी यह किराया मिला और न ही युद्ध खत्म होने के बाद जमीन वापस की गई। अब बकाया किराया, ब्याज और अन्य दावों को जोड़ते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में करीब साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए का दावा किया है। युद्ध खत्म हुआ तो कानून भी खत्म हो गया अश्निनी बताते हैं कि डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट में यह व्यवस्था थी कि युद्ध समाप्त होने और उसके छह महीने बाद तक ही यह कानून प्रभावी रहेगा। दस्तावेजों के मुताबिक, 20 सितंबर 1946 को यह कानून समाप्त हो गया। इसके एक साल बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। आजादी के बाद प्रशासनिक कामकाज अचानक प्रभावित न हो, इसलिए केंद्र सरकार ने कंटीन्यूएंस ऑफ पावर्स एक्ट, 1947 लागू किया। इस कानून के जरिए युद्धकालीन कई व्यवस्थाओं को अस्थायी रूप से जारी रखा गया। संविधान बना, फिर आया नया कानून दस्तावेजों का अगला पन्ना पलटते हुए वे शेयर करते हैं कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद केंद्र ने ‘रिक्विजिशनिंग एंड एक्विजिशन ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एक्ट, 1952’ (RAIP Act) बनाया। इस नए कानून के जरिए ही युद्धकालीन जमीनों का प्रशासनिक प्रबंधन शुरू हुआ। दावों के अनुसार, इन जमीनों का नियंत्रण पहले ‘मिनिस्ट्री ऑफ वर्क्स, हाउसिंग एंड सप्लाई’ के पास रहा। आगे चलकर सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने इनका जिम्मा संभाला और जरूरत के मुताबिक अन्य मंत्रालयों या विभागों को ट्रांसफर किया। संस्कृति विभाग की प्रदर्शनी में मिले जमीन के रिकॉर्ड करीब साल भर पहले रायपुर में संस्कृति विभाग की ओर से पुराने अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसे देखने पहुंचे अश्विनी बांधे तब चौंक गए, जब उन्हें वहां माना एयरफील्ड से जुड़े कई ऐसे सरकारी रिकॉर्ड दिखाई दिए जिनमें उनके पूर्वजों की जमीन का जिक्र था। प्रदर्शनी में कुछ दस्तावेज उन्हें पहले से मालूम थे, लेकिन कई अहम रिकॉर्ड पहली बार उनके सामने आए थे। इसके बाद उन्होंने तुरंत ‘लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ का इस्तेमाल कर संस्कृति विभाग से इन सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां (Certified Copies) निकालवाईं। उनका दावा है कि विभाग से मिले ये नए सबूत अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही उनकी कानूनी लड़ाई का सबसे मजबूत हिस्सा हैं। दस्तावेजों में कई किसानों के नाम दर्ज हैं संस्कृति विभाग के उपसंचालक डॉ. प्रताप पारेख के मुताबिक कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान माना एयरफील्ड के निर्माण के लिए बरौदा, रामचंडी और आसपास के गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। विभाग के अभिलेखों में उस दौर के कई राजस्व और अधिग्रहण संबंधी दस्तावेज आज भी सुरक्षित हैं, जिनमें प्रभावित किसानों व भू-स्वामियों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि अश्विनी बांधे ने प्रदर्शनी के दौरान इन दस्तावेजों को देखा था और बाद में ‘लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ के तहत इनकी कॉपियां मांगी थीं। विभाग ने नियमानुसार उपलब्ध रिकॉर्ड उन्हें सौंप दिए हैं, जिनमें उनके पूर्वजों के नाम भी शामिल हैं। अब फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में करीब 35 साल से अश्विनी बांधे के हाथ में एक फाइल है। हर सुनवाई में वह थोड़ी और मोटी हो जाती है। उसमें 1942 का रिकॉर्ड है, रक्षा मंत्रालय के पत्र हैं, राजस्व दस्तावेज हैं और उनके पूर्वजों के नाम भी। अब फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है कि इन फाइलों में दर्ज इतिहास सिर्फ कागज है या फिर उस जमीन पर हक की कानूनी बुनियाद, जहां आज रायपुर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट खड़ा है। RAIP (STR) कानून और रेकरिंग रिवाइज्ड कंपनसेशन के नियम: RAIP (STR) कानून और रेकरिंग रिवाइज्ड कंपनसेशन (Recurring Revised Compensation) के नियमों के मुताबिक, सरकार जिस तारीख से जमीन कब्जे में लेती है, उसके 365 दिनों (1 साल) के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो ब्याज की दरें समय के साथ इस तरह बढ़ती हैं: 1 से 3 साल तक: समय पर भुगतान न होने पर 9% सालाना ब्याज। 3 से 5 साल तक: इसके बाद भी राशि न मिलने पर 12% ब्याज। 5 से 15 साल तक: 5 साल बीतने पर 15% ब्याज के साथ संशोधित मुआवजा। 15 साल के बाद: इस अवधि के बाद भी भुगतान लंबित रहने पर 18% चक्रवृद्धि (Compound) ब्याज का नियम लागू होता है। 84 साल का हिसाब: अश्विनी का कहना है कि साल 1942 से लेकर अब तक (करीब 84 साल) का बकाया किराया, उस पर अलग-अलग अवधि का भारी ब्याज और अन्य कानूनी दावों को मिलाकर ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ₹3,500 करोड़ का क्लेम किया है। एयरपोर्ट से आगे भी है विवाद यह मामला सिर्फ एयरपोर्ट परिसर तक सीमित नहीं है। अश्विनी के मुताबिक नवा रायपुर और आसपास की कुछ अन्य जमीनों को लेकर भी इसी तरह के विवाद और रिकॉर्ड मौजूद हैं। उनका कहना है कि इन मामलों से जुड़े दस्तावेज भी उनके पास हैं और अलग-अलग स्तर पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। (इस रिपोर्ट में किसान अश्विनी बांधे के उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, उनके पक्ष और न्यायालय में लंबित मामले से संबंधित दावों का उल्लेख है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। संबंधित सरकारी विभागों को भी हमने इमेल भेजा है, उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।) यहां देखें दस्तावेज अन्य दस्तावेज …………………. रायपुर की ये खबर भी पढ़िए… 100 रुपए की रिश्वत, 39 साल केस, सब बिखर गया: केस लड़ते-लड़ते पत्नी चल बसी, बच्चों की पढ़ाई छूटी, अब हाईकोर्ट बोला- जागेश्वर निर्दोष है 83 साल की उम्र में चेहरे पर गहरी झुर्रियां, आंखों में न थमने वाला दर्द और 39 साल तक कोर्ट-कचहरी की थकावट। यही पहचान बन गई है जागेश्वर प्रसाद अवधिया की। रायपुर के इस बुजुर्ग ने अपनी पूरी जिंदगी केवल एक लड़ाई में गुजार दी। 100 रुपए की रिश्वत के झूठे केस में बेगुनाही साबित करने की लड़ाई। पढ़ें पूरी खबर

टोंक में 4 इंच से ज्यादा बारिश:अलवर में बहने लगी नदी, दौसा में जगह-जगह पानी भरा; 10 से ज्यादा जिलों में बारिश

राजस्थान में गुरुवार को मानसून की एंट्री हो गई है। जयपुर, दौसा, चित्तौड़गढ़, अलवर, अजमेर, प्रतापगढ़, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़, भरतपुर, उदयपुर सहित 10 से ज्यादा जिलों में बरसात हुई। टोंक जिले के मालपुरा क्षेत्र के टोरडी सागर में 4 इंच से ज्यादा बारिश हुई। चित्तौड़गढ़ में एक से डेढ़ इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। अलवर में तेज बारिश के बाद रूपारेल नदी बहने लगी। सीकर के नीम का थाना में बारिश से सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया। उदयपुर के ऋषभदेव में आधे घंटे तक बरसात हुई। दौसा जिले के कई इलाकों में पानी भरने होने से लोगों को परेशानी हो रही है। दो दिन से बदले मौसम के कारण लोगों को गर्मी-उमस से राहत मिली है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 25 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इधर राजस्थान-पाकिस्तान के बॉर्डर वाले जिलों में अब भी तेज गर्मी का असर है। यहां तापमान 40 डिग्री के ऊपर रिकॉर्ड हो रहा है। पहले देखिए मौसम से जुड़ी 4 फोटोज… अब देखिए- मानसून की वर्तमान स्थिति बीते 24 घंटे में बदला मौसम देरी से आए मानसून के कारण इस बार जून के अंत तक तेज गर्मी और उमस रही है। बीते 24 घंटे में राजस्थान के अधिकतर जिलों में मौसम बदला है। जयपुर, दौसा, अलवर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ सहित कई जिलों में रुक-रुककर बरसात हो रही है। जयपुर में इस साल मानसून ने दो दिन की देरी से एंट्री की। अब देखिए- राजस्थान में बारिश की अन्य PHOTOS
राजस्थान में मानसून की एंट्री:7 दिन की देरी से आया, 12 जिलों को कवर किया; इस बार कमजोर रहने की संभावना मौसम से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

पत्नी का सिर दीवार पर मारा, फिर गला घोंटकर हत्या:पकड़े जाने के डर से दोनों बच्चों का मर्डर, पछतावे में फंदा लगाकर किया सुसाइड

फलोदी के फतेहगढ़ गांव में एक कृषि फार्म पर 30 जून को परिवार के 4 लोगों की मौत के मामले में पुलिस की जांच में कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। पाली के रोहट इलाके में बिठू गांव का गेनाराम (35) फलोदी से करीब 40 किमी दूर फतेहगढ़ गांव में कृषि फार्म पर खेती करता था। यहां वह पत्नी पुष्पा (32), 13 साल की बेटी खुशबू और 10 साल के बेटे किशन के साथ रहता था। गेनाराम की पत्नी पुष्पा की दिमागी हालत पिछले दो–तीन साल से ठीक नहीं थी। ऐसे में वह अजीब हरकतें करती थी। उसे पति व परिजन भोपा (तांत्रिक) के पास ले जा रहे थे। भूत-प्रेतात्मा का साया निकालने के लिए पुष्पा को देचू इलाके में भी लेकर गए। वहां भी भोपाओं ने जादू-टोटका कर भूत भगाने के दावे किए थे, लेकिन पुष्पा की सेहत में सुधार नहीं हुआ। देचू इलाके में गेनाराम के दो और भाई खेती करते हैं। पुष्पा का भाई भी खेती करता है। उनके साथ 29 जून को गेनाराम अपनी पत्नी पुष्पा को लेकर बिठू गांव में एक थान (मंदिर) पर ले गया। वहां भोपा ने दावा किया कि पूर्णिमा के दिन टोना-टोटका करने के बाद पुष्पा के सिर से भूत-प्रेत का साया निकल जाएगा। अपने दोनों बच्चों को फतेहगढ़ में छोड़ गेनाराम पत्नी, भाई-साले के साथ 29 जून को अपने गांव बिठू पहुंचा। वहां थान पर फेरी लगाई और भोपा से पूजा कराने के बाद जीप से उसी रात करीब 9 से 10 बजे फतेहगढ़ पहुंच गए। रास्ते में चामू गांव क्रॉस करते ही पुष्पा फिर से अजीब हरकतें करने लगी। गेनाराम व उसकी पत्नी को घर छोड़ कर उसका भाई-साला समेत चार लोग जीप से अपने घर चले गए। उस रात क्या हुआ? पत्नी की तबीयत में नहीं हो रहा था सुधार पुलिस का मानना है कि घटना वाली रात को गेनाराम इस बात को लेकर गुस्से में था कि सभी थान-मंदिर पर ले जाने के बाद भी उसकी पत्नी की सेहत में सुधार नहीं हो रहा था। उस रात अजीब हरकतें कर रही पत्नी को देख गेनाराम को लगा कि उस पर फिर से भूत-प्रेत सवार हो गया। ललाट पर चोट के निशान से लग रहा है कि बेकाबू पत्नी ने दीवार पर सिर मारा होगा। गेनाराम ने काबू में करने के लिए पत्नी को चारपाई पर सुलाने का प्रयास किया होगा, लेकिन वह काबू में नहीं आई। इससे गेनाराम ने उसका गला दबा दिया। पकड़े जाने के डर से बच्चों का गला घोंटा महिला की चारपाई के पास ही अन्य चारपाई पर बेटी खुशबू और बेटा किशन का शव मिला। दोनों के गले पर निशान है। आशंका है कि इन दोनों की भी हत्या गला दबाकर की गई है। पुलिस मान रही है कि पति-पत्नी के बीच शोर-शराबा सुन कर बच्चे जाग गए होंगे। पत्नी की हत्या के बाद गेनाराम को गलती का अहसास हुआ होगा और पकड़े जाने के डर से उसने दोनों बच्चों को भी गला दबाकर मार दिया। खुद भी फांसी पर लटक गया मां व दोनों बच्चों के शव चारपाई पर मिले। उनसे करीब 20–30 फीट की दूरी पर बरामदे में पंखे के हुक से बनाए फंदे पर गेनाराम का शव लटका मिला। पूजा-पाठ का सामान भी मिला। गेनाराम (मृतक) की जेब से मौली का धागा भी मिला। पुलिस यह मान रही है कि पत्नी व दोनों बच्चों की हत्या के बाद गेनाराम को अपने किए पर पछावा हुआ और उसने फांसी लगा कर अपनी जान दे दी। दो भाई भी फतेहगढ़ में खेती-बाड़ी करते हैं गेनाराम चार भाइयों और तीन बहनों में से एक था। उसके दो भाई चेनाराम और सियाराम भी फतेहगढ़ क्षेत्र में खेतों में मजदूरी करते हैं। बीठू गांव में उसके पिता जोधाराम, मां सीतादेवी और एक दिव्यांग भाई रहते हैं। पिता लकवाग्रस्त हैं। मां सीतादेवी पति और दिव्यांग बेटे की देखभाल करती हैं। उसके पिता ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गेनाराम की पत्नी पुष्पा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसी वजह से गेनाराम मानसिक तनाव में था। गेनाराम पिछले करीब चार साल से फतेहगढ़ क्षेत्र में खेतों में मजदूरी करता था और परिवार भी उसके साथ रहता था। परिजन बोले- अकेले तीन लोगों की गला दबाकर हत्या नहीं कर सकता परिजनों का कहना है कि गेनाराम अकेले तीन लोगों की गला दबाकर हत्या नहीं कर सकता। उन्हें आशंका है कि उसने पहले खाने में कोई नशीला या जहरीला पदार्थ मिलाकर पत्नी और बच्चों को खिलाया होगा। इसके बाद उनका गला घोंटकर हत्या की। फिर खुद फंदे पर झूल गया। गेनाराम के रिश्तेदार जगदीश कुमार ने बताया – गेनाराम 29 जून को अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ बीठू (रोहट) आया था। यहां उसने एक थान (मंदिर) पर पत्नी को दिखाया और प्रसाद चढ़ाया। इसके बाद शाम करीब साढ़े छह बजे वह परिवार सहित वापस फतेहगढ़ के लिए रवाना हो गया था। अगली सुबह चारों के शव खेत में मिले। पुलिस ने कहा- पत्नी की हालत से तनाव में था पति देचू थाना प्रभारी विक्रमसिंह सांदू ने बताया कि गेनाराम के परिजनों से अब तक की पूछताछ में सामने आया है कि उसकी पत्नी की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। इससे वह डिप्रेशन (तनाव) में था। किसी भी बॉडी पर ऐसी कोई जाहिर चोट नहीं मिली, जिससे मौत हो सके। विस्तार से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि पत्नी व दोनों बच्चों का गला दबाकर हत्या करने के बाद गेनाराम भी फांसी पर झूल गया।
——- यह खबर भी पढ़िए… ‘बच्चों के लिए जीने वाला जान कैसे ले सकता है’:भाई बोला-बेटी को टीचर बनाना चाहता था, ट्रैक्टर चालाना भी सिखाया; हर इच्छा पूरी करता था पत्नी और दो बच्चों की हत्या कर किसान गेनाराम के सुसाइड करने के बाद भाई को यकीन नहीं है कि वह ऐसा कैसे कर कसता है। भाई ने कहा- जो पिता बच्चों की हर छोटी-छोटी खुशी का ख्याल रखता था, उनके भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करता था। पढ़ें पूरी खबर… पत्नी, बेटे-बेटी की हत्या कर किसान ने सुसाइड किया:महिला पर बताया था भूत-प्रेत का साया; फर्श पर पड़े मिले शव फलोदी जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी दूर फतेहगढ़ गांव में पत्नी, बेटा-बेटी की हत्या कर किसान ने सुसाइड कर लिया। चारों शव खेत में पड़े मिले। पुलिस के अधिकारी मौके पर छानबीन में जुटे हैं। FSL की टीम ने मौके से सबूत जुटाया। कहा जा रहा है कि पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसी से पति परेशान रहता था। यह घटना देचू थाना इलाके में हुई है। पढ़ें पूरी खबर…