जयपुर में बिना जांच बसों में रखे जा रहे पार्सल:यात्रियों की जान से खिलवाड़; दौसा अग्निकांड के बाद ग्राउंड पर भास्कर का रियलिटी चेक
दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार (30 जून) देर रात हुए बस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। भीषण हादसे के बाद यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बस की डिक्की में सिगरेट के कार्टन (बॉक्स) समेत भारी मात्रा में पार्सल ठसाठस भरे हुए थे। इसी दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ की टीम बुधवार को जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंची। वहां जो तस्वीरें और लापरवाही के नजारे सामने आए, उन्होंने यात्री बसों में अवैध रूप से चल रहे पार्सल ढुलाई के खेल को उजागर करने के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर के रियलिटी चेक में सामने आए ये 4 बड़े खुलासे… 1. बसों की डिक्की में धड़ल्ले से लोड हो रहे पार्सल रियलिटी चेक के दौरान कई निजी स्लीपर बसों की डिक्कियों में बड़े पैमाने पर पार्सल लोड होते मिले। कहीं गत्ते के बड़े बॉक्स रखे जा रहे थे, तो कहीं प्लास्टिक की बोरियां और अन्य पैकेट। कई जगह इस व्यावसायिक सामान को बिना किसी सुरक्षात्मक अलगाव के यात्रियों के निजी सामान (लगेज) के साथ ही ठसाठस भरा जा रहा था। पार्सल लोडिंग का यह खेल खुलेआम और लगातार चलता नजर आया। 2. न सामान की जांच, न सुरक्षा की कोई व्यवस्था भास्कर टीम ने देखा कि ज्यादातर बसों में पार्सल रखने से पहले उनकी कोई सुरक्षा जांच नहीं की जा रही थी। सामान किस श्रेणी का है, उसमें कोई ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री तो नहीं है, या उसे सुरक्षित तरीके से पैक किया गया है या नहीं- इसकी पुष्टि करने वाली कोई व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दी। बिना किसी रोक-टोक के पार्सल सीधे बस की डिक्की में सरकाए जा रहे थे। 3. बेखबर यात्री, खतरे में जान बस में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों को यह भनक तक नहीं होती कि जिस डिक्की में उनका कीमती सामान रखा है, उसी में किस तरह के कमर्शियल पार्सल भी ले जाए जा रहे हैं। यदि किसी पार्सल में ज्वलनशील या जोखिमपूर्ण सामग्री हो, तो किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 4. हादसे के बाद फिर खड़े हुए गंभीर सवाल दौसा हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यात्री बसों का इस्तेमाल पार्सल ढुलाई के लिए तय सुरक्षा मानकों के अनुसार हो रहा है? क्या हर पार्सल की उचित जांच और स्क्रीनिंग की जाती है? क्या प्रतिबंधित सामग्री को रोकने का कोई सिस्टम है? और यदि नहीं, तो यह लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा टाइम बम साबित हो सकती है? अधिकारियों से नहीं मिला जवाब मामले में दैनिक भास्कर टीम ने संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया। सबसे पहले राजस्थान के परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने न तो कॉल रिसीव किया और न ही भेजे गए संदेश का कोई जवाब दिया। इसके बाद परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा से भी इस मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया गया। मंत्री ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी लेकर अपना पक्ष देंगे। ———— दौसा हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर की भिड़ंत हो गई। एक्सीडेंट में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने से और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। पढ़ें पूरी खबर

