तारानगर जैन मंदिर चोरी: 72 घंटे में खुलासा:13 बेशकीमती अष्टधातु मूर्तियां बरामद करने के प्रयास जारी, अंतरराज्यीय गिरोह के 3 सदस्य गिरफ्तार

चूरू के तारानगर स्थित 1200 साल पुराने जैन मंदिर से 13 अष्टधातु मूर्तियों की चोरी के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने महज 72 घंटे में खुलासा कर दिया। इस मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शातिर आरोपियों को उत्तर प्रदेश के मथुरा और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह का 76 वर्षीय सदस्य धार्मिक व्यक्ति बनकर मंदिरों में रुकता और रेकी करता था, जिसके बाद साथी चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और चोरी गई मूर्तियों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। धार्मिक स्थल से चोरी के बाद बनी विशेष टीम धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी निश्चय प्रसाद एम के निर्देश पर तारानगर थानाधिकारी सतपाल बिश्नोई और एएसआई सुमेर सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय आसूचना के आधार पर जांच शुरू की। अर्टिगा कार से मिला गिरोह का सुराग जांच के दौरान वारदात में प्रयुक्त अर्टिगा कार की पहचान की गई। इसके बाद मथुरा परिवहन कार्यालय से वाहन मालिक की जानकारी जुटाई गई, जिससे आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता खुला। पुलिस ने मथुरा और दिल्ली में दबिश देकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। श्रद्धालु बनकर करता था मंदिरों की रेकी गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा निवासी इसराइल भटियारा (54), विनोद कुमार शर्मा उर्फ लॉलीपॉप तथा भजनपुरा (दिल्ली) निवासी नित्यानंद बासनी (76) के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि नित्यानंद खुद को कैंसर पीड़ित और धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति बताकर बड़े मंदिरों में पूजा के समय ठहरता था। वह मंदिर के खुलने-बंद होने का समय, सुरक्षा व्यवस्था और मूर्तियों की स्थिति की रेकी करता था। इसके बाद अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। रिमांड पर पूछताछ, फरार आरोपियों की तलाश जारी गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उनसे गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी की गई बेशकीमती अष्टधातु मूर्तियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस की विशेष टीम उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संभावित ठिकानों पर दबिश देकर फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। खुलासे पर जैन समाज और व्यापारियों ने किया सम्मान चोरी के मामले का 72 घंटे में खुलासा होने पर गुरुवार को तारानगर व्यापार मंडल, अग्रवाल महासभा, तेरापंथी महिला मंडल और जैन समाज के लोगों ने पुलिस टीम का साफा पहनाकर, माल्यार्पण कर और मिठाई खिलाकर सम्मान किया। इस दौरान स्थानीय व्यापारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

कृषि अधिकारी के क्वार्टर से जूते-कपड़े-चार्जर तक ले गए चोर:बोले-छुट्‌टी पर जयपुर गया था, एक महीने में कॉलोनी में तीसरी चोरी

पाली में कृषि विभाग के एक अधिकारी के सरकारी क्वार्टर का दिनदहाड़े ताला तोड़कर चोर सामान चोरी कर ले गए। चोर घर से जूते, कपड़े, मोबाइल चार्जर, ट्रॉली बैग, प्रेस, पानी की मोटर और 12 हजार रुपए नकद तक ले गए। घटना के समय अधिकारी जयपुर छुट्टी पर गए हुए थे। कोतवाली थानाधिकारी रविंद्र सिंह खिंची ने बताया कि लोढ़ा स्कूल पैकेज कॉलोनी के सरकारी क्वार्टर में रहने वाले कृषि विभाग के कृषि अधिकारी अभिषेक जितरवाल ने 1 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वे मोहर्रम की छुट्टी पर जयपुर गए हुए थे। इसी दौरान 26 जून की दोपहर चोर क्वार्टर का पिछला दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए। चोर क्वार्टर से ट्रॉली बैग, तीन घड़ियां, तीन पंखे, प्रेस, पानी की मोटर, कपड़े, जूते, मोबाइल चार्जर सहित घर में रखे 12 हजार रुपए नकद चोरी कर ले गए। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक महीने में कॉलोनी में तीसरी चोरी कृषि अधिकारी अभिषेक जितरवाल ने बताया कि उनके मोहल्ले में पिछले एक महीने में यह तीसरी चोरी की वारदात है। इससे पहले चोर कृषि अधिकारी राजेश मीणा के घर से पानी की मोटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीपक सिंह के घर से बर्तन व गैस सिलेंडर तक चोरी कर ले गए थे। लगातार हो रही चोरियों से कॉलोनी के लोगों में दहशत का माहौल है।

जल संसाधन विभाग कार्यालय की नीलामी के आदेश:उदयपुर कोर्ट ने 19.53 लाख बकाया पर दिया फैसला, 14-16 जुलाई को होगी नीलामी

उदयपुर स्थित कमर्शियल कोर्ट ने करीब 19.53 लाख रुपए की डिक्री राशि, ब्याज और वाद व्यय का भुगतान नहीं होने पर जल संसाधन विभाग के खंड द्वितीय, पुनर्वास कॉलोनी, सागवाड़ा स्थित कार्यालय भवन की सार्वजनिक नीलामी के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई एससीएल इंफ्राबिल्ड लिमिटेड द्वारा दायर वसूली प्रकरण में की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि नीलामी से पहले विभाग पूरी बकाया राशि और नीलामी संबंधी खर्च जमा करा देता है तो नीलामी की कार्रवाई रोक दी जाएगी। 14 से 16 जुलाई तक होगी सार्वजनिक नीलामी कोर्ट के आदेशानुसार कार्यालय भवन की सार्वजनिक नीलामी 14, 15 और 16 जुलाई को प्रतिदिन दोपहर 3 बजे आयोजित की जाएगी। डिक्रीधारक के पक्ष में बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग की संपत्ति नीलाम की जाएगी।

सफल बोलीदाता के लिए तय की गईं शर्तें कोर्ट ने नीलामी की विस्तृत शर्तें भी निर्धारित की हैं। सफल बोलीदाता को नीलामी के तुरंत बाद कुल बोली राशि का 25 प्रतिशत जमा कराना होगा, जबकि शेष राशि निर्धारित अवधि में जमा करनी होगी। समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में संपत्ति की दोबारा नीलामी की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी। सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा होंगे आदेश कोर्ट ने नीलामी आदेश की प्रतियां जल संसाधन विभाग के सागवाड़ा कार्यालय सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इच्छुक खरीदार तय तिथि और समय पर नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सकें। लोडेश्वर बांध परियोजना से जुड़ा है मामला जल संसाधन विभाग के एईएन मोहित पाटीदार ने बताया कि वर्ष 2013 में लोडेश्वर बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए टेंडर जारी किए गए थे। कार्य का ठेका एससीएल इंफ्राबिल्ड लिमिटेड को मिला था, लेकिन कंपनी ने बीच में काम रोक दिया। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा। अब कमर्शियल कोर्ट ने विभाग को कंपनी की बकाया राशि, उस पर देय ब्याज और वाद व्यय का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। भुगतान नहीं होने पर कार्यालय भवन की नीलामी की कार्रवाई की जा रही है।

प्रागपुरा जीएसएस अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह शेखावत राज्य स्तर पर सम्मानित:सहकारिता में नवाचार के लिए मिला सम्मान, सर्वश्रेष्ठ अध्यक्ष अवॉर्ड मिला

प्रागपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) के अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह शेखावत को राज्य स्तरीय “सर्वश्रेष्ठ अध्यक्ष अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व, पारदर्शी कार्यशैली और नवाचारों के माध्यम से किसानों के हित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए मिला है। ये प्रतिष्ठित सम्मान राजस्थान स्टेट कॉपरेटिव बैंक और सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय किसानों सम्मान दिवस समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक, राजस्थान स्टेट कॉपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक रणजीत सिंह चूंडावत, संयुक्त रजिस्ट्रार भोमाराम और निर्वाचन संयुक्त रजिस्ट्रार इंद्राज मीणा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपेन्द्र सिंह शेखावत को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। प्रशस्ति-पत्र में उपेन्द्र सिंह शेखावत के सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, अनुकरणीय सेवाओं तथा प्रभावी एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली की सराहना की गई है। प्रागपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति ने किसानों के हित में कई नवाचार लागू किए हैं, जिनमें किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराना, ब्याज मुक्त ऋण, कॉमन सर्विस सेंटर, आधुनिक ड्रोन तकनीक, कस्टम हायरिंग सेंटर और सहकार सुपर बाजार जैसी सुविधाओं का सफल संचालन शामिल है। किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के इन प्रयासों को राज्य स्तर पर विशेष रूप से सराहा गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद उपेन्द्र सिंह शेखावत ने इसे समिति के संचालक मंडल, कर्मचारियों, सदस्य किसानों और क्षेत्रवासियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सम्मान उनके लिए नई जिम्मेदारी और प्रेरणा है। उन्होंने ये भी कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक उन्नति और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार है। शेखावत ने भविष्य में भी किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नवाचार और पारदर्शिता के साथ कार्य जारी रखने का संकल्प लिया। इस राज्य स्तरीय सम्मान मिलने पर प्रागपुरा सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं सहकारी संगठनों के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और किसानों ने उपेन्द्र सिंह शेखावत को बधाई दी है और इसे क्षेत्र की सहकारिता व्यवस्था के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

साइबर ठगी में देश का पहला अनूठा मामला:साइबर ठगी के पैसे गोल्ड लोन में जमा कर बनाते थे 'सफेद'; सिस्टम की खामियां उजागर

बीकानेर साइबर ठगों ने अब ठगी के काले धन को सफेद बनाने का ऐसा तरीका खोज लिया था, जिसे पकड़ना पुलिस और बैंकिंग एजेंसियों के लिए भी आसान नहीं था। बीकानेर साइबर थाना पुलिस ने देश में पहली बार ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा किया है, जो साइबर ठगी की रकम को गोल्ड लोन अकाउंट में जमा कर उसे वैध बैंकिंग लेनदेन में बदल देता था। पुलिस ने इस मामले में बज्जू थाना क्षेत्र के मिठड़िया निवासी 35 वर्षीय सुनील ज्याणी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त एक स्विफ्ट कार और तीन महंगे मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। ऐसे करते थे पूरा फ्रॉड बीकानेर एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया- जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सबसे पहले अपने या भोले-भाले लोगों के नाम पर मणप्पुरम फाइनेंस से गोल्ड लोन लेते थे। इसके लिए सोना गिरवी रखकर लाखों रुपए का वैध लोन बैंक खाते में प्राप्त किया जाता था। इसके बाद देशभर में सक्रिय गिरोह के अन्य सदस्य लोगों को डिजिटल अरेस्ट, पुलिस या सरकारी एजेंसी का डर दिखाकर अथवा इन्वेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों रुपए की साइबर ठगी करते थे। ठगी की रकम सीधे आरोपियों के बैंक खातों में रखने के बजाय उसे मणप्पुरम फाइनेंस के ऑनलाइन गोल्ड लोन (OGL) अकाउंट में जमा कर दिया जाता था। इस रकम से तुरंत गोल्ड लोन की किस्त या पूरा लोन चुका दिया जाता था। लोन क्लोज होने के बाद गिरवी रखा सोना वापस मिल जाता था या उसी सोने पर दोबारा नया लोन ले लिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में साइबर ठगी का पैसा बैंकिंग सिस्टम में वैध लेनदेन जैसा दिखाई देने लगता था। जब तक पीड़ित शिकायत करता और पुलिस बैंक खाते फ्रीज करवाती, तब तक पैसा गोल्ड लोन रिपेमेंट के रूप में सिस्टम में समायोजित हो चुका होता था। यही वजह थी कि ठगी की रकम का ट्रैक पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता था। 56 ग्राम सोने पर छह बार लिया लोन पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सुनील ज्याणी ने 56 ग्राम सोना गिरवी रखकर छह बार गोल्ड लोन लिया। इन गोल्ड लोन खातों में साइबर ठगी के करीब 25 लाख रुपए जमा करवाए गए और बाद में यह राशि अपने लिंक बैंक खाते में प्राप्त कर ली। आरोपी और उसके साथी इस काम के बदले कमीशन लेते थे। सिस्टम की ये खामी सामने आई एसपी मृदुल ने बतायाा- सिस्टम की खामी ये है कि आमतौर पर साइबर ठगी की जो राशि है, वो किसी सामान्य एकाउंट में होती है तो उस पर लियन लगता है। वो खाता सीज हो जाता है। वहीं गोल्ड लोन एजेंसी के एकाउंट्स ट्रेडिंग एकाउंट होते हैं, उन पर किसी तरह का लियन या फिर फ्रीज करने का विकल्प नहीं होता। इसी सिस्टम की खामी का फायदा उठाकर बीकानेर के युवक ने तरीका अपनाया। पहले गोल्ड लोन लेता और फिर साइबर ठगी के रुपए इस खाते में ट्रांसफर करवा लेता। डिजिटल अरेस्ट से डेढ़ करोड़ और इन्वेस्टमेंट के नाम पर 5 लाख की ठगी जांच में सामने आया कि आरोपी ने छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति से इन्वेस्टमेंट के नाम पर करीब 5 लाख रुपए की ठगी की। इसके अलावा एक वृद्ध महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करीब 1.50 करोड़ रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया। आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध के कई मामले दर्ज हैं। शराब कारोबार की आड़ में चला रहा था नेटवर्क पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पार्टनरशिप में बीकानेर शहर में चार और कोलायत क्षेत्र में तीन, कुल सात शराब की दुकानों का संचालन करता है। उसने ‘मातेश्वरी’ नाम से फर्म का बैंक खाता खुलवा रखा था, जिसमें साइबर ठगी से जुड़ी राशि भी प्राप्त की जाती थी। पुलिस अब उसके साझेदारों और उनसे जुड़े बैंक खातों का भी विश्लेषण कर रही है। पुलिस की अपील बीकानेर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक या गोल्ड लोन अकाउंट न खुलवाएं। ऐसा करने पर आपका खाता साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का माध्यम बन सकता है और आप कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

नागदा पेयजल परियोजना से केबल चोरी का खुलासा:दो महिलाओं सहित चार आरोपी गिरफ्तार, केबल बरामद

बारां की अंता थाना पुलिस ने नागदा-अन्ता-बलदेवपुरा पेयजल परियोजना के फिल्टर प्लांट से केबल चोरी के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की गई केबल बरामद कर ली गई है और वारदात में इस्तेमाल की गई दो बाइकें भी जब्त की गई हैं। पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि 26 जून को नागदा स्थित 7.5 एमएलडी फिल्टर प्लांट से अज्ञात बदमाशों द्वारा केबल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. कमल जांगिड़ और वृत्ताधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह आढ़ा के निर्देशन में थानाधिकारी भूपेश शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। जांच के दौरान, पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर दो संदिग्ध बाइकों की पहचान की गई। नाकाबंदी के दौरान इन दोनों बाइक सवारों को पकड़ा गया, जिनकी पहचान कपिल और रोकी उर्फ चोटिया के रूप में हुई। आगे की जांच में दो महिलाओं प्रेमपति और दीचा की संलिप्तता भी सामने आई, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में चारों आरोपियों ने पेयजल परियोजना के फिल्टर प्लांट से केबल चोरी करने की बात स्वीकार की। आरोपियों ने बताया कि वे पहले कबाड़ बीनने के बहाने गांवों में घूमकर रेकी करते थे और मौका मिलने पर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।

जयपुर में मैरिज रजिस्ट्रार-कर्मचारी को घूस लेते किया गिरफ्तार:शादी रजिस्ट्रेशन की एवज में मांगी रिश्वत; साढ़े 12 हजार रुपए लेते पकड़ा

भष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जयपुर के लालकोठी स्थित नगर निगम ऑफिस से मैरिज रजिस्ट्रार और कर्मचारी को घूस लेते पकड़ा। मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाने की एवज में दोनों आरोपी घूस मांग रहे थे। एसीबी ने यह कार्रवाई गुरुवार शाम को की। एसीबी कोटा की टीम ने दोनों आरोपियों को 12 हजार 500 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। एसीबी टीम की ओर से गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। डीजी (एसीबी) गोविंद गुप्ता ने बताया- कोटा एसीबी को परिवादी ने शिकायत दी। वह जयपुर के प्रताप नगर के आर्य समाज मंदिर के प्रधान पद पर काम करता है। उनकी ओर से गरीब और दहेज रहित शादी करवाई जाती है। इसके बाद उन शादियों को नगर निगम में लालकोठी स्थित मैरिज ऑफिस से रजिस्ट्रर्ड करवाया जाता है। विवाह रजिस्ट्रेशन का निर्धारित शुल्क 110 रुपए है। इसके बावजूद मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और कर्मचारी राकेश चौधरी की ओर से प्रति विवाह पंजीयन 2500 से 3000 रुपए तक रिश्वत रकम मांगी जाती थी। घूस रकम नहीं देने पर रजिस्ट्रेशन के लिए दिए डॉक्यूमेंट में अनावश्यक कमियां बताकर परिवादियों को परेशान किया जाता था। कर्मचारी से 38 हजार रुपए बरामद, किए जब्त परिवादी की शिकायत पर एसीबी की ओर से गोपनीय सत्यापन करवाया गया। मांग सत्यापन में आरोपी मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह की ओर से कर्मचारी राकेश चौधरी के जरिए रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। कोटा एसीबी टीम की ओर से गुरुवार को मैरिज ऑफिस में ही दोनों आरोपियों को रिश्वत के 12 हजार 500 रुपए लेते दबोचा गया। ट्रैप कार्रवाई के दौरान कर्मचारी राकेश की तलाशी में 38 हजार रुपए अतिरिक्त कैश मिलने पर बरामद किए गए। एसीबी की ओर से गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के साथ ही ऑफिस-घर और अन्य संभावित ठिकानों की तलाशी ली जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक:ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे, इससे न्याय व्यवस्था को नुकसान; NCLT का फैसला रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने गुरुवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का फैसला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा- AI से बनाए गए झूठे और गैर-मौजूद फैसलों को कोर्ट में असली बताकर पेश करना न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए ऐसे मामलों में अदालतों को बिल्कुल भी नरमी नहीं दिखानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि नकली कानूनी जानकारी दिखने में छोटी बात लग सकती है, लेकिन यह बहुत खतरनाक होती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया खराब होती है और अदालत के फैसलों पर लोगों का भरोसा भी कम हो सकता है। पूरा मामले समझें… यह मामला एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड, जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड और पूजा रमेश सिंह से जुड़े दिवालियापन विवाद का है। इस मामले में NCLT मुंबई ने IBC की धारा-7 के तहत एक याचिका स्वीकार की थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। NCLT ने अपने फैसले को सही साबित करने के लिए जिन कानूनी मामलों का हवाला दिया था, उनमें से कई मामले असल में थे ही नहीं। फैसले में कुछ ऐसे मामलों का नाम लिखा गया था, जो पूरी तरह से मनगढ़ंत यानी नकली थे। उनकी कानूनी साइटेशन भी बनाई गई थीं और उनका कोई वास्तविक रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा कि उनके वकील ने इन नकली मामलों का हवाला नहीं दिया था। बैंक के अनुसार, NCLT ने इन्हें अपनी तरफ से की गई रिसर्च के दौरान शामिल किया था। सुप्रीम कोर्ट के 5 कमेंट ————————————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पैदल चलने वालों को परेशानी समझते हैं ड्राइवर, फुटपाथ पर चलना बुनियादी अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि तय रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बूंदी कारागृह का निरीक्षण:बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने व्यवस्थाओं की जांच की, बंदियों से भेदभाव पर पूछा

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश और सर्वोच्च न्यायालय के सुकन्या शान्था बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में पारित आदेश की पालना में गुरुवार को बूंदी जिला कारागृह का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कारागृह की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, विधिक सहायता और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। साथ ही बंदियों से सीधे बातचीत कर उनके प्रकरणों की जानकारी ली गई तथा यह भी पूछा गया कि कारागृह में उनके साथ धर्म, जाति या सामाजिक आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं किया जा रहा है। कारागृह की व्यवस्थाओं का लिया जायजा मॉडल प्रिजन मैनुअल के तहत गठित बोर्ड ऑफ विजिटर्स के आधिकारिक सदस्यों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बूंदी के सचिव ने मुख्य प्रहरी जितेंद्र नागर की उपस्थिति में निरीक्षण किया। इस दौरान विधिक सेवा क्लिनिक, सीसीटीवी विंग, टेलीफोन कक्ष, बैरक, रसोईघर, कैंटीन, मुलाकात कक्ष, डिस्पेंसरी, वार्ड, स्नानागार, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता और मनोरंजन के साधनों का विस्तृत अवलोकन किया गया। बंदियों से सीधे संवाद निरीक्षण दल ने बंदियों से मुलाकात कर उनके लंबित प्रकरणों और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया कि कारागृह में कार्य आवंटन या अन्य व्यवस्थाओं में धर्म, जाति अथवा सामाजिक आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। ये अधिकारी रहे मौजूद निरीक्षण में जिला एवं सेशन न्यायाधीश संदीप कुमार शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मुकेश परनामी, जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव और जिला पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार शर्मा मौजूद रहे। इनके साथ सीएमएचओ डॉ. ओपी सामर, अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी मुकेश गुप्ता, सहायक निदेशक (मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी) धनराज मीणा, संयुक्त निदेशक कृषि राजेश कुमार शर्मा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अर्पित जैन, जिला उद्योग अधिकारी शुभकरण थालोर तथा जिला रोजगार अधिकारी भैरू प्रकाश नागर भी मौजूद रहे।

कोर्ट का आदेश आने तक नसरीन सांगा का रहेगा कब्जा:प्रियंका वाड्रा की जेठानी ने खान फार्म को बताया वैध संपत्ति, बीजेपी ने मांगा जवाब

ऊधम सिंह नगर के किच्छा में स्थित खान फार्म की जमीन को लेकर दो दावेदार सामने आने के बाद प्रशासन ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) पंकज उपाध्याय ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के बाद यह आदेश जारी किया है। सुनवाई के दौरान तहसील परिसर में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संभावित तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए एडीएम ने खान फार्म के बाहर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए। आदेश के बाद विवादित स्थल पर भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई। नसरीन सांगा ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले को लेकर भाजपा ने प्रियंका गांधी वाड्रा से जवाब मांगा है। जाने पूरा विवाद… आठ एकड़ भूमि को लेकर विवाद
किच्छा के पिपलिया मोड़ पर स्व. कुलसुम खान का 8 एकड़ भूमि पर खान फार्म है। दोनों दावेदारों के बीच विवाद जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी व स्व. रिचर्ड वाड्रा की पत्नी सायरा वाड्रा का दावा है कि यह फार्म उनकी बुआ की वसीयत के आधार पर उनकी वैध संपत्ति है। वहीं स्व. कुलसुम खान की बहन नसरिन सांगा ने भी इस संपत्ति पर अपना दावा जताया है। सायरा वाड्रा ने जबरन कब्जा करने का लगाया आरोप
सायरा वाड्रा का दावा है कि यह फार्म उनकी बुआ की वसीयत के आधार पर उनकी वैध संपत्ति है। उनका आरोप है कि नसरीन सांगा ने फार्म पर काम कर रहे मजदूरों को हटाकर जबरन कब्जा कर लिया। जिसके बाद मौके पर कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और ट्रक के नीचे आकर आत्मदाह की चेतावनी दी। प्रशासन ने दस्तावेज पेश करने के दिए निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने दोनों पक्षों को एडीएम कार्यालय में अपने-अपने स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। निर्धारित समय पर सायरा वाड्रा की ओर से अधिवक्ता पीयूष पंत और नसरीन सांगा की ओर से अधिवक्ता शुभम छाबड़ा एडीएम कार्यालय पहुंचे और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए। अपर जिला अधिकारी पंकज उपाध्याय ने दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए निर्णय लिया है कि जो पक्ष मौके पर काबिज है वह काबिज रहे और जो पक्ष बाहर है वह बाहर रहे। दोनों पक्षों को उनके द्वारा बताया गया कि दोनों पक्ष अपना कोर्ट के माध्यम से समझौता करें। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों की ओर से किसी भी हालत में कानून व्यवस्था को बिगड़ने का प्रयास न किया जाए। यदि ऐसा होता है तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की विस्तृत जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष द्वारा विवादित भूमि की वर्तमान स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। दोनों पक्षों के वकीलों ने पेश किए दस्तावेज
एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि कल रात में संपत्ति को लेकर के दो पक्षों में विवाद का मामला संज्ञान में आया। पुलिस ने मजिस्ट्रेट को सूचना दी और इस बीच कुछ लोग तहसील में एसडीएम से मिलने आए। एसडीएम की ओर से समझाने के बाद भी वो नहीं माने। जिसके बाद दोनों पक्षों को एडीएम कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए। आज तहसील किच्छा में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने दस्तावेज पेश किए। दोनों पक्षों के मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं, इसलिए न्यायालय में विचाराधीन मामलों पर कोई टिप्पणी प्रशासन की ओर से किया जाना उचित नहीं है। मामला कोर्ट में विचाराधीन
एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि एक पक्ष अपने आप को मृतक का उत्तराधिकारी बता रहा है। दूसरा पक्ष वसीयत अपने पास होने का दावा कर रहा है। अभी दोनों का मामला कोर्ट में चल रहा है। मैं दोनों पक्षों के लोगों से अपील करना चाहता हूं कि कानून व्यवस्था बनाए रखें, कानून हाथ में ना लें, विवाद की स्थिति उत्पन्न ना करें। नसरीन सांगा ने खुद को बताया पुश्तैनी मालिक
नसरीन सांगा ने कहा कि हम 1939 यहां पले बड़े हैं। हम इस जमीन के पुश्तैनी मालिक हैं। मेरे 2 भाई बहन थे। अब मैं अकेली बच गई हूं। मैं अपनी ही चीज पर कब्जा क्यों करूंगी। कोर्ट के निर्णय का दोनों पक्ष करेंगे सम्मान
सायरा वाड्रा के अधिवक्ता पीयूष पंत ने बताया कि सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट के दस्तावेजों को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के सामने देखा गया। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों पक्षों से अनुरोध किया गया कि किसी भी पक्ष की ओर से कोई ऐसा काम नहीं किया जाए, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो। दोनों पक्षों ने आश्वस्त किया है कि न्यायालयों का जो भी निर्णय होगा, उसका वो सम्मान करेंगे। कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेंगे। भाजपा ने प्रियंका गांधी से मांगा जवाब
भाजपा नेताओं का कहना है कि खान फार्म कुलसुम खान के नाम पर है और इसी परिसर में 90 वर्षीय नसरीन सांगा रहती हैं। इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा इस जमीन पर दावा कर रही हैं। भाजपा का आरोप है कि मामले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के विधायक तिलक राज बेहड़ करीब 100 लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग महिला को धमकाया। भाजपा का दावा है कि नसरीन सांगा ने खुद कहा है कि कुछ लोग कांग्रेस से जुड़े हुए थे और उन्हें जमीन खाली करने का दबाव बना रहे थे। विधायक गैरकानूनी तरीके से लोगों को धमका रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि विधायक प्रियंका गांधी के कहने पर वहां पहुंचे होंगे। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या जमीन पर कब्जा करने के लिए इस तरह के तरीके अपनाए जाने सही है। भाजपा ने प्रियंका गांधी से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।