पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई:2.07 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में CBI का एक्शन, राजस्थान-ओडिशा से 3 गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड सरकारी अधिकारी से 2.07 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में सीबीआई ने राजस्थान और ओडिशा में कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने राजस्थान के नागौर और ओडिशा के बालेश्वर सहित सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर की गई। सीबीआई ने इस संबंध में 25 मार्च 2026 को केस दर्ज किया था। सीबीआई के अनुसार ठगों ने एक सेवानिवृत्त लोक सेवक को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर धमकाया। आरोपियों ने उन्हें फर्जी कार्रवाई में फंसाने की बात कहकर कुल 2.07 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सबसे पहले एक ट्रस्ट के नाम से खोले गए बैंक खाते में जमा करवाई गई। इसके बाद रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई अन्य बैंक खातों में लेयरिंग कर ट्रांसफर किया गया। नागौर से एक, बालेश्वर से दो आरोपियों को पकड़ा सीबीआई ने 30 जून 2026 को राजस्थान और ओडिशा में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान राजस्थान के नागौर से एक आरोपी और ओडिशा के बालेश्वर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से संदिग्ध दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। सीबीआई इनकी जांच कर रही है। सीबीआई ने चेताया- डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं
सीबीआई ने लोगों को चेताया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी या रेगुलेटरी अथॉरिटी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती। एजेंसी ने अपील की है कि फर्जी निवेश योजनाओं, पुलिस या जांच अधिकारी बनकर किए जाने वाले कॉल और डिजिटल अरेस्ट की धमकियों से डरकर पैसा ट्रांसफर न करें। संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट:जयपुर, जोधपुर, कोटा की आर्थिक सेहत का बनेगा रिपोर्ट कार्ड; रोजगार-उद्योग, जनसंख्या जैसे आंकड़ों से बनेंगी विकास योजनाएं

राजस्थान के तीन शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा को अब आबादी या भौगोलिक विस्तार से नहीं, बल्कि आर्थिक क्षमता, रोजगार सृजन, महिला उद्यमिता और उद्योग-व्यापार की वास्तविक तस्वीर के आधार पर आंका जाएगा। शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट के तहत इनकी आर्थिक प्रोफाइल तैयार की गई है। इससे सरकार को पहली बार यह स्पष्ट आधार मिलेगा कि किस शहर की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर टिकी है। कहां रोजगार की संभावना अधिक और किन क्षेत्रों में निवेश या सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। बता दें, शहरों के लिए ऐसी यह रिपोर्ट पहली बार तैयार की जा रही है। केंद्रीय राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अनिगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) 2025 के आंकड़ों का उपयोग कर शहर-स्तरीय आकलन तैयार करने की पहल की है। पहली बार देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 शहरों (जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या के आधार पर) की एक व्यापक सांख्यिकीय रूपरेखा में आकलन किया गया है। जयपुर में 48.49 हजार प्रतिष्ठानों से 1 लाख को रोजगार रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में लगभग 48.49 हजार प्रतिष्ठान और 1.01 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां प्रति प्रतिष्ठान सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) करीब 4.68 लाख रुपए तथा सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 55 फीसदी है। जोधपुर में प्रति प्रतिष्ठान जीवीए लगभग 3.89 लाख और कोटा में 2.59 लाख रुपए है। तीनों शहरों में सेवा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। सरकार का उद्देश्य शहरों की आर्थिक ताकत और कमजोरियों की पहचान कर विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। अभी अधिकांश सरकारी आंकड़े राज्य या जिला स्तर तक सीमित रहते थे, जिससे शहर-विशेष की चुनौतियों और संभावनाओं का सटीक आकलन कठिन था। नई व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी। भविष्य में इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय करना आसान होगा कि किस शहर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएं, कहां व्यापारिक अधोसंरचना बढ़ाई जाए, किस क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम चलें और किन शहरों में महिला उद्यमिता को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए। इससे सरकारी निवेश और बजट का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। रिपोर्ट कार्ड से यह फायदा होगा सरकार क्या चाहती है? पहली बार विकास के लिए आर्थिक संकेतकों को पैमाना बनाना बेहतर है। दूसरे शहरों की योजनाएं भी इसी आधार पर बने। -एनके जैन, अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

आरएसएएचसी की बड़ी चूक:बिना फिजिकल वेरिफिकेशन बना परीक्षा केन्द्र, 1500 क्षमता वाले कॉलेज में 2600 छात्रों को बैठाया

राजस्थान स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल (आरएसएएचसी) की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का फिजिकल वेरिफिकेशन किए बिना केवल चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दे दी गई। इसका खामियाजा 29 जून को आयोजित पैरामेडिकल डिप्लोमा कोर्स की परीक्षा में सामने आया, जहां अव्यवस्था मिलने पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे 2600 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि करीब 1500 परीक्षार्थियों की क्षमता वाले परीक्षा केन्द्र पर 2600 छात्रों को बैठाया गया। व्यवस्था कम पड़ने पर परीक्षार्थियों को टेंट में बैठाकर परीक्षा करानी पड़ी। बाद में गड़बड़ियां सामने आने पर परीक्षा निरस्त कर दी गई। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विरेन्द्र कुमार शर्मा ने स्वीकार किया कि समय कम होने के कारण फिजिकल निरीक्षण नहीं कराया गया और केवल चेकलिस्ट के आधार पर केन्द्र को स्वीकृति दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परीक्षा केन्द्र की क्षमता, आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किए बिना अनुमति देना गंभीर प्रशासनिक चूक है। क्या है मामला; कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में 29 जून को डिप्लोमा इन कैथ लैब टेक्नोलॉजी (डीसीएलटी), डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नोलॉजी (डीडीटी) और डिप्लोमा इन ईसीजी टेक्नोलॉजी (डीईसीजीटी) के प्रथम वर्ष एवं रिमांडेड छात्रों की सैद्धांतिक परीक्षा आयोजित थी। परीक्षा के दौरान अव्यवस्था मिलने पर इसे रद्द करना पड़ा। जयपुर में इस दिन कुल 11 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। ये हैं बड़ी खामियां
1. पिछले 10 साल से सिर्फ जयपुर ही परीक्षा केन्द्र
काउंसिल पिछले दस वर्षों से पैरामेडिकल कोर्स की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं केवल जयपुर में आयोजित करा रही है। इससे जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बाड़मेर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बीकानेर, चूरू और अलवर सहित अन्य जिलों के छात्रों पर यात्रा, ठहरने और भोजन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मौजूदा समय में गायत्री राठौड़ के पास चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा विभाग, दोनों के सचिव का दायित्व है। ऐसे में जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने और एसओपी जारी करने की मांग उठ रही है। 2. परीक्षा केन्द्रों और परीक्षकों को नाममात्र का मानदेय
परीक्षा केन्द्रों को प्रति छात्र करीब 12 रुपए और परीक्षकों को 250 रुपए मानदेय दिया जाता है, जिसे विशेषज्ञ अपर्याप्त मानते हैं। 3. काउंसिल का अपना भवन नहीं
आरएसएएचसी वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रही है और अब तक उसका अपना भवन नहीं बन पाया है। हमने कालवाड़ रोड स्थित सेंटर का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की बजाय चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दी थी। सरकार को जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने के लिए भी पत्र लिखा है, ताकि प्रदेश के बाहर के छात्रों को अपने गृह जिले या संभाग में परीक्षा देने की सुविधा मिल सके। -डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा, परीक्षा नियंत्रक, आरएसएएचसी

कर्मचारी चयन बोर्ड:पात्रता परीक्षाओं को लेकर अलग-अलग नियम; रीट के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार होता है जारी, समान पात्रता परीक्षा में नहीं

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) में टॉपिक वाइस अंक भार जारी नहीं किया जा रहा है। इससे सीईटी स्नातक और सीईटी सीनियर सेकंडरी की तैयारी करने वाले 30 लाख से अधिक अभ्यर्थी असमंजस में है कि वे कौन से टॉपिक की तैयारी अधिक करें और कौन से टॉपिक की कम। अंकभार जारी होने से विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करने में आसानी रहती है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से शिक्षक बनने के लिए होने वाली रीट के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार जारी किया जाता है। इससे अभ्यर्थी को तैयारी करने में काफी आसानी रहती है। अब सीईटी में भी टॉपिक वाइज अंकभार जारी करने की मांग उठ रही है। रीट के मुकाबले सीईटी में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक रहेगी। उधर, चयन बोर्ड ने टॉपिक वाइज अंकभार जारी करने से इंकार कर दिया है। 30 लाख असमंजस में; कौन से टॉपिक की तैयारी करें अभ्यर्थियों की मांग क्यों है जायज? रीट – सीईटी
टॉपिक वाइज अंकभार जारी होता है टॉपिक वाइज अंकभार जारी नहीं
तैयारी की स्पष्ट दिशा मिलती है अभ्यर्थियों में असमंजस
विषयवार रणनीति बनाना आसानसभी विषयों की तैयारी समान रूप से करनी पड़ रही पेपर सेटर्स की मनमानी पर रोक लगा सकेंगे समान पात्रता परीक्षा के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार जारी होने से अभ्यर्थियों को तैयारी में काफी मदद मिलती है। इससे उन्हें यह पता चलता है कि उन्हें किस टॉपिक पर अधिक ध्यान देना है और किस पर कम। इससे पेपर सेटर्स की मनमानी भी रोकी जा सकेगी। वे किसी टॉपिक से अधिक तो किसी से कम सवाल बना देंगे। बोर्ड को चाहिए कि टॉपिक वाइज अंकभार जारी करे। -हनुमान किसान, अध्यक्ष, राजस्थान बेरोजगार यूनियन अभ्यर्थी सभी टॉपिक की तैयारी करे। टॉपिक वाइज अंकभार जारी करना संभव नहीं है। पिछली सीईटी में भी ऐसा नहीं किया गया था। फिर भी सिलेबस में टॉपिक के अंकों का निर्धारण काफी कुछ 2024 की सीईटी जैसा ही है। अभ्यर्थी अगर पिछली दोनों सीईटी सिलेबस और पुराने पेपर्स देखेंगे तो उन्हें सटीक अंदाजा हो जाएगा कि कौन से टॉपिक का कितना वेटेज है। -आलोक राज, अध्यक्ष, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड

एनसीआरबी-2024 में बाल अपराध 11.2 प्रतिशत बढ़े:डिजिटल पढ़ाई की आड़ में क्राइम क्लास बच्चे यू-ट्यूब से सीख रहे हत्या के तरीके

गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर खुल गए हैं। होमवर्क, असाइनमेंट और स्कूल अपडेट अब वाट्सएप व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने लगे हैं। इसी ‘डिजिटल पढ़ाई’ के नाम पर बच्चों के हाथों में दिनभर मोबाइल रहता है। लेकिन चिंता कि बात यह है कि मोबाइल पर कई बच्चे पढ़ाई के बीच हिंसक गेम, क्राइम सीरीज, डार्क वेब और अपराध से जुड़े वीडियो देख रहे हैं। इसी कारण बच्चों यानी किशोरों के अपराध में बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में जारी एनसीआरबी-2024 रिपोर्ट के अनुसार बच्चों यानी किशोरों के अपराध में 11.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मर्डर, डकैती और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में नाबालिगों की भूमिका बढ़ना गंभीर संकेत है। साइबर अपराधों में भी 17.9% वृद्धि दर्ज हुई। पहली बार साइबर अपराध का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंचा है। राजस्थान और जयपुर की स्थिति भी चिंताजनक है। जयपुर धोखाधड़ी के मामलों में देश में पहले नंबर पर है। चोरी, किडनैपिंग और मर्डर के मामलों में जयपुर महानगरों में तीसरे पायदान पर है। मुहाना कांड; 11-12 साल के बच्चों ने दोस्त का सिर काटा जयपुर के मुहाना इलाके में 14 जून को लापता 10 साल के अजमत की 25 जून को नाले में सिर कटी लाश मिली। वारदात में मृतक के ही 11 और 12 साल के तीन दोस्त शामिल निकले। बहन को लेकर हुई मामूली कहासुनी का बदला लेने के लिए बच्चों ने पहले अजमत का गला घोंटा, फिर चाकू से सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया। इतनी कम उम्र में इस तरह की वारदात और फिर सामान्य तरीके से घर लौट आना, बच्चों पर हिंसक कंटेंट के असर की ओर इशारा करता है। शिवदासपुरा कांड; यू-ट्यूब देखकर काटे ताई के पैर
शिवदासपुरा इलाके में 24 साल के सूरज बैरवा ने अपनी 53 साल की ताई की हत्या कर दी। उसे ताई के पैरों में पहने करीब एक किलो चांदी के कड़े लूटने थे। वारदात की पूरी साजिश मोबाइल पर रची गई। हत्या से पहले सूरज ने तीन दिन तक यू-ट्यूब पर 50 से ज्यादा क्राइम वीडियो देखे। गूगल पर यह भी सर्च किया कि सबूत कैसे मिटाएं और कुएं में फेंकी लाश कितने दिन में पानी के ऊपर आती है। उसने इंटरनेट से ही हत्या का तरीका सीखा। पुणे मर्डर; डिजिटल प्लानिंग से पुलिस को चकमे की कोशिश
महाराष्ट्र के पुणे में 20 साल की सिया गोयल ने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को 500 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। इस केस में मोबाइल का इस्तेमाल पुलिस को चकमा देने के लिए किया गया। आरोपी चेतन ने अपनी लोकेशन छुपाने के लिए वारदात वाले दिन अपना फोन दुकान पर ही छोड़ दिया और इंटरनेट बंद रखा, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. अदिति अग्रवाल, मनोवैज्ञानिक रील्स खत्म कर रही बच्चों का धैर्य, हिंसक गेम्स बना रहे आक्रामक – 5 से 17 साल के बच्चों में मनोरंजन के लिए स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और रोज 60 मिनट शारीरिक गतिविधि की सलाह दी गई है। – अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और कुछ अन्य संस्थाएं 5 से 17 साल के बच्चों के लिए 2 घंटे से कम स्क्रीन टाइम की सलाह देती हैं। भारतीय बाल रोग अकादमी भी मनोरंजन के लिए स्क्रीन का उपयोग सीमित रखने और परिवार के साथ स्क्रीन-फ्री समय तय करने पर जोर देती है। एक्सपर्ट व्यू : सर्च इंजन जवाबदेह बनें, पैरेंट्स दें ‘डिजिटल संस्कार’ मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट
– इंटरनेट पर अपराध के तरीके खोजना आसान होता जा रहा है। सरकार को ऐसे सख्त नियम बनाने चाहिए कि क्राइम से जुड़े खतरनाक वीडियो सर्च होते ही ब्लॉक हों और पुलिस को अलर्ट मिले। स्कूलों में इंटरनेट के सही इस्तेमाल की पढ़ाई जरूरी है। अभिभावकों को एडमिशन के समय स्कूलों से इसकी मांग करनी चाहिए। आज घर के संस्कारों के साथ ‘ऑनलाइन संस्कारों’ की भी उतनी ही जरूरत है। – बच्चा आपसे ज्यादा मोबाइल चलाना जानता है, तो इसे गर्व नहीं बल्कि चिंता की बात मानना चाहिए। पैरेंट्स खुद को तकनीकी रूप से अपडेट रखें और बच्चों के फोन में पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर जरूर डालें। बच्चों को फोन में पासवर्ड लगाने या पूरी प्राइवेसी की छूट न दें। उनकी सर्च हिस्ट्री नियमित जांचें। कुछ गलत दिखे तो तुरंत डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाएं और जरूरत हो तो काउंसलिंग कराएं।

पचपदरा रिफाइनरी का शुभारंभ आज:प्रदेश की जरूरत का 60 प्रतिशत फ्यूल बनाएंगे, हर साल 1 मिलियन मीट्रिक टन पेट्रोल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार दोपहर 12 बजे देश की सबसे हाईटेक और प्रदेश की पहली पचपदरा रिफाइनरी देश को सुपुर्द करेंगे। इसी के साथ काले क्रूड से बाड़मेर ही नहीं राजस्थान में खुशहाली का नया स्वर्णिम द्वार खुल जाएंगे। यह प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा 79,459 करोड़ का प्रोजेक्ट है, जो शुरुआत में 43,129 करोड़ का था। दुनिया की सबसे अत्याधुनिक तकनीकों से लैस एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी BS-6 मानकों का सबसे स्वच्छ ईंधन देगी। यहां से निकलने वाला कच्चा तेल रिफाइन होने के लिए गुजरात और अन्य राज्यों में भेजा जाता था। अब यह यहीं रिफाइन होगा। पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथिलीन जैसे मूल्यवान पेट्रोकेमिकल उत्पाद यहीं बनेंगे। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल उत्पादों से प्लास्टिक, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, कपड़ा और मेडिकल उपकरण बनाने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े सहायक उद्योगों को सीधी राह मिलेगी। पूरी क्षमता से रिफाइनरी चलेगी तब राजस्थान की जरूरत की 60-70 फीसदी डीजल-पेट्रोल की मांग पूरी होगी। उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, पेट्रोलियम मंत्री हरदीपसिंह पुरी, उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी सहित प्रदेश व केंद्र के कई नेता शामिल होंगे। प्रोजेक्ट में 9 रिफाइनरी और 4 पेट्रो केमिकल यूनिट पेट्रोल-डीजल-एलपीजी से पेटकॉक तक तैयार होंगे 1.शुरुआती उत्पाद- स्विंग नेफ्था, लाइट-हेवी केरोसिन, लाइट-हेवी गैस ऑयल गैस। 2.पेट्रोल- नेफ्था को सीसीआर यूनिट में भेज बीएस-4 मानकों का पेट्रोल तैयार होगा। 3.डीजल- लाइट-हेवी गैस ऑयल को डीजल हाइड्रो-ट्रीटिंग यूनिट में प्रोसेस कर सल्फर-मुक्त अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल बनेगा। 4.एलपीजी और अन्य गैसें- फ्लुइड कैटेलिटिक क्रैकिंग और डिलेड कोकर यूनिट में भारी तेल को तोड़कर एलपीजी और प्रोपलीन निकलेगा। 5.पेट्रोकेमिकल्स- सह-उत्पादों को पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में भेजा जाता है। पॉलीप्रोपाइलीन, बेंजीन और टोल्यूनि जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद बनेंगे। ये प्लास्टिक और पॉलीमर उद्योगों के काम आएंगे।
पेटकोक: डिलेड कोकर यूनिट की क्रैकिंग प्रक्रिया से ठोस पेट्रोलियम कोक बनेंगे। 4 मेगा पाइप लाइन, क्रूड की 2, गैस-पानी की एक-एक 1.क्रूड ऑयल लाइनें स्थानीय क्रूड- मंगला क्रूड टर्मिनल से रिफाइनरी तक 80 किमी. लंबी व 30 इंच चौड़ी विशेष इलेक्ट्रिकल-हीटेड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। आयातित क्रूड- गुजरात के भोगत टर्मिनल से पचपदरा तक विदेशी क्रूड ऑयल लाने के लिए 575 किमी. लंबी और 30 इंच चौड़ी नई पाइपलाइन बिछाई गई है। 2.पानी की पाइपलाइन- रिफाइनरी चलाने के लिए 5,300 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा कच्चे पानी की आवश्यकता रहेगी। इसे पूरा करने के लिए इंदिरा गांधी नहर से रिफाइनरी तक 200 किमी. लंबी 46 इंच चौड़ी पाइपलाइन बिछाई गई है। 3. प्राकृतिक गैस पाइपलाइन- रागेश्वरी गैस टर्मिनल से रिफाइनरी तक प्राकृतिक गैस लाने के लिए 80 किमी. लंबी और 34 इंच चौड़ी पाइपलाइन का उपयोग किया जाएगा। 13 साल में कितना संवरा पचपदरा टाउनशिप: रिफाइनरी के पास 247 एकड़ जमीन पर 613.15 करोड़ से टाउनशिप विकसित की गई है। इसमें 800 से ज्यादा फ्लैट और आवास हैं। ए कैटेगरी के बड़े विला के रूप में 24, बी कैटेगरी के 120, सी कैटेगरी के 656 आवास हैं। सीआईएसएफ के जवानों के लिए अलग से बैरक और क्वार्टर हैं। सोलर पैनल लगे हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और कचरा प्रबंधन की सुविधा है। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मिल्क बूथ, स्पोर्ट्स, क्रिकेट मैदान और जिम, कम्युनिटी हॉल, क्लब हाउस, ऑडिटोरियम और उपासना स्थल हैं। 2 गेस्ट हाउस हैं। स्कूल: एचपीसीएल की ओर से 600 बच्चों के लिए आधुनिक स्कूल तैयार किया गया है। सीबीएसई पैटर्न से शिक्षा प्रणाली रहेगी। स्कूल बिल्डिंग का काम पूरा हो गया है। स्कूल में आधुनिक ऑडियो-विजुअल सहायता और डिजिटल बोर्ड से लैस कमरे हैं। विज्ञान और कंप्यूटर की अलग-अलग हाईटेक लैब हैं। एक विशाल लाइब्रेरी है। इसमें डिजिटल संसाधनों और ई-बुक्स की सुविधा रहेगी। पूरे स्कूल को सीसीटीवी से लैस किया गया है। मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल- रिफाइनरी के सामने ही 50 बेड का मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल तैयार हो रहा है। इसमें जनरल वार्ड के साथ इमरजेंसी और आईसीयू की सुविधा भी है। औद्योगिक क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की सुविधा भी रहेगी। आधुनिक डिजिटल एक्स-रे, सोनोग्राफी, स्वचालित पैथोलॉजी लैब, ईसीजी, ऑपरेशन थिएटर, ओपीडी, एंबुलेंस सेवा रहेगी।

पाक आतंकी भट्टी का बॉर्डर सिंडिकेट:ऑनलाइन गेम, पैसा और ग्लैमर से युवाओं को बना रहा जासूस

भारत-पाकिस्तान सीमा पर अब घुसपैठ सिर्फ तारों के नीचे से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन के जरिए डिजिटल हो गई है। राजस्थान एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड द्वारा प्रदेश के 20 से ज्यादा शहरों में की गई छापेमारी और बाड़मेर से 20 साल के बशीर की गिरफ्तारी ने एक बेहद खतरनाक नेटवर्क का खुलासा किया है। पाकिस्तानी आतंकी और गैंगस्टर शहजाद भट्टी अब बॉर्डर के युवाओं को स्लीपर सेल की तरह इस्तेमाल करने की साजिश रच रहा है। युवक ने गुजरात से लौटकर गांव को बनाया केंद्र एटीएस के इनपुट पर रामसर पुलिस द्वारा गागरिया गांव से गिरफ्तार किया गया बशीर (20) पुत्र आमदन खान इस नेटवर्क का अहम मोहरा था। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि बशीर पहले गुजरात में मजदूरी करता था। कुछ महीने पहले ही वह गांव लौटा था और काम-काज छोड़कर लगातार मोबाइल पर सक्रिय रहता था। गागरिया गांव रणनीतिक और भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में आता है। एजेंसियां अब यह जांच कर रही है कि गुजरात में रहने के दौरान वह किसके संपर्क में आया और अब तक उसने कौन-सी खुफिया जानकारियां पाकिस्तान भेजी हैं। गागरिया निवासी बशीर के खिलाफ रामसर थाने में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है। प्रारंभिक जांच में उसका संबंध पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी से सामने आया है। एटीएस और खुफिया एजेंसियां संयुक्त रूप से गहन पूछताछ कर रही हैं, जल्द ही नेटवर्क से जुड़े अन्य खुलासे होंगे। -चूनाराम जाट, एसपी, बाड़मेर।

झुंझुनूं सतत विकास के लक्ष्य में राजस्थान में टॉपर:जयपुर 10वें से फिसल कर 22वें नंबर पर आया, सेहत भी कमजोर, पर अमीरी में आगे

प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के एसडीजी इंडेक्स-2025 में विकास की कई विरोधाभासी तस्वीरें सामने आई हैं। प्रदेश की राजधानी जयपुर में जहां गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों का अनुपात सबसे कम, 6.15 प्रतिशत है, वहीं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की रैंकिंग में यह 10वें स्थान से फिसलकर 22वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, आदिवासी बाहुल्य उदयपुर में हर तीसरा परिवार अब भी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य और टीकाकरण जैसे सामाजिक संकेतकों में उदयपुर कई विकसित जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का औसत एसडीजी स्कोर 59.11 से बढ़कर 60.80 हो गया है। 100 अंकों में 67.13 अंक हासिल कर झुंझुनूं दूसरे वर्ष भी पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि चित्तौड़गढ़ 65.41 और राजसमंद 65.00 अंकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, जैसलमेर 51.82 अंकों के साथ प्रदेश में सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ और राजसमंद का टॉप-3 में शामिल होना क्षेत्र की मजबूत विकास स्थिति को दर्शाता है।उदयपुर जिले का एसडीजी स्कोर 59.19 रहा और उसे प्रदेश में 17वां स्थान मिला। पिछले वर्ष उदयपुर की रैंकिंग 12वें स्थान पर थी। दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर (57.03), बांसवाड़ा (55.47) और प्रतापगढ़ (57.81) भी राज्य के औसत स्कोर से नीचे रहे।राजस्थान के अधिकांश जिले अभी ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में हैं। केवल झुंझुनूं, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद ही सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में बेहतर प्रगति दर्ज कर पाए हैं। गरीबी : दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी जिलों पर अब भी गरीबी का सबसे बड़ा दबाव
डूंगरपुर में 40.87 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 37 प्रतिशत और उदयपुर में 33.83 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं। प्रतापगढ़ में यह आंकड़ा 28.55 प्रतिशत है, जबकि राज्य का औसत 15.92 प्रतिशत है। यानी प्रदेश में गरीबी का सबसे बड़ा दबाव अब भी दक्षिणी आदिवासी जिलों पर है। स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बावजूद यही क्षेत्र समग्र विकास की दौड़ में पीछे हैं। जानिए एसडीजी इंडेक्स के बारे में
एसडीजी इंडेक्स भारत में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति को मापने वाला सूचकांक है, जिसे नीति आयोग जारी करता है। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के आधार पर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करना है। उदयपुर में हर तीसरा परिवार अब भी गरीब – मेवाड़ से चित्तौड़गढ़ और राजसमंद दूसरे और तीसरे पर, उदयपुर 17वें स्थान पर सेहत : जयपुर की सेहत सबसे खराब, उदयपुर की हालत भी ठीक नहीं, बारां सबसे स्वस्थ
जयपुर स्वास्थ्य और खुशहाली में मात्र 37.60 अंकों के साथ अंतिम स्थान पर रहा। उदयपुर भी 42.22 स्कोर के साथ फिसड्‌डी है। 63.54 अंकों के साथ बारां की सेहत सबसे अच्छी है। सिकर, कोटा, भरतपुर, अजमेर और अलवर के लोग स्वास्थ्य और खुशहाली में सबसे पीछे हैं। जेंडर इक्वालिटी – प्रदेश लैंगिक समानता में फेल प्रदेश, झुंझुनूं को छोड़ सभी जगह हालात खराब
महिला सशक्तिकरण-लैंगिक समानता में प्रदेश की स्थिति खराब है। इस लक्ष्य में राज्य का औसत स्कोर केवल 39.60 है। झुंझुनूं (52.88 इंडेक्स स्कोर) को छोड़कर बाकी सभी अति-पिछड़ी श्रेणी में हैं। महिलाओं के खिलाफ सबसे कम अपराध दर पाली (18.08 प्रति लाख) में दर्ज की गई। स्कूलों में बिजली – प्रदेश में 90 से बढ़कर 96% हुआ कवरेज, बारां 70 से बढ़कर 90 पर पहुंचा
प्रदेश में स्कूलों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है। बिजली कनेक्शन वाले स्कूलों का प्रतिशत वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में 90.01% से बढ़कर 96.18 हो गया है। सबसे बड़ा सुधार बारां जिले में दर्ज किया गया है। यहां बिजली सुविधा वाले स्कूलों का अनुपात 70.80 प्रतिशत से बढ़कर सीधा 90.20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बड़ा बदलाव -विकास यात्रा अब शहरी और ग्रामीण अंतर से आगे रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि राजस्थान की विकास यात्रा अब केवल शहरी-ग्रामीण अंतर की कहानी नहीं रह गई है। जयपुर जैसा समृद्ध जिला विकास सूचकांक में अपेक्षा से पीछे है, जबकि उदयपुर जैसा जिला गरीबी से जूझते हुए भी स्वास्थ्य और सामाजिक संकेतकों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विकास की रफ्तार बढ़ाने से ज्यादा विकास की खाई को पाटने की है।

सोलर से मिले रुपए के बंटवारे का विवाद:3 साल से अलग रह रहे थे दोनों भाई, पैतृक मकान से परिजनों से मिलने पहुंचे युवक पर बड़े भाई ने बैट से किया हमला

जिले के शिव थाना क्षेत्र के पूषड गांव में पैसों के लेनदेन के विवाद की वजह से हत्या का मामला सामने आया है। यहां एक बड़े भाई ने आवेश में आकर अपने ही सगे छोटे भाई पर क्रिकेट बैट से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मृतक के पिता की रिपोर्ट पर आरोपी बड़े भाई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। शिव थानाधिकारी डॉ. मनोहर विश्नोई ने बताया कि पूषड गांव निवासी तोगाराम मेघवाल के दो बेटे जेठाराम और सुरेश कुमार (27) पिछले करीब 3 साल से अलग रह रहे थे। छोटा भाई सुरेश कुमार गांव में स्थित अपने पैतृक मकान में रहता था। बड़ा भाई जेठाराम उससे करीब 5 किमी. दूर गांव की सरहद पर स्थित खेत में बने मकान में अपने परिवार और पिता तोगाराम के साथ रहता था। दोनों भाई खेती करते थे। गुरुवार देर रात दोनों में विवाद हुआ। छोटा भाई पत्नी के साथ पुराने घर में पिता से मिलने गया था, वहीं पर हुआ विवाद हत्या की मुख्य वजह जमीन के बदले मिले रुपए थे। दरअसल, पिता तोगाराम मेघवाल की जमीन सोलर कंपनी को सोलर प्लेटें लगाने के लिए दी गई थी। इसके एवज में कंपनी ने परिवार को 4 लाख रुपए दिए थे। यह पूरी रकम बड़े भाई जेठाराम ने अपने पास रख ली। छोटे भाई सुरेश कुमार को एक भी रुपया नहीं दिया। इसी राशि को लेकर दोनों भाइयों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। गुरुवार रात सुरेश अपनी पत्नी के साथ पिता के पास पहुंचा। उसने रुपए नहीं देने की शिकायत की। गुस्साए जेठाराम ने बैट से हमला कर सुरेश की जान ले ली। उसने घर में रखा क्रिकेट बैट उठाया। सुरेश के सिर पर एक के बाद एक कई ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमला इतना गंभीर था कि सुरेश के सिर पर गहरी चोटें आईं। अत्यधिक खून बहने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता व पत्नी के सामने हत्या घटना के समय घर पर दोनों भाइयों के पिता तोगाराम, जेठाराम, और सुरेश की पत्नी भी मौजूद थी। सभी ने बीच-बचाव कर विवाद को शांत कराने का पूरा प्रयास किया। जेठाराम के सिर पर खून सवार था। उसने किसी की एक न सुनी। अपने से करीब 10 साल छोटे भाई की जान ले ली। पिता ने दर्ज कराया बड़े बेटे पर हत्या का केस घटना की जानकारी मिलने पर शिव थानाधिकारी मनोहर विश्नोई पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर स्थानीय अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। वहां मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमॉर्टम करवाया। इसके बाद परिजनों को सौंप दिया गया। थानाधिकारी ने बताया कि मृतक के पिता तोगाराम ने शुक्रवार को अपने ही बड़े बेटे जेठाराम के खिलाफ रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में रुपयों के लेनदेन के विवाद में छोटे बेटे सुरेश की हत्या का आरोप लगाया है।