झुंझुनूं सतत विकास के लक्ष्य में राजस्थान में टॉपर:जयपुर 10वें से फिसल कर 22वें नंबर पर आया, सेहत भी कमजोर, पर अमीरी में आगे

प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के एसडीजी इंडेक्स-2025 में विकास की कई विरोधाभासी तस्वीरें सामने आई हैं। प्रदेश की राजधानी जयपुर में जहां गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों का अनुपात सबसे कम, 6.15 प्रतिशत है, वहीं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की रैंकिंग में यह 10वें स्थान से फिसलकर 22वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, आदिवासी बाहुल्य उदयपुर में हर तीसरा परिवार अब भी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य और टीकाकरण जैसे सामाजिक संकेतकों में उदयपुर कई विकसित जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का औसत एसडीजी स्कोर 59.11 से बढ़कर 60.80 हो गया है। 100 अंकों में 67.13 अंक हासिल कर झुंझुनूं दूसरे वर्ष भी पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि चित्तौड़गढ़ 65.41 और राजसमंद 65.00 अंकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, जैसलमेर 51.82 अंकों के साथ प्रदेश में सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ और राजसमंद का टॉप-3 में शामिल होना क्षेत्र की मजबूत विकास स्थिति को दर्शाता है।उदयपुर जिले का एसडीजी स्कोर 59.19 रहा और उसे प्रदेश में 17वां स्थान मिला। पिछले वर्ष उदयपुर की रैंकिंग 12वें स्थान पर थी। दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर (57.03), बांसवाड़ा (55.47) और प्रतापगढ़ (57.81) भी राज्य के औसत स्कोर से नीचे रहे।राजस्थान के अधिकांश जिले अभी ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में हैं। केवल झुंझुनूं, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद ही सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में बेहतर प्रगति दर्ज कर पाए हैं। गरीबी : दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी जिलों पर अब भी गरीबी का सबसे बड़ा दबाव
डूंगरपुर में 40.87 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 37 प्रतिशत और उदयपुर में 33.83 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं। प्रतापगढ़ में यह आंकड़ा 28.55 प्रतिशत है, जबकि राज्य का औसत 15.92 प्रतिशत है। यानी प्रदेश में गरीबी का सबसे बड़ा दबाव अब भी दक्षिणी आदिवासी जिलों पर है। स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बावजूद यही क्षेत्र समग्र विकास की दौड़ में पीछे हैं। जानिए एसडीजी इंडेक्स के बारे में
एसडीजी इंडेक्स भारत में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति को मापने वाला सूचकांक है, जिसे नीति आयोग जारी करता है। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के आधार पर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करना है। उदयपुर में हर तीसरा परिवार अब भी गरीब – मेवाड़ से चित्तौड़गढ़ और राजसमंद दूसरे और तीसरे पर, उदयपुर 17वें स्थान पर सेहत : जयपुर की सेहत सबसे खराब, उदयपुर की हालत भी ठीक नहीं, बारां सबसे स्वस्थ
जयपुर स्वास्थ्य और खुशहाली में मात्र 37.60 अंकों के साथ अंतिम स्थान पर रहा। उदयपुर भी 42.22 स्कोर के साथ फिसड्‌डी है। 63.54 अंकों के साथ बारां की सेहत सबसे अच्छी है। सिकर, कोटा, भरतपुर, अजमेर और अलवर के लोग स्वास्थ्य और खुशहाली में सबसे पीछे हैं। जेंडर इक्वालिटी – प्रदेश लैंगिक समानता में फेल प्रदेश, झुंझुनूं को छोड़ सभी जगह हालात खराब
महिला सशक्तिकरण-लैंगिक समानता में प्रदेश की स्थिति खराब है। इस लक्ष्य में राज्य का औसत स्कोर केवल 39.60 है। झुंझुनूं (52.88 इंडेक्स स्कोर) को छोड़कर बाकी सभी अति-पिछड़ी श्रेणी में हैं। महिलाओं के खिलाफ सबसे कम अपराध दर पाली (18.08 प्रति लाख) में दर्ज की गई। स्कूलों में बिजली – प्रदेश में 90 से बढ़कर 96% हुआ कवरेज, बारां 70 से बढ़कर 90 पर पहुंचा
प्रदेश में स्कूलों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है। बिजली कनेक्शन वाले स्कूलों का प्रतिशत वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में 90.01% से बढ़कर 96.18 हो गया है। सबसे बड़ा सुधार बारां जिले में दर्ज किया गया है। यहां बिजली सुविधा वाले स्कूलों का अनुपात 70.80 प्रतिशत से बढ़कर सीधा 90.20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बड़ा बदलाव -विकास यात्रा अब शहरी और ग्रामीण अंतर से आगे रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि राजस्थान की विकास यात्रा अब केवल शहरी-ग्रामीण अंतर की कहानी नहीं रह गई है। जयपुर जैसा समृद्ध जिला विकास सूचकांक में अपेक्षा से पीछे है, जबकि उदयपुर जैसा जिला गरीबी से जूझते हुए भी स्वास्थ्य और सामाजिक संकेतकों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विकास की रफ्तार बढ़ाने से ज्यादा विकास की खाई को पाटने की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *