राजस्थान के सरिस्का में दिखा सफेद मोर:सोने की तरह चमकता 'गोल्डन सांभर'; प्रदेश में पहली बार देखे गए

राजस्थान में बाघ-बाघिन का घर इन दिनों नए और अनोखे मेहमानों से गुलजार है। अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार दो बेहद दुर्लभ जीव देखे गए हैं। इनमें से एक ‘सफेद रंग का मोर’ है, तो दूसरा धूप में सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’। इससे पहले प्रदेश के किसी भी फॉरेस्ट में सफेद मोर नहीं देखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि कभी (18 साल पहले) पूरी तरह ‘टाइगर विहीन’ हो चुके सरिस्का में बाघों का कुनबा भी बढ़कर अब 56 हो गया है। इस अभूतपूर्व सफलता और तेजी से बढ़ती संख्या पर रिसर्च करने के लिए देश भर के वन विभाग के अधिकारी पिछले कुछ दिनों से अलवर में डेरा डाले हुए हैं। नए मेहमानों को PHOTOS में देखिए…. टाइग्रेस ST-19 के बफर जोन में दिखा ‘सफेद मोर’ यह दूधिया सफेद रंग का मोर सरिस्का के बफर जोन (बाला किला और गंगोडी इलाके के आस-पास) में जून के पहले सप्ताह में देखा गया है। सबसे पहले जंगल में ट्रैकिंग करने वाले वनकर्मियों ने इसे देखा था, लेकिन तब फोटो नहीं ली जा सकी। बाद में ओडिशा के एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने इसकी खूबसूरत तस्वीरें कैमरे में कैद कीं। अब पर्यटकों को इस जोन में बाघिन ST-19 और अन्य 12 बाघों के साथ इस दुर्लभ मोर के भी दीदार होंगे। धूप में चमकता ‘गोल्डन सांभर’ दूसरा अनोखा मेहमान है ‘गोल्डन सांभर’। वाइल्डलाइफ एक्सपट्‌र्स के मुताबिक, इसे सामने से देखने पर धूप में इसका शरीर बिल्कुल सोने की तरह चमकता हुआ दिखाई देता है। टाइगर एक्सपर्ट निरंजन सिंह कहते हैं- सफेद मोर और गोल्डन सांभर का दिखना बेहद खास है। इनके रंग में यह दुर्लभ बदलाव पिगमेंटेशन या हार्मोन्स में गड़बड़ी (जीनेटिक म्यूटेशन) के कारण हो सकता है। अब बाघों की बात… पहले ये PHOTOS देखिए… सरिस्का ने रणथंभौर को पछाड़ा सरिस्का के जंगल ने ‘कम समय में ज्यादा शावकों’ को जन्म देने का एक अनोखा नेशनल रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले 3 साल के भीतर यहां 4 अलग-अलग बाघिनों ने एक बार में 4-4 शावकों को जन्म दिया है। करीब 90 बाघों वाले सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं है। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट हिमांशु शर्मा ने बताया कि सरिस्का की 0 से 56 बाघों तक की यात्रा रोमांचकारी रही है। पिछले 2 साल में ही यहां 25 शावकों का जन्म हुआ है। बेहतरीन हैबिटेट का असर, जल्द ही गूंजेगी 100 टाइगर की दहाड़ वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट निरंजन सिंह कहते हैं- सरिस्का का जंगल सबसे अलग और विशेष है। यहां का घना जंगल और बेहतरीन हैबिटेट (प्राकृतिक आवास) ही मुख्य वजह है, जिससे बाघिनें एक बार में 4-4 शावक देकर नया इतिहास रच रही हैं। अब सोने सा चमकता सांभर और सफेद मोर देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है। 60 के पार जाएगी संख्या वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2026 के भीतर ही सरिस्का में बाघों का आंकड़ा 60 के पार निकल जाएगा। जिस तेजी से कुनबा बढ़ रहा है, आने वाले कुछ ही सालों में सरिस्का के घने जंगलों में 100 से ज्यादा टाइगर दहाड़ते नजर आएंगे। सरिस्का में 3 साल में एक साथ चार-चार शावकों ने जन्म लिया रणथम्भौर में 6 साल में 3 बाघिनों ने 4-4 शावक को जन्म दिया पढ़िए- क्या बोले एक्सपट्‌र्स… —— यह खबर भी पढ़िए… जयपुर- टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ा लेपर्ड, कुत्ते का शिकार,VIDEO:12 सेकेंड में मारा, कुछ देर डॉग के पास बैठा, फिर घसीटकर ले गया जयपुर की झालाना सेंचुरी में लेपर्ड ‘बहादुर’ ने अचानक तीन टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ लगा दी। इससे कुछ देरी के लिए जिप्सी में सवार 10 से ज्यादा पर्यटक डर गए। हालांकि, लेपर्ड के निशाने पर एक जिप्सी के नीचे बैठा डॉग था। पढ़ें पूरी खबर…

उदयपुर में कई जगह बारिश; कल आ सकता मानसून:गिर्वा से लेकर ऋषभदेव, छाणी और बावलवाड़ा में अच्छी बारिश

उदयपुर शहर में गुरुवार दोपहर को हिरणमगरी सहित अन्य इलाकों में हल्की बारिश हुई। वहीं कई इलाकों में सूखे की स्थिति रही। इससे पहले सुबह से शहर में बादल छाए रहे। इधर, राजस्थान के कई जिलों में मानसून की एंट्री हो गई है। उदयपुर में शुक्रवार को मानसून की एंट्री होने की संभावना मौसम एक्सपर्ट ने जताई है। हवा के साथ हुई तेज बारिश शहर से सटे गिर्वा क्षेत्र के तीतरड़ी, ढोल की पाटी, डाकन कोटड़ा, बिलिया और एकलिंगपुरा सहित आसपास इलाकों में दोपहर बाद बारिश हुई। बारिश शुरू होते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया और तेज गर्मी से बेहाल लोगों ने राहत की सांस ली। उदयपुर जिले के ऋषभदेव कस्बे में दोपहर एक से डेढ़ बजे तक तेज बारिश हुई। पिछले दो दिनों से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश से राहत मिली। ऋषभदेव के आसपास के गांवों में भी बारिश हुई। उदयपुर जिले के खेरवाड़ा के पास छाणी गांव में भी दोपहर में अच्छी बारिश हुई। बावलवाड़ा गांव में दोपहर 1.45 से 2.15 तक आधे बारिश हुई। अधिकतम तापमान गिरा उदयपुर में गुरुवार को मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार शहर का अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक दिन पहले बुधवार को अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस था। इस तरह अधिकतम तापमान में 1.9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। अब जानिए एक्सपर्ट ने क्या कहा… मौसम एक्सपर्ट डॉ. आर.एस. देवड़ा ने बताया- उदयपुर में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की अरब सागरीय शाखा के कारण बादल छाए हुए हैं और शुक्रवार से मानसूनी वर्षा शुरू होने की संभावना है। जिले में खंड वर्षा की संभावना है। मानसून के पहुंचने के बाद लगातार सभी जगह बारिश होगी।
इनपुट : शैलेंद्र जैन, प्रतीक्षा गांधी, चेतन व्यास

वायरल गर्ल के पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:कोर्ट ने कहा- सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका, राहत नहीं दे सकते; ट्रायल में तय होगी उम्र

खरगोन में मंडलेश्वर के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने वायरल गर्ल के पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा- फरार होने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। मामला वायरल गर्ल के पिता द्वारा 25 मार्च को दर्ज कराई गई उस FIR से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले गया था। कुछ समय तक साथ रखने के बाद आरोपी ने बहला-फुसलाकर उससे शादी कर ली। बुधवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा- वायरल गर्ल के माता-पिता की ओर से पेश दस्तावेजों के अनुसार, शादी के समय उसकी उम्र 18 साल से कम थी। वहीं, बचाव पक्ष ने दावा किया कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने आपसी सहमति से विवाह किया था। उसने खुद को बालिग बताया है। माता-पिता का आरोप झूठा है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए। जांच की स्थिति को देखते हुए जमानत का आधार नहीं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा- वायरल गर्ल की वास्तविक उम्र का निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। अदालत ने माना कि फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज, केस डायरी और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी फरार है। उसे अग्रिम जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। केरल हाईकोर्ट ने दे रखी है ट्रांजिट बेल इससे पहले 3 जून को केरल हाईकोर्ट ने वायरल गर्ल को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल दे दी थी। हाईकोर्ट के जज कौसर एडप्पागथ ने कहा था- युवती के जन्म प्रमाणपत्र में उसके पैदा होने की तारीख 1 जनवरी 2008 दर्ज है, इसलिए वह बालिग है। इस पर मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दावा किया कि ये प्रमाणपत्र फर्जी है। असलियत में वायरल गर्ल नाबालिग है। जज ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा- जन्म प्रमाणपत्र के अतिरिक्त आवेदक क्रमांक-2 (वायरल गर्ल) का वोटर आईडी और बैंक पासबुक भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। जिनसे यह स्पष्ट होता है कि वह बालिग है। वह स्वयं भी बालिग होने का दावा कर रही है। वायरल गर्ल ने शपथपत्र भी दिया है कि उसने आवेदक क्रमांक-1 के साथ विवाह किया है। अदालत ने वायरल गर्ल के पति की जमानत याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि वह 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है। इस अवधि के समाप्त होने तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। दलील- युवती हिंदू और युवक मुसलमान, मंदिर में शादी जायज नहीं वायरल गर्ल और उसके पति ने अपनी संयुक्त याचिका में दावा किया था कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो अलग-अलग धर्मों से होने के कारण कट्टरपंथी तत्वों द्वारा उनकी ऑनर किलिंग की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि गिरफ्तारी से संरक्षण के आदेश के बिना वे न तो यात्रा कर सकते हैं और न ही मध्य प्रदेश में जमानत याचिका दायर करने के लिए किसी वकील से संपर्क कर सकते हैं। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया- युवती हिंदू है और उसका पति मुस्लिम, इसलिए मंदिर में हुआ उनका विवाह वैध नहीं है। इस आधार पर स्थानीय मैरिज रजिस्ट्रार को उन्हें विवाह प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी दोनों की मुलाकात दरअसल, वायरल गर्ल की मुलाकात केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान युवक से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। मामला उस समय विवादों में आया, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग का दावा था कि शादी के समय वायरल गर्ल की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने वायरल गर्ल के पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। डायरेक्टर के खिलाफ केरल में दर्ज कराई थी FIR वायरल गर्ल ने 29 अप्रैल 2026 को डायरेक्टर सनोज मिश्रा और तीन अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में FIR कराई थी। FIR के बाद केरल की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जब वह नाबालिग थी, तब डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। मिश्रा ने उसे एक्टिंग के मौके देने का झांसा देकर उसका शोषण किया। आरोपियों में केरल के विहिप नेता और वकील अनिल विलायल भी शामिल हैं। पीड़िता ने उन पर सोशल मीडिया पर बदनामी करने का आरोप लगाया है। दो अन्य आरोपियों के नामों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। फिल्म डायरेक्टर बोले- आरोप सोची-समझी साजिश उधर, फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इन आरोपों को सोची-समझी साजिश बताया है। दावा किया कि उन्हें ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनकी फिल्म की अभिनेत्री को बहला-फुसलाकर केरल पहुंचाया गया। नाबालिग लड़की से फर्जी कागजों के आधार पर शादी की गई। अब मामले में आवाज उठाने पर उन्हें ही झूठे केस में फंसाया जा रहा है। जन्मतिथि के दो अलग-अलग प्रमाण पत्र मिले थे वायरल गर्ल की शादी शुरू से विवाद में है। पहले इसे ‘लव जिहाद’ बताया गया, फिर परिवार ने नाबालिग होने का दावा किया। जांच में महेश्वर नगर परिषद के जन्म प्रमाण पत्र में विसंगतियां मिली थीं। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उसका जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। 11 मार्च 2026 को शादी के समय उसकी उम्र 16 साल, 2 महीने और 12 दिन थी। इसके बाद प्रशासन ने 1 जनवरी 2008 वाले पुराने प्रमाण पत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए थे। परिजन ने कहा था- बहला-फुसलाकर शादी की वायरल गर्ल के माता-पिता की शिकायत है कि युवक ने उसे बहला-फुसलाकर शादी के लिए राजी किया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में सामने आया कि शादी के समय वह नाबालिग थी। इसके बाद पति पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। इस मामले में बयान के लिए उसे पुलिस के सामने पेश होना था। वायरल गर्ल ने माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे वायरल गर्ल ने केरल के थंपानूर पुलिस स्टेशन में बयान देकर माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि परिजन चाचा के लड़के से शादी का दबाव बना रहे थे, जबकि वह उसे भाई मानती है। मानसिक तनाव के दौरान युवक ने उसका साथ दिया। नजदीकियां प्रेम में बदलीं तो दोनों ने केरल के एक मंदिर में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में शादी कर ली।

केंद्रीय मंत्री बोले- लोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए एआई:जितेंद्र सिंह ने कहा- इस तकनीक से लोगों को हर सेक्टर में मिल रही मदद

जयपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। 29वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह कहा। इससे पहले ‘AI इन पुलिसिंग’ सेशन में पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, डेटा सिक्योरिटी और नई टेक्नोलॉजी की चुनौतियों पर चर्चा हुई। एक्सपर्ट्स ने बताया कि AI से इन्वेस्टिगेशन, लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम एनालिसिस और पब्लिक सर्विस बेहतर हो सकती है, लेकिन संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजस्थान कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी और डीआईजी (BPRD) डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने कहा कि पुलिस विभाग ने AI को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित और जवाबदेह होना चाहिए, क्योंकि पुलिस के पास सबसे संवेदनशील डेटा होता है। क्रिमिनल डेटा प्राइवेट कंपनियों के पास जाना खतरनाक डॉ. कपूर ने कहा कि आज पुलिस के पास ऐसा कोई अपना AI प्लेटफॉर्म नहीं है, इसलिए कई बार बाहरी कंपनियों के टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “हम पुलिस का डेटा, क्रिमिनल रिकॉर्ड और इंटेलिजेंस से जुड़ी जानकारी प्राइवेट कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा खतरा है। इस डेटा पर प्राइवेसी के कानून लागू होते हैं और इसका लीक होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जोखिम बन सकता है।” पुलिस को अपने AI टूल्स खुद बनाने होंगे उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध AI टूल्स डेटा कहां से लेते हैं, इसकी पूरी जानकारी किसी के पास नहीं होती। डेटा प्रोटेक्शन के नियम पूरी तरह लागू होने के बाद ऐसे कई टूल्स बंद भी हो सकते हैं। इसलिए पुलिस को अपनी जरूरत के हिसाब से इन-हाउस AI टूल्स तैयार करने होंगे और कंसल्टेंट्स पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। डेटा सिक्योरिटी भी पुलिस की जिम्मेदारी होगी डॉ. कपूर ने कहा कि आने वाले समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल लोगों की जान-माल की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। अगर किसी थाने से क्रिमिनल डेटा लीक होता है तो उसकी जवाबदेही भी पुलिस की होगी। इसलिए डेटा सिक्योरिटी को भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाना होगा। दिल्ली पुलिस का ‘ई-चिट्ठा’ बना उदाहरण उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस में ‘ई-चिट्ठा’ सॉफ्टवेयर के जरिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी ऑटोमैटिक तरीके से अलॉट होती है। इससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी, तेज और प्रभावी बना है। AI कभी पुलिस की जगह नहीं ले सकता डॉ. कपूर ने कहा कि AI से सीए, वकील और हेल्थ सेक्टर जैसे कई प्रोफेशन प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन पुलिसिंग में ऐसा संभव नहीं है। थाना और पुलिसकर्मी हमेशा पुलिसिंग की सबसे अहम यूनिट रहेंगे। AI केवल उनकी एफिशिएंसी बढ़ाने का काम करेगा, उनकी जगह नहीं ले सकता। ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी की समझ जरूरी उन्होंने कहा कि AI का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए पुलिसकर्मियों को नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग देना जरूरी है। भविष्य की स्मार्ट पुलिसिंग के लिए टेक्नोलॉजी की समझ और डेटा सिक्योरिटी दोनों पर बराबर फोकस करना होगा। एआई से आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा शासन केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। प्रधानमंत्री के “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” के विजन के तहत पिछले 10 साल में शुरू की गई हर डिजिटल पहल का उद्देश्य लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना रहा है। तकनीक ऐसी होनी चाहिए, जो प्रक्रियाओं को आसान बनाए, अनावश्यक औपचारिकताएं खत्म करे और लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करे। डिजिटल गवर्नेंस अब नए दौर में पहुंचा डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- जयपुर में दो दिनों तक चली नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस ने दिखाया कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा अब सिर्फ सेवाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है। अब देश एआई, डेटा आधारित निर्णय, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रशासन का नया मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार तभी सफल माने जाएंगे, जब उनका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। इसी दिशा में सीपीग्राम्स (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली) जैसी व्यवस्था ने शिकायतों के निस्तारण का समय कम किया है और देशभर में लोगों की पहुंच को आसान बनाया है। दो दिवसीय सम्मेलन में 80 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 28 राज्यों तथा 8 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी प्रदर्शनों और अनुभव साझा करने के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस के सफल मॉडलों पर भी चर्चा की जा रही है।

15 साल बाद पूरा होगा राजस्थान में रिफाइनरी का सपना:2 बार शिलान्यास, 2 बार उद्घाटन की तारीखें, सियासी हाईवोल्टेज ड्रामे का भी गवाह बनी

डेढ़ दशक का लंबा इंतजार, दो बार शिलान्यास, दो बार उद्घाटन की तारीखें और जमीन के खेल से लेकर अपनों की बगावत तक… राजस्थान के रेगिस्तान में देश की पहली BS-6 मानक वाली हाईटेक ‘HPPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड’ (HRRL) बनकर तैयार है। आगामी 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे। माना जा रहा है कि बालोतरा के पचपदरा में बनी इस रिफाइनरी की वजह से पूरे राजस्थान की तस्वीर बदल जाएगी। 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) की क्षमता वाली यह रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। आइए जानते हैं 2012 से 2026 तक के इस सफर की पूरी कहानी… आग लगने के कारण टल गया था PM का दौरा देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी के लिए राजस्थान की सियासत में ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ हुआ था। 2012 से 2026 तक का सफर इतना आसान नहीं था। इस प्रोजेक्ट ने न केवल दो बार शिलान्यास देखा, बल्कि जमीन के फेर में अपनों को अपनों के खिलाफ लड़ते भी देखा। संयोग से दो बार उद्घाटन की तारीख की घोषणा भी हुई। 21 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले 20 अप्रैल को सीडीयू-वीडीयू यूनिट में लीकेज होने से आग लग गई। इससे पीएम का उद्घाटन दौरा स्थगित हो गया था। लीलाना से पचपदरा कैसे पहुंची रिफाइनरी शुरुआत में रिफाइनरी बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) के बायतु के लीलाना गांव में लगनी तय थी। जैसे ही घोषणा हुई, राजनीतिक रसूख वाले लोगों और भूमाफिया ने वहां हजारों बीघा जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। जब सरकार जमीन अवाप्त (कब्जा लेने) करने पहुंची, तो किसानों ने हाथ खींच लिए। कुछ ने 1 बीघा जमीन के बदले 1 करोड़ रुपए की मांग रख दी। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने पचपदरा का रुख किया, जहां सरकारी जमीन उपलब्ध थी। रिफाइनरी शिफ्ट होते ही लीलाना में करोड़ों के ख्वाब देख रहे भूमाफिया और नेता अर्श से फर्श पर आ गए। कर्नल सोनाराम का विद्रोह बाड़मेर के राजनीतिक मामलों के जानकार शिव प्रकाश सोनी बताते हैं- रिफाइनरी शिफ्ट होने पर राजनीति में भूचाल आ गया था। बायतु के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी (स्वर्गीय) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अशोक गहलोत काकाणी में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स लगाकर अपने गृह जिले जोधपुर को फायदा देना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था- जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा। उस समय राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी इस्तीफा तक दे दिया था। देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी यह रिफाइनरी HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है। 15 साल के लंबे इंतजार और ₹42,229 करोड़ की अतिरिक्त लागत (शुरुआती लागत से तुलना) के बाद अब यह रेगिस्तान की तस्वीर बदलने को तैयार है। पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 है। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, निम्न गुणवत्ता (लो क्वालिटी) वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण देते हुए इस रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। इसका दिमाग यानी कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का सहारा लिया गया है। इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के तकनीशिय ने पचपदरा की तपती धूप में पसीना बहाया है। खास हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई कच्चे तेल की प्रकृति वैक्सी (मोम जैसी) होती है। इसे पाइपलाइन में जमने से रोकने के लिए मुंद्रा (गुजरात) से पचपदरा तक एक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें जगह-जगह हीटिंग स्टेशन, थर्मल इंसुलेशन लगाया गया है। इससे तेल का तापमान बना रहेगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग काम कर रहे हैं। इंजीनियर्स इंडिया इसकी कमान संभाल रही है। लमस टेक्नोलॉजी, यूओपी, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी ग्लोबल कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक प्रदान की है। लाखों टन स्ट्रक्चरल स्टील और विशेष एलॉय स्टील से स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। हजारों किलोमीटर की केबलिंग और मोटरों में कॉपर का अधिक उपयोग किया गया है, जिससे वायरिंग फ्रिक्वेंसी मजबूत रहे। रिफाइनरी शुरू होते ही राजस्थान भी मजबूती से आर्थिक क्षेत्र में उभरेगा। रिफाइनरी से प्रोडक्शन शुरू होने के बाद राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। वह उसे प्रोसेस कर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट (जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलिमर) बनाने वाला हब बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक, केमिकल उद्योगों की बाढ़ आएगी। —- ये खबरें भी पढ़िए… 1- राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग, कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। पढ़ें पूरी खबर… 2- राजस्थान की रिफाइनरी से देश बनेगा एनर्जी सुपरपावर; एक्सपर्ट बोले- जामनगर और भटिंडा की तरह बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना अब अंतिम चरण में है। दैनिक भास्कर ने करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से बनी रिफाइनरी की स्टेट्स रिपोर्ट को खंगाला। पढ़ें पूरी खबर…

लोकलसर्किल्स सर्वे- OTT के 80% यूजर्स डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार:61% पुरुष और 39% महिलाएं शामिल; कार्रवाई की मांग

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न (डिजिटल धोखाधड़ी) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लोकलसर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 यानी 80% भारतीय यूजर्स ने माना कि वे ओटीटी एप्स पर ऐसी भ्रामक रणनीतियों का शिकार हुए हैं। सर्वे में देश के 324 जिलों से 1.18 लाख से अधिक लोगों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं। इनमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं। बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार से ओटीटी कंपनियों पर सख्ती और डार्क पैटर्न जैसी भ्रामक प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। अमेजन प्राइम वीडियो पर ऑस्ट्रेलिया में मुकदमा ऑस्ट्रेलिया में अमेजन के खिलाफ प्राइम वीडियो में विज्ञापन शुरू करने और अतिरिक्त फीस लेने पर मुकदमा दर्ज हुआ है। नियामक का आरोप है कि अमेजन ने प्राइम सब्सक्रिप्शन की शर्तों में मनमाने बदलाव किए। 2024 में विज्ञापन शुरू होने पर पहले ही सालाना फीस दे चुके 8.5 लाख से अधिक ग्राहकों को विज्ञापन-मुक्त सेवा के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़े। ऐसा न करने वाले ग्राहकों को कंपनी ने कम सुविधाओं वाली सर्विस दी। भारत में क्या हैं नियम भारत में 30 नवंबर 2023 से डार्क पैटर्न रोकथाम एवं विनियमन दिशानिर्देश लागू हैं। नियम ई-कॉमर्स, एप, ओटीटी, ट्रैवल, फूड डिलीवरी समेत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू होते हैं। दिशानिर्देशों में 13 तरह के डार्क पैटर्न पर रोक लगाई गई है। इनमें फॉल्स अर्जेंसी, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, ड्रिप प्राइसिंग, डिस्गाइज्ड एड, कन्फर्म शेमिंग और बैट एंड स्विच शामिल हैं। यूजर्स खुद को कैसे बचाएं सब्सक्रिप्शन लेने से पहले और बाद में ऑटो-रिन्यूअल बंद करें, भुगतान अलर्ट रखें, ट्रायल की शर्तें पढ़ें और कैंसिलेशन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। डार्क पैटर्न का मकसद यूजर को उसकी मर्जी से नहीं, बल्कि डिजाइन और मनोवैज्ञानिक तरीकों से ऐसा फैसला लेने के लिए प्रेरित करना होता है, जिससे कंपनी को अधिक लाभ हो। —————- ये खबर भी पढ़ें… दावा- सरकार ने वॉट्सएप से यूजरनेम फीचर रोकने को कहा:मेटा को नोटिस, 3 दिन में जवाब मांगा; कहा- टेलीग्राम की तरह गलत इस्तेमाल की आशंका केंद्र सरकार ने भारत में वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं करने को कहा है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के मुताबिक बताया, सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर पर बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे भारत में शुरू न किया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

भाजपा नेता को घेरकर लोहे के सरिए से पीटा:सिर पर गहरा घाव, हाथ में फैक्चर; आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर रात 11 बजे तक धरना

एक भाजपा नेता और वकिल पर बुधवार की देर शाम को कुछ अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोट आई। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें सिरोही रेफर किया गया। घटना के विरोध में सियाणा क्षेत्रपाल व्यापार संघ और राजपुरोहित समाज के लोगों ने सियाणा पुलिस चौकी के बाहर रात 11 बजे तक धरना देकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। दरअसल, वह कचहरी से अपना काम निप्टाकर शाम को अपनी कार से सियाणा गांव जा रहे थे। इसी दौरान गांव के आसपास सामने से आ रही गाड़ी में अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। यह घटना जालोर जिले के बागरा थाना क्षेत्र के सियाणा गांव में बुधवार शाम की है। आकोली और सियाणा के बीच कार रुकवाकर किया हमला बिशनगढ़ थाने के सीआई मोहनलाल गर्ग ने बताया कि सियाणा निवासी भाजपा युवा मोर्चा के जिला प्रवक्ता और वकील नटवर सिंह राजपुरोहित (37) बुधवार को जालोर कचहरी से काम खत्म कर अपनी कार से सियाणा लौट रहे थे। शाम करीब 6 बजे आकोली और सियाणा के बीच आडवाडा गांव के पास सामने से आई एक गाड़ी में सवार अज्ञात लोगों ने उनकी कार रुकवाई और धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले के दौरान आसपास अन्य लोगों को आता देख हमलावर मौके से फरार हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने एम्बुलेंस की मदद से घायल नटवर सिंह राजपुरोहित को सियाणा के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सिरोही रेफर कर दिया गया। जहां उनका इलाज जारी है। सिर में गहरा घाव, हाथ में फ्रैक्चर हमले में नटवर सिंह राजपुरोहित के सिर पर धारदार हथियार से वार किया गया। हमले से उनके सिर में गहरा और लंबा चीरा लग गया, जिससे काफी खून बहा। घाव इतना गंभीर था कि सिर पर कई टांके लगाने पड़े। इसके अलावा उनके एक हाथ में भी फ्रैक्चर हुआ है। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त कार को जब्त कर जांच शुरू कर दी। गिरफ्तारी की मांग को लेकर रात 11 बजे तक धरना घटना की सूचना मिलते ही सियाणा क्षेत्रपाल व्यापार संघ और राजपुरोहित समाज के लोग सियाणा पुलिस चौकी के सामने जमा हो गए। उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। धरना रात करीब 11 बजे तक चला। बाद में बागरा थाना प्रभारी मोहनलाल गर्ग के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर गुरुवार शाम 5 बजे तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। पुलिस कर रही मामले की जांच बागरा थाने के सीआई मोहनलाल गर्ग ने बताया कि रात में हुई मारपीट के मामले में जांच की जा रही और टीमें बनाकर आरोपियों के पकड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं।

जयपुर- टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ा लेपर्ड, कुत्ते का शिकार,VIDEO:12 सेकेंड में मारा, कुछ देर डॉग के पास बैठा, फिर घसीटकर ले गया

जयपुर की झालाना सेंचुरी में लेपर्ड ‘बहादुर’ ने अचानक तीन टूरिस्ट जिप्सी की ओर दौड़ लगा दी। इससे कुछ देरी के लिए जिप्सी में सवार 10 से ज्यादा पर्यटक डर गए। हालांकि, लेपर्ड के निशाने पर एक जिप्सी के नीचे बैठा डॉग था। करीब 12 सेकेंड में बहादुर ने डॉग को गर्दन से दबोचकर मार दिया। घटना बुधवार दोपहर को वॉच टावर के पास बने वाटर पॉइंट की है। शिकार के इस नजारे को एक टूरिस्ट ने कैप्चर किया। सबसे पहले देखिए- ‘बहादुर’ ने कैसे किया शिकार शिकार के पास बैठा, फिर जंगल में ले गया टूरिस्ट रोहित गंगवाल ने बताया शिकार के बाद लेपर्ड कुछ देर तक वहां रुका और फिर उसे लेकर घने जंगल की ओर चला गया। जंगल में शिकार की यह पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि वहां मौजूद पर्यटक केवल उसे देखते ही रह गए। बता दें कि लेपर्ड अवसरवादी शिकारी होता है। ऐसे में अगर उसे आस-पास आसान शिकार दिखाई देता है, तो वह बिना समय गंवाए हमला कर देता है। ऐसे में झालाना लेपर्ड रिजर्व में सामने आए इस घटनाक्रम ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। जयपुर के झालाना में 50 से ज्यादा लेपर्ड जयपुर में पिछले कुछ वक्त से लेपर्ड की संख्या लगातार बढ़ रही है। झालाना, आमागढ़ और नाहरगढ़ सफारी में लगभग 75 लेपर्ड रह रहे हैं। इनमें सबसे अधिक लगभग 50 लेपर्ड झालाना में है। वहीं, 20 से ज्यादा लेपर्ड आमागढ़ के जंगलों में है। जयपुर देश का पहला ऐसा शहर है जहां 2 लेपर्ड सफारी, एक लॉयन सफारी, एक टाइगर और एक एलिफेंट सफारी है। राजस्थान के इन जिलों में हैं लेपर्ड की मौजूदगी राजस्थान में जयपुर, अलवर, सीकर, भरतपुर, करौली, बूंदी, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, पाली, सिरोही, जालोर, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, टोंक और दौसा जिलों में लेपर्ड की मौजूदगी है। इनके अलावा बाड़मेर और जोधपुर में कभी-कभी अजमेर, पाली, राजसमंद, सिरोही के जंगलों से लेपर्ड का मूवमेंट होता है। …. लेपर्ड के शिकार करने की ये खबर भी पढ़िए… होटल की छत पर सो-रहे कर्मचारी के पास पहुंचा लेपर्ड;VIDEO:कुत्ते का शिकार किया माउंट आबू (सिरोही) के एक होटल में लेपर्ड घुस गया। उसने होटल की छत पर सो रहे कर्मचारी (युवक) के पास बंधे कुत्ते का शिकार किया। इसके बाद लेपर्ड युवक की तरफ बढ़ा। पूरी खबर पढ़िए…

जयपुर में बिना जांच बसों में रखे जा रहे पार्सल:यात्रियों की जान से खिलवाड़; दौसा अग्निकांड के बाद ग्राउंड पर भास्कर का रियलिटी चेक

दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार (30 जून) देर रात हुए बस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। भीषण हादसे के बाद यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बस की डिक्की में सिगरेट के कार्टन (बॉक्स) समेत भारी मात्रा में पार्सल ठसाठस भरे हुए थे। इसी दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ की टीम बुधवार को जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंची। वहां जो तस्वीरें और लापरवाही के नजारे सामने आए, उन्होंने यात्री बसों में अवैध रूप से चल रहे पार्सल ढुलाई के खेल को उजागर करने के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर के रियलिटी चेक में सामने आए ये 4 बड़े खुलासे… 1. बसों की डिक्की में धड़ल्ले से लोड हो रहे पार्सल रियलिटी चेक के दौरान कई निजी स्लीपर बसों की डिक्कियों में बड़े पैमाने पर पार्सल लोड होते मिले। कहीं गत्ते के बड़े बॉक्स रखे जा रहे थे, तो कहीं प्लास्टिक की बोरियां और अन्य पैकेट। कई जगह इस व्यावसायिक सामान को बिना किसी सुरक्षात्मक अलगाव के यात्रियों के निजी सामान (लगेज) के साथ ही ठसाठस भरा जा रहा था। पार्सल लोडिंग का यह खेल खुलेआम और लगातार चलता नजर आया। 2. न सामान की जांच, न सुरक्षा की कोई व्यवस्था भास्कर टीम ने देखा कि ज्यादातर बसों में पार्सल रखने से पहले उनकी कोई सुरक्षा जांच नहीं की जा रही थी। सामान किस श्रेणी का है, उसमें कोई ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री तो नहीं है, या उसे सुरक्षित तरीके से पैक किया गया है या नहीं- इसकी पुष्टि करने वाली कोई व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दी। बिना किसी रोक-टोक के पार्सल सीधे बस की डिक्की में सरकाए जा रहे थे। 3. बेखबर यात्री, खतरे में जान बस में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों को यह भनक तक नहीं होती कि जिस डिक्की में उनका कीमती सामान रखा है, उसी में किस तरह के कमर्शियल पार्सल भी ले जाए जा रहे हैं। यदि किसी पार्सल में ज्वलनशील या जोखिमपूर्ण सामग्री हो, तो किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 4. हादसे के बाद फिर खड़े हुए गंभीर सवाल दौसा हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यात्री बसों का इस्तेमाल पार्सल ढुलाई के लिए तय सुरक्षा मानकों के अनुसार हो रहा है? क्या हर पार्सल की उचित जांच और स्क्रीनिंग की जाती है? क्या प्रतिबंधित सामग्री को रोकने का कोई सिस्टम है? और यदि नहीं, तो यह लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा टाइम बम साबित हो सकती है? अधिकारियों से नहीं मिला जवाब मामले में दैनिक भास्कर टीम ने संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया। सबसे पहले राजस्थान के परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने न तो कॉल रिसीव किया और न ही भेजे गए संदेश का कोई जवाब दिया। इसके बाद परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा से भी इस मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया गया। मंत्री ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी लेकर अपना पक्ष देंगे। ———— दौसा हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर की भिड़ंत हो गई। एक्सीडेंट में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने से और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। पढ़ें पूरी खबर

TMC बागी गुट आज चुनाव आयोग से मिलेगा:नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग; 80 में से 58 विधायक ममता से अलग हो चुके

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बागी गुट आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलेगा। 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) को मान्यता देने की मांग करेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा- 22 जून को कोलकाता में प्रतिनिधि बैठक हुई। इसमें नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। चुनाव आयोग (कोलकाता और नई दिल्ली) को इसकी जानकारी भेजी गई। ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हुए 58 विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद 3 जून को TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए थे। इसके अलावा 15 जून को टीएमसी के 20 सांसदों ने भी पार्टी छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया था। बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसी बगावत 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं ———————— ये खबर भी पढ़ें… TMC बागी गुट की 47 पूर्व पार्षदों के साथ बैठक: ममता गुट ने शिकायत दर्ज कराई, कहा- पार्टी के नाम-सिंबल का गलत इस्तेमाल हुआ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने 27 जून को एक हफ्ते में दूसरी बार मीटिंग की थी। इसमें 47 पूर्व पार्षदों शामिल हुए थे। बैठक पूर्वी कोलकाता के टॉपसिया इलाके में हुई। इससे पहले 22 जून को न्यू टाउन में भी बागी गुट की बैठक हुई थी। दोनों बैठकों में TMC का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल किया गया, लेकिन ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाई गई। पूरी खबर पढ़ें…