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चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस छोड़ सकते हैं:संगठन में बदलाव से नाराज; बोले- पार्टी को 45 साल दिए, कुछ लोगों की इनसिक्योरिटी से ऐसा फैसला लिया

पंजाब कांग्रेस को संगठनात्मक फेरबदल के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान की ओर से गठित की गईं चुनावी समितियों से चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद मनीष तिवारी को बाहर रखा गया है। इस पर मनीष तिवारी की नाराजगी खुलकर बाहर आई है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। मनीष तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 45 साल इस पार्टी को दिए हैं, लेकिन आज कुछ लोगों की असुरक्षा की भावना के कारण ऐसा फैसला लिया गया है। उनके इस बयान के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चर्चाएं हैं कि मनीष तिवारी पार्टी छोड़ सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए पंजाब में यह बड़ा झटका होगा। मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा पार्टी की अहम कमेटियों, विशेषकर चुनाव अभियान समिति और घोषणापत्र समिति से बाहर किए जाने के तुरंत बाद मनीष तिवारी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना लिखा, “जब आपकी योग्यता दूसरों की असुरक्षा बन जाती है, तो फैसले सांगठनिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रेरित होते हैं।” तिवारी ने आगे लिखा कि उन्होंने 1981 में NSUI के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। छात्र राजनीति से लेकर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सांसद बनने तक, उन्होंने साढ़े 4 दशकों तक पूरी निष्ठा के साथ सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी की सेवा की है। ऐसे में आज उन्हें दरकिनार किए जाने का फैसला पूरी तरह से चौंकाने वाला है। पोस्ट के अंत में उन्होंने मशहूर अंग्रेजी गीत की पंक्ति लिखी, ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’, जिसका अर्थ है- जो होगा, सो होगा या जो होना है, वह होकर रहेगा। पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी फिर उजागर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनीष तिवारी को पंजाब की चुनावी कमेटियों से दूर रखना पार्टी के भीतर चल रही गहरी गुटबाजी का नतीजा है। पंजाब कांग्रेस के कुछ शीर्ष स्थानीय नेता नहीं चाहते थे कि ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) और आनंदपुर साहिब क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले तिवारी का हस्तक्षेप आगामी चुनाव के टिकट बंटवारे या चुनावी रणनीति में हो। मनीष तिवारी को दरकिनार किए जाने के बाद उनके समर्थकों और पंजाब के कई जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा जा रहा है। विपक्षी दल भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने कांग्रेस को गुटबाजी से घिरी पार्टी कहना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब चुनावों से ठीक पहले मनीष तिवारी जैसे नेता को चुनावी प्रक्रिया से अलग रखना कांग्रेस के लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है। इससे पहले भी नाराजगी जता चुके प्रधान पद के लिए चुनाव को लेकर चल रही चर्चा के बीच मनीष तिवारी ने कहा था- पंजाब कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर या नेतृत्व (प्रधान पद) में बदलाव को लेकर चल रही किसी भी प्रक्रिया या चर्चा में कांग्रेस आलाकमान की ओर से मुझसे कोई सलाह या राय नहीं ली गई है। उन्होंने कहा- मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि यदि आप किसी राज्य में संगठन को बदलना चाहते हैं या चुनाव की तैयारी करना चाहते हैं, तो सांगठनिक बदलाव चुनाव से कम से कम 2 साल पहले ही हो जाने चाहिए, ताकि नए नेतृत्व को जमीन पर काम करने का पर्याप्त समय मिल सके। चुनाव के बिल्कुल मुहाने पर आकर इस तरह के बड़े फैसले करने से केवल अनिश्चितता बढ़ती है। पंजाब कांग्रेस ने संगठन में ये बदलाव किए 1 जुलाई को कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने रहेंगे। जबकि, प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता का दायित्व निभाते रहेंगे। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा लोकसभा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंघला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति और सांसद अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। संगठनात्मक विस्तार के तहत सुखविंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और धर्मवीर गांधी को चुनाव अभियान समिति का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाब कांग्रेस की नई टीम, 2022 जैसे हालात, चन्नी ने मीटिंग बुलाई, रंधावा ने चुप्पी साधी पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किए बदलाव को लेकर कांग्रेस में बगावत के आसार बन गए हैं। पूर्व CM चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा अमरिंदर राजा वड़िंग के प्रधान पद में बदलाव न होने से नाराज हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान से पद मिलने के बाद धन्यवाद तक नहीं कहा। पढ़ें पूरी खबर…

राजस्थान में जासूसी के लिए रफीक करता था फंडिंग:सेना की जानकारी के बदले जैसलमेर भेजे पैसे, ई-मित्र संचालक को हैनीट्रैप से फंसाया था

राजस्थान में पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क का खुलासा औरंगाबाद (महाराष्ट्र) से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। 26 जनवरी को पकड़ा गया जैसलमेर का ई-मित्र संचालक झबरा राम सेना की गोपनीय जानकारियां भेज रहा था। इसके बदले मिलने वाली रकम रफीक फर्जी बैंक खातों के जरिए झबरा राम तक पहुंचाता था। जांच में पता चला कि ई-मित्र संचालक सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क आने के बाद हनीट्रैप में फंस गया था। अब दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पाकिस्तान को कौन-कौन सी संवेदनशील जानकारियां भेजी गईं और इस नेटवर्क में राजस्थान के अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। अब पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. जैसलमेर के गांव में ई-मित्र की दुकान चलाता था झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, झबरा राम मेघवाल (28) पुत्र भाना राम, जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के नेडान गांव का रहने वाला है। गांव में उसकी ई-मित्र की दुकान है। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए काम कर रहा था। उसे 26 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह जेल में बंद है। 2. सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसा, फिर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ के अनुसार, झबरा राम करीब 20 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया। वह हनीट्रैप का शिकार हुआ और धीरे-धीरे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। उसने अपने भारतीय नंबर के व्हाट्सएप का ओटीपी भी पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे दिया, जिसके बाद वे उसका व्हाट्सएप अकाउंट संचालित कर उसी के जरिए संवेदनशील जानकारियां सरहद पार भेजने लगे। 3. सेना की गोपनीय जानकारी भेजता था, रफीक संभालता था पैसों का नेटवर्क खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर्स ने झबरा राम को जैसलमेर और पोकरण जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सेना की गतिविधियों, सैन्य वाहनों की आवाजाही, आर्मी कैंपों और रणनीतिक ठिकानों की तस्वीरें व वीडियो जुटाने का जिम्मा दिया था। हर टास्क पूरा करने के बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। यह रकम सीधे भेजने के बजाय आईएसआई ने औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख का इस्तेमाल किया। रफीक ने अपने और करीबियों के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खुलवा रखे थे। पाकिस्तान से पैसा पहले इन्हीं खातों में आता था और फिर रफीक कमीशन काटकर रकम झबरा राम तक पहुंचाता था। 4. तीन मोबाइल इस्तेमाल किए, एयरफोर्स कर्मचारी से भी जुड़े तार जांच में सामने आया कि झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर और हैंडसेट इस्तेमाल करता था। इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) सुमित कुमार को भी जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार सुमित कुमार और झबरा राम दोनों रफीक चांद शेख के इसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े हुए थे। 5. बैंक खातों की जांच से खुल सकते हैं कई राज, आमने-सामने होगी पूछताछ सीआईडी इंटेलिजेंस अब रफीक के पास मिले फर्जी बैंक खातों और झबरा राम के बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि जासूसी से मिली रकम का इस्तेमाल झबरा राम ने पश्चिमी राजस्थान में अपना नेटवर्क बढ़ाने और कुछ स्थानीय लोगों को लालच देकर जोड़ने में किया हो सकता है। जून 2026 के अंत में औरंगाबाद से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क की जांच में जुटी है। — जासूसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए … पाकिस्तानी हैंडलर्स चला रहे थे जैसलमेर के युवक का वॉट्सऐप:हनीट्रैप में फंसकर ई-मित्र संचालक ने ISI को भेजी खुफिया जानकारी; गिरफ्तार जैसलमेर में जासूसी के शक में पकड़े गए ई-मित्र संचालक का वॉट्सऐप पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स चला रहे थे। पूरी खबर पढ़िए

दतिया विधानसभा उपचुनाव-30 जुलाई को वोटिंग, 3 अगस्त को नतीजे:6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी; राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने से खाली थी सीट

चुनाव आयोग ने दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई, नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 16 जुलाई निर्धारित की गई है। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना की जाएगी। निर्वाचन प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी। निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार अब दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मतदान सभी केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट के माध्यम से कराया जाएगा। विजयवर्गीय बोले- बीजेपी ही जीतेगी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- दतिया उपचुनाव में निश्चित रूप से भाजपा ही जीतेगी। इस सवाल पर कि क्या बीजेपी के उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा ही होंगे, विजयवर्गीय बोले- ये कहना अभी जल्दबाजी होगी। जो उम्मीदवार आएगा, आपको बताया जाएगा। सिंघार बोले- कांग्रेस पर भरोसा जताएगी जनता नेता प्रतिपक्ष उमंघ सिंघार ने कहा- दतिया की जनता ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती को बहुमत देकर विधायक चुना था, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग के षड्यंत्र के कारण उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। अब भाजपा जल्दबाजी में उपचुनाव कराकर इस सीट पर कब्जा करना चाहती है। हमें पूरा विश्वास है कि दतिया की जनता एक बार फिर कांग्रेस पार्टी पर अपना भरोसा जताएगी। जानिए दतिया सीट पर उपचुनाव की नौबत क्यों आई? विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म हुई थी दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट खाली घोषित कर दी। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के तहत की गई। बैंक एफडी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला साल 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया। आरोप था कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई। इसके आधार पर 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेन्द्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। बाद में मामले की जांच हुई और आरोपपत्र दायर किया गया। 1 अप्रैल को कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया। दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही। इसी दिन मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी। साथ ही दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को भेज दी गई। विधानसभा ने तुरंत सीट रिक्त क्यों घोषित की? जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर वह अयोग्य हो जाता है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद ऐसी स्थिति में सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करने से सदस्यता बहाल नहीं होती। इसके लिए उच्च अदालत को दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगानी होती है। अब जानिए क्यों हारे नरोत्तम मिश्रा और ढाई साल में राजेंद्र भारती ने क्या किया? पिछला चुनाव: क्यों नहीं दोहराया गया ‘बसई चमत्कार’ 2023 में नरोत्तम मिश्रा की हार में बसई का शहरी क्षेत्र सबसे बड़ी वजह रहा। 13 राउंड में से वे सिर्फ 3 राउंड में बढ़त बना पाए। 10वें राउंड तक राजेंद्र भारती 8 हजार वोटों से आगे थे। बीजेपी को 2018 जैसा ‘चमत्कार’ दोहराने की उम्मीद थी, जब बसई से मिले वोटों ने मिश्रा को जीत दिलाई थी। 2023 में 11वें और 12वें राउंड में वे क्रमशः 866 और 379 वोटों से पीछे रहे। आखिरी राउंड में 735 वोटों की बढ़त भी नाकाफी रही और नरोत्तम 7,742 वोटों से चौथा चुनाव हार गए। जनता की राय: ओवर कॉन्फिडेंस और भीतरघात बना हार का कारण एडवोकेट इतरत अली जैदी के अनुसार विकास कार्य हुए, लेकिन मिश्रा के करीबी लोगों की कार्यशैली से जनता नाराज थी। वे 2022 के नगर पालिका चुनाव में कथित धांधली और स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी को हार की प्रमुख वजह मानते हैं। उदाहरण के तौर पर ‘लाला का तालाब’ की टूटी दीवार अब तक नहीं बनने का मुद्दा आज भी लोगों में नाराजगी पैदा करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मिश्रा को संगठन के भीतर ही नुकसान पहुंचा। परसराम श्रीवास्तव और राजू त्यागी के अनुसार कार्यकर्ता जरूरत के मुताबिक जमीन पर सक्रिय नहीं रहे। वे अति आत्मविश्वास में रहे। बीजेपी कार्यालय प्रभारी रोहित दुबे भी मानते हैं कि कार्यकर्ता जीत को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त थे। राजेंद्र भारती का कार्यकाल: जनता की मिली-जुली राय राजेंद्र भारती के ढाई साल के कार्यकाल पर स्थानीय लोगों की राय सख्त है। परसराम श्रीवास्तव के अनुसार वे जनता से दूर रहे। इतरत अली जैदी कहते हैं कि भारती प्रशासन और पुलिस पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव का हवाला देते थे। राजू त्यागी और शलस त्रिपाठी आरोप लगाते हैं कि विधायक निधि का उपयोग क्षेत्र से बाहर हुआ और विधानसभा के सवाल अफसरों पर दबाव बनाने के लिए उठाए गए। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र दांगी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि असहयोग के बावजूद भारती ने विधायक निधि से जितने संभव थे, उतने काम किए। चुनावी मैदान: प्रमुख दावेदार और रणनीति दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस में टिकट के लिए कई दावेदार मैदान में हैं। अयोग्य घोषित किए गए राजेन्द्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी टिकट के प्रमुख दावेदार हैं। बीजेपी की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। आजाद समाज पार्टी (एएसपी) की ओर से दामोदर यादव उम्मीदवार होंगे। दामोदर यादव का कहना है कि पार्टी उन्हें दतिया से उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। 1. नरोत्तम मिश्रा (बीजेपी): डैमेज कंट्रोल मोड में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद मिश्रा लगातार सक्रिय हैं। वे सामाजिक सम्मेलनों के जरिए नाराज कार्यकर्ताओं और समुदायों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो महीनों में एक दर्जन से ज्यादा कार्यक्रम कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, वे दतिया के लिए बड़ी सरकारी घोषणा की तैयारी में हैं और 1 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिल चुके हैं। बीजेपी का दावा है कि इस बार संगठन पिछली गलतियों से सबक लेकर मैदान में उतरेगा। 2. कांग्रेस: एक अनार, तीन बीमार टिकट को लेकर पार्टी में खींचतान दिखाई दे रही है। राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट मांग रहे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद टिकट न मिलने पर बागी होने की चर्चा है। पिछले चुनाव में टिकट का त्याग करने वाले अवधेश नायक खुद को स्वाभाविक दावेदार मान रहे हैं, जबकि पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक दांगी ने गुटबाजी से इनकार करते हुए कहा कि टिकट सर्वे के आधार पर तय होगा। 3. दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी): बिगाड़ सकते हैं खेल दामोदर यादव किसान सम्मेलन और बैठकों के जरिए संगठन मजबूत करने में जुटे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके साथ आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मजबूत मौजूदगी कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। एक्सपर्ट व्यू: मुद्दों पर भारी पड़ेंगे जातिगत समीकरण वरिष्ठ पत्रकार रवि ठाकुर के अनुसार उपचुनाव में जातिगत समीकरण निर्णायक रहेंगे। यादव वोट (18 हजार): 2023 में इन्होंने बीजेपी का साथ नहीं दिया था। अब दामोदर यादव की मौजूदगी से 60% यादव वोट आजाद समाज पार्टी की तरफ जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस का वोट बैंक कटेगा। कुशवाहा वोट (37 हजार): यह समाज दो धड़ों में बंटा है। यदि कोई सजातीय उम्मीदवार मैदान में आता है, तो बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस को नुकसान होगा। ब्राह्मण वोट (35 हजार): यदि कांग्रेस किसी ब्राह्मण को टिकट देती भी है, तब भी इस वर्ग का बड़ा हिस्सा नरोत्तम मिश्रा के साथ ही रहने की संभावना है।

स्कूल बस और ट्रैक्टर की जोरदार टक्कर VIDEO:बाल-बाल बचे बच्चें, ट्रैक्टर के ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा; सीसीटीवी में कैद हुई घटना

एक स्कूल बस और ट्रैक्टर के बीच भीषण टक्कर हो गई। जिसका सीसीटीवी भी सामने आया है। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर के ब्रेक फेल हो गए ​थे। घटना 30 जून की है। ब्रेक नहीं लगने से हादसा हुआ जानकारी के अनुसार, यह घटना 30 जून की है। जिसका CCTV भी सामने आया है। मंडावा सड़क पर एक स्कूली बस जा रही थी। बस एक सड़क के कट से अंदर की ओर जाने के लिए जैसे ही घूमी वैसे ही सामने से आ रहे ट्रैक्टर ने उसमें जोरदार टक्कर मार दी। जिससे ट्रैक्टर पलट गया। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर के ब्रेक फेल हो गए ​थे। इस कारण से यह हादसा हुआ। ​टक्कर इतनी जबरदस्त थी बस का संतुलन बिगड़ गया। इसी दौरान सड़क के किनारे से गुजर रहा एक छात्र, ट्रैक्टर को अपनी ओर आता देख अपनी सूझबूझ और फुर्ती दिखाते हुए कूद गया। जिससे वह बाल-बाल बच गया। टक्कर के बाद बस में मची अफरा-तफरी ​घटना के बाद बस में सवार स्कूली बच्चों में हड़कंप मच गया। बच्चे चिलाने लगे। गनीमत ये रही कि इस दुर्घटना में किसी भी बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। आपसी सहमति बनी, मामल दर्ज नहीं घटना के चार दिन इस हादसे का सीसीटीवी सामने आया। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना की पुष्टि की है। स्कूल प्रशासन के अनुसार, ट्रैक्टर चालक और स्कूल प्रबंधन के बीच आपसी सहमति बन गई है। जिसके चलते मामले को सुलझा लिया गया है। आपसी समझौता होने के कारण स्कूल संचालक की ओर से इस संबंध में थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है।

NDA का मिशन 360, अब DMK-NCP-सपा में सेंध की तैयारी:लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पाने अब 41 सांसदों की जरूरत; बड़े संवैधानिक बदलाव करेगी

भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी। पार्टी का फोकस केवल इसी विधेयक तक सीमित नहीं बल्कि ‘एक देश-एक चुनाव’ और न्यायिक सुधारों जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए जरूरी ‘सुपर मेजोरिटी’ हासिल करने पर है। इसके लिए भाजपा विपक्षी दलों में टूट, नए सहयोगी जोड़ने और जरूरत पड़ने पर मतदान के समय विपक्ष की गैरहाजिरी जैसे विकल्पों पर नजर रखे है। इसे संसद के मानसून सत्र तक पूरा करने का टारगेट है। पहले लोकसभा का गणित और मौजूदा स्थिति समझ लीजिए उद्धव गुट के 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हाल ही में टीएमसी के 20 सांसदों के अलग होकर एनडीए को समर्थन करने और शिवसेना (उद्धव) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद इस कयास को और बल मिल गया है। हालांकि इस जोड़तोड़ के बावजूद दो-तिहाई बहुमत के लिए 41 और सांसदों की जरूरत है। इसके लिए भाजपा की निगाह अब सपा, डीएमके, एनसीपी (शरद) जैसे दलों पर की है। महाराष्ट्र भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि शरद पवार के 8 सांसदों में उनकी बेटी सुप्रिया सुले के अलावा बाकी 7 भाजपा के साथ हैं। हालांकि, सरकार बिलों के संबंध में सभी दलों से बात कर रही है। केंद्र सरकार का फोकस- वोटिंग में 61 विपक्षी सांसद गैरहाजिर रहें परिसीमन के लिए महिला आरक्षण का नुस्खा निकाला सुप्रीम कोर्ट के वकील चिराग गुप्ता और राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री से दैनिक भास्कर दो-तिहाई बहुमत के मामले चर्चा की। दोनों के मुताबिक… महाराष्ट्र- NCP (शरद गुट) के विलय की चर्चा, भाजपा-कांग्रेस दोनों से बातचीत उधर महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट) पार्टी कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों से बातचीत को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 8 लोकसभा सांसद और 10 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं। दावा है कि कुछ सांसद और विधायक NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ विलय चाहते हैं। शरद पवार कांग्रेस में विलय के लिए तभी तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पवार समर्थक, सुप्रिया सुले को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं। दूसरी ओर, एक अन्य सूत्र का दावा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा भाजपा और NDA के साथ जाने का समर्थक है। बातचीत में सुप्रिया सुले के लिए केंद्रीय मंत्री पद और पवार समर्थकों के लिए दो मंत्री पद की चर्चा भी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ………………. यह खबर भी पढ़ें… शिवसेना उद्धव गुट को संसद में ऑफिस खाली करना होगा: टूट के बाद सांसदों की संख्या 5 से कम हुई शिवसेना (UBT) को संसद भवन में अपना मौजूदा ऑफिस खाली करना पड़ सकता है। संसद भवन के नियमों के मुताबिक, सिर्फ 5 या उससे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी को संसद भवन में ऑफिस मिल सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष जैसे ही छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दे देते हैं। पूरी खबर पढ़ें… लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल 17 अप्रैल को केंद्र सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। पूरी खबर पढ़ें…

स्कूल वैन का रेडिएटर फटा, तीन मासूम झुलसे:पाइप फटने से गर्म पानी का फव्वारा निकला था, 11 बच्चे सवार थे

एक निजी स्कूल वैन (टाटा मैजिक) का रेडिएटर फट गया। पाइप फटने से गर्म पानी का फव्वारा बच्चों पर आ गया। जिससे वैन के केबिन में सवार तीन मासूम छात्र झुलस गए। वैन में 11 बच्चे सवार थे। तीनों छात्र 5 और 9 साल के है। तीनों के चेहरे, सीने और हाथ-पैर बुरी तरह से झुलस गए। हादसा उस समय हुआ जब वैन बच्चों को घर से बैठाकर स्कूल लेकर जा रही थी। मामला जिले के मानपुर कस्बे का गुरुवार सुबह 9 बजे का है। झुलसे छात्र तीसरी और पांचवी क्लास में पढ़ते है। सूचना पर पहुंची पुलिस मानपुर SHO सतीश कुमार ने बताया- सूचना पर पुलिस जाब्ते के साथ सिकराय अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। जानकारी के अनुसार वैन (टाटा मैजिक) के रेडिएटर का पाइप फटने से गर्म पानी बाहर निकल गया। ये छात्र हुए घायल जिससे दीपक (5), आयुष (5) और हार्दिक (9) झुलस गए। एक छात्र तीसरी क्लास और दो छात्र पांचवी क्लास में पढ़ते है। जिनका इलाज जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। किसी भी तरह का मामला दर्ज नहीं किया गया है। घायल छात्रों को अस्पताल पहुंचाया हादसे के बाद घायल छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। एक छात्र की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जिसे मानपुर अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया। जबकि दो अन्य छात्रों का इलाज सिकराय उपजिला अस्पताल में जारी है। सिकराय विधायक ने चिंता सिकराय विधायक विक्रम बंसीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा- विधानसभा क्षेत्र सिकराय की ग्राम पंचायत मानपुर में आज सुबह स्कूल के बच्चों को स्कूल ले जा रहे वैन का रेडिएटर फटने से बच्चों के घायल होने का समाचार अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दुर्घटना में घायल सभी बच्चे शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों तथा उन्हें जल्द स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो। प्रशासन से भी अपेक्षा है कि घायल बच्चों को समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए और दुर्घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
मेरी संवेदनाएँ सभी घायल बच्चों एवं उनके परिजनों के साथ हैं। ईश्वर सभी बच्चों को शीघ्र स्वस्थ एवं सुरक्षित रखें।

ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 15 महिलाएं दबीं, 2 की मौत:दर्द से बिलखने लगीं घायल; तेज चलाने पर ड्राइवर को टोका था

भरतपुर जिले में जानवर को बचाने के चक्कर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। हादसे में ट्रॉली में सवार 15 महिलाएं दब गईं। इनमें से 2 की मौके पर ही मौत हो गई। 13 घायल हो गईं। घायल महिलाएं दर्द से कराहने लगीं। हादसा वैर थाना क्षेत्र के रायपुर गांव में गुरुवार सुबह करीब 8 बजे हुआ। आरोप है कि महिलाओं ने ड्राइवर से ट्रैक्टर धीरे चलाने के लिए कहा था, लेकिन वह स्पीड में दौड़ाता रहा। जिन 2 महिलाओं की मौत हुई हैं, उनमें ड्राइवर की पत्नी भी थी। 12 घायलों का हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। वहीं एक महिला घर चली गई। थाना प्रभारी धीरेंद्र ने बताया- शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिलाएं रायपुर गांव की तरफ खेतों में कृषि कार्य के लिए जा रही थीं। रायपुर गांव के पास ट्रैक्टर के सामने अचानक एक जानवर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मिथलेश (45) पत्नी वीरेंद्र और धौरी (35) पत्नी दान सिंह की मौत हुई है। मृतका धौरी का पति दान सिंह ही ट्रैक्टर चला रहा था। देखिए, हादसे से जुड़ी PHOTOS… पत्नी को हॉस्पिटल लेकर गया ड्राइवर, अन्य महिलाओं को छोड़ गया वैर कस्बा निवासी मिथलेश (मृतका) के पति वीरेंद्र ने बताया कि ट्रैक्टर ड्राइवर दान सिंह का खेत है। गुरुवार सुबह वह अपनी पत्नी धौरी के साथ वैर कस्बे की जाटव बस्ती आया था। यहां से मेरी पत्नी मिथलेश सहित 14 महिलाओं को खेत में मजदूरी करने के लिए लेकर जा रहा था। रास्ते में महिलाओं ने दान सिंह से ट्रैक्टर धीरे चलाने को कहा था, लेकिन उसने रफ्तार कम नहीं की। हादसे के बाद जब ट्रॉली हटाकर महिलाओं को बाहर निकला, तब तक मौके पर मिथलेश और धौरी की मौत हो चुकी थी। वीरेंद्र का आरोप है कि हादसे के बाद दान सिंह अपनी पत्नी धौरी को लेकर तुरंत हॉस्पिटल चला गया, जबकि बाकी घायल महिलाओं को मौके पर ही छोड़ दिया था। 12 महिलाओं का चल रहा इलाज राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से 12 घायलों को वैर हॉस्पिटल पहुंचाया। बाद में इन्हें आरबीएम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। वहीं एक महिला को हल्की खरोंच आई थी। वह उठकर घर चली गई। बयाना गेट जाटव बस्ती (वैर) निवासी मछला (38), आरती (25), मोहिनी (35), बर्फी (65), हरदेई (35), सत्तो (45), गुड्डी (40), नमकीन (38), सरोज (35), गोविंद (45), संतो (48) और आरती (36) का इलाज जारी है। पसलियां टूट जाने से हुई मौत मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि मिथलेश और धौरी के सीने में गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उनकी कई पसलियां टूट गईं। सिर, हाथ और पैरों में भी गंभीर चोटें थीं। सीने और शरीर पर आई इन गंभीर चोटों के कारण दोनों महिलाओं की मौत हुई।

ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार की मौत:अचानक यू-टर्न लेते समय हुआ हादसा, आमेर रोड पर जलमहल के पास की घटना

जयपुर में आमेर रोड स्थित जलमहल के पास सड़क हादसे में 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई। गुरुवार को सुबह साढ़े तीन बजे आमेर की ओर जा रहे ट्रक की चपेट में स्कूटी सवार युवक चपेट में आ गया। जानकारी के अनुसार, ट्रक और स्कूटी दोनों रामगढ़ मोड़ से आमेर की ओर जा रहे थे। जलमहल के पास ट्रक चालक ने अचानक यू-टर्न लिया। इसी दौरान पीछे चल रही स्कूटी ट्रक की चपेट में आ गई। हादसे में स्कूटी सवार अरशद (28) गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी (SHO) हेमंत पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए एसएमएस हॉस्पिटल की मोर्च्यूरी भिजवाया। दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों सुपुर्द कर दिया गया। मृतक मोहम्द अरशद के चचेरे भाई समीर ने ट्रक के ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रक चालक के अचानक यू-टर्न लेने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ट्रक चालक की भूमिका और दुर्घटना के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

बेंगलुरु में पत्थर खदान में चट्टान गिरी, 7 की मौत:हादसे के समय 17 लोग काम कर रहे थे, दिहाड़ी मजदूर थे सभी मृतक

कर्नाटक के बेंगलुरु में गुरुवार सुबह पत्थर खदान ढहने से 7 प्रवासी मजूदरों की मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी थी कि सभी मृतक बिहार के रहने वाले हैं। लेकिन, बाद में स्पष्ट किया गया कि 5 मजदूर मध्य प्रदेश, एक छत्तीसगढ़ और एक कर्नाटक के यादगीर का रहने वाला था। घटना के दौरान 17 मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, साउथ तालुक इलाके में मौजूद कावेरी क्रशर कंपनी की खदान में खनन चल रहा था। इसी दौरान 40 फीट ऊंचाई से चट्टान का बड़ा टुकड़ा मजदूरों पर आ गिरा। हादसे में 5 मजदूर भी घायल हो गए। पांचों खतरे से बाहर हैं। सभी मृतक व घायल दिहाड़ी मजदूर थे और वहां स्टोन क्रशर साइट पर काम कर रहे थे। घटना की 3 तस्वीरे… प्रत्यक्षदर्शी बोला- पहाड़ी का हिस्सा कुछ ही सेकंड में ढह गया एक्सकेवेटर चला रहे परशुराम ने बताया कि काम शुरू करने के लिए जैसे ही मैं मौके पर पहुंचे और मशीन चालू की, तभी पहाड़ी का एक हिस्सा ढह गया। मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता, लेकिन उस समय नीचे करीब 18 लोग काम कर रहे थे। हादसा इतना अचानक हुआ कि मजदूरों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। मलबे में दबे 4 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों के परिवार को ₹10-10 लाख की सहायता राशि खदान मालिक ने मुआवजा देने पर सहमति जताई है। खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधिकारी रंगप्पा ने बताया कि उन्होंने खदान मालिक से मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को पांच-पांच लाख रुपये देने के लिए कहा, जिस पर उसने सहमति दे दी है। खनन गतिविधियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे: सीएम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि राज्य में खनन गतिविधियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि मिट्टी के खिसकने के कारण हुआ है। विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। ————— ये खबर भी पढ़ें… कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम ढही, 5 की मौत: 20 को बचाया, मलबे में दबा मजदूर बोला- मेरा पैर काट लो, लेकिन मुझे बचा लो दक्षिण कोलकाता के तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के पास 24 जून दोपहर 12:07 बजे निर्माणाधीन गोदाम का शेड गिर गया। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। मलबे में दबे 20 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है, जिनमें दो आईसीयू में है। अन्य 18 की हालत खतरे से बाहर है। पूरी खबर पढ़ें…

बेटी को बचाने के लिए गाय से भिड़े मां-बाप; VIDEO:2 बार जमीन पर पटका, छाती में सींग मारा, पसलियां टूटीं

ट्यूशन पढ़कर लौट रही 5 साल की बच्ची पर घर के सामने ही गाय ने अचानक हमला कर दिया। बच्ची की मां ने जैसे ही यह देखा, उसके होश उड़ गए। वह जान की परवाह किए बिना गाय से भिड़ गई। दोनों सींग पकड़ लिए। गाय ने उसको भी 2 बार पटक कर कुचल दिया, जिससे पसलियां टूट गईं। इतने में बच्ची के पिता और पड़ोसी भी आ गए। सबने मिलकर किसी तरह गाय को वहां से भगाया। यह घटना श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान इलाके की CRK कॉलोनी (वार्ड नंबर-26) में मंगलवार शाम को हुई। यह पूरा वाकया सामने लगे सीसीटीवी में कैद हो गया। इसका 50 सेकेंड का वीडियो गुरुवार को सामने आया। तस्वीरों से समझिए… 50 सेकेंड का पूरा घटनाक्रम ‘बेटी को तड़पता देख मुझे अपनी जान का डर नहीं रहा’ हॉस्पिटल में भर्ती मंजीत कौर (30) ने कहा- मैंने जब अपनी बच्ची पर गाय को हमला करते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए। मुझे बस यही दिख रहा था कि किसी भी तरह अपनी बच्ची को बचाना है। गाय मुझे सींग मार रही थी, पैरों से कुचल रही थी, लेकिन मुझे सिर्फ हरकीरत की जान की फिक्र थी। बच्ची के सिर और मुंह पर गंभीर चोटें छाती में गाय के सींग और पैर लगने से अंदरूनी चोटें आई हैं, जिससे उनकी पसलियां टूट गई हैं। उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। बच्ची के मुंह, घुटने, पैर और सिर पर गंभीर चोटें और खरोंचें आई हैं।
बीच-बचाव करने के दौरान पिता को भी मामूली चोटें आई हैं।