जयपुर में 'लोकमंथन 2026' की शुरुआत:CM बोले- रामकथा-लोककलाओं ने किया चरित्र निर्माण, गजेंद्र शेखावत ने कहा- भारत की आत्मा है 'लोक'
जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा- भारत की संस्कृति और परंपराओं ने समाज को हमेशा सही दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा कि रामकथा, रामलीला और रासलीला जैसे लोक माध्यमों के जरिए पीढ़ियों ने जीवन के आदर्श, नैतिक मूल्य और संस्कार सीखे हैं। लोक कलाकारों ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि समाज के चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को शुरू हुए लोकमंथन 2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल ने यह कहा। ‘हम भारत के लोग’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल हुए। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में लोक की भूमिका पर मंथन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन्हें संरक्षित और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति ही भारत की असली ताकत है, जिसने सदियों से समाज को एक सूत्र में बांधकर रखा है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि लोकमंथन का मुख्य आयोजन दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का वास्तविक निर्माता और उसकी सबसे बड़ी शक्ति उसका ‘लोक’ है। यही भारत की आत्मा है और इसी के आधार पर देश की सांस्कृतिक पहचान कायम है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सराहना करते हुए कहा- राजस्थान की प्यास बुझाने के लिए राज्य सरकार ने जो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, उन्हें आने वाले सालों में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता पूरे देश में अलग पहचान रखती है और लोकमंथन जैसे आयोजनों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि लोकमंथन के माध्यम से राजस्थान की लोक कला, संस्कृति, परंपराएं और लोक ज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना भी मजबूत होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती से जुड़ा रहेगा, तभी वह विश्व का मार्गदर्शक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। लोक परंपराओं, संस्कृति और समाज के सामूहिक अनुभवों को सहेजना ही विकसित भारत की मजबूत नींव है। बता दें कि लोकमंथन 2026 के शुभारंभ के साथ ही राजस्थान में सांस्कृतिक विमर्श की एक नई शुरुआत मानी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान लोक संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर अलग-अलग विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षाविद, संस्कृति विशेषज्ञ, लोक कलाकार और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए।

