हाईकोर्ट ने नर्सिंग-पैरामेडिकल काउंसलिंग पर लगाई रोक:एनओसी लंबित होने से संस्थानों को नुकसान का अंदेशा; 15 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी नर्सिंग और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों को राहत देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की पीठ ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के कॉमन एंट्रेंस टेस्ट 2026 के तहत बीएससी नर्सिंग, डी.फार्म और बीपीटी पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह रोक लंबित एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) आवेदनों पर निर्णय न होने के कारण लगाई है। याचिकाकर्ता संस्थानों की ओर से अधिवक्ता श्रेयांस मर्डिया और अधिवक्ता अंकुर माथुर ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 15 अक्टूबर 2024 की नीति के तहत आवेदन मांगे थे। संस्थानों ने आवश्यक ढांचा विकसित कर आवेदन जमा किए, लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश मामलों में एनओसी जारी नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि आरयूएचएस ने 11 जून 2026 को काउंसलिंग शेड्यूल जारी कर दिया है। ऐसे में यदि एनओसी लंबित रहती है तो संस्थानों का एक और शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे उन्हें भारी नुकसान होगा। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि मामला विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद लंबित आवेदनों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इन दलीलों और टिप्पणियों के बाद हाईकोर्ट ने काउंसलिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को तय की है।

