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वसुंधरा बोलीं- राजनीति के लिए सामाजिक रिश्ते खराब न करें:मेरे खिलाफ चुनाव लड़े अबरार अहमद की मौत पर कांग्रेस कार्यालय गई थी

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा- सामाजिक रिश्तों को राजनीति के कारण खराब नहीं करना चाहिए। राजनीति से अलग भी हमारे सामाजिक रिश्ते होते हैं। विधानसभा सदन से बाहर आने पर बहुत सी बातें ऐसी होती हैं, जिन पर हम साथ बैठ सकते हैं। लेकिन अब सदन के भीतर अमर्यादित आचरण के छींटे लगने लगे हैं और भाषा का स्तर बहुत गिर चुका है। राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर साल भर चलने वाले कार्यक्रमों के उद्घाटन के मौके पर वसुंधरा राजे ने ये बातें कही। वसुंधरा राजे ने किस्सा साझा करते हुए कहा- कांग्रेस नेता अबरार अहमद मेरे खिलाफ चुनाव लड़े थे। जब कुछ समय बाद उनका निधन हुआ और उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस कार्यालय लाया गया, तब वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में मैं भी शामिल थी। उस समय कांग्रेस के लोग भी वहां ज्यादा संख्या में नहीं पहुंचे थे। मेरे बहुत से शुभचिंतकों ने मुझसे कहा था कि ‘आप कांग्रेस कार्यालय क्यों जा रही हैं?’ तब मैंने उनसे कहा था कि इंसानियत राजनीति की लक्ष्मण रेखा से ऊपर होनी चाहिए। जब कभी किसी के यहां दुख-सुख हो, जैसे किसी की मौत, शादी या बच्चों का जन्म, तो हमें विरोधी दलों के नेताओं के यहां भी जाना चाहिए। इसमें कोई बुरा मानने वाली बात नहीं है। मैंने भैरोंसिंह शेखावत से पूछा था- आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? वसुंधरा राजे ने कहा- मोहनलाल सुखाड़िया और भैरोंसिंह शेखावत पान की एक दुकान पर जाते थे। वहां बैठकर खूब चर्चा करते थे। हरिदेव जोशी जब खुद मुख्यमंत्री थे और बाद में जब वे विपक्ष में रहे, तब भी शेखावत साहब के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। शेखावत साहब के मुख्यमंत्री रहते हुए जब हरिदेव जोशी बीमार हो गए, तो शेखावत साहब रोज उनसे मिलने अस्पताल जाते थे। घंटों वहां बैठते थे। कभी-कभी तो वे सरकारी फाइलें भी अस्पताल से ही निपटाते थे। मैंने एक बार उनसे पूछा था कि आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? तब शेखावत साहब ने मुझे पोरस और सिकंदर की कहानी सुनाकर इसका महत्व समझाया था। सदन में सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की खूब आलोचना करते थे पूर्व सीएम ने कहा- राजनेताओं के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनके बीच हमेशा से ही आपसी रिश्ते अच्छे रहे हैं। भैरोंसिंह शेखावत विपक्ष में रहते हुए उस वक्त के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की सदन में खूब आलोचना करते थे। लेकिन दोनों तरफ से कभी दुश्मनी नहीं रही। उनके आपसी रिश्ते बहुत अच्छे थे। पीएम नरसिम्हा राव ने अटलजी को भारत का पक्ष रखने UN भेजा था वसुंधरा ने कहा- पूर्व पीएम नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच गहरी दोस्ती थी। नरसिम्हा राव जब प्रधानमंत्री थे, उस वक्त पाकिस्तान जेनेवा में भारत के खिलाफ मानवाधिकार के मामले में संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रस्ताव ला रहा था। राव ने विपक्षी दल के नेता होने के बावजूद अटलजी पर भरोसा जताया और उन्हें भारत का पक्ष रखने जेनेवा भेजा। अटलजी ने अपने बेहतरीन राजनयिक कौशल से उस प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया और वह प्रस्ताव गिर गया। नए विधायक तैयारी करके नहीं आते नए विधायकों को सीख देते हुए वसुंधरा राजे ने कहा- आजकल ज्यादातर नए विधायक तैयारी करके नहीं आते। भैरोंसिंह शेखावत और सतीश चंद्र अग्रवाल जैसे नेता विधानसभा की लाइब्रेरी में जाकर पुस्तकें पढ़ते थे। जब वे सदन में आते थे, तो उनके तर्कों के आगे कोई टिक नहीं पाता था। आज कई नए विधायक पढ़ते नहीं हैं और विधानसभा सदन में भी कम आते हैं। मैं सभी विधायकों से कहना चाहूंगी कि यह कोई साधारण सदन नहीं है। यहां से ऐतिहासिक निर्णय निकले हैं। भैरोंसिंह जी हमेशा नए विधायकों को बोलने का मौका देते थे। जब कोई नया विधायक अच्छा बोलता था, तो वे खुश होकर लड्डू मंगवाकर बंटवाते थे। कई बार तो ये लड्डू विरोधी दल के विधायकों तक भी पहुंच जाते थे। मदेरणा रविवार को मौन रखते थे, वह उनके अध्ययन का दिन होता था पूर्व सीएम ने कहा- एक बार मैं बिना बताए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा साहब के यहां चली गई थी। वहां लोगों ने मुझे बताया कि उन्होंने मौन धारण किया हुआ है। वे रविवार को किसी से बोलते नहीं हैं। मैंने कहा कि जब मैं यहां तक आई हूं, तो राम-राम करके ही जाऊंगी। जब मैं उनसे मिली, तो वे मौन थे। उन्होंने मुझे कागज पर लिखकर बताया कि रविवार को उनका मौन व्रत होता है और यह दिन उनके अध्ययन (स्टडी) का होता है। हमें ऐसे महान नेताओं से सीखने की जरूरत है कि व्यस्तता के बीच भी अध्ययन के लिए समय कैसे निकाला जाता है। हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी राजस्थान के काम आए तो कम है वसुंधरा राजे ने कहा- सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का काम हाथ में लिया है। यह बहुत बड़ा कदम है। हम सदन में केवल अपना नाम दर्ज करवाने नहीं आए हैं। हम यहां आए हैं तो राजस्थान के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करें। जिन्होंने हमें चुनकर भेजा है, हम उनके विश्वास पर खरा उतरें। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि अगर राजस्थान के विकास के लिए हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी लग जाए, तो वह भी कम होगा। … ये खबर भी पढ़िए… उपराष्ट्रपति बोले- विकसित राजस्थान बिना विकसित भारत नहीं बनेगा:बिरला ने कहा- सदन में हंगामा हो, मैं खड़ा नहीं होता, स्पीकर के चेहरे पर तनाव नहीं हो जयपुर में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा- विकसित राजस्थान के बिना विकसित भारत नहीं बन सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य दिया है। यह लक्ष्य पाने के लिए सशक्त संस्थाएं जरूरी हैं। पढ़ें पूरी खबर वसुंधरा बोलीं- भैया मेरा चला गया, तुम्हारे लिए क्या करूं:लोग कहते हैं आपका तो ठीक है, हमें बचा लीजिए; मैं कैसे बचाऊं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा- छोटे-मोटे काम होते रहते हैं। किसी को मकान नहीं मिल रहा, किसी की पेंशन नहीं मिल रही, किसी का मुआवजा नहीं मिल रहा। कल आई थी, ये लोग मुझे बोल रहे थे। पढ़ें पूरी खबर

बिजली विभाग से जुड़ी कंपनी का डीजीएम रिश्वत लेते पकड़ा:फॉउंडेशन और अर्थिंग वर्क के 1 लाख मांगे थे, 90 हजार में सौदा तय हुआ था

बीकानेर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग से जुड़ी कंपनी के डीजीएम देवेश को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि ले रहा था, तभी एसीबी की टीम ने उसे ट्रैप कर दबोच लिया। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देश पर की गई। बीकानेर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया। अधिकारी ने बिजली लाइन बिछाने वाली जगह पर अर्थिंग और फॉउंडेशन काम को चलने देने के लिए 1 लाश रुपए की रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई के दौरान सीआई इंद्र कुमार सहित एसीबी की टीम मौके पर मौजूद रही। ट्रैप के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। साथ ही उसके कार्यालय और संबंधित दस्तावेजों की जांच भी शुरू कर दी गई है। एसीबी अब रिश्वतखोरी से जुड़े संभावित नेटवर्क, लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

श्रीगंगानगर में इनकम टैक्स की छापेमारी:दो साल की रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर की जांच शुरू, 9 लोगों की टीम पहुंची

श्रीगंगानगर में आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग ने रियल एस्टेट कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी शुरू की है। विभाग की 9 सदस्यीय विशेष टीम ने रजिस्ट्रार कार्यालय में पिछले दो साल यानी 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 तक हुई सभी महत्वपूर्ण रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। टीम सोमवार दोपहर को श्रीगंगानगर पहुंची और कर रिकॉर्ड खंगालती रही। सूत्रों के माने तो टीम अभी एक-दो दिन और रुक सकती है। कार्रवाई की खबर फैलते ही प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े बिल्डरों, निवेशकों और बड़े सौदागरों में हड़कंप मच गया। पुलिस 30 लाख से अधिक मूल्य की रजिस्ट्री खंगाल रही विभाग विशेष रूप से उन मामलों पर फोकस कर रहा है जिनमें दो लाख रुपए से अधिक का नकद भुगतान हुआ है। साथ ही 30 लाख रुपए से अधिक मूल्य की रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है, जिनकी सूचना नियमानुसार आयकर विभाग को भेजी जानी चाहिए थी। जांच में गलत पैन नंबर, फर्जी बैंक खाते, गलत चेक नंबर या डीएलसी दरों में हेरफेर की भी पड़ताल की जा रही है। वित्तीय लेन-देन की गहन जांच सीमावर्ती जिला होने के कारण श्रीगंगानगर में पिछले कुछ वर्षों में जमीनों और संपत्तियों के दामों में आई अप्रत्याशित तेजी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभाग को आशंका है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में बाहरी और संदिग्ध धन का भारी निवेश हुआ हो सकता है। इसी एंगल से दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। 75 करोड़ की संदिग्ध रजिस्ट्रियां सामने आई थी हाल ही में अनूपगढ़ सब रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई जांच के दौरान लगभग 75 करोड़ रुपए की संदिग्ध रजिस्ट्रियां सामने आई थीं। वहां दो लाख रुपए से अधिक के नकद लेन-देन, 30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों की रिपोर्ट न भेजने और गलत पैन, बैंक खाते और चेक नंबर दर्ज करने जैसी गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसके बाद अब श्रीगंगानगर को भी जांच के दायरे में लिया गया है। यदि जांच में टैक्स चोरी, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आयकर अधिनियम और अन्य प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले से रियल एस्टेट कारोबारियों में दहशत का माहौल है और आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। टीम में मौजूद रहे ये अधिकारी जयपुर से 9 लोगों की टीम पहुंची। जिसका नेतृत्व आईटीओ सुमित तिवाड़ी कर रहे हैं। टीम में प्रभारी राजेश कुमार चौधरी, निरीक्षक सत्येन्द्र शर्मा, प्रदीप, विनोद गोदारा, गायत्री, संदीप ढालिया, योगेश ढाका, पंकज रहेजा और अब्दुल रहमान शामिल हैं।

चार प्रसूताओं की मौत, मंत्री बोले-2 पहले से थीं क्रिटिकल:एनीमिया-हाई बीपी बन रही वजह; रिपोर्ट में लिखा-महिलाओं की हार्ट-किडनी फेल हुई

बांसवाड़ा जिला हॉस्पिटल में पहुंचे चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने माना कि चार में दो महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हुई है। कहा- सभी मौतें प्रसव की जटिलताओं के कारण नहीं हुईं। एक महिला दो महीने की प्रेग्नेंट थी और उसने बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात की गोलियां (अबॉर्शन पिल्स) खा ली थीं। अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत पहले से ही बेहद गंभीर हो चुकी थी। दो महिलाओं की मौत हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और लिवर (यकृत) से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। जबकि अन्य दो मरीज अस्पताल आने से पहले ही अत्यंत गंभीर स्थिति में थीं। मंत्री ने कहा- एनीमिया और हाई बीपी मौत की वजह बन रही है। वहीं रिपोर्ट में दो महिलाओं की मौत का कारण हार्ट और किडनी खराब होना लिखा है। मंत्री ने कहा- मैं खुद स्वास्थ्य मंत्री के नाते यहां आया हूं। हमने विभाग के अधिकारियों के साथ पूरी बैठक की है। सभी मृत प्रसूताओं के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उनकी मौत तक के सभी रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं। इन रिकॉर्ड्स को जयपुर ले जाकर गहनता से वेरिफाई किया जाएगा, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। बता दें, 12 जुलाई को उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम हॉस्पिटल पहुंची थी। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट मंत्री को सौंप दी है। अधिकारियों के साथ बैठक के बाद चिकित्सा मंत्री ने अस्पताल के वार्डों का भी निरीक्षण किया। मंत्री बोले- एनीमिया के कारण हो रही ज्यादा मौत चिकित्सा मंत्री ने कहा- उप-स्वास्थ्य केंद्र स्तर से ही सभी गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान सुनिश्चित की जाएगी। अधिकांश मातृ मृत्यु एनीमिया (खून की कमी) और हाई ब्लड प्रेशर के कारण हो रही हैं। इसलिए अब सभी एएनएम और फील्ड स्टाफ को गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन की नियमित जांच, आयरन की गोलियों के वितरण और ब्लड प्रेशर की लगातार मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जयपुर की फाइनल रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई हॉस्पिटल में बैठक के दौरान कलेक्टर और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चारों मामलों की विस्तृत केस हिस्ट्री चिकित्सा मंत्री को सौंपी। विभाग ने बताया कि अब जयपुर से आने वाली अंतिम सत्यापन (फाइनल वेरिफिकेशन) रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ​पढ़िए… जांच रिपोर्ट में क्या आया सामने? — संबंधित ये खबरें भी पढ़ें … मां दुनिया में नहीं, बकरी का दूध पी रहा नवजात:परिजन बोले- वह दर्द से तड़प रही थी, नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहते थे डॉक्टर बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत के बाद राज्य सरकार से आई टीम अस्पताल में जांच में जुटी है। 3 प्रसूताओं के परिजन उन्हें ले गए। 1 प्रसूता का लक्ष्मी का परिवार सामने आया है। पूरी खबर पढ़िए

'या तो किडनी ट्रांसप्लांट कराओ, नहीं तो इच्छा मृत्यु दो':डिलीवरी के बाद किडनी फेल, महिलाओं ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन (प्रसव) के बाद महिलाओं की किडनी फेल होने के बेहद गंभीर मामले में नया मोड़ आ गया है। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती 5 पीड़ित महिलाओं में से 4 बुधवार को मीडिया के सामने आईं। महिलाओं ने रोते हुए कहा- हमें अस्पताल में भर्ती हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अब सरकार या तो हमारे किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करवाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद, विरोध स्वरूप इन महिलाओं ने बुधवार से डायलिसिस कराने से साफ मना कर दिया है। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद फेल हुई थीं किडनियां
गौरतलब है कि 4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए ये महिलाएं भर्ती हुई थीं। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। इस मामले में पांचों महिलाएं अब भी अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। इन महिलाओं की किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं और इन्हें हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पीड़ित महिला रागिनी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा- हम यहां डिलीवरी के लिए आए थे। 4 मई को भर्ती किया गया था, आज 70 दिन से ज्यादा का समय हो गया है और हम अस्पताल में ही पड़े हैं। हर दो-तीन दिन में डायलिसिस होता है, जिसमें असहनीय दर्द और तकलीफ होती है। पीड़ित महिलाओं का दर्द और इच्छा मृत्यु की मांग
पीड़ित महिला रागिनी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई डायलिसिस के दौरान हालत बहुत खराब हो जाती है, बार-बार बुखार आता है और तबीयत बिगड़ जाती है। हमारी बस यही मांग है कि हमारा किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। हम अस्पताल में जैसे (भले-चंगे) आए थे, हमें वैसे ही ठीक करके घर भेजा जाए। बीमारी के कारण घर पर सब परेशान हैं और पति की नौकरी तक छूट गई है। हम डायलिसिस के भरोसे कब तक जिंदा रहेंगे? या तो हमारा ट्रांसप्लांट कराओ या फिर हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो, अब यह दर्द सहन नहीं होता।” वहीं, दूसरी पीड़ित धन्नी बाई ने भी साफ कह दिया कि अब वे डायलिसिस नहीं करवाएंगी, चाहे अस्पताल में उनके साथ कुछ भी हो जाए। डायलिसिस का बहिष्कार और आईसीयू में भर्ती मरीज अपनी मांगों को लेकर महिलाओं ने अब इलाज का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने इसके लिए साफ मना कर दिया। इस बीच, डायलिसिस न होने के कारण बुधवार को आरती की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ा। इसके बावजूद पीड़ित महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं कि जब तक सरकार किडनी ट्रांसप्लांट की लिखित गारंटी नहीं देती, वे डायलिसिस नहीं कराएंगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने इस मामले पर कहा- पांचों महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और जरूरत के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है। यह कहना संभव नहीं है कि डायलिसिस कब तक करना पड़ेगा। जब तक उनकी किडनियां खुद रिकवर नहीं हो जातीं, तब तक डायलिसिस करना बेहद जरूरी है। वैसे इन महिलाओं को अब अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, सिर्फ डायलिसिस के लिए आना ही काफी है, लेकिन यहां रहने से भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। जहां तक किडनी ट्रांसप्लांट का सवाल है, तो मरीज की स्थिति देखने के बाद 3 से 6 महीने बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।

वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप नहीं लगाया, मरीज की मौत:परिजनों ने किया हंगामा, अस्पताल ने गलती मानी; सिर के ऑपरेशन के बाद ICU में थे भर्ती

भीलवाड़ा में रामस्नेही हॉस्पिटल में स्टाफ की लापरवाही के कारण एक मरीज के मौत हो गई। हॉस्पिटल स्टाफ वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप लगाना भूल गया था। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन के गलती मानने पर परिजन शांत हुए। उन्होंने लिखित में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक्सीडेंट के बाद हॉस्पिटल में कराया था एडमिट मृतक के भांजे गौतम मेघवंशी ने बताया- रायला में रहने वाले घीसू लाल मेघवंशी (52) प्राइवेट कंपनी में गार्ड सुपरवाइजर थे। 8 जुलाई की शाम को उनका मांडल-रायल नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था। हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने एंबुलेंस की सहायता से उनको हॉस्पिटल भिजवाया गया। तब से ही वो रामस्नेही हॉस्पिटल के ICU में एडमिट थे। यहां उनके सिर का ऑपरेशन किया गया था और इलाज चल रहा था। मरीज की तबीयत बिगड़ी, ICU में नहीं था हॉस्पिटल स्टाफ गौतम ने बताया- मंगलवार देर रात को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से जुड़ी कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए मरीज को ICU वार्ड से नीचे काउंटर पर लाया गया था। फॉर्मेलिटी पूरी होने के बाद मरीज को वापस आईसीयू में ले जाया गया था। आईसीयू में मौजूद स्टाफ वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप लगाना भूल गया। पाइप नहीं जुड़ने के कारण कुछ देर बाद ही मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। इस दौरान ICU में हॉस्पिटल का कोई स्टाफ नहीं था। काउंटर पर जानकारी देने के काफी देर बाद स्टाफ मरीज के पास पहुंचा, लेकिन तब तक मरीज की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दी भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी ने बताया- मंगलवार रात 11:30 बजे प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया था। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही मानी तो परिजन शांत हुए। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी और कार्रवाई की मांग की। फिलहाल परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

युवक ने ड्राइवर सीट छोड़कर जीप चलाई, VIDEO:पुलिस ने गिरफ्तार किया तो बोला- इसे फॉलो करने की गलती नहीं करें

उदयपुर में एक युवक को जीप से स्टंटबाजी करना भारी पड़ गया। युवक ड्राइविंग सीट छोड़कर साथ वाली सीट पर बैठकर ओपन जीप चला रहा था। वीडियो उदयपुर के अंबामाता थाना क्षेत्र में शिल्पग्राम-फतेहसागर रोड का है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने युवक ऋत्विक सुखवाल पुत्र पंकज सुखवाल को गिरफ्तार कर लिया है। कार जब्त कर ली गई है। गिरफ्तारी के बाद युवक ने माफी मांगी। आगे से ऐसा नहीं करने की बात कही। लोगों से भी ऐसा नहीं करने की अपील की। बाद में युवक को पाबंद करके छोड़ दिया गया। लोगों ने ट्रेफिक रूल्स का उल्लंघन बताया था दरअसल, वीडियो 11 जुलाई को सोशल मीडिया पर सामने आया था। ​वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे ट्रेफिक रूल्स का उल्लंघन बताते हुए सवाल खड़े किए थे। ऐसे स्टंट को अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था। इसके बाद पुलिस ने 14 जुलाई शाम को युवक को गिरफ्तार किया। पुलिस ने थाने में युवक का एक माफीनाम वीडियो जारी किया। इसमें युवक बोल रहा है कि यह जानलेवा स्टंट है। कोई भी इसे फॉलो करने की गलती नहीं करें। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। भविष्य में ऐसा नही करूंगा। थाने के एसआई अजयराज सिंह ने बताया- स्टंट करने वाले ऋत्विक सुखवाल को आगे से ऐसी स्टंट वाली वीडियो नहीं बनाने के लिए पाबंद किया है। युवक कॉलेज में पढ़ाई करता है। पुलिस द्वारा आमजन से भी अपील है कि वे लाइक और व्यूज के चक्कर में ऐसी वीडियो नहीं बनाएं।

स्विफ्ट ने स्कूटी सवार दोस्तों को उड़ाया, दोनों की मौत:स्कूटी को 2 किमी घसीटा, टायर फटा तो छोड़ फरार हुआ

झुंझुनूं में स्विफ्ट कार ड्राइवर ने स्कूटी सवारों 2 को जोरदार टक्कर मार दी। दोनों स्कूटी से उछलकर गिर गए और स्कूटी कार के नीचे गई फंस गई। कार सवार इसके बावजूद भी स्कूटी को घसीटता हुआ करीब 2 किमी ले गया। इसके वाद कार का टायर फट गया। इसके बाद वह कार छोड़ कर फरार हो गया। मामला गुढ़ागौड़जी थाना इलाके का मंगलवार रात का है। दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, हादसे में संत कुमार सैनी (35) और जावेद (41) की मौत हो गई है। संत किशोरपुरा निवासी था और होटल पर काम करता था। जावेद इस्लामपुरा का रहने वाला था और मजदूरी करता था। वे दोनों एक होटल पर खाना खाकर झुंझुनूं की तरफ निकले ही थे कि होटल से महज 100 मीटर की दूरी पर ही यह भीषण हादसा हो गया। टायर फटा तो कार छोड़ कर भागा ​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद भी कार चालक नहीं रुका। स्कूटी कार के अगले हिस्से में फंसी होने के बावजूद चालक उसे तेज रफ्तार में घसीटता रहा। करीब दो किलोमीटर दूर ‘दूडीया’ गांव के पास कार का टायर फट गया, जिससे कार रुक गई। मौका पाकर चालक कार को वहीं छोड़ फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और निजी एंबुलेंस की मदद से दोनों के शवों को गुढ़ागौड़जी सीएचसी की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया है और फरार ड्राइवर की तलाश में जुटी है।

श्रीगंगानगर में डेरा विवाद, दीवाली नाथ पर कब्जे के आरोप:पूर्व सरपंच बोलीं- महंत ने हरे पेड़ कटवाए, दीवार तोड़ी; कार्रवाई नहीं हुई तो धरना देंगे

श्रीगंगानगर जिले के मुकलावा में स्थित शिव मंदिर डेरा बारुनाथ में संचालक दीवाली नाथ पर हरे पेड़ कटवाने और अवैध कब्जे करने के आरोप लगे हैं। महंतों व ग्रामीणों ने डेरे को दीवाली नाथ से मुक्त करवाने की मांग की है। पूर्व सरपंच शकुंतला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रायसिंहनगर एसडीएम पूनम चंद को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि पूजा-अर्चना के लिए लगाए गए हरे पेड़ों को दीवाली नाथ ने कटवा दिया है। साथ ही डेरे की चारदीवारी भी तोड़ दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दीवाली नाथ ने डेरे पर अवैध कब्जा जमा रखा है। ऐसे में महंत जीतनाथ को कब्जा दिलाने की मांग की जा रही है।

मुकलावा की पूर्व सरपंच शकुंतला ने कहा- दो साल पहले जीतनाथ जी ने ही दिवाली नाथ को यहां बिठाया था। अब वही यहां कब्जा जमाए बैठे हैं। हमारे सामने दिवाली नाथ की कई गलतियां भी आई हैं। हमने एसडीएम को पूरी जानकारी दी है। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अगर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं होती तो हम मजबूरन विरोध-प्रदर्शन और धरना करेंगे।

बीकानेर से लापता 10 साल का बच्चा पाली में मिला:CCTV और ट्रेन लोकेशन से 3 घंटे तलाश के बाद पुलिस ने सकुशल परिजनों को सौंपा

बीकानेर से एक 10 साल का बच्चा लापता हो गया। घर से कॉपी और किताब लेने की बात कहकर साथ में पानी की बोतल लेकर निकला था। काफी देर तक घर नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई और तलाश शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि लड़का बीकानेर से रवाना हुई तिरुवनंतपुरम नॉर्थ एक्सप्रेस में सवार होकर पाली रेलवे स्टेशन पर मंगलवार रात को उतर गया। सूचना मिलते ही अभय कमांड सेंटर की टीम सक्रिय हो गई। एप की मदद से ट्रेन की लोकेशन देखी टीम ने ऐप की मदद से ट्रेन की लोकेशन और पाली रेलवे स्टेशन पहुंचने का समय पता किया। इसके बाद रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित सुभाष सर्किल के CCTV कैमरे खंगाले गए। जिनमें बच्चा स्टेशन से बाहर निकलता दिखाई दिया। कुछ देर इधर-उधर घूमने के बाद वह दोबारा रेलवे स्टेशन के अंदर चला गया। पुलिस ने दोबारा ट्रेन और रेलवे गतिविधियों का मिलान किया तो पता चला कि उस समय स्टेशन से कोई अन्य ट्रेन रवाना नहीं हुई थी। इससे स्पष्ट हो गया कि बच्चा पाली में ही मौजूद है। लगातार ट्रैक करने के बाद बच्चे की लोकेशन मिली इसके बाद सीसीटीवी फुटेज की कड़ी जोड़ते हुए रेलवे स्टेशन, सुभाष सर्किल और सदर थाना बाईपास क्षेत्र के कैमरों के जरिए उसकी गतिविधियों को लगातार ट्रैक किया गया। आखिरकार बच्चे की लोकेशन सदर थाना क्षेत्र में मिली। वायरलेस संदेश के माध्यम से सदर थाना पुलिस को सूचना दी गई। जिसके बाद बच्चे को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया गया। परिजनों को तत्काल सूचना देकर बुलाया गया और आवश्यक कानूनी एवं कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बच्चे को सौंपा गया। बच्चे का देख भावुक हुए परिजन अपने बच्चे को सकुशल वापस पाकर परिजन भावुक हो गए। उन्होंने राजस्थान पुलिस और अभय कमांड सेंटर की त्वरित कार्रवाई, तकनीकी दक्षता और सतर्कता की सराहना की। अभय कमांड निगरानी टीम के हेड कांस्टेबल प्रेमप्रकाश, कांस्टेबल रामाराम चौधरी और कम्पनी के सहयोगी टीम ने करीब तीन घंटे तक सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए बच्चे को ढूंढा। अकेला देखा तो थाने ले गए पुलिसकर्मी लड़का रेलवे स्टेशन से रवाना होकर पैदल-पैदल शहीद उद्यान तक पहुंच गया। और गार्डन में बैठ गया। उधर से गुजर रहे एक पुलिसकर्मी की नजर उस पर पड़ी तो बच्चे को अकेला देख उसने उससे बात की। और फिर सदर थाने ले गया।