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मेट्रो फेज-2 का भूमिपूजन:सीएम बोले- 5 साल में पूरा हो जाएगा फेज-2, फेज-3 व 4 भी बनेंगे

राजधानी के बहुप्रतीक्षित मेट्रो फेज-2 प्रोजेक्ट का काम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भूमिपूजन के बाद शुरू हो गया। सीएम भजनलाल ने टोंक रोड बंबाला स्थित मेट्रो यार्ड की जमीन पर पूजा-अर्चना कर पाइलिंग का उद्घाटन किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को बाड़मेर पचपदरा में रिफाइनरी उद्घाटन के साथ मेट्रो प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। बुधवार को भूमिपूजन के बाद मुख्यमंत्री, विधायक और ब्यूरोक्रेट्स के साथ बस से मेट्रो स्टेशन पहुंचे, फिर मेट्रो में चौपड़ तक सफर किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में जल्द ही मेट्रो फेज-3 और फेज-4 पर काम शुरू किया जाएगा। टोंक रोड के प्रहलादपुरा से सीकर रोड स्थित टोडी मोड़ तक बनने वाले 41 किमी लंबे मेट्रो फेज-2 का काम 4 पैकेज में पूरा होगा। पहले पैकेज में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल करीब 12 किमी का रूट मई-2029 तक पूरा कर लिया जाएगा। जल्द ही दूसरे, तीसरे और चौथे पैकेज के टेंडर खुलेंगे। 13 हजार करोड़ की लागत से बन रहे फेज-2 का काम सितंबर 2031 तक पूरा करने का टारगेट है। कार्यक्रम में दो मंत्री, तीन विधायक, सीएस सहित 8 आईएएस; भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा आईएएस अफसरों की उपस्थिति रही। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, एसीएस आलोक गुप्ता, सीएम सचिव जितेंद्र सोनी, ज्वाइंट सेक्रेटरी उत्सव कौशल, कलेक्टर संदेश नायक, जेडीसी सिद्धार्थ महाजन, हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर अरविंद पोसवाल, निगम कमिश्नर ओम कसेरा, पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल, मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जोगाराम पटेल, विधायक कैलाश वर्मा, बालमुकुंदाचार्य सहित अन्य विधायक उपस्थित रहे। 27 हेक्टेयर यार्ड बनेगा; इस 41 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का यार्ड टोंक रोड बंबाला पुलिया के पास बनेगा। इसके लिए मेट्रो को 27 हेक्टेयर जमीन दी गई है। यहीं मेट्रो ट्रेनों का मेंटेनेंस होगा। सीएम ने देखा इंटरचेंज स्टेशन पॉइंट- मानसरोवर-बड़ी चौपड़ लाइन पर खासाकोठी में नया स्टेशन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मेट्रो में सवार होकर यह इंटरचेंज स्टेशन पॉइंट देखा। खासाकोठी पर फेज-1 और फेज-2 के स्टेशन आमने-सामने होंगे। दोनों स्टेशनों को 150 मीटर लंबे फुटओवर ब्रिज कनेक्ट करेंगे। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रोजाना 2.50 लाख यात्री सफर करेंगे।

पूर्व उपमुख्यमंत्री बनवारी लाल बैरवा की पुण्यतिथि पर कांग्रेसियों ने दी श्रद्धांजलि

भास्कर न्यूज |टोंक राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री, पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेसी रहे बनवारी लाल बैरवा की पुण्यतिथि पर बुधवार को टोंक बस स्टैंड के बाहर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी-कार्यकर्ता ओं के अलावा सामाजिक संगठनों से जुडे लोगों ने बैरवा के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूर्व विधायक कमल बैरवा ने कहा कि डिप्टी सीएम और राजनीति में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए बनवारी बैरवा का सादगीपूर्ण जीवन, उनका हंसमुख, मिलनसार और सहज व्यक्तित्व ही उनकी पहचान था। स्वयं को सबसे पहले कांग्रेस का एक समर्पित कार्यकर्ता मानते थे और जीवनभर जनता के सुख-दुख में सहभागी बनकर सेवा करते रहे। जिला कांग्रेस सोशल मीडिया प्रभारी जर्रार खान ने बताया कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्व. बैरवा के पुत्र मनिंदर बेरवा, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद बेरवा, अलका बैरवा, दिनेश चौरासिया, हंसराज फागणा, कैलाशी देवी मीणा, देवकरण गुर्जर, रामदेव गुर्जर, बरकात हसीन, सलीमुद्दीन खान, फोजूराम मीणा, शब्बीर अहमद, शिवजीराम मीणा, विकास लोदी, अशोक महावर, हंसराज गाता सहित काफी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी-कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

100 करोड़ का अस्पताल; न डॉक्टर, न सुपरस्पेशलिटी:ईएसआईसी : 2.5 लाख मरीजों से 180 करोड़ की वसूली, इलाज के बजाय कर रहे रेफर

यदि आप उदयपुर संभाग के उन ढाई लाख ईएसआईसी कार्डधारक बीमित कर्मचारियों में से हैं, जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से 15 करोड़ रुपए (सालाना 180 करोड़ रुपए) सरकारी खजाने में जमा कराते हैं। आपकी ही बदौलत उदयपुर में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक आलीशान इमारत बनकर खड़ी हो चुकी है। कागजों में इसे मॉडल हॉस्पिटल और सुपरस्पेशलिटी सेंटर कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक भव्य रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इलाज को छोड़कर बाकी सब कुछ प्रथम श्रेणी का है। यहां 64 की जगह 75 नर्सेज (जरूरत से ज्यादा) मुस्तैद हैं, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत 34 पदों में से केवल 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी सिर्फ आंख (ओप्थाल्मोलॉजी), स्किन (डर्मेटोलॉजी), शिशु रोग (पिडियाट्रिक) और रेडियोलॉजी के डॉक्टर ही ड्यूटी बजा रहे हैं। गंभीर रोगों के इलाज के लिए आवश्यक सुपरस्पेशलिटी विभागों नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, आंकोलॉजी (कैंसर), न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी का तो खाता तक नहीं खुला है। यहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 77 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 25 हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स 38 में से केवल 1 रेजिडेंट कार्यरत हैं। गत वर्ष आए तीन सीनियर रेजिडेंट्स तो दो-दो महीने काम करके ही यहां से निकल गए। मुख्यालय या तो अस्पताल की क्षमता 100 बेड से बढ़ाकर 150 या 200 बेड करे, ताकि यहां आने वाले डॉक्टरों का अनुभव काउंट हो सके और वे टिक पाएं। या फिर मुख्यालय स्तर से ही स्थायी विशेषज्ञों की सीधी पदस्थापना की जाए, ताकि ढाई लाख बीमित श्रमिकों को उनके हक का इलाज उदयपुर में ही मिल सके। अनोखा आदेश… इलाज मत करो, मरीज को बाहर भेजो जब स्थानीय बीमित श्रमिकों ने डॉक्टर भेजने की गुहार लगाई तो दिल्ली-जयपुर बैठे आकाओं ने डॉक्टर भेजने के बजाय एक और अनोखा आदेश जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि स्थानीय आरएनटी (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज से टाइअप कर काम चलाओ, या फिर मरीज को उठाकर जयपुर, कोटा, अहमदाबाद, अलवर या बीकानेर के ईएसआईसी अस्पतालों में रेफर कर दो। यह स्थिति तब है जब उदयपुर का श्रमिक अपनी जेब से सालाना 180 करोड़ रुपए प्रीमियम भर रहा है और जब इलाज की नौबत आए तो 300 से 500 किलोमीटर दूर दूसरे शहरों की दौड़ लगाएं। आंकड़ों में हकीकत : इस साल 1200 मरीजों को कर चुके रेफर अस्पताल के निर्माण पर 100 करोड़ रु. खर्च हुए हैं। ईएसआईसी का मासिक प्रीमियम कलेक्शन 15 करोड़ रु. है, जो सालाना 180 करोड़ तक पहुंचता है। उदयपुर जिले में 92 हजार और संभाग में 2.50 लाख कार्मिक ईएसआईसी के दायरे में हैं। गत वर्ष 90 हजार ओपीडी व 21 हजार आईपीडी मरीज आए थे। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 44,100 ओपीडी और 17 हजार आईपीडी मरीज दर्ज हुए हैं। गत वर्ष 3,800 मरीजों को बाहर रेफर किया था। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 1,200 रेफर किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश एमआरआई, सीटी स्कैन, हृदय रोग और न्यूरो से जुड़ी समस्याओं के मरीज हैं। 100 बेड की सीमा: डॉक्टर लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते 100 बेड का अस्पताल होने से यहां कार्यरत डॉक्टरों का अनुभव आगे की पढ़ाई या उच्च पदों के लिए मान्य नहीं माना जाता। यही डॉक्टरों के यहां नहीं टिकने का मुख्य कारण है। कॅरिअर प्रभावित होने की आशंका के चलते डॉक्टर यहां लंबे समय तक काम नहीं करना चाहते। 18 मई को इंटरव्यू के जरिए गायनिक और सर्जरी के दो डॉक्टर नियुक्त किए गए थे, लेकिन इनमें से सर्जरी के डॉक्टर ही टिके। बता दें कि अशोक नगर, बेदला रोड, फतेहपुरा और मादड़ी रोड नंबर-3 के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 1 लाख बीमितों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से अस्पताल शुरू किया गया था, लेकिन अब मेडिकल क्लेम महीनों अटक रहे हैं। हम मुख्यालय से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए समय-समय पर वॉक-इन इंटरव्यू लिए जाते हैं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे मरीजों को सही समय पर उपचार दिलाने के लिए रेफर करना नियम अनुसार अनिवार्य है।
-डॉ. अनुराधा गहलोत, अधीक्षक, ईएसआईसी हॉस्पिटल उदयपुर

डिग्गी में 21 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे

धर्म नगरी डिग्गी में बुधवार को श्री जी सर्व धर्म सेवा संस्थान ने 19वां सामूहिक विवाह सम्मेलन कराया। डिग्गी की गौड़ धर्मशाला में 21 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक रीति-रिवाजों से सात फेरे लेकर वैवाहिक बंधन में बंधे। नवदंपतियों को सुखद, समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामनारायण कांदला रहे। वे सरस डेयरी जयपुर के डायरेक्टर हैं। अखिल भारतीय हरियाणा गौड़ ब्राह्मण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जयनारायण शर्मा, लालचंद शर्मा, शंकर यादव विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों ने कहा कि सामूहिक विवाह सामाजिक एकता बढ़ाते हैं। आपसी सहयोग मजबूत होता है। सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा आगे बढ़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलती है। अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगता है। समिति अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया कि सम्मेलन की शुरुआत सुबह नवविवाहित जोड़ों की पारंपरिक निकासी से हुई। बैंड-बाजों के साथ निकासी निकली। परिजन, श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद गौड़ धर्मशाला परिसर में वैदिक आचार्यों के सान्निध्य में पाणिग्रहण संस्कार कराया गया। वैदिक मंत्रों की गूंज रही। शुभ मंगल गीत गूंजे। सभी 21 जोड़ों ने सात फेरे लेकर साथ निभाने का संकल्प लिया।

टोंक के कबाड़ बाजार में 8 घंटे सर्च ऑपरेशन 15 गोदामों को नोटिस थमाए, संचालक फरार

भास्कर न्यूज | टोंक धन्नातलाई क्षेत्र के गैस गोदाम और बिलाल मस्जिद के आसपास स्थित कबाड़ गोदामों पर बुधवार को पुलिस और परिवहन विभाग ने सर्च अभियान चलाया। कई कबाड़ गोदाम मालिक ताला लगाकर भाग छूटे। इस कार्रवाई का आधार आरटीओ टैक्स बकाया, फाइनेंस बकाया व संदिग्ध वाहनों की जांच करना रहा। इस दौरान पुलिस ने 15 गोदाम संचालकों को नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ लेकर वृत्ताधिकारी मृत्युंजय मिश्रा ने कोतवाली सहित छह थानों और पुलिस लाइन के जाब्ते, मय थाना प्रभारियों सहित करीब 8 घंटे गहन छानबीन की। दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि कबाड़ गोदामों में संदिग्ध वाहनों को लाकर काटा जा रहा है। दूसरी तरफ कबाड़ गोदामों पर पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही कई कबाड़ी अपने गोदामों पर ताला लगाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने बंद और खुले दोनों तरह के गोदामों की जांच करते हुए वहां खड़े वाहनों, खुले पड़े इंजनों, चेसिस, वाहन पार्ट्स और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया। साथ ही जिन वाहनों का आरटीओ टैक्स या फाइनेंस बकाया था, उनके रिकॉर्ड भी खंगाले गए। अधिकारियों ने इंजन और चेसिस नंबर का मिलान कर वाहनों की वैधता जांचने के साथ रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेजों की भी पड़ताल की। चोरी का माल की खरीद-फरोख्त वाले बख्शे नहीं जाएगे ^चोरी का माल खरीदने, छिपाने या खपाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की नजर हर संदिग्ध गोदाम और प्रतिष्ठान पर है। आज जांच हुई है, कल भी होगी। चोरी के सामान के साथ पकड़े गए तो गोदाम सीज होगा, गिरफ्तारी होगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान जारी रहेगा, भागकर या छिपकर कोई बच नहीं सकेगा। – मृत्युंजय मिश्रा, सीओ, टोंक सिटी

मसूदा में 19 साल का रिकॉर्ड टूटा, 5 घंटे में 6.4 इंच, ब्यावर में 6.2 इंच बारिश

मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने बुधवार को जिंदगी की रफ्तार रोक दी। तड़के 3:30 बजे शुरू हुई बारिश दोपहर 12:30 बजे तक लगातार 9 घंटे तक कभी तेज तो कभी धीमी होती रही। इस दौरान 6.2 इंच बारिश दर्ज हुई। वहीं मसूदा में 5 घंटे में 6.4 इंच बारिश दर्ज हुई। 19 साल पहले जुलाई में ही 24 घंटे में 6 इंच बारिश हुई थी। कस्बे के व्यस्तम मार्ग मसूदा अजमेर रोड स्थित छीपा पुलिया पर पानी का बहाव तेज हो गया। प्रशासन ने पुलिस बल तैनात कर वाहन चालकों की आवाजाही रोक दी है। मसूदा. छीपा पुलिया पर बहाव तेज, पुलिस ने आवाजाही रोकी। सबसे बदहाल स्थिति रेलवे स्टेशन पर रही। गंदे नाले का पानी स्टेशन परिसर में घुस गया। टिकट खिड़की, स्लीपर वेटिंग रूम और रेलवे डिस्पेंसरी जलमग्न हो गए। प्लेटफॉर्म और ट्रैक नंबर-1 पर पानी भरने से कर्मचारियों को निकासी के लिए मशक्कत करनी पड़ी। पार्किंग में घुटनों तक पानी भर गया, ऑटो बंद हो गए और दुकानों के बाहर खड़े दोपहिया वाहन बहाव में गिर गए। छावनी अंडरपास में सुबह 11 बजे पंप लगाकर पानी निकाला गया। रेलवे डिसपेंसरी में भरा पानी। जर्जर मकान की छत गिरी: ब्यावर खास में तेजाजी मंदिर के सामने वर्षों से बंद पड़े हरचंद चौधरी और कानाराम चौधरी के दो मंजिला जर्जर मकान की छत बारिश से ढह गई। पड़ोसियों ने बताया कि दीवारों में बड़ी दरारें हैं और पूरा मकान गिरने से जन-धन हानि का खतरा बना हुआ है। वहीं हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-3 में बिजली के तारों सहित पोल झूल गया। बिजली आपूर्ति बंद कर निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर रास्ता सुचारू कराया। जवाजा में 10 घंटे बारिश से जर्जर मकान की छत गिर गई। पीसांगन में 2 इंच से जयादा बारिश हुई।

थानमठुई में खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से बुजुर्ग की मौत

थानमठुई गांव में बुधवार अल सुबह बिजली के खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना को लेकर पुलिस थाने में मर्ग दर्ज करवाई गई। पुलिस के अनुसार संजय कुमार जाट निवासी थानमठुई ने रिपोर्ट दी कि उसके पिता जले सिंह जाट बुधवार सुबह घर से खेत में निनाण निकालने के लिए जा रहे थे। पीछे-पीछे मां चल रही थी। रास्ते में एक खेत के पास रास्ते पर भरे पानी को बचाकर जाने के दौरान उसके पिता का बिजली के खंभे से हाथ छू गया। बिजली के खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से उसके पिता की मौत हो गई। मां के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लाइनमैन को फोन कर लाइन बंद करवाई। भास्कर न्यूज | सादुलपुर एडीजे कोर्ट प्रथम ने करीब 6 वर्ष पुराने हत्या के मामले में दोषी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास व एक-एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस अनुसंधान में सुरेश सिंह निवासी लादड़िया व राजकुमार उर्फ लिलिया, धर्मेंद्र उर्फ फौजी, अमर सिंह, संजय निवासी बेरी (झुंझुनूं) के खिलाफ जुर्म धारा 302/34, 120 बी भादंसं में आरोप पत्र पेश किया गया। अभियोजन की तरफ से मामले में 27 गवाह परीक्षित करवाए गए और 106 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए। एडीजे प्रथम मुनेश चंद यादव ने मामले में परिस्थिति जन्य साक्ष्यों व मोबाइल कॉल डिटेल के साक्ष्य को महत्वपूर्ण मानते हुए पांचों आरोपियों को सजा सुनाई। मामले को लेकर राज्य की तरफ से एपीपी सुनील जांगिड़ ने पैरवी की। यह था मामला : घटना के अनुसार लादड़िया (चूरू) के रणवीर सिंह पुत्र मोहनराम जाट ने हमीरवास थाने में मामला दर्ज करवाया था कि उसका बेटा ओमप्रकाश जालोर में प्राइवेट नौकरी करता है। उसके बेटे के पास गांव की प्रियंका देवी लिव इन में रहती है। प्रियंका का पति सुरेश कुमार निवासी लादड़िया उसके बेटे से रंजिश रखने लगा। उसका बेटा 2 मई 2020 को प्रियंका के साथ लादड़िया आया था। वह प्रियंका को उसके गांव बेरी छोड़ने के गया था, लेकिन अगले दिन सुबह तक घर नहीं आया। प्रियंका ने बताया कि बेरी आते समय रास्ते में उसके परिवार के राजकुमार उर्फ लिलिया, संजय निवासी बेरी (झुंझुनूं), सुरेश निवासी लादड़िया और दो-तीन व्यक्ति मिले थे और उनकी बाइक का पीछा किया था। 3 मई को उसके बेटे का फोन आया कि ओमप्रकाश की हत्या हो गई है।

हरिसागर कुंड में डूबने की सूचना अफवाह निकली

लांबाहरिसिंह| ऐतिहासिक हरिसागर कुंड बाराखंबा छतरी गार्डन के सामने घाट के किनारे देर शाम चप्पल जोड़ी, कुरकुरे के पैकेट व बीयर की बोतल दिखाई पड़े पर कुंड में किसी व्यक्ति के डूबने की आंशका को लेकर कस्बेवासियों में सनसनी फैल गई। जहां सूचना मिलने पर एएसआई रामस्वरूप खींची मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से कुंड में जाल डालकर शंका का समाधान किया। जहां पुलिस व ग्रामीणों ने मंगलवार देर रात 12 बजे तक पानी के अन्दर तलाश किया। पुलिस ने बताया की हरिसागर कुंड के किनारे घाट पर चप्पल जोड़ी व बीयर शराब बोतल दिखाई दी। लोगों ने उसके आधार पर किसी के कुंड में डूबने की आंशका जताई। सूचना पर मौके पर पहुंचकर कुंड तलाश की लेकिन कुछ नहीं मिला।

सीकर रोड पर इंटरलॉकिंग, NHAI बोला- प्रयोग कर रहे:जलभराव-मिट्‌टी का कटाव रुकेगा, विशेषज्ञ- ट्रोले-डंपर का वजन नहीं झेल पाएंगी

राजधानी के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल सीकर रोड पर रोड नंबर-14 के आगे सड़क के दोनों किनारों पर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया है। एनएचएआई का कहना है कि बरसात के दौरान सड़क किनारे होने वाले जलभराव और मिट्टी कटाव को रोकने के लिए 500 मीटर के हिस्से में यह कार्य प्रयोग के तौर पर कराया जा रहा है। हालांकि सड़क निर्माण और हाईवे इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञ इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहां एम-20 या एम-30 ग्रेड की टाइल्स लगाई जा रही हैं तो वे लगातार भारी वाहनों का दबाव लंबे समय तक नहीं झेल पाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन-रात हजारों ट्रक, ट्रोले और कंटेनर गुजरते हैं। ऐसे में यदि भारी वाहन सड़क के किनारे चढ़ते-उतरते हैं तो इंटरलॉकिंग ब्लॉक बैठने, उखड़ने और असमतल होने का खतरा रहेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टिकाऊ व्यवस्था के लिए प्रबलित कंक्रीट शोल्डर, बेहतर स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और नियमित रखरखाव अधिक प्रभावी विकल्प माने जाते हैं, जबकि इंटरलॉकिंग ब्लॉक का उपयोग फुटपाथ, मीडियन, बस-बे, पैदल मार्ग या सीमित भार वाले क्षेत्रों में अधिक उपयुक्त माना जाता है। असल चुनौती जलभराव नहीं, ड्रेनेज व्यवस्था कई वर्षों से सीकर रोड़ के वीकेआई नंबर-14 और ढ़ेहर का बालाजी क्षेत्र में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी हुई है जो जाम का प्रमुख कारण है। इसके समाधान के लिए NHAI पहले भी सीमेंट कंक्रीट रोड, ड्रेनेज नेटवर्क और फ्लाईओवर निर्माण की योजना शुरू कर चुका है। अब फिर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया गया है। मजबूत सब-बेस और ड्रेनेज ही स्थायी समाधान
रिटायर्ड एक्सईएन हरिमोहन शर्मा के अनुसार इंटरलॉकिंग ब्लॉक जल निकासी सुधारने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए मजबूत सब-बेस, उचित कम्पेक्शन और वैज्ञानिक ड्रेनेज जरूरी है। सड़क किनारे भारी वाहन चढ़ते-उतरते हैं, ब्लॉक जल्द बैठ सकते हैं। सीकर रोड पर फिलहाल प्रयोग के तौर पर 500 मीटर की दूरी में टाइल्स लगाई जा रही है। यहां कच्ची सड़क थी, जिस पर बारिश में जलभराव होता था। उसी के किनारे यह टाइल्स लगाई गई हैं। -अजय आर्य, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई जयपुर

4 कारीगरों ने 40 दिन में बदली तस्वीर:11 किलो जर्मन गोल्ड से निखर रहा मोतीडूंगरी में ‘गजानन का दरबार’

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस बार गणेश चतुर्थी पर ‘गोल्डन गणपति’ के दर्शन होंगे। पहली बार परिसर के 40 फीट चौड़े और 35 फीट लंबे हिस्से को 11 किलो जर्मन गोल्ड वर्क से सजाया गया है। गर्भगृह की दीवारों पर सवा किलो 24 कैरेट सोने की मढ़ाई पूरी हो चुकी है। राजधानी में किसी मंदिर को इस तरह गोल्डन थीम पर सजाने का संभवतया यह पहला प्रयोग है। दरबार को स्वर्ण आभा देने वाले सभी कारीगर मुस्लिम हैं। 20 हजार गोल्ड वर्क से सजा मंदिर मंदिर परिसर को सजाने के लिए 6×6 इंच आकार के करीब 20 हजार जर्मन गोल्ड वर्क लगाए गए हैं। सुनहरी परत और बारीक नक्काशी से मंदिर का पूरा भीतरी हिस्सा अब स्वर्ण आभा में चमक रहा है। छत पर हाथों से नक्काशी-पेंटिंग मंदिर की छत पर पारंपरिक शैली में हाथ से नक्काशी और पेंटिंग की गई है। गोल्ड वर्क, राजस्थानी शिल्प और कलात्मक चित्रकारी का मेल मंदिर को पारंपरिक और आधुनिक सजावट का अनूठा स्वरूप दे रहा है। 4 कारीगरों ने 40 दिन में बदली तस्वीर कारीगर सईदउल्ला मिर्जा ने बताया कि चार विशेषज्ञ कारीगरों ने करीब 40 दिन तक लगातार काम कर सजावट पूरी की है। इसमें पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक फिनिशिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। गणेश चतुर्थी पर गणेशजी स्वर्ण आभा में दिखेंगे। मंदिर में हो रही सजावट भी तैयारी का ही हिस्सा है। ठाकुरजी की पोशाक और आभूषण भी विशेष होंगे। पूरे परिसर को गोल्डन थीम पर सजाया जा रहा है।
-कैलाश शर्मा, महंत, मोतीडूंगरी गणेश मंदिर