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सिंधिया रियासत की 400 साल पुरानी तोप चोरी:3000 फीट नीचे उतारी; ब्लैक मार्केट में 5 करोड़ तक कीमत, नरवर किले में अब 13 तोपें बचीं

मध्य प्रदेश के शिवपुरी के नरवर किले से सिंधिया रियासत की 400 साल पुरानी तोप चोरी हो गई। बदमाश किले की ओपन कचहरी से 16वीं शताब्दी की करीब 3500 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप चुराकर ले गए। इंटरनेशनल एंटीक ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत 3-5 करोड़ रुपए हो सकती है। चोरों ने वारदात को पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया है। तोप को पहले गद्दों में लपेटा, फिर बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा। इसके बाद लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए। वारदात 15 जुलाई की रात की है। नरवर किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात नहीं थे। चोरों ने इसी का फायदा उठाया। शक है कि वारदात को इंटरनेशनल एंटीक ब्लैक मार्केट से जुड़े लोगों न अंजाम दिया है। किले के बाहर हैवी गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं। ये तस्वीरें देखिए… 10 दिन पहले भी की थी चोरी की कोशिश जांच में यह भी सामने आया है कि चोरों ने इस चोरी की पूरी तैयारी पहले से कर रखी थी। 4-5 जुलाई की रात बदमाशों ने इसी तोप को उसके मूल स्थान से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण उसे वहां से ले नहीं जा सके। घटना के बाद सुरक्षा गार्डों ने नरवर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद 15-16 जुलाई की रात आरोपी पूरी तैयारी के साथ दोबारा लौटे। इस बार वे बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली लेकर आए और उसी की मदद से तोप को नीचे उतारकर वाहन में भरकर फरार हो गए। अब किले में बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। चोरी के बाद अब वहां 13 तोपें ही बची हैं। कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं ने कराया था। इसके बाद 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया। यहां रखी गई सभी तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी हैं। इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं। घटनास्थल से मिले कई अहम सुराग राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान घटनास्थल से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के निशान मिले हैं। इसके अलावा किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहन के टायरों के निशान भी मिले हैं। सुरक्षा गार्डों ने मानी लापरवाही सुरक्षा गार्ड बालकिशन बाल्मीक ने बताया कि किले पर रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां न टॉर्च उपलब्ध है और न ही अन्य सुरक्षा संसाधन, इसलिए वह रात में अपने घर चला गया था। दूसरे गार्ड शरणलाल जाटव ने भी स्वीकार किया कि घटना के समय वह ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। उसने यह भी माना कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी पुलिस को बताई गई थी, वह झूठी थी। 6 गार्ड तैनात, फिर भी हो गई चोरी नरवर किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड तैनात हैं। इनमें चार गार्ड दिन और दो गार्ड रात की ड्यूटी करते हैं। घटना वाली रात दोनों रात के गार्ड ड्यूटी छोड़कर घर चले गए थे। इसी वजह से चोरों को ऐतिहासिक तोप चोरी करने का मौका मिल गया। पुलिस और पुरातत्व विभाग की जांच जारी राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के साथ संयुक्त जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया जाएगा। वहीं नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि जांच में सुरक्षा गार्डों की लापरवाही सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। साथ ही चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन और आरोपियों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

हाईकोर्ट ने कहा- एक समय में एक पुलिसकर्मी दो-जगह कैसे?:यह मानवीय रूप से संभव नहीं; एनडीपीएस मामले में दोषी की सजा को किया सस्पेंड

राजस्थान हाईकोर्ट ने नशीली दवाओं के स्टॉक रखने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा सस्पेंड करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। जस्टिस अनिल उपमन की कोर्ट ने कहा- पूरे मामले में जिस कॉन्स्टेबल की सूचना पर कार्रवाई करना बताया गया है, वह कार्रवाई के समय घटना स्थल पर मौजूद था। वहीं उसी कॉन्स्टेबल को ठीक उसी समय दूसरी जगह हुई कार्रवाई में भी उपस्थित होना पाया गया है। ऐसे में एक समय में एक ही पुलिसकर्मी दो अलग-अलग जगह की कार्रवाई में कैसे उपस्थित हो सकता है। कोर्ट ने कहा- यह मानवीय रूप से तो संभव नहीं है। अदालत ने कहा- इस मामले में जब्ती की कार्रवाई 6:40 बजे की गई। वहीं घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर दूसरे मामले में जब्ती की कार्रवाई 7:10 बजे की गई। कोर्ट ने आरोपी की सजा को निलंबित करते हुए डीजीपी से कहा- वे पूरे मामले में स्वतंत्र जांच करके तीन महीने में रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने यह आदेश आरोपी कमल रामचंदानी के सजा स्थगन के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं लिए नमूने आरोपी के अधिवक्ता शांतनु बंसल ने कोर्ट को बताया- पुलिस के अनुसार कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल की सूचना पर मुरलीपुरा थाना पुलिस ने 31 जनवरी 2022 को मुरलीपुरा स्कीम सर्किल स्थित कमल मेडिकल एंड प्रोविजनल स्टोर पर कार्रवाई करते हुए नशीली दवाओं का स्टॉक बरामद किया। आरोपी के पास इन दवाओं के संबंध में खरीद का बिल और कोई वाउचर नहीं मिला। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया, लेकिन मामले में कानून प्रवाधानों का पालन नहीं किया गया। जब्ती के बाद अगले दिन 1 फरवरी को पुलिस ने नमूने एफएसएल को भेज दिए। वहीं एनडीपीएस एक्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही नमूने लेने का प्रावधान है। जब्ती की कार्रवाई भी इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अधिकारी के द्वारा ही की जा सकती है। इस मामले में मौके पर पहुंची औषधि नियंत्रण अधिकारी अरुणा मीणा ने बयानों में कहा- मेरे घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही दवाओं की बरामदगी हो चुकी थी। यह बरामदगी कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल द्वारा की गई थी। मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं
अपील में कहा गया कि मामलें में पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया। सभी गवाह पुलिसकर्मी ही थे। जब्ती अधिकारी ने अपनी जिरह में स्वीकार किया है कि कथित बरामदगी ऐसे स्थान से हुई, जहां अनेक अन्य दुकानें स्थित थी और वहां सामान्यत लोगों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। लेकिन उसके बाद भी तलाशी और जब्ती की पूरी कार्रवाई में किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया। पुलिस केवल यह कहकर अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती है कि कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र गवाह बनने के लिए तैयार नहीं हुआ।

इंडियन बुलेट-ट्रेन प्रोजेक्ट लेट होने से पूर्व जापानी मंत्री नाराज:कहा- हमने मेहनत की, लेकिन भारतीय मंत्री का रवैया खराब, वादों-शर्तों से पलटे

भारत के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी होने पर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि देरी की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा- मैं खुद प्रोजेक्ट से जुड़ा रहा। जापानी टीम ने पूरी मेहनत की, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। भारतीय पक्ष ने वादे पूरे नहीं किए, समझौतों से पीछे हट गए। अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ा। माकीहारा ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर यह बात कही। पीएम नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने माकीहारा के बयान पर कहा- भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। जापान की पीएम के दौरे का भी असर नहीं- माकिहारा माकिहारा के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी। इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है। माकिहारा ने पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। माकीहारा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी 100% भारतीय पक्ष की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- मुंबई और अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। जापान की E-10 ट्रेन सीरीज अभी डेवलप की जा रही है और इसकी आपूर्ति 2030 के शुरुआती वर्षों में होगी। दोनों देशों ने फैसला किया है कि 2027 में शुरू होने वाले पहले सेक्शन पर भारतीय हाई स्पीड ट्रेन शुरू की जाएगी। भारत ने आरोप खारिज किए भारत सरकार ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जापान के साथ मतभेद की खबरों को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि पूर्व जापानी मंत्री की टिप्पणी उनकी निजी राय है और उसका वास्तविक स्थिति से कोई मेल नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने संबंधित पोस्ट देखी है। यह एक व्यक्ति की निजी राय है, जो तथ्यों से काफी अलग है।” मंत्रालय ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है और दोनों देश इस परियोजना पर मिलकर काम कर रहे हैं। 2017 में शुरू हुआ बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी। अभी सफर में सात-आठ घंटे लगते हैं। प्रोजेक्ट में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान की सरकारी एजेंसी JICA देगी। भारत को इस पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा। इस कर्ज को चुकाने के लिए भारत को 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। वह शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को दे रहा है। रूट का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा ——————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- सुजुकी दो-तिहाई कारें भारत में बना रही:जापान की मदद से देश में खाद के 1000 कारखाने लगेंगे; PM ताकाइची को बहन कहा भारत और जापान ने आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के लिए ‘जापान बिजनेस वीक’ शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत PMO के सीनियर अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से बातचीत करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

मेसी बोले- हमें कुछ भी थाली में परोसकर नहीं मिला:फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना रेफरी से फेवर मिलने के आरोपाें का जवाब दिया

अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया कि 2026 फीफा वर्ल्ड कप में उनकी टीम को रेफरी से फेवर मिला है। मेसी ने कहा कि मौजूदा चैंपियन टीम ने अपनी मेहनत और जुझारूपन से लगातार दूसरी बार फाइनल में जगह बनाई है। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 2-1 की जीत के बाद मेसी ने कहा- चाहे किसी को पसंद हो या न हो, हम पिछले चार साल से सर्वश्रेष्ठ रहे हैं। हमने साबित किया है कि हमारी सफलता कोई तुक्का नहीं है और हमें कुछ भी मुफ्त में नहीं मिला है। अटलांटा में बुधवार को हुए सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने 55वें मिनट में एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त बनाई थी। हालांकि, इंग्लैंड के डिफेंसिव रुख का फायदा उठाते हुए अर्जेंटीना के लिए एंजो फर्नांडीज और लाउटारो मार्टिनेज ने देर से गोल कर टीम को जीत दिलाई। टूर्नामेंट के दौरान अर्जेंटीना के मैचों में रेफरी के फैसलों पर सवाल उठे थे। स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में ब्रिल एम्बोलो को रेड कार्ड मिलने पर स्विस कोच मूरत याकिन ने कहा था, “हमें एक ऐसे नियम की सजा मिली जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह हार बहुत दर्दनाक है।” मिस्र फुटबॉल एसोसिएशन ने भी राउंड ऑफ 16 के मैच में विवादास्पद फैसलों पर नाराजगी जताई थी। मिस्र का आरोप था कि मुस्तफा जिको का गोल VAR रिव्यू में गलत तरीके से रद्द किया गया और मोहम्मद सलाह को गिराए जाने के बावजूद पेनल्टी नहीं दी गई। अर्जेंटीना अब रविवार को न्यू जर्सी में होने वाले फाइनल में स्पेन का सामना करेगा। वहीं, शनिवार को मियामी में तीसरे स्थान के लिए फ्रांस और इंग्लैंड के बीच मुकाबला होगा। इससे पहले अर्जेंटीना ने केप वर्डे, मिस्र और स्विट्जरलैंड के खिलाफ कड़े मुकाबलों के बाद जीत हासिल की थी। इंग्लैंड को हराकर अर्जेंटीना फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है। लियोनेल मेसी की टीम ने बुधवार रात को दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराया। टीम 85 मिनट 0-1 से पिछड़ रही थी। उसके बाद आखिरी 7 मिनट में दो गोल दागे और जीत हासिल की। फाइनल में उसका मुकाबला 19 जुलाई को स्पेन से होगा। अटलांटा में एंथनी गॉर्डन के 55वें मिनट के गोल से इंग्लैंड फाइनल की ओर बढ़ता दिख रहा था। लेकिन लियोनेल मेसी की टीम ने आखिर वक्त में मैच का रुख पलट दिया। मेसी के पास पर एंजो फर्नांडेज ने 25 गज से शानदार गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। फिर इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेसी के सटीक क्रॉस पर सब्स्टीट्यूट लॉटारो मार्टिनेज ने हेडर से गोल दागकर जीत दिला दी। जीत के बाद अर्जेंटीना के प्लेयर्स ने मैदान पर ‘Las Malvinas son Argentinas’ (फॉकलैंड/माल्विनास अर्जेंटीना के हैं) लिखा हुआ बैनर लहराया था। इस पर विवाद हो गया और दोनों देशों के फैंस भिड़ गए। फॉकलैंड अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीप है, जिस पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। 2 अप्रैल 1982 को अर्जेंटीना ने फॉकलैंड पर कब्जा कर लिया। फिर ब्रिटेन ने 74 दिन चले युद्ध के बाद द्वीपों पर दोबारा कब्जा हासिल कर लिया। 1816 में स्पेन से आजाद होने के बाद फॉकलैंड अर्जेंटीना का था। अर्जेंटीना 7वीं बार फाइनल में पहुंचा है यह अर्जेंटीना का 7वां वर्ल्ड कप फाइनल होगा। टीम इससे पहले 1930, 1978, 1986, 1990, 2014 और 2022 में फाइनल खेल चुकी है। अर्जेंटीना 1978, 1986 और 2022 में विश्व कप जीत चुकी है। अब उसके पास लगातार दूसरी बार और कुल चौथा खिताब जीतने का मौका है। पहला हाफ- फुटबॉल कम, लड़ाई ज्यादा मैच की शुरुआत से ही यह साफ हो गया था कि मुकाबला सिर्फ फुटबॉल का नहीं है। तीसरे ही मिनट में इंग्लैंड के इलियट एंडरसन पर टैकल के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी आमने-सामने आ गए। रेफरी इस्माइल एलफाथ को बीच-बचाव करना पड़ा। पूरे पहले हाफ में कई बार खिलाड़ी भिड़े और फाउल की भरमार रही। 33वें मिनट में इंग्लैंड को पहला मौका मिला। डेक्लन राइस की फ्री-किक पर जॉन स्टोन्स ने हेडर लगाया, लेकिन गेंद नेट में लगाकर बाहर चली गई। अर्जेंटीना की ओर से एंजो फर्नांडेज ने 38वें मिनट में बॉक्स के बाहर से शॉट लगाया, जो गोलपोस्ट के ऊपर निकल गया। 37वें मिनट में लियोनेल मेसी आगे बढ़े, लेकिन इलियट एंडरसन ने उन्हें रोकने के लिए फाउल किया। इस पर एंडरसन को येलो कार्ड मिला। 42वें मिनट में जूड बेलिंगहम की जर्सी खींचने पर अर्जेंटीना के लिसांद्रो मार्टिनेज को भी कार्ड दिखाया गया। हाफ टाइम की सीटी के बाद भी दोनों टीमों के खिलाड़ी रेफरी से बहस करते रहे और मेसी सबसे आखिर में मैदान से बाहर गए। दूसरे हाफ की शुरुआत में इंग्लैंड का गोल ब्रेक के बाद अर्जेंटीना ने तेज शुरुआत की। जूलियन अल्वारेज ने 48वें मिनट में पहला ऑन-टारगेट शॉट लगाया, जिसे जॉर्डन पिकफोर्ड ने शानदार तरीके से रोक दिया। 55वें मिनट में मैच का पहला गोल इंग्लैंड ने किया। हैरी केन के लंबे पास पर अर्जेंटीना का डिफेंस पूरी तरह क्लियरेंस नहीं कर सका। डेक्लन राइस ने गेंद मॉर्गन रोजर्स को दी। रोजर्स ने दाईं ओर से सटीक क्रॉस डाला, जिस पर एंथनी गॉर्डन ने बॉक्स से आसान फिनिश किया। यह टूर्नामेंट में गॉर्डन का पहला गोल था और इंग्लैंड 1-0 से आगे हो गया। मेसी के पास ने पलटा मैच, लॉटारो ने तोड़ा इंग्लैंड का सपना गोल खाने के बाद अर्जेंटीना ने अटैकिंग गेम खेलना शुरू कर दिया। टीम को 86वें मिनट में कॉर्नर मिला। लियोनेल मेसी ने शॉर्ट कॉर्नर खेलकर गेंद एंजो फर्नांडेज को दी। फर्नांडेज ने करीब 25 गज की दूरी से शॉट लगाया। गेंद खिलाड़ियों के बीच से निकलते हुए सीधे नेट में जा समाई। इस गोल के साथ स्कोर 1-1 हो गया। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेसी ने फिर कमाल कर दिखाया। उन्होंने दाईं ओर से बॉल बॉक्स में भेजी। सब्स्टीट्यूट स्ट्राइकर लॉटारो मार्टिनेज डिफेंडरों से आगे निकले और शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। अर्जेंटीना ने 7 मिनट के भीतर मैच पलटते हुए 2-1 की बढ़त बना ली। मैच के टॉप-5 रिकॉर्ड्स… 1. लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फाइनल में स्कालोनी अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाले इतिहास के 7वें कोच बन गए। उनसे पहले यह उपलब्धि सिर्फ विटोरियो पोजो, हेल्मुट शॉन, मारियो जगालो, कार्लोस बिलार्डो, फ्रांज बेकेनबाउर और डिडिएर डेशां ने हासिल की थी। 2. अर्जेंटीना पहली बार लगातार दो फाइनल में 2022 में चैंपियन बनने के बाद अर्जेंटीना ने 2026 में भी फाइनल में जगह बना ली। टीम इतिहास में पहली बार लगातार दो वर्ल्ड कप फाइनल खेलेगी। अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप इतिहास में अपना छठा सेमीफाइनल खेला। अर्जेंटीना कभी भी सेमीफाइनल नहीं हारा। 3. अर्जेंटीना ने लगातार 14वां मैच जीता इंग्लैंड को हराकर अर्जेंटीना ने सभी प्रतियोगिताओं में लगातार 14वीं जीत दर्ज की। टीम सितंबर 2025 में इक्वाडोर से हारने के बाद एक भी मैच नहीं हारी है। 4. एक वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल अर्जेंटीना ने मौजूदा टूर्नामेंट में 19 गोल किए हैं। यह टीम का एक वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड है। अर्जेंटीना ने लगातार 14 वर्ल्ड कप मैचों में कम से कम 2 गोल किए हैं। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 5. हैरी केन सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले आउटफील्ड खिलाड़ी अर्जेंटीना के खिलाफ उतरते ही हैरी केन ने इंग्लैंड के लिए 121वां मैच खेला। वह वेन रूनी को पीछे छोड़कर इंग्लैंड के सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले आउटफील्ड खिलाड़ी बन गए। ओवरऑल उनसे आगे सिर्फ गोलकीपर पीटर शिल्टन (125 मैच) हैं। भास्कर नॉलेज 1. भारत ने 1950 में खुद छोड़ दिया फीफा वर्ल्ड कप खेलने का मौका 1950 में भारत बिना कोई क्वालिफाइंग मैच खेले फीफा वर्ल्ड कप के लिए चुन लिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि एशिया की कई टीमों ने टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया था, लेकिन ब्राजील तक लंबी यात्रा, ज्यादा खर्च, टीम की पूरी तैयारी न होना और उस समय ओलंपिक को ज्यादा महत्व दिए जाने के कारण अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने टीम को वर्ल्ड कप में नहीं भेजा। इसके बाद से आज तक भारत फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया है। 2. 1982 से हर फीफा वर्ल्ड कप की फुटबॉल पाकिस्तान में बन रही 1982 के स्पेन वर्ल्ड कप से लेकर 2026 वर्ल्ड कप तक लगभग हर आधिकारिक मैच बॉल पाकिस्तान के सियालकोट शहर में तैयार की गई है। 2026 वर्ल्ड कप की आधिकारिक गेंद ‘Trionda’ भी सियालकोट की फॉरवर्ड स्पोर्ट्स कंपनी ने एडिडास के लिए बनाई है। ———————————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… स्पेन 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल में; फ्रांस को 2-0 से हराया स्पेन 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है। टीम ने पहले सेमीफाइनल में फ्रांस को 2-0 से हराकर दूसरी बार फाइनल में जगह बनाई। डलास स्टेडियम में मिकेल ओयारजाबाल ने 22वें मिनट में पेनल्टी पर पहला गोल किया। इसके बाद 58वें मिनट में पेड्रो पोरो ने गोल दागकर स्पेन की जीत पक्की कर दी। पढ़ें पूरी खबर

मर्सिडीज की 8 कंस्ट्रक्टर्स जीत और हैमिल्टन के 6 खिताब:300 सेंसर और एआई तकनीक से मर्सिडीज बनी फॉर्मूला-1 की सबसे सफल टीम

फॉर्मूला-1 की रेस देखते समय हमारी नजर आमतौर पर ड्राइवर की स्पीड, ओवरटेक या आखिरी लैप पर टिक जाती है। लगता है कि जीत उसी की होगी जिसकी कार सबसे तेज होगी या जिसका ड्राइवर सबसे बेहतर होगा। लेकिन आज की फॉर्मूला-1 में एक और खिलाड़ी है, जो ट्रैक पर दिखाई नहीं देता। उसका नाम है- डेटा। इसी डेटा ने मर्सिडीज-एएमजी पेट्रोनास को दुनिया की सबसे मजबूत तकनीकी टीमों में शामिल कर दिया है। रेस शुरू होते ही मर्सिडीज की हर कार सिर्फ दौड़ती नहीं, बल्कि लगातार ‘बोलती’ भी रहती है। कार में लगे करीब 300 सेंसर हर सेकंड 10 लाख से ज्यादा जानकारी टीम तक भेजते हैं। इंजन कितना गर्म है, टायर कितने घिस चुके हैं, ब्रेक कितने दबाव में हैं, ईंधन कितनी तेजी से खर्च हो रहा है, ड्राइवर कब एक्सिलरेटर दबा रहा है और कब ब्रेक लगा रहा है… हर छोटी-बड़ी चीज लगातार रिकॉर्ड होती रहती है। ट्रैक पर ड्राइवर स्टीयरिंग संभाल रहा होता है, लेकिन सैकड़ों किलोमीटर दूर कंट्रोल रूम में इंजीनियर इन आंकड़ों को पढ़ रहे होते हैं। कई बार इन्हीं आंकड़ों से कुछ सेकंड में फैसला लिया जाता है कि ड्राइवर को पिट स्टॉप के लिए बुलाना है या नहीं, टायर बदलने हैं या नहीं, या फिर रणनीति पूरी तरह बदलनी है। यही कुछ सेकंड पूरी रेस का नतीजा बदल सकते हैं। मर्सिडीज के आईटी डायरेक्टर माइकल टेलर 25 साल से टीम के साथ हैं। उनका मानना है कि पहले जीत का पैमाना सिर्फ स्टॉपवॉच थी, लेकिन अब कार के लगभग हर हिस्से को मापा जाता है। उनका सीधा-सा सिद्धांत है- जिस चीज को मापा जा सकता है, उसे बेहतर भी बनाया जा सकता है। हालांकि रेस के दौरान कार से लाइव डेटा भेजने की शुरुआत नई नहीं है। फॉर्मूला-1 में यह तकनीक 1980 के दशक से मौजूद है। ब्रिटेन के ब्रैक्ली में बने मर्सिडीज के विशाल टेक्नोलॉजी कैंपस में यही आंकड़े नई कारों का डिजाइन तय करते हैं। कौन-सा पार्ट बेहतर होगा, कहां वजन कम करना है, हवा का असर कैसे घटाना है और अगली रेस में क्या बदलाव करने हैं, लगभग हर फैसला डेटा के आधार पर लिया जाता है। अब इस खेल में एआई भी उतर चुका है। मर्सिडीज मशीन लर्निंग और एआई की मदद से प्रोडक्शन प्लानिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और दूसरे तकनीकी काम आसान बना रही है। फिर भी टीम पूरी तरह मशीनों पर भरोसा नहीं करती। अंतिम फैसला आज भी इंसान ही लेता है। तकनीक सलाह देती है, लेकिन जिम्मेदारी इंसान की रहती है। यही वजह है कि मर्सिडीज ने 2014 से 2021 तक लगातार आठ कंस्ट्रक्टर्स चैम्पियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया। इसी दौरान लुईस हैमिल्टन ने टीम के साथ छह बार ड्राइवर्स वर्ल्ड चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। मौजूदा सीजन में भी मर्सिडीज 333 अंक लेकर कंस्ट्रक्टर्स चैम्पियनशिप में टॉप पर है। उसके ड्राइवर किमी एंटोनेली (179 अंक) पहले और जॉर्ज रसेल (154) दूसरे नंबर पर हैं।

पाकिस्तानी स्पिनर मोहम्मद नवाज डोप टेस्ट में फेल हुए:ICC ने लगाया 3 महीने का बैन, 1 मई से लागू माना गया प्रतिबंध

पाकिस्तान के बाएं हाथ के स्पिनर मोहम्मद नवाज को ICC एंटी-डोपिंग कोड का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। नवाज ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, जिसके बाद उन पर 3 महीने का बैन लगाया गया है। अगर वे नशीले पदार्थों के इलाज से जुड़ा ट्रीटमेंट प्रोग्राम पूरा कर लेते हैं, तो इस प्रतिबंध के समय को घटाकर 1 महीना कर दिया जाएगा। कोलंबो में हुआ था नवाज का डोपिंग टेस्ट
32 साल के नवाज का यह डोपिंग टेस्ट श्रीलंका के कोलंबो में हुआ था। 7 फरवरी को ICC मेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच के बाद उनका सैंपल लिया गया था। इस टेस्ट में नवाज के शरीर में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ (कार्बोक्सी-THC) के अंश पाए गए थे, जो ICC एंटी-डोपिंग कोड के तहत बैन है। इसका संबंध खेल के प्रदर्शन से नहीं था
नवाज ने अपनी इस गलती को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने यह साबित किया कि इस प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल उन्होंने आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन (यानी खेल के समय से अलग) किया था। साथ ही इसका उनके खेल के प्रदर्शन को बेहतर करने से कोई संबंध नहीं था। 1 मई से लागू माना गया प्रतिबंध
नवाज पर लगा यह 3 महीने का प्रतिबंध 1 मई 2026 से लागू माना गया है। 1 मई से उन्होंने अपना प्रोविजनल सस्पेंशन शुरू किया था। अब ढाई महीने का निलंबन पूरा करने और ट्रीटमेंट प्रोग्राम में शामिल होने के कमिटमेंट के बाद उनका प्रोविजनल सस्पेंशन हटा लिया गया है। अगर वे ICC की संतुष्टि के अनुसार इस ट्रीटमेंट प्रोग्राम को पूरा कर लेते हैं, तो उन्हें आगे कोई अतिरिक्त बैन नहीं झेलना होगा। नीदरलैंड्स मैच और उसके बाद के रिकॉर्ड्स रद्द
ICC एंटी-डोपिंग कोड के नियमों के तहत नवाज के कुछ मैचों के रिकॉर्ड्स को अमान्य कर दिया गया है। 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के खिलाफ खेले गए मैच और उसके बाद से लेकर 1 मई 2026 तक खेले गए सभी मैचों में उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन और रिकॉर्ड्स को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। ————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… तीसरा वनडे-न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज को 6 विकेट से हराया:सीरीज में 2-1 से आगे; लेनोक्स को 4 विकेट; विंडीज ने 19 रन पर 6 विकेट खोए न्यूजीलैंड ने तीसरे वनडे में वेस्टइंडीज को 6 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ कीवी टीम ने 5 मैचों की वनडे सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है। गयाना में पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की टीम 140/9 रन ही बना सकी। जवाब में न्यूजीलैंड ने 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। पूरी खबर

NEET रिजल्ट: किसान के बेटे की आई 11वीं रैंक:अभिलाष बाेले- कॉन्फिडेंस कभी नहीं खोना चाहिए, 18वीं रैंक अचीवर कृतिक बोले-सोशल मीडिया ऐप कभी इंस्टॉल नहीं किए

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET-2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। सीकर में कोचिंग करने वाले स्टूडेंट अभिलाष ने NEET 2026 में ऑल इंडिया लेवल पर 11वीं रैंक हासिल की है। अभिलाष के पिता जयप्रकाश एक किसान हैं। अभिलाष ने 720 में से 705 नंबर हासिल किए हैं। सीकर जिले के ग्रामीण इलाकों के बच्चों ने भी NEET रिजल्ट में बेहतरीन अंक हासिल किए हैं। 11वीं रैंक अचीवर अभिलाष का स्कोर 705, कहा- कभी भी कॉन्फिडेंस कम नहीं करना चाहिए NEET परीक्षा परिणाम में सीकर के स्टूडेंट अभिलाष ने ऑल इंडिया लेवल पर 11वीं रैंक हासिल की है। 3 मई को जो परीक्षा हुई थी उसमें अभिलाष ने 705 नंबर हासिल किए थे और इस बार भी अभिलाष ने उतना ही स्कोर किया है। अभिलाष का कहना है कि रेगुलर स्टडी और रेगुलर डाउट क्लियर होने से कोई भी प्रॉब्लम नहीं हुई। अभिलाष ने बताया कि 11वीं क्लास से सीकर में रहकर पढ़ाई शुरू कर दी थी। पिता खेती करते हैं और घर में कोई कैरियर के लिए गाइड करने वाला नहीं था। टीचर ताऊ ने कहा कि डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। 12वीं कक्षा के साथ परीक्षा देनी थी लेकिन तब उम्र कम थी। इस बार पहले अटेम्प्ट में 3 मई को परीक्षा दी वो कैंसिल हो गई। फिर निराश हुआ तो परिवार और टीचर्स ने मोटिवेट किया। अभिलाष ने कहा कि कॉन्फिडेंस बिल्कुल भी नहीं खोया। कई बार ऐसा होता है कि स्टूडेंट को पेपर काफी हद तक इजी लगता है लेकिन कुछ क्वेश्चंस देखकर कॉन्फिडेंस खो देते हैं। ऐसे में चाहे तैयारी कैसी भी हो लेकिन कॉन्फिडेंस कम नहीं करना चाहिए।
18वीं रैंक होल्डर कृतिक बोले- सोशल मीडिया कभी नहीं चलाया सीकर में कोचिंग करने वाले और ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल करने वाले कृतिक जैन ने बताया- मैं रेगुलर 5 से 6 घंटे पढ़ाई करता था। 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा रद्द होने के बाद एक बार तो मुझे दुख हुआ, क्योंकि मैं 705 नंबर हासिल करने वाला था। लेकिन जैसे ही परीक्षा की दूसरी डेट डिक्लेअर हुई, मैंने फिर से लगातार तैयारी करना शुरू कर दिया। मैंने सोशल मीडिया से काफी दूर रहता हूं। मैंने अपने मोबाइल में स्नैपचैट या इंस्टाग्राम कभी इंस्टॉल ही नहीं किया। NCERT बुक्स को बताया सफलता की कुंजी NEET परीक्षा में सवाईमाधोपुर के रहने वाले सौरभ अग्रवाल ने ऑल इंडिया लेवल पर 87वीं रैंक हासिल की है। सौरभ के पिता संजय अग्रवाल सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। सौरभ अग्रवाल का कहा- नीट परीक्षा में इस बड़ी उपलब्धि को हासिल करने में सबसे बड़ा योगदान NCERT बेस्ड स्टडी मैटेरियल का रहा। इसके अलावा रेगुलर क्लासेज और रोजाना डाउट सॉल्यूशन से पढ़ाई और ज्यादा आसान हो गई। 11वीं क्लास से ही सीकर में रहकर अपनी तैयारी कर रहे हैं। NEET-2026 के रिजल्ट की कट-ऑफ क्वालीफाई करने वाले स्टूडेंट्स के फोटो दैनिक भास्कर ऐप पर पब्लिश किए जाएंगे। इसके लिए नाम, रैंक, पिता का नाम, मार्कशीट की फोटो और पता इस नंबर 8058948066 पर भेज सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट बोला-SIR से नाम कटने पर नागरिकता नहीं जाती:बंगाल सरकार-EC को नोटिस; योजनाओं का लाभ न रोकने वाली याचिका पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में से नाम हटने से किसी की नागरिकता नहीं जाती है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि बंगाल में जिन लोगों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के कारण कट गए हैं उनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद नहीं होना चाहिए। साथ ही नागरिकता पर अंतिम फैसला होने तक सभी सुविधाएं मिलती रहनी चाहिए। इस मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने चुनाव आयोग (EC) और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग बंगाल सरकार ने योजनाओं का लाभ देने से मना किया दरअसल बंगाल सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत अन्नपूर्णा योजना जैसी योजनाओं का लाभ उन लोगों को देने से मना करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किए हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। दावा किया गया कि उन लोगों को जाति सर्टिफिकेट भी नहीं दिए जा रहे हैं। बंगाल में वोटर लिस्ट से 58 लाख से ज्यादा नाम कटे पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 58.20 लाख नाम कट गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 7.66 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 7.08 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया। काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 58.20 लाख वोटर्स में से 24.17 लाख मृत पाए गए, 1.38 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, 32.65 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे। SIR से जुड़ा अपडेट… चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को तीन चरणों में लागू किया है। पहला फेज: सबसे पहले SIR बिहार में लागू हुआ। फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो चुकी है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। दूसरा फेज: उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप में दूसरे चरण का SIR हुआ।
तीसरा फेज: आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में SIR शुरू किया है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ शामिल हैं। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… नए वोटर को देना होगा माता-पिता के SIR का ब्योरा, अभी केवल पुराने वोटर्स पर लागू था चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले नए आवेदकों के लिए भी नया नियम लागू किया है। अब फॉर्म-6 भरकर वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने वाले हर नए वोटर को अपने माता-पिता के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का ब्योरा भी देना होगा। पूरी खबर पढ़ें…

जोधपुर की नेशनल प्लेयर ने क्रेक किया नीट:नीट रद्द का सुन पढ़ाई छूट गई थी; पिता बेचते हैं दूध बेटी बनेंगी डॉक्टर

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार रात NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी किया। 11.21 लाख स्टूडेंट मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। इसमें जोधपुर के मोहित अग्रवाल ने 335 वीं रैंक के साथ सिटी ऑप किया है। मोहित के ऑल इंडिया रैंक 335 और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 19वीं रैंक आई है। मोहित के 720 में 677 नंबर आए हैं। मोहित के पिता का निधन 2008 में मेहरानगढ़ किले के चामूंडा माता मंदिर में हुई भगदड़ में हो गया था। पिता की मौत के 14 दिन बाद मोहित का जन्म हुआ। उनकी परवरिश उनकी माता तरुणा अग्रवाल ने की। वे सरकारी नौकरी में हैं। वहीं जोधपुर की ​डिंपल खींची ने नीट एग्जाम क्रेक कर 5 हजार 609वीं रैंक हासिल की है। इसके साथ ही हिमांशी सिंह की ऑल इंडिया रैकिंग 512 है। हिमांशी ने बताया कि उन्होंने अपनी स्टडी को कंटीन्यू रखा और लगातार रिवीजन करती रहीं। बोले-परिवार का सपना था वे डॉक्टर बने मोहित ने बताया कि जब री-नीट एग्जाम के बारे में सुना तो वे डिप्रेशन में आ गए थे। लेकिन, उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और ये रैंक हासलि की। मोहित ने बताया- मेरे परिवार का भी सपना था कि मैं डॉक्टर बनें। इस रिजल्ट से उनका और परिवार का सपना पूरा हुआ है। मैं रोजाना 7-8 घंटे पढ़ाई करता था। एग्जाम के करीब आने पर रोजाना 10 से 12 घंटे तैयारी की। री नीट की जब खबर आई को उन्हें डिप्रेसिंग लगा। लेकिन फिर उन्होंने तैयारी शुरू कर दी और अच्छे मार्क्स हासिल किए। मोहित ने 12वीं के साथ पहले प्रयास में यह सफलता हासिल की है। पढ़ाई के दौरान रिलेक्स होने के लिए यूट्यूब देखते थे और परिवार के साथ समय बिताते थे। NEET 2026 के रिजल्ट की कट ऑफ क्वालीफाई करने वाले स्टूडेंट्स के फोटो दैनिक भास्कर ऐप पर पब्लिश किए जाएंगे। इस नंबर 9799081721 पर जानकारी भेज सकते हैं।