बिना ऑर्डर घर पहुंचे पार्सल,जानिए कैसे बचें इस स्कैम से:600 रुपए के ऑर्डर में कपूर की गोलियां, ऑनलाइन शॉपिंग का नया फ्रॉड
राजस्थान में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों को ‘फर्जी पार्सल’ भेजकर कैसे ठगा जा रहा है, इसका पूरा सच दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने अपने कैमरे में कैद किया है। इस पूरे स्कैम की पड़ताल के लिए हमने अलग-अलग शॉपिंग एप से कुछ सामान ऑर्डर किए थे। इसके कुछ दिन बाद ही हमारी पूरी डिटेल (नाम, पता और फोन नंबर) साइबर ठगों तक पहुंच गई। ठगों ने हूबहू वैसे ही फर्जी पार्सल तैयार किए। किसी बॉक्स में कपूर की गोलियां तो किसी में कम कीमत का सामान भरकर हमारे पते पर भेजने शुरू कर दिए। ऐसा एक नहीं 3-4 बार हुआ। ये सभी ऑर्डर कैश-ऑन डिलीवरी के थे। हमने पार्सल डिलीवर करने आए युवकों से सारी बातचीत को रिकॉर्ड किया। फिर साइबर एक्सपर्ट के जरिए डिलीवरी बॉय से लेकर इस ठगी से जुड़ी हर कड़ी को समझा। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- कैसे ठग फर्जी पार्सल तैयार कर आपके घर डिलीवर करते हैं? इससे बचने का तरीका क्या है? पड़ताल-1 : ऑर्डर करने के बाद कुछ दिन बाद ही ठगों के निशाने पर आई रिपोर्टर रिपोर्टर ने पिछले एक महीने में अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सामान ऑर्डर किए थे। ये ऑर्डर कैश-ऑन डिलीवरी के थे। यानी ऑर्डर घर पहुंचने पर ही उनका भुगतान करना था। ये सभी ऑर्डर हमें सामान्य तरीके से डिलीवर मिल गए थे। लेकिन कुछ दिनों बाद अचानक एक मैसेज आया कि आपका 1067 रुपए का पार्सल डिलीवर होगा। इसके बाद डिलीवरी बॉय ने कॉल कर बताया- आपके नाम से एक्सप्रेस डिलीवरी फर्म के तहत पार्सल आया है। इसके लिए करीब 1067 रुपए का भुगतान करना होगा। बिना ऑर्डर किए पार्सल का हमारे एड्रेस पर आना चौंकाने वाला था। जैसे ही डिलीवरी बॉय पार्सल लेकर पहुंचा, हमने अपना कैमरा ऑन किया और उससे पूछताछ शुरू की। डिलीवरी बॉय ने अपने एप में ऑर्डर बुक दिखाई। उसमें रिपोर्टर का पूरा नाम, मोबाइल नंबर और घर का पता दर्ज था। पहली नजर में सबकुछ बिल्कुल असली जैसा लग रहा था। जब हमने ऑनलाइन शॉपिंग एप में जाकर ऑर्डर चेक किया तो पता चला कि इस नाम से कोई नया ऑर्डर था ही नहीं। जिस ऑर्डर का हवाला दिया जा रहा था, उसकी डिलीवरी हमें 15 दिन पहले ही हो चुकी थी। वो ऑर्डर मिन्त्रा (Myntra) एप से किया गया था। हमारी पड़ताल में सामने आया कि Myntra पर हमने जो ऑर्डर किया था, उसी की डिटेल चुराकर एक फर्जी पार्सल तैयार कर प्राइवेट डिलीवरी सर्विस से भेजा गया था। स्कैमर (ठगों) की पूरी कोशिश यही थी कि असली ऑर्डर की जानकारी होने के कारण ग्राहक बिना शक किए पैसे देकर पार्सल ले लेगा, लेकिन हमने उस ऑर्डर को लौटा दिया। पड़ताल-2 : तीन दिन बाद पहुंचा दूसरा पार्सल तीन दिन बाद ही फिर एक नया पार्सल घर के पते पर पहुंचा। इस बार पार्सल मेशो एप के नाम से था। डिलीवरी बॉय ने अपने सर्विस एप में हमें ऑर्डर दिखाया। वहां- रिपोर्टर का नाम, वही मोबाइल नंबर और पता दर्ज था। इतना ही नहीं, उसके पास डिलीवरी के लिए ओटीपी भी मौजूद था। रिपोर्टर ने इस बार डिलीवरी बॉय को अपने मोबाइल में मेशो का ऑफिशियल एप खोलकर उसकी ऑर्डर लिस्ट दिखाई। साफ दिखाई दे रहा था कि इस नाम से कोई ऑर्डर किया ही नहीं गया था। डिलीवरी बॉय भी हैरान रह गया। उसने साफ कहा- हम डिलीवरी पार्टनर हैं, हमारे पास जो ऑर्डर एप में आता है, जो एड्रेस उसमें दिया होता है, उसी के अनुसार डिलीवरी करते हैं। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं होती। लगता है कि कोई थर्ड पार्टी इस पूरे सिस्टम का गलत फायदा उठा रही है। जब रिपोर्टर ने पार्सल लेने से इनकार कर दिया तो डिलीवरी बॉय उसे कैंसिल करने के लिए ओटीपी मांगा। रिपोर्टर ने ओटीपी साझा नहीं किया। इसके बाद कुछ समय बाद पार्सल अपने आप कैंसिल हो गया। पड़ताल-3 : तीसरी बार आया फर्जी ऑर्डर ठगों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। मोबाइल पर मैसेज आया अगले 24 घंटे में मेशो एप से आपका पार्सल डिलीवर हो जाएगा। अगले ही दिन तीसरी बार एक और फर्जी पार्सल हमारे एड्रेस पर पहुंचा। पार्सल की कीमत करीब 586 रुपए थी। हमने डिलीवरी बॉय से कहा कि हमने ऐसे कोई ऑर्डर किया ही नहीं। इस पर उसने खुद स्वीकार करते हुए कहा फिर ये फर्जी होगा। हमने डिलीवरी बॉय से ऑर्डर के बॉक्स में आइटम चेक कराने को कहा। उसने डिब्बा खोलने से इनकार कर दिया, लेकिन खुद बॉक्स को चेक करने के बाद बताया कि इसमें कपूर की गोलियां भरी हुई हैं। 2 तरीके से होती है ठगी, डिलीवरी बॉय ने कैमरे पर बताई हकीकत पहला तरीका : पार्सल में पत्थर या घटिया सामान पैक कर देते हैं पड़ताल के दौरान ऑर्डर देने आए एक डिलिवरी बॉय ने बताया कि स्कैमर्स पहले किसी तरह ऑनलाइन ऑर्डर करने वाले ग्राहकों का डेटा हासिल करते हैं। इनकी नजर उन ग्राहकों पर रहती है जो कैश ऑन डिलीवरी सामान ज्यादा ऑर्डर करते हैं। ऐसे ग्राहकों का नाम, पते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हासिल कर लेते हैं। जैसे ही कोई ग्राहक ऑरिजनल ऑर्डर करता है तो इसकी जानकारी मिलते ही, ये कम कीमत वाला कोई सामान पैक कर एक फर्जी बॉक्स तैयार करते हैं। फिर उसे ग्राहक के पते पर कैश ऑन डिलीवरी के लिए भेज देते हैं। ग्राहक को लगता है कि शायद यह उसी का ऑर्डर है। कई ग्राहक बिना ऐप में चेक किए ऑर्डर की पेमेंट कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि उसने ऐसा कोई सामान मंगाया ही नहीं था। एक डिलीवरी बॉय ने बताया कि उसके पास डेली ऐसे 7-8 केस आ रहे हैं। जब वो डिलीवरी देने जाते हैं तब ग्राहक कहता है कि पार्सल उसने ऑर्डर नहीं किया। यह थर्ड पार्टी का काम है जो इस तरीके की गड़बड़ी कर रहे हैं। दूसरा : ऑर्डर कैंसिल करने के नाम पर भी हो सकती है ठगी साइबर एक्सपर्ट केशव शर्मा ने बताया कि साइबर ठग पार्सल कैंसिल कराने के बहाने भी शिकार बनाते हैं। कोई ग्राहक अगर यह कहकर पार्सल लौटाता है कि उसने ऑर्डर नहीं किया, तब एक लिंक भेजकर पार्सल कैंसिल करने या फिर OTP शेयर करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति ओटीपी साझा करता है या फिर संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है। साइबर ठग ग्राहक के फोन को हैक कर लेते हैं। इसके बाद तो कई ग्राहकों के बैंक खातों में जमा पैसा भी ठग लिया जाता है। केशव शर्मा के अनुसार, कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने कोई ऑर्डर ही नहीं किया, फिर भी उनके नाम और पते पर पार्सल पहुंच गया। इसके बाद ठग पार्सल को रद्द कराने के बहाने लिंक भेजते हैं या ओटीपी मांगते हैं। कभी भी ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए साथ ही अनजान लिंक पर क्लिक भी नहीं करना चाहिए। ज्यादातर लोग दर्ज नहीं करवाते शिकायत साइबर एसपी सुमित मेहरड़ा ने बताया कि इस फर्जी पार्सल स्कैम में ठगी की रकम आमतौर पर 500 से 1000 रुपये के बीच होती है। रकम कम होने के कारण अधिकांश पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं करवाते। वे सोचते हैं कि थाने जाने और पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा, जबकि यही सोच साइबर ठगों की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। उन्होंने बताया कि अगर ठग एक दिन में 500 फर्जी पार्सल भेजते हैं और उनमें से 100 लोग भी पार्सल स्वीकार कर लेते हैं, तो वे बड़ी रकम इकट्ठी कर लेते हैं। इसलिए लोगों का सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अगर किसी के नाम ऐसा पार्सल पहुंचे, जिसे उसने ऑर्डर ही नहीं किया हो, तो उसे किसी भी स्थिति में रिसीव न करें और भुगतान भी न करें। इस तरह के कई मामलों में डेटा ब्रीच की आशंका भी सामने आती है, जिससे साइबर अपराधियों तक लोगों का नाम, मोबाइल नंबर और पता पहुंच जाता है। साइबर एसपी ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने जाना जरूरी नहीं है। पीड़ित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी आसानी से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यदि ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान किसी तरह का फर्जी पार्सल, संदिग्ध डिलीवरी या धोखाधड़ी का प्रयास नजर आए तो तुरंत इसकी सूचना दें। —– यह खबर भी पढ़िए… 800 रुपए में पार्सल डिलीवरी, चाहे विस्फोटक हो या ड्रग्स:कैमरे पर रोडवेज ड्राइवर-कंडक्टर का अवैध सिस्टम, चेक तक नहीं करते कार्टन के अंदर क्या है? राजस्थान रोडवेज की बसों में 900 से 1 हजार रुपए लेकर धड़ल्ले से अवैध पार्सल भेजे जा रहे हैं। ड्राइवर-कंडक्टर पार्सल तक चेक नहीं करते कि इसमें ड्रग्स या हथियार तो नहीं? पटाखे या अन्य विस्फोटक तो नहीं, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए संकट बन जाए। पढ़ें पूरी खबर…

