चार मर्डर के बाद चश्मदीद मासूम को मारने दौड़े हत्यारे:जिस जमीन के लिए जानें लीं, वह 17 साल से बंजर पड़ी, पार्ट-2

पाली से 15 किमी दूर इद्रको की ढाणी गांव के बाबू खान उर्फ उस्मान गनी, उसके भाई शरीफ खान और दोनों बेटे साबिर मोहम्मद व लाल मोहम्मद की हत्या का चश्मदीद गवाह था 10 साल का बच्चा। मासूम शरीफ खान (मृतक) का बेटा है, जिसे घटना वाले दिन 19 जुलाई, 2009 को उसकी मां ने खेत पर भेजा था। असल में आरोपी शकूर खान व उसके चारों बेटों ने बाबू व उसके भाई शरीफ को जमीन पर पैर रखने पर जिंदा नहीं छोड़ने की धमकी दी थी। घटना वाले दिन इन पांचों आरोपियों को शरीफ की पत्नी ने हथियारों से लैस होकर खेत की जमीन पर जाते हुए देखा था। उसका पति शरीफ व जेठ बाबू खान और जेठ के दोनों लड़के भी खेत पर गए थे। ऐसे में अनहोनी की आशंका में शरीफ की पत्नी ने अपने सबसे छोटे बेटे को उनके पीछे यह जानने के लिए भेजा था कि कहीं वहां लड़ाई-झगड़ा तो नहीं हो रहा। खेत में अपनों को तड़पते हुए मासूम में देखा पुलिस की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि मासूम जब खेत पर गया तो वहां शकूर खान व उसके चारों बेटे कत्लेआम मचा रहे थे। मासूम के पिता शरीफ, ताऊ बाबू खान व उनके दोनों बेटे साबिर व लाल मोहम्मद खेत में पड़े तड़प रहे थे। उनका शरीर खून से लथपथ था और आरोपी उनके मुंह में तेजाब से भरी पिचकारी उड़ेल रहे थे। 10 साल के बच्चे के पीछे दौड़े हत्यारे यह देख मासूम सिहर उठा और वापस गांव जाने के लिए मुड़ा। मगर उसी समय आरोपियों ने मासूम को देख लिया। वे लोग बोल रहे थे कि इस बच्चे को भी मार कर खेत में इनके बीच पटक दो। आरोपी मासूम को पकड़ने के लिए दौड़े। मासूम सड़क पर बदहवास दौड़ रहा था। इतने में उधर से जेसीबी लेकर गुजर रहे ड्राइवर की नजर खेत पर पड़े लोगों व मासूम के पीछे दौड़ रहे आरोपियों पर पड़ी। जेसीबी ड्राइवर ने बचाई जान जेसीबी ड्राइवर ने तुरंत जेसीबी का अगला बकेट नीचे किया और मासूम को उसमें बैठा लिया। इसके बाद ड्राइवर ने बकेट ऊपर किया और मासूम को लेकर जेसीबी की स्पीड बढ़ा दी। ड्राइवर ने गांव के पास मासूम को सुरक्षित उतारा, जिसने घर जाकर पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार की महिलाएं ग्रामीणों को लेकर मौके पर पहुंची। तब जाकर पुलिस को इस सामूहिक हत्याकांड की सूचना मिली। कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा मामले में 20 जुलाई, 2009 को आरोपी शकूर खान के साथ उसके पुत्र शहाबुदीन व कालू खान को पुलिस ने अरेस्ट किया। 25 जुलाई को आरोपी पिता-पुत्रों को कोर्ट के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा (ज्यूडिशियल कस्टडी) में जेल भेज दिया गया। 27 जुलाई, 2009 को आरोपी शकूर के बेटे रहीमबक्स व उस्मान खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे भी बाद में न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। 26 सितंबर, 2009 को जांच अधिकारी एवं तत्कालीन एसएचओ पारस चौधरी ने कोर्ट में पांचों आरोपियों के खिलाफ जांच पूरा कर कोर्ट में चालान पेश किया। 6 अक्टूबर 2016 को पाली में अपर एवं सेशन न्यायालय ने पांचों को दोषी ठहराते हुए हत्याकांड को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। आजीवन कारावास में बदली सजा 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट ने पाली में एडीजे कोर्ट की ओर से भेजे गए डेथ रेफरेंस तथा आरोपियों की अपील निस्तारित करते हुए पांचों आरोपियों को दी गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। जघन्य अपराध का क्राइम स्पॉट और भी डरावना था: तत्कालीन एसपी तत्कालीन पाली एसपी और वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक) जयपुर डॉ. बीएल मीणा ने बताया कि मैं उस घटना को कभी नहीं भूल पाऊंगा। घटनास्थल बहुत ही डरावना और दिल झकझोर देने वाला था। हमने सभी फैक्ट और सबूत को शामिल कर दो माह में ही कोर्ट में चालान पेश कराया। साथ ही इस मामले को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सबूत पेश किए। सीनियर एडवोकेट एवं इस केस के स्पेशल पीपी कमलेश दवेरा ने बताया कि मामले में राज्य सरकार ने पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी के लिए 2009 में मुझे स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त किया था। 2016 में फैसला देते समय न्यायालय ने मामले में अपराध की प्रकृति और प्रवृत्ति को भी ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ माना है। उस समय तक यह प्रदेश का पहला मामला था, जिसमें एक साथ 5 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई। जमीन पड़ी बंजर, 17 साल से झाड़ियां नहीं कटी रोहट के इंद्रको की ढाणी के निकट सरदार समंद-पाली रोड पर जिस 12 बीघा जमीन के लिए आज से 17 साल पहले 2009 में दो परिवारों में जंग हुई, वो बंजर पड़ी है। बाबू खान व उसके दोनों बेटों की जान गई। बाबू खान के छोटे भाई शरीफ का भी कत्ल हुआ। अब बाबू खान (मृतक) के परिवार में सिर्फ महिलाएं ही रह गई हैं। उसके दोनों बेटे की भी आरोपियों ने बलि ले ली। परिवार खत्म हो गया। शरीफ (मृतक) का बेटा भी अब 27 साल का हो गया, जो अपने पांचों भाइयों के साथ मुंबई में शिफ्ट हो चुका है। उसके पांचों भाई घटना वाले दिन भी घर से बाहर ही थे। इधर, जमीन के लिए अपने सगे दोनों ममेरे भाई बाबू व शरीफ समेत 4 लोगों की जान लेने वालों का परिवार भी टूट गया। कत्लेआम करने के बाद शकूर खान व उसके चारों बेटों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल में भेज दिया। उसके दो बेटे और हैं, लेकिन वे घटना के पहले से ही गांव से बाहर थे। पांचों आरोपी पिता-पुत्रों के परिवार के लोग गांव से पलायन कर गए थे। पाली-सरदार समंद रोड पर भांगेसर सरहद में स्थित झगड़े की जड़ माने जाने वाली वह जमीन अब बंजर हो चुकी है। घटना के बाद 2009 से मृतक परिवार के लोगों ने भी इस जमीन पर पैर नहीं रखे। अंग्रेजी बबूल की झाड़ियों का झुरमुट इस जमीन में नजर आता है। गांव वाले भी इस जमीन की ओर जाने से कतराते हैं। पशुपालक व चरवाहे भी जमीन में भूलकर भी मवेशियों को नहीं जाने देते हैं। 1 परिवार के 4 की हत्या,पानी मांगा तो तेजाब पिलाया:6 बीघा जमीन के लिए हथियारों से काटा, ट्रैक्टर से कुचला, पार्ट-1

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