जयपुर में XUV ने युवक को रौंदा, मौत:दूसरी गाड़ी से कार टकराई; युवकों के मारपीट से बचने के लिए भागते समय हादसा

जयपुर में गुरुवार रात XUV गाड़ी के रौंदने से एक युवक की मौत हो गई। घर लौटते समय उसकी कार दूसरी गाड़ी से टच हो गई थी। गाड़ी सवार के मारपीट करने से बचकर भागने पर वह XUV की चपेट में आ गया। नारायण विहार थाना पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए शव को जयपुरिया हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी भिजवाया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। SHO (नारायण विहार) गुंजन सोनी ने बताया- हादसे में मानसरोवर के मांग्यावास निवासी अतुल मंडल (24) की मौत हो गई। वह कम्प्यूटर से डिजाइनिंग का काम करता था। परिजनों की ओर से दर्ज शिकायत में बताया- पिछले कुछ दिनों पहले ही अतुल ने नारायण विहार में रेस्टोरेंट खोला था। गुरुवार रात करीब 11 बजे वह अपनी ब्रेजा गाड़ी से घर लौटने के लिए निकला था। कार बैक लेते समय दूसरी गाड़ी से टच होने पर हुआ था विवाद वंदे मातरम रोड पर नारायण पेट्रोल पंप के पास अतुल की कार बैक लेते समय पीछे वाली कार से टच हो गई। इस बात पर गुस्साए कार सवारों ने पीछा कर उसे रुकवाया। कार से नीचे उतारकर अतुल के साथ मारपीट करने लगे। इससे बचने के लिए अतुल भागकर रोड क्रॉस करने लगा। इसी दौरान आई XUV गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। रोड पर गिरने के बाद XUV उसके ऊपर से निकल गई। हादसे के बाद झगड़ा करने वाले कार सवार और रौंदने वाली XUV गाड़ी दोनों मौके से फरार हो गए। एक्सीडेंट की सूचना पर पहुंची नारायण विहार थाना पुलिस ने गंभीर हालत में उसे जयपुरिया हॉस्पिटल पहुंचाया। डॉक्टर्स ने चेक करने के बाद अतुल को मृत घोषित कर दिया।

जाट महापंचायत विवाद पर 30 दिन में फैसला करना होगा:हाईकोर्ट ने कहा- एक महीने में कारण सहित आदेश जारी करेंगे; जोधपुर कलेक्टर को दिए निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रस्तावित जाट महापंचायत और तेजा गायन कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद में जोधपुर कलेक्टर को निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को सभी पक्षों की सुनवाई कर 30 दिनों में कारण सहित आदेश जारी करने को कहा है। यह मामला महाराजा सूरजमल संगठन (भारत) द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया था कि पीपाड़ क्षेत्र में प्रस्तावित जाट महापंचायत और तेजा गायन कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने आवेदन को रद्द कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता हनुमान राम सिरोही ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम फैसला जिला प्रशासन को ही लेना होगा जस्टिस समीर जैन की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह मामला कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णय से संबंधित है। इस पर अंतिम फैसला जिला प्रशासन को ही लेना होगा। हाईकोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता को जिला कलेक्टर के समक्ष नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी। यदि किसी अन्य पक्ष को इस कार्यक्रम पर आपत्ति है तो उसे भी व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद जिला कलेक्टर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी नीति को ध्यान में रखते हुए 30 दिनों में एक ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ (कारण सहित आदेश) पारित करेंगे। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश का मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और कलेक्टर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए अधिकृत होंगे।

डबल इंजन सरकार से आर्थिक विकास:पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के औद्योगिक विकास में नया अध्याय

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सूरज सोनी ने कहा कि बालोतरा के पचपदरा में स्थापित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी परियोजना राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उनका कहना है कि लंबे समय तक राजनीतिक अनिर्णय और प्रशासनिक सुस्ती के कारण अटकी रही यह परियोजना अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और केंद्र-राज्य की डबल इंजन सरकार के समन्वय से निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सोनी ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी का सपना वर्षों पुराना था, लेकिन शुरुआती दौर में परियोजना वित्तीय अस्पष्टता और अन्य कारणों से अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी। बाद में एचपीसीएल के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में एचआरआरएल का गठन किया गया और परियोजना को पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में किए गए शिलान्यास के बाद इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का स्वरूप मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई, जिससे लागत और समय दोनों बढ़े। दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पदभार संभालने के बाद परियोजना की नियमित समीक्षा और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से कार्य में तेजी आई। उनके अनुसार अब रिफाइनरी संचालन के अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका पूर्ण संचालन शुरू होगा। सोनी ने कहा कि रिफाइनरी के आसपास विकसित किए जा रहे पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र से डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और बाड़मेर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल तेल शोधन इकाई नहीं, बल्कि राजस्थान के औद्योगिक भविष्य और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

ससुर के घर से दामाद ने चुराए थे 13 लाख:कर्जा चुकाने के लिए की थी वारदात; पुलिस ने किया गिरफ्तार

टोंक जिले के बरौनी थाना क्षेत्र में घर से करीब 14 लाख रुपए की चोरी के मामले में पुलिस ने आरोपी दामाद को गिरफ्तार किया है। दामाद ने ही खुद का कर्जा चुकाने के लिए चोरी की वारदात की थी। घटना बरौनी थाना क्षेत्र के सोहेला गांव में सोमवार की रात को हुई थी। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी के 13 लाख 58 हजार 500 रुपए कैश भी बरामद कर लिया है। साथ ही चोरी के काम में ली गई अल्टो कार भी जब्त की है। पुलिस के अनुसार, कैश की रकम आरोपी की साली की थी। उसे यह बड़ी राशि जमीन बेचने के बदले मिली थे, सुरक्षित रखने के लिए उसने अपने पिता सोहेला निवासी भैरु लाल बैरवा के घर पर इस रकम को रखा था। पिता ने इन रुपयों को अनाज की कोठी में छुपाकर रख रखा था। वह भी इन रुपयों से कुछ दिन में अन्य जगह जमीन खरीदने वाले थे, लेकिन इसकी भनक लगते ही उसके जीजा सुरतपुरा लूहारा निवासी श्योराज बैरवा ने मौका पाकर सोमवार रात को रुपए चुरा लिए। घरवालों को इसका पता मंगलवार की सुबह लगा, जब परिजनों के उठने के बाद अनाज की कोठी की कुंदी टूटी हुई थी। फिर अनाज में हाथ डालकर देखा तो रुपए नहीं मिले। उसके बाद भैरूलाल और उसका पुत्र नंदलाल बरौनी थाना पहुंचे, जहां नंदलाल बैरवा ने रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया था कि सोमवार रात 12 बजे एक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसे हॉस्पिटल लेकर गए थे, जबकि अन्य लोग एक जागरण के कार्यक्रम में गए हुए थे। ऐसे में घर पर सिर्फ दादा ही थे और दवा लेने के कारण गहरी नींद आ गई थी, इसी दौरान यह वारदात हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी रोशन मीना ने टोंक डीएसपी मृत्युजंय मिश्रा के सुपरविजन में डीएसटी प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी और बरौनी थाना प्रभारी नारायण लाल गुर्जर के नेतृत्व में इस चोरी का पता लगाने के लिए टीम गठित की। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच शुरू की। दूसरे दिन बुधवार को 24 घंटे में ही पुलिस टीम ने आरोपी सुरतपुरा लूहारा निवासी श्योराज (30) पुत्र स्व. रामदयाल बैरवा को डिटेन कर पूछताछ की, जिसमें आरोपी के जुर्म स्वीकार करने पर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लग्जरी लाइफ जीने का शौकीन
आरोपी निवाई सदर थाना क्षेत्र में एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत है और लग्जरी लाइफ जीने के कारण उस पर लाखों रुपए का कर्जा हो गया था। उसे चुकाने के लिए अपने ससुराल में रखे उसकी साली के इन रुपयों को चुराकर अपने गांव चला गया था।

जयपुर में ज्वेलर्स से 35 लाख की लूट:कार से आए नकाबपोश बदमाशों ने किया हमला; सिर-नाक में गंभीर चोट, हाथों में फ्रैक्चर

जयपुर में एक ज्वेलर्स से 35 लाख के गहने-कैश बदमाशों ने लूट लिए। यह वारदात खोरा बीसल क्षेत्र के नांगल लाड़ी ग्रिड पर शुक्रवार रात करीब 8:15 बजे हुई। कार से आए नकाबपोश चार-पांच बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। रेकी के बाद हमला कर ज्वेलर्स से गहने-कैश से भरा बैग छीन ले गए। खोरा बीसल थाना पुलिस ने लूट की सूचना पर नाकाबंदी करवाई, लेकिन बदमाशों को कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने बताया- लूट की वारदात खोरा बीसल के नांगल लाड़ी गांव निवासी शंकर लाल शर्मा (45) के साथ हुई। घर से करीब 2.5 किलोमीटर दूर नागल लाड़ी ग्रिड पर उनकी ज्वेलरी शॉप है। रोज की तरह रात करीब 8 बजे शॉप बंद कर वह ज्वेलरी बैग में भरकर बाइक से घर लौट रहे थे। शॉप से करीब 800 मीटर दूर पहुंचते ही पीछे से सफेद कलर की अल्टो कार उनके आगे रुकी। कार सवार नकाबपोश चार-पांच बदमाशों ने ज्वेलर पर हमला कर दिया। बदमाशों ने शंकर लाल को लहूलुहान कर नीचे गिरा दिया। इसके बाद शंकर लाल का गहने-कैश से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। राहगीरों ने जैसे-तैसे संभालकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सूचना पर नाकाबंदी करवाई, लेकिन बदमाशों का कोई सुराग नहीं लगा। रेकी के बाद वारदात शंकर लाल के भतीजे किशन शर्मा ने बताया- बदमाशों के हमले में चाचा शंकर लाल के सिर और नाक फट गए। डॉक्टर ने दोनों हाथों में फ्रैक्चर होना है। हॉस्पिटल में एडमिट करवाकर उनका इलाज चल रहा है। लूट गए बैग में करीब 35 लाख के सोने-चांदी के गहने और 1.50 लाख रुपए रखे थे। रोज की तरफ दुकान से बाइक लेकर घर आने के लिए निकले थे। रेकी के बाद बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया है।

ढूंढाड़ी कलम की विरासत से रूबरू होंगे युवा:जयपुर में तीन दिवसीय निःशुल्क पारंपरिक चित्रकला कार्यशाला की 24 जुलाई से होगी शुरुआत

भारतीय पारंपरिक चित्रकला की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और विलुप्त होती कला शैलियों के संरक्षण के उद्देश्य से जयपुर में तीन दिवसीय भारतीय पारंपरिक चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित रंगरीत स्टूडियो में 24 से 26 जुलाई तक आयोजित होने वाली यह कार्यशाला पूरी तरह निःशुल्क होगी। कार्यशाला प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रतिभागियों को राजस्थान की पारंपरिक ढूंढाड़ी कलम (जयपुर शैली) के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का लघुचित्र बनाना सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पारंपरिक चित्रकला की बारीकियों से रूबरू कराया जाएगा, जिसमें रेखांकन, प्राकृतिक एवं पारंपरिक रंगों का प्रयोग, सूक्ष्म ब्रश तकनीक, अलंकरण और जयपुर शैली की विशिष्ट चित्रांकन विधियों का व्यावहारिक अभ्यास शामिल रहेगा। कार्यशाला का नेतृत्व राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार एवं कला गुरु रामू रामदेव करेंगे। उनके साथ उनकी कला परंपरा की सातवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे युवा कलाकार राधिका रामदेव, यामिनी रामदेव और प्रतीक रामदेव भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे। आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला केवल चित्रकला सीखने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और सात पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक कला विरासत को समझने और अनुभव करने का भी दुर्लभ अवसर प्रदान करेगी। विलुप्त होती कला को मिलेगा नया मंच आयोजकों का कहना है कि आधुनिक समय में पारंपरिक भारतीय चित्रकलाएं धीरे-धीरे सीमित होती जा रही हैं। ऐसे में इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन प्राचीन कला शैलियों को सीखकर उन्हें आगे बढ़ा सकें। ढूंढाड़ी कलम, जिसे जयपुर शैली के नाम से भी जाना जाता है, अपनी सूक्ष्म रेखाओं, आकर्षक रंग संयोजन और धार्मिक व सांस्कृतिक विषयों के जीवंत चित्रण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रही है। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को इस पारंपरिक शैली की तकनीकी बारीकियां सीखने का अवसर मिलेगा।

जोधपुर में 20 साल की युवती ने किया सुसाइड:फार्मेसी का पेपर बिगड़ा तो डिप्रेशन में आई; जहर खाकर दी जान

जोधपुर शहर में एक 20 साल की युवती ने जहर खाकर जान दे दी। यह मामला शुक्रवार को शहर के सदर कोतवाली थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि सदर कोतवाली एरिया में रहने वाली युवती एग्जाम खराब होने की वजह से डिप्रेशन में थी। फार्मेसी का पेपर बिगड़ा तो खाया जहर एएसआई अमर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को युवती के जहर खाने की सूचना मिली थी। इसके बाद परिजन उसे हॉस्पिटल लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि फार्मेसी की परीक्षा का पेपर खराब हो गया था। इसके बाद से वह डिप्रेशन में थी और इसी वजह से उसने जहर खा लिया।

भोपाल-जोधपुर-भोपाल ट्रेन परिवर्तित मार्ग से चलेगी:कोट स्टेशन पर काम के चलते किया बदलाव; पटरी पार करने वाले 350 लोगों पर रेलवे ने की कार्रवाई

पश्चिम-मध्य रेलवे की ओर से कोटा स्टेशन के प्लेटफार्म नं. 4 पर पुनर्विकास कार्य के कारण ब्लॉक लिया जा रहा है। ब्लॉक के कारण रेल यातायात प्रभावित रहेगा। मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार- इस कार्य के कारण उत्तर-पश्चिम रेलवे पर संचालित भोपाल-जोधपुर-भोपाल ट्रेन मार्ग परिवर्तित रहेगी। मार्ग परिवर्तित ट्रेन (प्रारम्भिक स्टेशन से) पटरी पार करने वालों पर रेलवे सख्त, 350 से अधिक पर कार्रवाई रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर, फुटओवर ब्रिज और पाथ-वे जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद ट्रैक पार कर नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ जोधपुर मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया- मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर यात्री जल्दबाजी में अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करते हुए पाए जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ नियमित कार्रवाई कर रही है। प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में रेलवे सुरक्षा बल ने रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 147 के तहत पटरी पार करने के 350 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। इनमें करीब 45 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया है,जबकि 36 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। धारा 147 के तहत होती है कार्रवाई रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 147 के अनुसार रेलवे ट्रैक,यार्ड अथवा अन्य गैर-यात्री क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए छह माह तक का कारावास, पांच सौ रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। जन विश्वास अधिनियम के तहत निर्धारित जुर्माना मौके पर जमा कराया जा सकता है। जुर्माना जमा नहीं कराने पर संबंधित व्यक्ति को सक्षम न्यायालय में पेश कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। यात्रियों से नियमों की पालना की अपील मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने यात्रियों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए केवल फुटओवर ब्रिज,लिफ्ट या एस्केलेटर का ही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि कई बार एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट ट्रेनें बीच के स्टेशनों पर बिना रुके तेज गति से गुजरती हैं। ऐसे में ट्रैक पार करने का प्रयास जानलेवा साबित हो सकता है। यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में शॉर्टकट अपनाने के बजाय अधिकृत मार्ग का ही उपयोग करना चाहिए।

सरकारी हॉस्पिटल में कपड़े उतारकर घूमता रहा डॉक्टर:बारिश में भीगता हुआ आया, बाथरूम में कपड़े उतारे; बोला- मैं डिप्रेशन में हूं

जोधपुर के एक सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर कपड़े उतारकर घूमने लगा। यह देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। इसके बाद अस्पताल स्टाफ और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उसे वार्ड में भर्ती कराया। डॉक्टर अस्पताल के ओपीडी (OPD) हॉल में बिना कपड़ों के घूमता रहा। जब उसे पकड़ा गया, तो वह बोला- ‘मैं उदास हूं और डिप्रेशन में हूं।’ मामला सामने आने के बाद उसे अस्पताल के ही एक वार्ड में भर्ती करवाया गया है, जहां उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। यह मामला शुक्रवार शाम 4:30 बजे मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल का है। शाम को बारिश में भीगता हुआ पहुंचा था, बाथरूम में उतारे कपड़े MDM हॉस्पिटल के अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि डॉक्टर मानसिक रूप से बीमार है। शुक्रवार को शहर में बारिश हो रही थी। डॉक्टर भीगता हुआ मथुरादास माथुर हॉस्पिटल के ओपीडी हॉल में पहुंचा। इसके बाद वह ओपीडी हॉल में बने बाथरूम में गया और अपने कपड़े उतारकर हॉल में आ गया। कुछ देर तक वह बिना कपड़ों के ही वहां घूमता रहा। बोला- मैं उदास हूं, डिप्रेशन में हूं, पिता भी बीमार रहते हैं डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि जैसे ही इस घटनाक्रम की जानकारी मिली, तुरंत पुलिस चौकी के स्टाफ को सूचित (इन्फॉर्म) कर दिया गया था। उसे संभालकर वार्ड में ले जाया गया। डॉक्टर ओपीडी हॉल में घूमते हुए कह रहा था- “मैं काफी डिप्रेशन में हूं और उदास हूं।” उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि साल 2017 में उसने एमबीबीएस (MBBS) पूरा किया था। अभी वह शहर के एक हॉस्टल में रह रहा था। जानकारी में सामने आया है कि वह नौकरी नहीं लगने की वजह से काफी समय से तनाव में था। डॉ. राजपुरोहित ने बताया कि डॉक्टर के पिता भी मानसिक रूप से बीमार रहते हैं। ऐसे में आशंका है कि हेरेडिटी (Heredity) यानी आनुवंशिक बीमारी की वजह से भी डॉक्टर में ये लक्षण (सिम्पटम्स) देखने को मिले हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर को वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है और अभी उसे डॉक्टरों की निगरानी (ऑब्जर्वेशन) में रखा गया है।

सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति पर सरकार को नोटिस:हाईकोर्ट ने पूछा- कैग की रिपोर्ट पर क्या कदम उठाए, याचिका में समान मुआवजा नीति की मांग

हाईकोर्ट ने राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने राज्य के प्रमुख चिकित्सा सचिव को कैग की 2024 की रिपोर्ट में बताई गई खामियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए कहा। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने बेंच ने असीम सिमलोट की जनहित याचिका ​पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा और परिचालन मानकों की पालना नहीं हो रही है। इनमें भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम और अनिवार्य अग्निशमन सुरक्षा मानदंड शामिल है। कैग की रिपोर्ट में भी चेताया गया याचिकाकर्ता ने बताया- इन व्यवस्थागत विफलताओं को पहले भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की 2024 की रिपोर्ट में भी बताया गया था, लेकिन कैग की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद राज्य सरकार ने कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसके कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मौत, चोटिल होना, चिकित्सा लापरवाही और अन्य दुर्घटनाओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कैग की सिफारिशों को समय रहते और प्रभावी ढंग से लागू किया होता, तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता था। समान मुआवजा नीति बनाए सरकार याचिका में चिकित्सा लापरवाही और अस्पताल से जुड़ी दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए पूरे राज्य में एक समान मुआवजा योजना तैयार करने की भी मांग की गई है। कोर्ट ने मामले में सरकार को नोटिस देते हुए सुनवाई 19 अगस्त तक टाल दी।