पीएचडी प्रवेश में 453 स्टूडेंट्स को नोटिस:जांच में नेट स्कोर बढ़ाने, वर्ष बदलने और दस्तावेज जोड़ने के मामले आए सामने

राजस्थान यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में 453 आवेदनों में गड़बड़ियां मिलने पर संबंधित छात्रों को नोटिस जारी किए गए हैं। यूनिवर्सिटी ने इन छात्रों से मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार शाम तक केवल 80 छात्रों ने ही मूल नेट स्कोर कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा कराए थे। शनिवार शाम तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। राजस्थान यूनिवर्सिटी में दो साल बाद पीएचडी की 984 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई है। इस बार यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार प्रवेश लिखित परीक्षा के बिना इंटरव्यू और नेट स्कोर के आधार पर होना था। इसके लिए 2500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। 22 जून से इंटरव्यू शुरू होने थे, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद प्रक्रिया रोक दी गई। कई अभ्यर्थियों ने अलग-अलग दस्तावेज जोड़कर पेश किए जांच में कई अभ्यर्थियों द्वारा दो अलग-अलग दस्तावेज जोड़कर प्रस्तुत करने के मामले सामने आए। प्रवेश के लिए 2024 का नेट स्कोर मान्य था, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों ने 2024 के स्कोर कार्ड में पूर्व की परीक्षा का स्कोर जोड़ दिया। कई मामलों में स्कोर कार्ड का वर्ष बदला गया, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने गलत जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। प्रभादेवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का परीक्षा केंद्र सस्पेंड
पैरामेडिकल परीक्षा में नकल कराने के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कालवाड़ स्थित प्रभादेवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का परीक्षा केंद्र सस्पेंड कर दिया है। अब इस कॉलेज में राजस्थान यूनिवर्सिटी से संबंधित कोई परीक्षा आयोजित नहीं होगी। खोरा बीसल थाना पुलिस और पश्चिम जिले की डीएसटी टीम ने हाल ही में पैरामेडिकल परीक्षा में नकल कराने के आरोप में कॉलेज संचालक समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कमेटी ने पीएचडी आवेदनों की जांच की है। कमी मिलने पर 453 छात्रों से मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 8 जुलाई को अंतिम सूची जारी करने की तैयारी है। -प्रो. अल्पना कटेजा, कुलगुरु, राजस्थान यूनिवर्सिटी

‘ग्राउंड जीरो’ से देखिए विकास:टोंक रोड पर 20 फीट का गड्ढा; 7 दिन पहले डाली थी गैस लाइन

राजधानी की मुख्य हार्टलाइन टोंक रोड पर शुक्रवार दोपहर अचानक सड़क धंस गई। निगम मुख्यालय से महज 200 मीटर पहले बीपी पेट्रोल पंप के सामने करीब 20 फीट लंबा, 15 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा गड्ढा हो गया। जिस समय सड़क धंसी, उस समय ट्रैफिक गुजर रहा था। गनीमत रही कि कोई वाहन गड्ढे में नहीं फंसा। जांच में सामने आया कि टोरेंट गैस कंपनी ने 7 दिन पहले यहां पीएनजी गैस लाइन डालने के लिए हॉरिजेंटल ड्रिलिंग की थी। लाइन डालने के बाद रीस्टोरेशन के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। नीचे मिट्टी में खाली जगह रह गई। गुरुवार रात तेज बारिश के बाद पानी रिसा, मिट्टी बैठी और शुक्रवार दोपहर सड़क धंस गई। पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्ट किया। जेडीए और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने टोरेंट कंपनी के प्रतिनिधियों को फोन किए, लेकिन कंपनी का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। 7 दिन में ड्रेनेज पाइप फटा, पानी भरा बारिश ने एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। इंजीनियरिंग विभाग की खामी के चलते एक सप्ताह पहले लगाया गया ड्रेनेज पाइप फट गया। पानी ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच गया। इमरजेंसी के पास स्थित ईसीजी रूम, माइनर ओटी और मुख्य कॉरिडोर में पानी भरने से मरीजों व स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ा। कॉरिडोर में फॉल्स सीलिंग का हिस्सा भी गिर गया। मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया। नोडल अधिकारी डॉ. राजेंद्र मांडिया ने बताया पाइप को ठीक करवा रहे हैं। देर रात 2 इंच पानी बरसा, सड़कें लबालब मानसून दस्तक देने के साथ ही जमकर बरसने लगा है। 2 जुलाई को दिन में एंट्री करने वाले मानसून ने देर रात तक पूरा जिला कवर लिया और खूब बरसा। सड़कें लबालब हो गईं, कई कॉलोनियों में पानी भर गया। मुरलीपुरा-झोटवाड़ा में दादी का फाटक अंडरब्रिज डूब गया। 5.5 मीटर (18 फीट) से गहरा अंडरपास में पानी भरने से वाहनों की आवाजाही बंद करनी पड़ी है। इससे एक तरफ से दूसरी तरफ जाने वाले वाहनों को करीब 4 से 5 किमी लंबा चक्कर लगाना जाना पड़ा। बीसलपुर का लेवल 313.57 आरएल मीटर पहुंचा: बीसलपुर में पानी की आवक शुरू हो गई। कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश के बाद दो दिन में बांध में 12 सेमी पानी आया। ऐसा पहली बार है कि मानसून के पहले दिन ही बांध में आवक हुई। शुक्रवार को बांध 313.57 आरएल मीटर पहुंच गया। अब कुल भराव क्षमता का 65.42 फीसदी पानी है। बड़ा सवाल: 15 जून से 15 सितंबर तक सड़क खोदने व ड्रिलिंग पर रोक, फिर कैसे खुद रहीं? जेडीए ने टोरेंट कंपनी को शहर में गैस लाइन के लिए ड्रिलिंग और रोड कटिंग की अनुमति दे रखी है, लेकिन अनुमति की शर्तों में साफ लिखा है कि मानसून सीजन में 15 जून से 15 सितंबर तक सड़क खोदने या ड्रिलिंग का काम नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद टोंक रोड जैसी मुख्य सड़क पर 7 दिन पहले गैस लाइन डालने का काम किया गया। परमिशन की शर्तों के अनुसार ड्रिलिंग के बाद सड़क की मरम्मत, केबल, सीवर या पेयजल लाइन डैमेज होने पर उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी कंपनी की है, लेकिन मौके पर सड़क धंसने के बाद भी कंपनी प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। सवाल यह है कि जब मानसून में काम पर रोक थी तो ड्रिलिंग किसकी अनुमति से हुई? काम के बाद रीस्टोरेशन की जांच किसने की? और टोंक रोड जैसी व्यस्त सड़क को बिना मजबूती जांचे ट्रैफिक के लिए कैसे छोड़ दिया गया? भुगतेगी जनता; 3 दिन तक टोंक रोड बाधित रहेगा
सड़क धंसने के बाद पुलिस ने तुरंत बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक को डायवर्ट किया। जेडीए और निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर गड्ढे में मलबा और डब्ल्यूएमएम डलवाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थायी मरम्मत में तीन दिन लगेंगे। इस दौरान टोंक रोड की एक लेन बंद रहेगी। पीक आवर्स में यहां लंबा जाम लगने की आशंका है, क्योंकि यह सड़क शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल है और दिनभर भारी ट्रैफिक गुजरता है।

जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग:बारिश से टाटियावास टोल की दुपहिया लेन बनी तालाब, इसका दबाव दूसरी लेन पर बढ़ा, 2 घंटे जाम जैसे हालात

जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित टाटियावास टोल प्लाजा पर गुरुवार तड़के हुई झमाझम बारिश ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जयपुर से चौमूं जाने वाली दिशा में दुपहिया वाहनों के लिए बनाई गई लेन में पानी भर जाने से पूरी लेन तालाब जैसी बन गई। इससे बाइक सवारों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा और कई वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पानी भरने से टोल संचालन भी प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालात बिगड़ने पर टोल कर्मियों ने मोटर लगाकर पानी निकालने का प्रयास शुरू किया, लेकिन तब तक करीब दो घंटे तक जाम जैसे हालात बने रहे। दुपहिया लेन प्रभावित होने के कारण कई वाहन अन्य लेनों में पहुंच गए, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि बारिश से पहले जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी। उनका कहना था कि जब टोल पर प्रतिदिन लाखों रुपए का शुल्क वसूला जाता है, तो सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना भी टोल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। टोलकर्मियों ने मोटर लगाकर निकाला पानी

फि​जिकल टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन राजस्थान में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बने डॉ. पुरोहित

बीकानेर| फिजीकल टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन राजस्थान की प्रदेश कोर कमेटी के निर्णयों के तहत संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से नई नियुक्ति की गई। प्रदेश अध्यक्ष धूमल भाटी ने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पद पर डॉ. सुरेन्द्र पुरोहित को जिम्मेदारी सौंपी। नियुक्ति आदेश में उन्हें निदेशालय स्तर पर समन्वय कर संगठनात्मक काम आगे बढ़ाने, साथ ही निष्क्रिय पदाधिकारियों और जिला कार्यकारिणी के स्थान पर सक्रिय पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नियुक्ति पर जिला सुरेन्द्र हर्ष, माणक चन्द व्यास, प्रकाश सारस्वत, मोती नाईम लोदी, शिवराज सिंह, आनन्द स्वामी, एनडी पणिया, सुभाष मिश्रा, कैलाशचन्द, मनमोहन गहलोत, अजय बिंदू, कैलाश प्रजापत सहित कुछ पदाधिकारियों और खेल प्रेमियों ने खुशी जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि संगठन की गतिविधियां अधिक प्रभावी होंगी।

भाषिणी बनेगी लोक सेतु:पब्लिक को मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी में मिलेंगे सरकारी आदेश

सुप्रीम कोर्ट के राजस्थानी भाषा को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने के आदेश के बाद अब एआई का ऐसा मॉडल आ रहा है, जो स्थानीय भाषाओं की ताकत में क्रांति ला देगा। पिछले 2 दिन जयपुर में ई-गवर्नेंस पर चले राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिविजन (डीआईबीडी) ने ऐसा मॉडल रखा, जिससे राजस्थान की मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी, हाड़ौती सहित तमाम स्थानीय भाषाओं का डेटासेट तैयार होगा। भाषिणी ने राजस्थानी भाषा मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन भी शुरू किया। नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी के ज़रिए भाषिणी गवर्नेंस सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में माप योग्य स्पीच और टेक्स्ट-आधारित एआई सेवाओं को सक्षम बनाएगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भाषिणी मॉडल को सराहा। उनका कहना है कि 2026 में भाषिणी की भागीदारी ने सरकारों और संस्थानों को नागरिकों की पसंदीदा भाषाओं में सेवाएं देने में सक्षम बनाकर, बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। नए एआई समाधानों, समुदाय-संचालित डेटासेट निर्माण और माप योग्य भाषा तकनीकों के माध्यम से भाषिणी डिजिटल इंडिया के उस दृष्टिकोण को मजबूत कर रही है, जहां भाषा कभी भी शासन व्यवस्था में बाधा न बने। भाषिणी के सीईओ की सीएम से मंत्रणा
डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीज़न (डीआईबीडी) के सीईओ अमिताभ नाग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ राज्य के लिए बहुभाषी एआई और भाषा-संबंधी तकनीकों को आगे बढ़ाने पर अलग से चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य फोकस भाषा-प्रधान नवाचार के ज़रिए समावेशी डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करना है। नाग ने कहा कि ‘एआई को सच में हर नागरिक की सेवा करने के लिए उन भाषाओं को समझना होगा, जो लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बोलते हैं। भाषा में हर योगदान, हर सत्यापित डेटासेट और हर नया इस्तेमाल हमें ऐसे एआई को बनाने के करीब ले जाता है, जो ज़्यादा समावेशी, ज़्यादा प्रतिनिधित्व करने वाला और सभी के लिए ज़्यादा सुलभ हो। 36 भारतीय भाषाओं पर काम हो चुका भाषिणी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सक्षम बना रही है, हर दिन 2 करोड़ से अधिक एआई के निष्कर्ष प्रोसेस करती है, 8 बिलियन से अधिक एआई इन्फरेंस को सक्षम बना चुकी, 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सहयोग, 20 से अधिक विशेष एनएलपी सेवाएं दे रही।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई:2.07 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में CBI का एक्शन, राजस्थान-ओडिशा से 3 गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड सरकारी अधिकारी से 2.07 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में सीबीआई ने राजस्थान और ओडिशा में कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने राजस्थान के नागौर और ओडिशा के बालेश्वर सहित सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर की गई। सीबीआई ने इस संबंध में 25 मार्च 2026 को केस दर्ज किया था। सीबीआई के अनुसार ठगों ने एक सेवानिवृत्त लोक सेवक को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर धमकाया। आरोपियों ने उन्हें फर्जी कार्रवाई में फंसाने की बात कहकर कुल 2.07 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सबसे पहले एक ट्रस्ट के नाम से खोले गए बैंक खाते में जमा करवाई गई। इसके बाद रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई अन्य बैंक खातों में लेयरिंग कर ट्रांसफर किया गया। नागौर से एक, बालेश्वर से दो आरोपियों को पकड़ा सीबीआई ने 30 जून 2026 को राजस्थान और ओडिशा में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान राजस्थान के नागौर से एक आरोपी और ओडिशा के बालेश्वर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से संदिग्ध दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। सीबीआई इनकी जांच कर रही है। सीबीआई ने चेताया- डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं
सीबीआई ने लोगों को चेताया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी या रेगुलेटरी अथॉरिटी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती। एजेंसी ने अपील की है कि फर्जी निवेश योजनाओं, पुलिस या जांच अधिकारी बनकर किए जाने वाले कॉल और डिजिटल अरेस्ट की धमकियों से डरकर पैसा ट्रांसफर न करें। संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट:जयपुर, जोधपुर, कोटा की आर्थिक सेहत का बनेगा रिपोर्ट कार्ड; रोजगार-उद्योग, जनसंख्या जैसे आंकड़ों से बनेंगी विकास योजनाएं

राजस्थान के तीन शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा को अब आबादी या भौगोलिक विस्तार से नहीं, बल्कि आर्थिक क्षमता, रोजगार सृजन, महिला उद्यमिता और उद्योग-व्यापार की वास्तविक तस्वीर के आधार पर आंका जाएगा। शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट के तहत इनकी आर्थिक प्रोफाइल तैयार की गई है। इससे सरकार को पहली बार यह स्पष्ट आधार मिलेगा कि किस शहर की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर टिकी है। कहां रोजगार की संभावना अधिक और किन क्षेत्रों में निवेश या सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। बता दें, शहरों के लिए ऐसी यह रिपोर्ट पहली बार तैयार की जा रही है। केंद्रीय राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अनिगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) 2025 के आंकड़ों का उपयोग कर शहर-स्तरीय आकलन तैयार करने की पहल की है। पहली बार देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 शहरों (जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या के आधार पर) की एक व्यापक सांख्यिकीय रूपरेखा में आकलन किया गया है। जयपुर में 48.49 हजार प्रतिष्ठानों से 1 लाख को रोजगार रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में लगभग 48.49 हजार प्रतिष्ठान और 1.01 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां प्रति प्रतिष्ठान सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) करीब 4.68 लाख रुपए तथा सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 55 फीसदी है। जोधपुर में प्रति प्रतिष्ठान जीवीए लगभग 3.89 लाख और कोटा में 2.59 लाख रुपए है। तीनों शहरों में सेवा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। सरकार का उद्देश्य शहरों की आर्थिक ताकत और कमजोरियों की पहचान कर विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। अभी अधिकांश सरकारी आंकड़े राज्य या जिला स्तर तक सीमित रहते थे, जिससे शहर-विशेष की चुनौतियों और संभावनाओं का सटीक आकलन कठिन था। नई व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी। भविष्य में इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय करना आसान होगा कि किस शहर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएं, कहां व्यापारिक अधोसंरचना बढ़ाई जाए, किस क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम चलें और किन शहरों में महिला उद्यमिता को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए। इससे सरकारी निवेश और बजट का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। रिपोर्ट कार्ड से यह फायदा होगा सरकार क्या चाहती है? पहली बार विकास के लिए आर्थिक संकेतकों को पैमाना बनाना बेहतर है। दूसरे शहरों की योजनाएं भी इसी आधार पर बने। -एनके जैन, अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

आरएसएएचसी की बड़ी चूक:बिना फिजिकल वेरिफिकेशन बना परीक्षा केन्द्र, 1500 क्षमता वाले कॉलेज में 2600 छात्रों को बैठाया

राजस्थान स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल (आरएसएएचसी) की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का फिजिकल वेरिफिकेशन किए बिना केवल चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दे दी गई। इसका खामियाजा 29 जून को आयोजित पैरामेडिकल डिप्लोमा कोर्स की परीक्षा में सामने आया, जहां अव्यवस्था मिलने पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे 2600 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि करीब 1500 परीक्षार्थियों की क्षमता वाले परीक्षा केन्द्र पर 2600 छात्रों को बैठाया गया। व्यवस्था कम पड़ने पर परीक्षार्थियों को टेंट में बैठाकर परीक्षा करानी पड़ी। बाद में गड़बड़ियां सामने आने पर परीक्षा निरस्त कर दी गई। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विरेन्द्र कुमार शर्मा ने स्वीकार किया कि समय कम होने के कारण फिजिकल निरीक्षण नहीं कराया गया और केवल चेकलिस्ट के आधार पर केन्द्र को स्वीकृति दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परीक्षा केन्द्र की क्षमता, आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किए बिना अनुमति देना गंभीर प्रशासनिक चूक है। क्या है मामला; कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में 29 जून को डिप्लोमा इन कैथ लैब टेक्नोलॉजी (डीसीएलटी), डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नोलॉजी (डीडीटी) और डिप्लोमा इन ईसीजी टेक्नोलॉजी (डीईसीजीटी) के प्रथम वर्ष एवं रिमांडेड छात्रों की सैद्धांतिक परीक्षा आयोजित थी। परीक्षा के दौरान अव्यवस्था मिलने पर इसे रद्द करना पड़ा। जयपुर में इस दिन कुल 11 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। ये हैं बड़ी खामियां
1. पिछले 10 साल से सिर्फ जयपुर ही परीक्षा केन्द्र
काउंसिल पिछले दस वर्षों से पैरामेडिकल कोर्स की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं केवल जयपुर में आयोजित करा रही है। इससे जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बाड़मेर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बीकानेर, चूरू और अलवर सहित अन्य जिलों के छात्रों पर यात्रा, ठहरने और भोजन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मौजूदा समय में गायत्री राठौड़ के पास चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा विभाग, दोनों के सचिव का दायित्व है। ऐसे में जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने और एसओपी जारी करने की मांग उठ रही है। 2. परीक्षा केन्द्रों और परीक्षकों को नाममात्र का मानदेय
परीक्षा केन्द्रों को प्रति छात्र करीब 12 रुपए और परीक्षकों को 250 रुपए मानदेय दिया जाता है, जिसे विशेषज्ञ अपर्याप्त मानते हैं। 3. काउंसिल का अपना भवन नहीं
आरएसएएचसी वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रही है और अब तक उसका अपना भवन नहीं बन पाया है। हमने कालवाड़ रोड स्थित सेंटर का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की बजाय चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दी थी। सरकार को जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने के लिए भी पत्र लिखा है, ताकि प्रदेश के बाहर के छात्रों को अपने गृह जिले या संभाग में परीक्षा देने की सुविधा मिल सके। -डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा, परीक्षा नियंत्रक, आरएसएएचसी

कर्मचारी चयन बोर्ड:पात्रता परीक्षाओं को लेकर अलग-अलग नियम; रीट के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार होता है जारी, समान पात्रता परीक्षा में नहीं

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) में टॉपिक वाइस अंक भार जारी नहीं किया जा रहा है। इससे सीईटी स्नातक और सीईटी सीनियर सेकंडरी की तैयारी करने वाले 30 लाख से अधिक अभ्यर्थी असमंजस में है कि वे कौन से टॉपिक की तैयारी अधिक करें और कौन से टॉपिक की कम। अंकभार जारी होने से विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करने में आसानी रहती है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से शिक्षक बनने के लिए होने वाली रीट के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार जारी किया जाता है। इससे अभ्यर्थी को तैयारी करने में काफी आसानी रहती है। अब सीईटी में भी टॉपिक वाइज अंकभार जारी करने की मांग उठ रही है। रीट के मुकाबले सीईटी में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक रहेगी। उधर, चयन बोर्ड ने टॉपिक वाइज अंकभार जारी करने से इंकार कर दिया है। 30 लाख असमंजस में; कौन से टॉपिक की तैयारी करें अभ्यर्थियों की मांग क्यों है जायज? रीट – सीईटी
टॉपिक वाइज अंकभार जारी होता है टॉपिक वाइज अंकभार जारी नहीं
तैयारी की स्पष्ट दिशा मिलती है अभ्यर्थियों में असमंजस
विषयवार रणनीति बनाना आसानसभी विषयों की तैयारी समान रूप से करनी पड़ रही पेपर सेटर्स की मनमानी पर रोक लगा सकेंगे समान पात्रता परीक्षा के सिलेबस में टॉपिक वाइस अंकभार जारी होने से अभ्यर्थियों को तैयारी में काफी मदद मिलती है। इससे उन्हें यह पता चलता है कि उन्हें किस टॉपिक पर अधिक ध्यान देना है और किस पर कम। इससे पेपर सेटर्स की मनमानी भी रोकी जा सकेगी। वे किसी टॉपिक से अधिक तो किसी से कम सवाल बना देंगे। बोर्ड को चाहिए कि टॉपिक वाइज अंकभार जारी करे। -हनुमान किसान, अध्यक्ष, राजस्थान बेरोजगार यूनियन अभ्यर्थी सभी टॉपिक की तैयारी करे। टॉपिक वाइज अंकभार जारी करना संभव नहीं है। पिछली सीईटी में भी ऐसा नहीं किया गया था। फिर भी सिलेबस में टॉपिक के अंकों का निर्धारण काफी कुछ 2024 की सीईटी जैसा ही है। अभ्यर्थी अगर पिछली दोनों सीईटी सिलेबस और पुराने पेपर्स देखेंगे तो उन्हें सटीक अंदाजा हो जाएगा कि कौन से टॉपिक का कितना वेटेज है। -आलोक राज, अध्यक्ष, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड

एनसीआरबी-2024 में बाल अपराध 11.2 प्रतिशत बढ़े:डिजिटल पढ़ाई की आड़ में क्राइम क्लास बच्चे यू-ट्यूब से सीख रहे हत्या के तरीके

गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर खुल गए हैं। होमवर्क, असाइनमेंट और स्कूल अपडेट अब वाट्सएप व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने लगे हैं। इसी ‘डिजिटल पढ़ाई’ के नाम पर बच्चों के हाथों में दिनभर मोबाइल रहता है। लेकिन चिंता कि बात यह है कि मोबाइल पर कई बच्चे पढ़ाई के बीच हिंसक गेम, क्राइम सीरीज, डार्क वेब और अपराध से जुड़े वीडियो देख रहे हैं। इसी कारण बच्चों यानी किशोरों के अपराध में बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में जारी एनसीआरबी-2024 रिपोर्ट के अनुसार बच्चों यानी किशोरों के अपराध में 11.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मर्डर, डकैती और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में नाबालिगों की भूमिका बढ़ना गंभीर संकेत है। साइबर अपराधों में भी 17.9% वृद्धि दर्ज हुई। पहली बार साइबर अपराध का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंचा है। राजस्थान और जयपुर की स्थिति भी चिंताजनक है। जयपुर धोखाधड़ी के मामलों में देश में पहले नंबर पर है। चोरी, किडनैपिंग और मर्डर के मामलों में जयपुर महानगरों में तीसरे पायदान पर है। मुहाना कांड; 11-12 साल के बच्चों ने दोस्त का सिर काटा जयपुर के मुहाना इलाके में 14 जून को लापता 10 साल के अजमत की 25 जून को नाले में सिर कटी लाश मिली। वारदात में मृतक के ही 11 और 12 साल के तीन दोस्त शामिल निकले। बहन को लेकर हुई मामूली कहासुनी का बदला लेने के लिए बच्चों ने पहले अजमत का गला घोंटा, फिर चाकू से सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया। इतनी कम उम्र में इस तरह की वारदात और फिर सामान्य तरीके से घर लौट आना, बच्चों पर हिंसक कंटेंट के असर की ओर इशारा करता है। शिवदासपुरा कांड; यू-ट्यूब देखकर काटे ताई के पैर
शिवदासपुरा इलाके में 24 साल के सूरज बैरवा ने अपनी 53 साल की ताई की हत्या कर दी। उसे ताई के पैरों में पहने करीब एक किलो चांदी के कड़े लूटने थे। वारदात की पूरी साजिश मोबाइल पर रची गई। हत्या से पहले सूरज ने तीन दिन तक यू-ट्यूब पर 50 से ज्यादा क्राइम वीडियो देखे। गूगल पर यह भी सर्च किया कि सबूत कैसे मिटाएं और कुएं में फेंकी लाश कितने दिन में पानी के ऊपर आती है। उसने इंटरनेट से ही हत्या का तरीका सीखा। पुणे मर्डर; डिजिटल प्लानिंग से पुलिस को चकमे की कोशिश
महाराष्ट्र के पुणे में 20 साल की सिया गोयल ने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को 500 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। इस केस में मोबाइल का इस्तेमाल पुलिस को चकमा देने के लिए किया गया। आरोपी चेतन ने अपनी लोकेशन छुपाने के लिए वारदात वाले दिन अपना फोन दुकान पर ही छोड़ दिया और इंटरनेट बंद रखा, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. अदिति अग्रवाल, मनोवैज्ञानिक रील्स खत्म कर रही बच्चों का धैर्य, हिंसक गेम्स बना रहे आक्रामक – 5 से 17 साल के बच्चों में मनोरंजन के लिए स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और रोज 60 मिनट शारीरिक गतिविधि की सलाह दी गई है। – अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और कुछ अन्य संस्थाएं 5 से 17 साल के बच्चों के लिए 2 घंटे से कम स्क्रीन टाइम की सलाह देती हैं। भारतीय बाल रोग अकादमी भी मनोरंजन के लिए स्क्रीन का उपयोग सीमित रखने और परिवार के साथ स्क्रीन-फ्री समय तय करने पर जोर देती है। एक्सपर्ट व्यू : सर्च इंजन जवाबदेह बनें, पैरेंट्स दें ‘डिजिटल संस्कार’ मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट
– इंटरनेट पर अपराध के तरीके खोजना आसान होता जा रहा है। सरकार को ऐसे सख्त नियम बनाने चाहिए कि क्राइम से जुड़े खतरनाक वीडियो सर्च होते ही ब्लॉक हों और पुलिस को अलर्ट मिले। स्कूलों में इंटरनेट के सही इस्तेमाल की पढ़ाई जरूरी है। अभिभावकों को एडमिशन के समय स्कूलों से इसकी मांग करनी चाहिए। आज घर के संस्कारों के साथ ‘ऑनलाइन संस्कारों’ की भी उतनी ही जरूरत है। – बच्चा आपसे ज्यादा मोबाइल चलाना जानता है, तो इसे गर्व नहीं बल्कि चिंता की बात मानना चाहिए। पैरेंट्स खुद को तकनीकी रूप से अपडेट रखें और बच्चों के फोन में पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर जरूर डालें। बच्चों को फोन में पासवर्ड लगाने या पूरी प्राइवेसी की छूट न दें। उनकी सर्च हिस्ट्री नियमित जांचें। कुछ गलत दिखे तो तुरंत डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाएं और जरूरत हो तो काउंसलिंग कराएं।