ममता बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा:गद्दारी की भी एक सीमा होती है; बागी नेताओं को चुनौती- हिम्मत है तो बीजेपी में शामिल हो

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत के बीच ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न कहीं नहीं जाएगा। अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा। ममता ने बागी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा, अगर हिम्मत है तो खुलकर BJP में शामिल हो जाओ। क्या तुम्हें लगता है कि मैं खत्म हो गई हूं? मैं जनता के बीच पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर जाऊंगी, मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता अब खुलकर BJP के लिए काम कर रहे हैं। ममता ने कहा, गद्दारी की भी एक सीमा होती है। ममता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी के 20 सांसद और 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। शनिवार को टीएमसी की पश्चिम बंगाल अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में वह बागी गुट के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ नजर आईं। ममता ने क्यों चुनौती दी; विधायकों का अलग गुट, सांसदों का NCPI में विलय ममता का साथ छोड़कर अलग हुए बागी विधायक और सांसद फिलहाल भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। ममता बोलीं- पार्टी के दम पर चुनाव जीते, अब उसी से गद्दारी कर रहे बंगाल चुनाव में हार के बाद बागी गुट ने ऋतब्रत को नेता चुना 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था। इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। ममता के पास अब 22 विधायक और 17 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। दो तिहाई सदस्य होने पर मिलती है अलग दल की मान्यता बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की जानकारी दी थी। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… TMC हेडक्वार्टर पर बागी गुट का कब्जा:ताले हटाए, पोस्टर बदले, इनमें ममता की फोटो नहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में गुट ने दफ्तर के ताले बदल दिए और नए पोस्टर लगाए। नए पोस्टर्स में ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। हालांकि, अंदर लगी उनकी तस्वीर और कटआउट को नहीं हटाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

बाड़मेर में सात दिन तेज हवा और बारिश का अलर्ट:रात में हल्की बूंदाबांदी से मौसम हुआ सुहाना, सुबह उमस से लोग परेशान

बाड़मेर में भीषण गर्मी और उमस का दौर जारी है। हालांकि शनिवार रात को हल्की बूंदाबांदी हुई। जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं रविवार सुबह से ही बादल और सूरज के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहा। साथ ही रुक-रुक हवाओं का दौर जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार 7 जुलाई तक यलो अलर्ट जारी किया है। फिलहाल मानसून पश्चिमी राजस्थान में एक्टिव है। न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। 9 दिन देरी से पहुंचा मानसून दरअसल, इस बार मानसून करीब 9 दिन देरी से पहुंचा है, लेकिन अब तक जिले के ग्रामीण इलाकों में बारिश हुई है। अब मानसून सक्रिय रहने की उम्मीद से जिले में अच्छी बारिश हो सकती है। शनिवार रात 8 बजे आंधी के साथ बारिश हुई। होर्डिंग्स, पेड़-पौधे और पोल गिरे जिले में कई इलाकों में होर्डिग्स, पेड़-पौधे और बिजली के पोल भी गिर गए। आकाश में आकाशीय बिजली की चमक और मेघगर्जना का दौर चला। रात में चौहटन, रामसर, गिराब इलाके में हल्की और मध्यम बारिश हुई है। दिनभर की उमस के बाद शाम को ग्रामीण इलाकों में गर्मी से राहत मिली। शनिवार को बाड़मेर का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रविवार को सुबह से आसमान में बादल छाए है। वहीं रुक-रुक हल्की हवा भी चल रही है। वहीं उमस ने लोगों के हाल बेहाल कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार अब तक वीक में ज्यादा समय तक प्रदेश में मानसून एक्टिव रहेगा। अब तूफानी हवा के साथ बारिश की संभावना बनी रहेगी। अब मानसून के करीब 6-7 दिन तक एक्टिव रहने की संभावना है।

बाइक सवारों से 4.90 लाख और आईफोन छीनकर भागे बदमाश:पहले 6 आरोपियों ने मिलकर रेकी की, गलियों का फायदा उठाकर फरार हुए

चित्तौड़गढ़ में 4.90 लाख रुपए और आईफोन की लूट का मामला सामने आया है। बदमाशों ने पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिया है। पहले पीड़ितों की 6 आरोपियों ने रेकी की। उसके बाद 4 आरोपियों ने सुनसान जगह पर मौका मिलते ही बैग छीनकर फरार हो गए। घटना शनिवार दोपहर 3.30 की है। वारदात के बाद पीड़ितों ने बदमाशों का काफी दूर तक पीछा भी किया, लेकिन गलियों का फायदा उठाकर वे भाग गए। पुलिस का कहना है कि वारदात में शामिल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग जगहों पर तलाश की जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि रेकी के दौरान आरोपी दो गाड़ियों में छह लोग नजर आए, जबकि लूट के समय चार लोगों ने वारदात को अंजाम दिया। भाई के कहने पर रुपए लाया था संजय ने बताया- शनिवार दोपहर उसके बड़े भाई शंकरलाल का फोन आया था। भाई ने घर पर रखे 4.50 लाख रुपए लेकर चित्तौड़गढ़ आने के लिए कहा गया। इसके बाद वह अपने दोस्त किशन सेन के साथ बाइक से शहर के लिए रवाना हुआ। रास्ते में दोनों ने चाय पी और फिर वी-2 मॉल के पास कान्हा होटल पहुंचे। जहां शंकरलाल मिले। यहां शंकरलाल ने संजय को 40 हजार रुपए और दिए। इस तरह बैग में कुल 4.90 लाख रुपए हो गए। इसके बाद दोनों दोस्त एक परिचित की दुकान जाने के लिए वहां से निकल गए। सुनसान जगह पर बैठे, तभी पहुंच गए बदमाश रास्ते में दोनों द्वारिका धाम कॉलोनी के पास गणपति मंदिर और दरगाह के पास कुछ देर के लिए रुक गए थे। किशन बैग लेकर दीवार पर बैठ गया था, जबकि संजय पास में शौच के लिए चला गया। वापस आने के बाद संजय ने बैग अपने पास रख लिया और उस पर अपना आईफोन भी रख दिया। साथ ही किशन के पास दीवार पर बैठ गया। दो गाड़ियों पर आए बदमाश इसी दौरान एक भूरे रंग की स्कूटी और एक स्प्लेंडर बाइक वहां पहुंची। दोनों गाड़ियों पर सवार चार लोगों ने चेहरा ढक रखा था। एक बदमाश ने किशन को धक्का देकर नीचे गिरा दिया, जबकि दूसरे ने बैग और उसके ऊपर रखा आईफोन छीन लिया। इसके बाद सभी आरोपी दोनों गाड़ियों से मौके से फरार हो गए। इस दौरान दीवार से नीचे गिरने से किशन को काफी चोट लगी। गलियों में गायब हो गए आरोपी संजय और किशन ने तुरंत बदमाशों का पीछा शुरू किया। पीछा करते हुए वे अप्सरा टॉकीज, पुरानी पुलिया, बस स्टैंड के पीछे, नगर परिषद अंडरपास और फव्वारा चौक तक पहुंचे, लेकिन आरोपी शहर की गलियों में घुसकर नजरों से ओझल हो गए। फोन कर भाई को जानकारी दी इसके बाद संजय ने अपने भाई को फोन कर पूरी जानकारी दी और तीनों कोतवाली थाने पहुंचे। जहां मामला दर्ज कराया। थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत ने बताया- सेहनवा निवासी संजय सालवी (24) ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है। 4 ने ​वारदात को अंजाम दिया शुरुआती जांच में सामने आया है कि रेकी के समय आरोपी 6 लोग थे, जबकि लूट की वारदात 4 लोगों ने की। आशंका है कि 2 आरोपियों को बीच रास्ते में कहीं उतार दिया गया था। पुलिस सभी संभावित ठिकानों पर दबिश देकर आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी लोग जुड़े हो सकते है।

3 फीट के गड्ढे में गाड़ी थी पति की लाश:बॉडी को घसीटकर बाथरूम तक लाई, हथौड़ी-छेनी से टाइल्स तोड़कर खुदाई की

पति की हत्या कर बॉडी बाथरूम में गाड़ने वाली रूबी ने इस हत्याकांड को प्लानिंग से अंजाम दिया है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि घर में डेली झगड़े हो रहे थे। बच्चों पर इसका गलत असर का बहाना कर उसने दोनों मासूमों और सास को वारदात वाले दिन जेठ के घर भेज दिया था। फिर रात को खीर में नींद की गोलियां मिलाकर पति को खिला दी। पति की मौत के बाद बॉडी को घसीटकर बाथरूम में लग गई। इसके बाद हथौड़ी-छेनी से बाथरूम के फर्श पर 3 फीट गहरा गड्ढा कर पति को दफना दिया। जेठ की शिकायत पर पुलिस ने सर्च किया तो रूबी के पति सुरेंद्र शर्मा की सड़ी-गली लाश मिली। आगरा में 17 मई को हुए इस हत्याकांड का खुलासा 3 जुलाई को हुआ। आरोपी रूबी यूपी के इटावा की रहने वाली है। वहीं, सुरेंद्र शर्मा राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला था। दोनों की शादी 2010 में हुई थी। इसके बाद से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में रहते थे। हत्याकांड में अब तक क्या-क्या सामने आया? बॉडी को घसीटते हुए बाथरूम में ले गई: रूबी पति की मौत के बाद कमरे से बॉडी को घसीटते हुए बाथरूम में ले गई। फिर हथौड़ी-छैनी से फर्श को तोड़ा और करीब 3 फीट गहरा गड्ढा किया। फिर बॉडी को उसमें दफन कर दिया। इसके बाद ऊपर से मिट्टी डाल दी। अगले दिन मजदूर बुलवाकर वहां सीमेंट से प्लास्टर करवा दिया। वारदात के कुछ दिन बाद वहां टाइल्स लगवा दीं। 45 दिन तक दुखी होने का नाटक करती रही: हत्या के 2 दिन बाद रूबी भी जेठ के घर ही चली गई। इस दौरान परिवार उससे सुरेंद्र के बारे में पूछता रहा। वो यही कहती रही कि सुरेंद्र घर से 5 हजार रुपए लेकर चला गया। उसके बाद लौटा ही नहीं। जब भी रूबी से सुरेंद्र की बात की जाती तो वो रोने लग जाती। उसने 45 दिन तक कुछ नहीं बताया। बदबू फैली, कंकाल देखकर डरे: तीन जुलाई को खुदाई के दौरान जब मजदूर यहां प्लास्टर तोड़ने लगे तो वे भी कंकाल देख घबरा गए। पूरा बाथरूम बदबू से भर गया था। बॉडी पूरी तरह गल चुकी थी। मजदूरों ने बताया कि कंकाल देखकर लग रहा था कि बॉडी को गड्ढे बुरी तरह से फंसाया गया है। बदबू और डर के कारण कुछ मजदूर बाथरूम से बाहर भाग गए। पुलिस को बताया- कहां सिर, कहां पैर: खुदाई के दौरान रूबी को भी पुलिस अधिकारियों ने बाथरूम में बुलाया था। उससे लाश के सिर और पैर की लोकेशन पूछी गई, तो वो रोने लगी। अधिकारियों ने बताया कि बॉडी दफनाने के बाद रूबी ने इस बाथरूम का इस्तेमाल बंद नहीं किया था। भाई बोला- सुरेंद्र के ATM कार्ड से निकल रही थी पिता की पेंशन सुरेंद्र के भाई अनिल शर्मा ने बताया- पति-पत्नी के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी। उनके पिता की पेंशन सुरेंद्र के खाते में आती थी। पेंशन दोनों भाई आपस में बांट लेते थे। भाई के गायब होने के बाद जब मैंने रूबी से रकम और ATM कार्ड के बारे में पूछा तो उसने कहा- ATM कार्ड तो सुरेंद्र अपने साथ ले गया है। भरतपुर में बैंक से जानकारी की तो पता लगा कि आगरा से ही रकम निकाली जा रही थी। जेठ ने पूछा तो- बाथरूम की ओर इशारा किया अनिल शर्मा ने बताया कि इसके बाद सख्ती से उससे पूछताछ की तो रूबी ने मान लिया कि रकम वही निकाल रही है। इस दौरान मैंने उससे कहा कि वह घबराए नहीं और पूरी बात बता दे तो हो सकता है मैं उसकी मदद करूं। इसके बाद रूबी ने बाथरूम की ओर इशारा कर पूरा मामला बताया था। अनिल ने बताया कि घर में सुरेंद्र, पत्नी रूबी, मां कमला और दोनों बेटियां रहती थीं। सुरेंद्र के पिता राधेश्याम शर्मा टीचर थे, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी है। पुलिस को हत्याकांड को लेकर एक और आशंका? पुलिस को आशंका है कि मामले में कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल हो सकता है। इस एंगल से भी जांच की जा रही है। वहीं, आगरा पुलिस ने रूबी को शनिवार को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की रिमांड पर लिया है। …. हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पति की हत्या कर शव को बाथरूम में दफनाया:टाइल्स लगवाईं, वहीं रोजाना नहाती रही; खीर में नींद की गोली खिलाकर मर्डर किया भरतपुर के रहने वाले एक व्यक्ति की उसकी पत्नी ने हत्या कर दी। आरोपी महिला ने बॉडी को घर के बाथरूम में ही गाड़ दिया। उसके ऊपर टाइल्स लगवा दीं। आरोपी नहाने के लिए इसी बाथरूम का इस्तेमाल करती रही। पूरी खबर पढ़िए…

आर्मी ट्रक और एम्बुलेंस में टक्कर, तीन की मौत:ओवरटेक के चक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़े, मरीज को डिस्चार्ज कराकर घर ले जा रहे थे

सेना के ट्रक (एंबुलेंस/मेडिकल सपोर्ट) से टकराकर प्राइवेट एम्बुलेंस के परखच्चे उड़ गए। उसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य लोग घायल हैं। दुर्घटना के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ समय के लिए जाम लग गया। रविवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे हादसा श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे-62 (सूरतगढ़-श्रीगंगानगर मार्ग) पर केंचियां कस्बे के निकट हुआ। एम्बुलेंस, ट्रक को ओवरटेक करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान सामने से आ रहे सेना की गाड़ी से आमने-सामने की टक्कर हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महिला मरीज को जयपुर के हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवाकर परिजन एंबुलेंस से घर ले जा रहे थे। तभी रास्ते में हादसे का शिकार हो गए। सूरतगढ़ के हॉस्पिटल में भर्ती कराया हादसे में अंबिका सिटी (श्रीगंगानगर) निवासी लक्ष्मी देवी (26) पत्नी कृष्णलाल, ड्राइवर सतनाम सिंह (26) पुत्र जसवंत सिंह और महेंद्र कौर (56) पत्नी किशन की मौत हो गई। रामप्रकाश (32) पुत्र जसवंत सिंह और राजवीर घायल हो गए। इनको सूरतगढ़ के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शुरू कराया रेस्क्यू घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद पुलिस ने तीनों शवों पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्च्युरी में रखवाया। — हादसे की ये खबरें भी पढ़िए … 1- ट्रॉले के बीच फंसी कार, मार्बल व्यवसायी-ड्राइवर की मौत पाली में सड़क हादसे में गुजरात के एक मार्बल व्यवसायी और उनके ड्राइवर की मौत हो गई। जयपुर से कच्छ लौटते समय उनकी कार पीछे से आए ट्रॉले की टक्कर के बाद आगे चल रहे ट्रॉले में जा घुसी। इतने में कार दोनों ट्रॉलों के बीच बुरी तरह फंस गई। पढ़ें पूरी खबर… 2- 30 जून को बस-ट्रेलर भिड़े थे, 8 की जान गई थी राजस्थान के दौसा जिले में 30 जून की देर रात बस-ट्रेलर में भिड़ंत के बाद आग लग गई थी। हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई थी। पढ़ें पूरी खबर…

बीकानेर में आज लगाएंगे 11 हजार खेजड़ी के पौधे:22 ब्लॉक में एक साथ पौधारोपण, 363 महिलाओं ने बजाए नगाड़े

खेजड़ली उत्सव के तहत रविवार सुबह बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण का बड़ा अभियान शुरू हुआ। सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर के पास भीनासर गोचर में एक साथ 11 हजार खेजड़ी के पौधे लगाए जा रहे हैं। इस महाअभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लिया। अभियान की खास बात यह रही कि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद श्याम सुंदर पालीवाल, लक्ष्मण सिंह लापोड़िया और हिम्मतराम भांभू भी पौधारोपण में शामिल हुए। 22 ब्लॉक बनाकर किया जा रहा पौधारोपण यह आयोजन बीकानेर वैचारिक जागरण मंच की ओर से किया जा रहा है। मंच के अध्यक्ष अजय पुरोहित ने बताया कि पौधारोपण के लिए पूरे क्षेत्र को 22 ब्लॉक में बांटा गया है। वहीं, हजारों लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए आयोजन स्थल पर चार प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संस्थाओं को अलग-अलग ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, जहां सामूहिक रूप से खेजड़ी के पौधे लगाए जा रहे हैं। 363 महिलाओं ने नगाड़ों की गूंज के बीच लगाया पौधा कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 363 महिलाओं की सहभागिता रही। महिलाओं ने पारंपरिक नगाड़ों और लोक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि के बीच पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। आयोजन में संत समाज के प्रतिनिधियों की भी मौजूदगी रही, जिन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की। खेजड़ी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल आयोजकों के अनुसार खेजड़ली उत्सव का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना भी है। मरुस्थलीय क्षेत्र में जीवनदायी माने जाने वाले खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि यह बीकानेर के अब तक के सबसे बड़े पर्यावरणीय अभियानों में से एक है। खेजड़ली आंदोलन के झलकियां देखें..

जम्मू-कश्मीर की किताब में आतंकी हाफिज सईद को महान बताया:FIR दर्ज, 8 अफसर सस्पेंड; भाजपा बोली- ये एकेडमिक जिहाद, बुक बैन करें

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो किताबों को लेकर UAPA के तहत FIR दर्ज गई है। इन किताबों में मुंबई हमलों के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद और अलगाववादी नेता मकबूल भट को महान हस्तियां बताया गया है। पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार FIR दर्ज करके छापेमारी शुरू कर दी है। विवादित किताबों में से एक हिलाल अहमद और संतोष मीना की ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ JK’ है। इसे जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस ने प्रकाशित किया है। दूसरी किताब सुशांत गिरी की ‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’ है। इसे दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने पब्लिश किया है। अधिकारियों के मुताबिक, एक किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में बांटी गई थीं। भाजपा ने इसे एकेडमिक जिहाद बताते हुए किताबों पर बैन और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। BJP ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। किताब के पन्नों का वह हिस्सा जिसमें अलगाववादियों के बारे में लिखा है… विवाद की वजह… पूर्व डीजीपी बोले- ये बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि मसरत आलम, सैयद अली शाह गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोग पाकिस्तान की ISI और वहां की सरकार का एजेंडा आगे बढ़ाते थे। उन्होंने कहा, अगर इन्हें महान नेता की तरह पेश किया जाएगा, तो नई पीढ़ी को यही संदेश मिलेगा कि बड़ा बनने के लिए इन्हीं जैसा बनना चाहिए। किताब में मीरवाइज उमर फारूक को कश्मीर की आखिरी उम्मीद बताया गया है। क्या सच में जम्मू-कश्मीर के लोग ऐसा मानते हैं? इस तरह की बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश देकर वापस मंगाई किताबें राज्य के 1832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों के लिए ‘समग्र शिक्षा’ लाइब्रेरी ग्रांट के तहत उम्र के हिसाब से सही किताबें खरीदने का आदेश जारी हुआ था। लाइब्रेरी की किताबें चुनने के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों के एक्सपर्ट्स और एकेडेमिक्स की चार सब-कमेटी बनाई गई थीं। इन कमेटियों ने 364 पब्लिशर्स से जमा की गई 463 किताबों को चुना। विवाद बढ़ने पर विभाग ने किताबें वापस लेने का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया, “विभाग के ध्यान में आया है कि इन किताबों में बहुत ही आपत्तिजनक कंटेंट है। यह साफ है कि सब-कमेटी सीरीज 4 के सदस्यों और सुपरवाइजरी अधिकारियों ने ऐसी किताबों की सिफारिश करने में गंभीर लापरवाही बरती, अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई और रूजरी सावधानी नहीं रखी। लेखकों और पब्लिशर्स को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बैन और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसमें यह भी निर्देश दिया गया कि उनकी लिखी या पब्लिश किए गए सभी प्रिंटेड मटेरियल को केंद्र शासित प्रदेश से वापस ले लिया जाए। मामले की जांच के लिए 2 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसकी रिपोर्ट 30 दिन के अंदर सक्षम अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। 8 अधिकारी सस्पेंड किए गए विवाद बढ़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को दोनों किताबों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी एक्शन लेते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त की गई और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। सस्पेंड अधिकारियों के नाम पब्लिशर के दफ्तर पर छापा, UAPA समेत कई धाराओं में केस पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 49 (उकसावा), 61(2) (आपराधिक साजिश), 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 196 (वैमनस्य फैलाना) और 353 (झूठे बयान या अफवाहें प्रकाशित करना) के अलावा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया है। FIR दर्ज होने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने जम्मू के बहु प्लाजा में एक पब्लिशर के दफतर पर छापा मारा। जांच के दौरान पुलिस ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

जोधपुर में 17 रूटों पर दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें:एक बार चार्ज होने पर 180 किलोमीटर तक चलेगी; जानिए कब शुरू होगी सेवा

जोधपुर शहर के लोग जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों में सफर कर सकेंगे। इसके लिए रूट निर्धारण से लेकर चार्जिंग स्टेशन और डिपो का काम शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि शहर की पहचान के अनुसार, इन बसों का रंग भी ब्लू यानी नीला होगा। जानकारी के अनुसार, जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। बजट घोषणा के अनुसार, जोधपुर को 125 बसें मिलेंगी। शहर के 17 रूटों पर इनका संचालन किया जाएगा। इन बसों का ट्रायल जयपुर में हो चुका है। हालांकि, जयपुर में मिली इलेक्ट्रिक बसों का आकार (साइज) 12 मीटर है, जबकि जोधपुर शहर को मिलने वाली बसों का आकार 9 मीटर रहेगा। नगर निगम आयुक्त राहुल जैन ने बताया- जुलाई के अंत तक हमें 30 से 40 बसें मिल जाएंगी। इन बसों को पहले पुराने रूटों पर चलाया जाएगा। 2 फेज में मिलेंगी इलेक्ट्रिक बसें नगर निगम के XEN मनोज बैरवा ने बताया- जोधपुर शहर को मिलने वाली इलेक्ट्रिक बसें दो फेज में मिलेंगी। पहले फेज में 100 और फिर दूसरे फेज में 25 बसें आएंगी। हालांकि, शुरुआती संचालन के लिए पहले चरण में कितनी बसें मिलेंगी, इसकी संख्या अभी पूरी तरह तय नहीं है। 9 मीटर लंबी इस बस में 25 सीटें होंगी, जबकि इसकी कुल क्षमता (कैपेसिटी) लगभग 36 यात्रियों की है। इनमें 2 सीटें खास तौर पर दिव्यांगों के लिए भी तैयार की गई हैं। इसे लेकर दिल्ली में टेंडर हो चुके हैं और अहमदाबाद की एक फर्म को इन बसों का काम दिया गया है। ड्राइवर कंपनी देगी, नगर निगम करेगा कंडक्टरों की भर्ती इधर, जोधपुर शहर में तीन एजेंसियां मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। पहली डिस्कॉम, जो इलेक्ट्रिक बसों के लिए लाइन और ट्रांसफॉर्मर लगाने का काम करेगी। दूसरी रूडसिको (RUDSICO), जो झालामंड में डिपो बना रही है और तीसरी नगर निगम। इन बसों के संचालन के लिए 100 ड्राइवर कंपनी की ओर से नियुक्त किए जाएंगे। लेकिन, कंडक्टरों की भर्ती और रेवेन्यू कलेक्शन (राजस्व संग्रह) का काम नगर निगम अपने स्तर पर करेगा। इसके लिए करीब 235 कंडक्टरों की भर्ती होगी। डिस्कॉम की ओर से झालामंड डिपो के लिए 220 केवी (KV) की लाइन ली जा रही है। झालामंड में बनने वाले इस डिपो में 13 ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। किराया जल्द होगा तय, पास भी बनेंगे एक्सईएन मनोज बैरवा ने बताया- किराया प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय किया जाएगा। हालांकि, यह किराया कितना होगा, यह कमेटी तय करेगी। वहीं, इन बसों में रोजाना सफर करने वाले शहरवासियों के लिए मासिक (मंथली) और सालाना पास भी बनेंगे। इन पास की भी अलग-अलग कैटेगरी होगी, जिसे कमेटी द्वारा तय किया जाएगा।

भंवरी देवी पेंशन मामले में हाईकोर्ट सख्त:हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों को अंतिम चेतावनी; आदेश नहीं मानने पर कोर्ट में पेश होना होगा

राजस्थान हाईकोर्ट ने एएनएम भंवरी देवी से जुड़े पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभ मामले में राज्य सरकार व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने 12 जनवरी 2024 के आदेश का 18 जुलाई 2026 तक पूर्ण पालन करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों को 21 जुलाई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। 2025 में दायर की थी याचिका याचिकाकर्ता साहिल पेमावत व अन्य ने कोर्ट को बताया कि भंवरी देवी की 2011 में हत्या के बाद उनके वारिसों को बकाया सेवा परिलाभ, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी इन आदेशों का पालन नहीं किया गया है। हाईकोर्ट आदेश के बाद भी उसके बेटे और बेटियों को पेंशन नहीं दी गई है। मामले में भंवरी देवी के बेटे साहिल पेमावत व दो बेटियों ने 3 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को सूचित किया गया कि पेंशन संबंधी प्रस्ताव पेंशन विभाग को भेजा जा चुका है और उसकी स्वीकृति लंबित है। इस पर कोर्ट ने अंतिम मोहलत देते हुए समय पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में चिकित्सा सचिव, सीएमएचओ जोधपुर, चिकित्सा निदेशालय और पेंशन विभाग के संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने 2 साल पहले पेंशन देने का दिया था आदेश हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने 12 जनवरी 2024 को स्पष्ट आदेश दिया था कि भंवरी देवी के बेटे साहिल और दोनों बेटियों अश्विनी व सुहानी को चार महीने के अंदर-अंदर पेंशन और रिटायरमेंट समेत सरकारी सेवा से जुड़े सभी लाभ दिए जाए। चिकित्सा विभाग को यह भी छूट दी गई थी कि वह भंवरी देवी की मृत्यु संबंधी आवश्यक सूचना और सर्विस बुक के लिए अधीनस्थ कोर्ट में आवेदन कर प्राप्त कर सकेगा।

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन:नाना से महाभारत सुनाने की प्रेरणा मिली, 13 की उम्र में पहली बार मंच पर आईं

छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वे 70 साल की थीं। उन्होंने शनिवार रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार थीं। तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को सुनाने की प्रेरणा उन्हें नाना से मिली थी। भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। आज पैतृक गांव गनियारी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने X पर लिखा, ‘उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।’ छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडवानी के जरिए उन्होंने देश-विदेश में राज्य का नाम रोशन किया। पीएम मोदी ने खुद फोन लगाकर स्वास्थ्य की जानकारी ली थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख को फोन लगाकर उनका हालचाल पूछा था। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने चिंता जताई थी और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था। वेणु ने बताया, प्रधानमंत्री ने तबीयत पर अफसोस जताते हुए कहा था कि उनका ध्यान रखिए। अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कीजिए। तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की धरोहर हैं। नाना को सुनकर गाने के प्रति लगाव बढ़ा तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। वे पारधी समुदाय से थीं। देश-विदेश में पंडवानी लोक गायिकी को पहचान दिलाने वाली तीजन की जिंदगी का सफर आसान नहीं रहा। इसी गायिकी की वजह से उन्हें समाज ने बेदखल कर दिया था। समाज से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। उनके पिता का नाम चुनुकलाल और माता का नाम सुखवती था। तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं थी। धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद हो गई। उनकी लगन और प्रतिभा को देखकर गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं, जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी की। कभी स्कूल नहीं गईं, 4 बार मिली डी. लिट. की उपाधि बचपन में स्कूल का मुंह न देख पाने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई साक्षरता अभियान में किसी तरह पांचवीं की सीढ़ी ही चढ़ पाईं। लेकिन उनकी पंडवानी की ऐसी धूम रही कि उन्हें भारत के 3 नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। तीजन बाई को 4 बार डॉक्टर ऑफ लिटरेचर यानी डी.लिट. की उपाधि मिली। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही थी निगरानी तीजन बाई पिछले करीब 2 सालों से बीमार थीं। कुछ दिनों पहले उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में भर्ती कराया गया था। एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी विशेष निगरानी कर रही थी। जानकारी के मुताबिक तीजन बाई को सांस लेने में तकलीफ और उम्र से संबंधित अन्य परेशानियां थीं।
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