मानसून की दस्तक के साथ बढ़ा 'साइलेंट किलर' का खतरा:खेत-खलिहानों में रहें सावधान, झाड़-फूंक से बचें, बीडीके अस्पताल में इस साल अब तक 33 केस दर्ज
मानसून की आहट के साथ ही जिले में एक अदृश्य खतरा तेजी से पैर पसार रहा है। बारिश की पहली फुहारों के साथ ही खेतों, ढाणियों और घरों के आसपास सांपों की आवाजाही बढ़ गई है। अपने बिलों से बाहर निकल रहे ये सांप अब इंसानी बस्तियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। बीडीके अस्पताल के आंकड़े भी इस बढ़ते खतरे की गवाही दे रहे हैं, जहां इस वर्ष जनवरी 2026 से मई 2026 अब तक 33 लोग सर्पदंश का शिकार होकर इलाज के लिए पहुंच चुके हैं। क्यों बढ़ रहा है खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की बारिश के दौरान जमीन में पानी भरने से सांपों के बिल भर जाते हैं, जिसके चलते वे सुरक्षित स्थानों और भोजन की तलाश में बाहर निकलते हैं। इस समय खेतों में बुवाई का काम भी जोर-शोर से चल रहा है, जिससे किसानों का खेतों में आना-जाना बढ़ गया है। इसके अलावा, घरों के पास जमा कबाड़, लकड़ी के ढेर और उगी झाड़ियां सांपों के लिए आदर्श छिपने की जगह बन जाती हैं। लगातार बढ़ रहे है मामले
बीडीके अस्पताल में दर्ज किए गए सर्पदंश के मामलों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। पिछले वर्षों की तुलना में यह समस्या लगातार विकराल हो रही है। 2021: 37 मामले 2022: 52 मामले 2023: 48 मामले 2024: 80 मामले 2025: 100 मामले 2026 (जनवरी से मई ): 33 मामले
झाड़-फूंक हो सकती है जानलेवा बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठना बहुत बड़ी भूल है। उन्होंने कहा, लोग अक्सर समय गवां देते हैं और जब स्थिति बिगड़ जाती है, तब अस्पताल आते हैं। घाव पर चीरा लगाना, जहर चूसना या अंग को कसकर बांधना जैसी चीजें स्थिति को और खतरनाक बना सकती हैं। डॉ. भाम्बू ने बताया कि बीडीके अस्पताल में सर्पदंश के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हैं। अस्पताल में ‘पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम’ (एएसवी) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आईसीयू सहित आपातकालीन इकाई में प्रशिक्षित स्टाफ चौबीसों घंटे मरीजों की सेवा में तैनात है। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज मिलने से मरीजों को बचाया जा सकता है। कैसे करें बचाव और प्राथमिक उपचार बीडीके अस्पताल के डॉ. राहुल चौधरी ने बताया कि घबराएं नहीं, मरीज को शांत रखें और तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। प्रभावित अंग को ज्यादा न हिलने दें। घाव को साबुन और साफ पानी से धीरे-धीरे धोएं और साफ ड्रेसिंग करें। अंगूठी, घड़ी, कड़ा या जूते जैसी कसी हुई चीजों को तुरंत हटा दें, क्योंकि सूजन आने पर ये रक्त संचार में बाधा डाल सकती हैं। बिना देरी किए मरीज को तुरंत उस अस्पताल ले जाएं जहां एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो। कैसे पहचानें जहरीला सांप विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सांप जहरीला है, तो मरीज को उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, धुंधला दिखाई देना, पलकों का झुकना, मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना, बेहोशी या मसूड़ों से खून आने जैसे लक्षण हो सकते हैं। सावधानी ही बचाव है रात के समय घर से बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें। घरों के आसपास सफाई रखें और कबाड़ या लकड़ी के ढेर न लगने दें। खेतों में काम करते समय सावधानी बरतें और पैरों में जूते या गद्देदार चप्पल पहनें। झाड़ियों में हाथ डालने से बचें।

