कटारिया बोले- 2045 तक उदयपुर की झीलें नहीं होंगी खाली:पंजाब के राज्यपाल ने देवास परियोजना का लिया जायजा; 2028 तक प्रोजेक्ट हो सकता है पूरा

उदयपुर में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने देवास-III और देवास-IV पेयजल प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद वर्ष 2045 तक उदयपुर की झीलों के खाली रहने की स्थिति नहीं बनेगी। उन्होंने बताया कि देवास प्रोजेक्ट का कार्य तेजी से चल रहा है और इसके वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है। 2029 से झीलों में इससे पानी आने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट को उदयपुर की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की लागत 1700 करोड़ रूपए है। कटारिया ने शनिवार को अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट की अलग-अलग साइट को देखा। उन्होंने सबसे पहले गोगुंदा के उंडीथल पहुंचकर वहां चल रहे टनल के काम को देखा। फिर उन्होंने नाल गांव पहुंचकर वहां बन रहे डैम के काम को बारीकी से समझा। उदयपुर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है देवास प्रोजेक्ट इस मौके पर कटारिया ने कहा कि देवास प्रोजेक्ट उदयपुर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। इसके पूरा होने से शहर को लंबे समय तक पीने का साफ और पर्याप्त पानी मिल सकेगा। शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली पिछोला, स्वरूप सागर और फतहसागर जैसी झीलों का जलस्तर हमेशा बना रहेगा। झीलों में पानी रहने से यहां का पर्यावरण सुधरेगा और पर्यटन व्यवसाय को नई मजबूती मिलेगी। राज्यपाल कटारिया ने काम में आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह काम शुरू तो हो गया, लेकिन फॉरेस्ट की क्लीयरेंस में फरवरी 2024 से लेकर जून 2026 तक बहुत कोशिशें करनी पड़ी। वो खुद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव से मिले, तब जाकर काम आगे बढ़ पाया। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद 2045 तक खाली नहीं रहेंगी झीलें कटारिया ने कहा कि देवास प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह पानी जब उदयपुर को मिलेगा तो 2045 तक झीलें कभी खाली नहीं रहेंगी। आने वाले 20 सालों की पेयजल डिमांड के हिसाब से फिलहाल यह प्रोजेक्ट बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जब भी अप्रैल-मई के महीनों में झीलों में पानी की जरूरत होती है, तो डैम के पानी से झीलों को भर लेते हैं। यह सिस्टम अगर पूरे राजस्थान में कहीं है तो वह केवल और केवल उदयपुर में ही है। उदयपुर से लेकर चितौडगढ़ और आगे बीसलपुर तक यह पानी जाता है। ऐसे में यह पानी सिर्फ हमें ही नहीं, बल्कि आगे के सब लोगों को भी मिलेगा और उनकी पानी की किल्लत दूर होगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह पूर्व सीएम मोहनलाल सुखाड़िया का अधूरा सपना था। 2028 तक पूरा हो सकता है प्रोजेक्ट का काम प्रोजेक्ट पूरा होने के समय को लेकर राज्यपाल ने कहा कि वैसे तो अधिकारी 2028 तक यह काम पूरा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह मुख्य रूप से टनल का काम है, इसलिए थोड़ा टिपिकल है। डैम तो जल्दी खड़ा हो जाएगा, लेकिन टनल के काम में जमीन के अंदर कई प्रकार की बाधाएं आती हैं। चट्टान किस तरह की आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल टनल की रोजाना 7 मीटर खुदाई हो रही है। खुदाई करने वाली कंपनी का टारगेट है कि हर महीने करीब 700 मीटर तक खुदाई हो जाए। इस दौरान कटारिया के साथ शहर विधायक ताराचंद जैन, गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, बीजेपी के देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविन्द्र श्रीमाली, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, अतुल चंडालिया भी मौजूद थे। देवास प्रोजेक्ट के इस महत्वपूर्ण दौरे पर गोगुन्दा उपखण्ड अधिकारी जगदीश सिंह, तहसीलदार प्रवीण सैनी, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता विरेन्द्र सागर, अधीक्षण अभियंता मनोज जैन, अधीक्षण अभियंता क्वालिटी कंट्रोल राजकुमार, अधिशाषी अभियंता बाबूलाल, कनिष्ठ अभियंता भव्या ने पूरे प्रोजेक्ट को विस्तार से बताया।
2029 तक पूरा होगा 1690 करोड़ का यह प्रोजेक्ट देवास थर्ड एवं फोर्थ की अनुमानित लागत 1690.55 करोड़ है। यह प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा किया जाना है। इससे 1000 MCFT(Million Cubic Feet) वार्षिक जल अपवर्तन उदयपुर शहर की झीलों में किया जा सकेगा। परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग(PHED) से जारी हो चुकी है। बांध निर्माण का 396.93 करोड़ रुपए का काम भोपाल और टनल निर्माण कार्य का 432.74 करोड़ रुपए का काम हैदराबाद की कंपनी को दिया गया है। उदयपुर की पेयजल आपूर्ति मांग पर देवास प्रोजेक्ट का काम हुआ था शुरू उदयपुर की तत्कालीन पेयजल आपूर्ति मांग सुनिश्चित करने 1973-74 में देवास- प्रथम (गोराणा बांध) का निर्माण किया गया, जिसकी सकल क्षमता 120 MCFT है। 2011 में उदयपुर शहर की पेयजल मांग अनुसार देवास सेकेंड प्रोजेक्ट बनाया गया। इसके अंतर्गत ही कुल क्षमता 85 MCFT क्षमता वाला मादड़ी बांध बनाया गया। इससे निकलने वाली 1.21 किलोमीटर की सुरंग को आकोदड़ा की मुख्य सुरंग से जोड़ा गया। देवास सेकेंड के अंतर्गत 302 MCFT क्षमता का आकोदड़ा बांध का निर्माण किया गया। इससे 11.05 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कर बांध से उदयपुर शहर की पिछोला झील में 550 MCFT वार्षिक जल अपवर्तन की योजना बनाई गई। यह परियोजना 2015 में पूरी हो गई। वीडियो – ताराचंद गवारिया।

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