किसानों ने नहरी पानी की मांग को लेकर दी गिरफ्तारियां:कोटा बैराज की तरफ कूच करते समय पुलिस ने रोका, धरने पर बैठे;दो दिन का अल्टीमेटम

धान की फसल बचाने के लिए नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर शनिवार दोपहर को बूंदी जिले के किसान सड़कों पर उतर आए। किसान कोटा बैराज की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस किसानों को पकड़कर थाने ले गई, बाद में जमानत पर छोड़ दिया। किसानों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित समय में मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। दरअसल, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों में बैठकर किसानों ने केशवराय पाटन चौराहे से कोटा बैराज की तरफ कूच किया। रास्ते में किसानों को पुलिस ने त्रिकुटा गिरधरपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। किसानों को दोबारा महंगे बीज खरीदकर करनी पड़ी बुवाई किसान नेता गिर्राज गौतम ने आरोप लगाया कि एक महीने पहले प्रशासन को चेताने के बावजूद अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत से अधिक धान की बुवाई हो चुकी है। कई किसानों को दोबारा महंगे बीज खरीदकर बुवाई करनी पड़ी है। पिछले तीन साल की तरह इस बार भी 1 जुलाई से नहरी पानी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं होने से किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। पुलिस ने कोटा बैराज की तरफ कूच करते समय रोका गौतम ने कहा कि नहरी पानी किसानों का अधिकार है। इसके लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। आज क्षेत्र के किसान दोपहर 2 बजे ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों में बैठकर केशोरायपाटन से कोटा बैराज की ओर रवाना हुए थे। रास्ते में पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर हमें रोक लिया। हमने ढाई घंटे तक धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान सीएडी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से समझाइश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सोमवार को सरकार से वार्ता कर गांधी सागर और राणा प्रताप सागर से पानी छोड़ने के संबंध में निर्णय कराने का प्रयास किया जाएगा। पुलिस ने किसानों को लिया हिरासत में, बाद में छोड़ा हालांकि, किसान तत्काल पानी छोड़ने की मांग पर अड़े रहे और बैराज की ओर बढ़ने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने किसानों को हिरासत में लेकर नांता थाने पहुंचाया। जहां बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। पानी छोड़ने का निर्णय नहीं हुआ तो डालेंगे महापड़ाव किसानों ने प्रशासन को सोमवार तक का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय नहीं हुआ तो वे सोमवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय पर जुटेंगे। आवश्यकता पड़ने पर वहां महापड़ाव भी डालेंगे। वरिष्ठ किसान नेता दशरथ कुमार ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को खुली चर्चा की चुनौती देते हुए कहा कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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