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खान विभाग का कड़ा आदेश:सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बिना अरावली में नहीं चलेंगी माइनिंग मशीनें, लंबित खनन प्रस्तावों को अब सिर्फ सशर्त पर्यावरण मंजूरी

अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच खान एवं भूविज्ञान निदेशालय ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनजर अरावली क्षेत्र के लंबित पड़े माइनिंग प्रस्तावों को अब केवल सशर्त पर्यावरण स्वीकृति (कंडीशनल ईसी) मिलेगी। हालांकि, इस मंजूरी के बाद भी पट्टाधारक सीधे तौर पर जमीन की सफाई या खनन कार्य शुरू नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े फैसलों का हवाला: खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण एवं विकास) महेश माथुर द्वारा जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े आदेशों (9 मई 2024, 29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की 25 अगस्त, 2010 की रिपोर्ट में तय अरावली पॉलीगॉन के दायरे में आने वाले सभी प्रस्तावों पर यह नियम सख्ती से लागू होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व लीज डीड पर भी ब्रेक मंजूरी के बाद भी ये 2 शर्तें लागू होंगी

महिलाओं ने खेल, गीत, नृत्य किए

ब्यावर| अखिल भारतीय अग्रवाल महिला संगठन ने सावन के आगमन पर सावन स्वागत उत्सव आयोजित किया। कार्यक्रम में राजस्थानी थीम पर चंगा-पो, चरमींग, सतोलिया, चेयर रेस सहित कई खेल हुए। सावन के गीतों पर महिलाओं ने नृत्य किया। कार्यक्रम संगठन अध्यक्ष ललिता जालान, महामंत्री ट्विंकल अग्रवाल के नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम में उर्मिला गुप्ता, शशि मोदी, मनीषा जैन, अनु जिंदल, अर्चना मित्तल, नंदनी गोयल सहित अन्य मौजूद रही।

3 साल में तीसरा हादसा:दुर्गानर्सरी तिराहे पर 50 साल पुराने नाले पर 30 फीट सड़क धंसी, कार भी फंसी

शहर के बीचोबीच दुर्गानर्सरी तिराहे पर रविवार देर रात को 50 साल पुराने नाले का 30 फीट का हिस्सा जमीन में धंस गया। इसमें एक कार भी फंस गई। गनीमत रही कि रात होने के कारण कोई वाहन नहीं थे और जनहानि टल गई। तीन साल में यह तीसरा हादसा है। नाले की जर्जर हालत ने नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए है। पहले दो कारें नाले में समा गईं, फिर सड़क धंस गई और अब 4 फीट का अंदर सड़क धंस गई है। हर बार निगम सिर्फ अस्थायी मरम्मत तक सीमित रहा। शक्तिनगर स्थित अंबामाता मंदिर से दुर्गा नर्सरी चौराहे तक पुराने नाले के पुनर्निर्माण के लिए निगम पहले ही करीब 3 करोड़ रुपए का टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी कर चुका है। निर्माण एजेंसी दो-चार दिन में काम शुरू करने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही नाले ने फिर जवाब दे दिया। अब मंगलवार से पुनर्निर्माण शुरू किया जाएगा। अगस्त 2024 में निगम ने 16 लाख रुपए खर्च कर नाला व सड़क की मरम्मत की थी। लेकिन, 50 साल पुराने नाले की कमजोर संरचना को बदलने का निर्णय समय पर नहीं लिया गया। ऐसे में हालात और बिगड़ते रहे। नाले की आरसीसी स्लैब के भीतर लगे सरिए पूरी तरह जंग खा चुके हैं, ऐसे में वह सड़क और वाहनों का भार नहीं झेल पा रहे है। इसका नतीजा यह रहा कि सड़क बार-बार नाले में धंस रही है। ऐसे निगम अब नाले के पुनर्निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपए का काम शुरू किया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर यह फैसला पहले लिया गया होता तो ये हादसे बार-बार नहीं होते। अब एहतियात : गड्ढे के पास बेरिकेड्स और होमगार्ड लगाए, रास्ता वनवे किया शक्ति नगर से आयड़ नदी तक 800 मीटर का नाला बना है। दुर्गानर्सरी चौराहे पर राडाजी मंदिर के पास अशोक नगर रोड के मुड़ाव पर 30 फीट लंबा हिस्सा जमीन में धंस गया। ऊपर ही खड़ी कार भी आधी अंदर लटक गई। चौराहे मौजूद यातायात पुलिसकर्मियों ने तुरंत यातायात को डायवर्ट किया और निगम को सूचना दी। निगम अधिकारियों ने मौका निरीक्षण किया और गड्ढे के आस-पास बेरिकेड्स लगवा दिए। ‎रात के समय सावधानी के लिए होमगार्ड‎ लगाए गए। साथ ही मार्ग को वनवे कर दिया गया है। ये दो हादसे पहले हो चुके समय पर जांच जरूरी : शहर के पुराने आरसीसी नालों की तय अंतराल पर तकनीकी जांच नहीं होने से ऐसे हादसों का खतरा लगातार बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार 40-50 वर्ष पुराने ढांचों की नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट, स्लैब की भार वहन क्षमता की जांच और सरियों में जंग का परीक्षण किया जाना चाहिए। भारी यातायात वाले मार्गों पर यह प्रक्रिया और अधिक जरूरी मानी जाती है। समय रहते कमजोर हिस्सों की पहचान कर उनका पुनर्निर्माण कर दिया जाए तो सड़क धंसने, यातायात बाधित होने और जनहानि जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है। इससे बार-बार होने वाली अस्थायी मरम्मत पर होने वाला अतिरिक्त सरकारी खर्च भी कम किया जा सकता है।

वाट के नाम पर निगम की ‘वॉट:5 हजार की ब्रांडेड बॉडी में 200 की चाइनीज LED प्लेट, मेंटेनेंस पर 13.60 करोड़ खर्च

प्रदेशभर की सड़कों पर नगर निगम ऐसी स्ट्रीट लाइटें लगा रहा है, जो दूर से चमकती दिखती हैं, लेकिन सड़क पर उनकी पूरी रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है। यानी पोल के नीचे उजाला और आगे अंधेरा। भास्कर टीम ने एक्सपर्ट के साथ जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में मौके पर रियलिटी चेक किया। लाइटें खुलवाकर अंदर के पार्ट्स की जांच में सामने आया कि बाहर से एमआई और बजाज जैसी ब्रांडेड दिखने वाली लाइटों में अंदर सस्ती चाइनीज एलईडी प्लेट लगी है। 5000 हजार रुपए की ब्रांडेड बॉडी में 200 रुपए की लाइट मिली। कई लाइटों में न एलईडी ड्राइवर मिला और न ही सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (एसपीडी) है। नगर निगम में स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के नाम पर घटिया सामग्री लगाने का भी मामला सामने आया है। खराब हो रही लाइटों की जगह कम गुणवत्ता वाली लाइटें लगाई जा रही हैं, जो जलती तो हैं, लेकिन उनका फोकस सड़क पर नहीं पड़ता। प्रदेश में 14.50 लाख लाइटें पहले से लगीं, निकायों ने 1.50 लाख लगाईं; 2 लाख और लगाने का लक्ष्य केंद्र के स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम के तहत 2024 तक राजस्थान में 14.50 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटें लग चुकी थीं। निकायों ने अपने स्तर पर 1.50 लाख लाइटें लगाईं। राज्य सरकार ने 2 लाख और लाइटें लगाने की घोषणा की है। सब गोलमाल है… मेंटेनेंस का बिल पूरा, खर्च कम; ठेकेदार को ज्यादा भुगतान यदि किसी ठेकेदार के पास 10 हजार पॉइंट हैं, तो 40 रुपए प्रति पॉइंट के हिसाब से उसे हर माह 4 लाख रुपए मिलते हैं। जांच में सामने आया कि वह करीब 50 हजार रुपए का घटिया सामान लगा रहा है। चाइनीज प्लेटें लगी हैं; ड्राइवर-SPD गायब पहले ठेकेदार, अब निगम संभाल रहा मेंटेनेंस, खर्च बढ़ा पहले ईईएसएल कंपनी के पास 1.26 लाख एलईडी लाइटों और मेंटेनेंस का काम था। जयपुर के मानसरोवर, विद्याधर नगर, वैशाली नगर, सिविल लाइंस और झोटवाड़ा जोन इसमें शामिल थे। निगम कंपनी को 25 रुपए प्रति पॉइंट भुगतान कर रहा था। दिसंबर 2024 में कंपनी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेंटेनेंस निगम की लाइट शाखा ने संभाला। जेडीए से ली गई 30 हजार लाइटें भी निगम मेंटेन कर रहा। ठेकेदारों को 40-80 रुपए/लाइट भुगतान कर रहे। 17 माह में 13.60 करोड़ खर्च हुए। यानी हर माह 80 लाख रुपए। 60 वाट की जगह 10 लक्स, मुख्य सड़कों पर भी मानक से कम रोशनी

खाद-बीज बेचने वालों पर कृषि विभाग की नजर,तीन माह में 420 नमूने ले जांच के लिए भेजे…गत साल लिए 1467 में से 13 अमानक

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा खरीफ सीजन में किसानों को नकली खाद और बीज की बिक्री से बचाने के लिए कृषि विभाग ने जिलेभर में विशेष सघन जांच अभियान चला रखा है। अभियान के तहत खाद-बीज विक्रेताओं और निर्माण इकाइयों से लगातार नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए विभाग की मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच में कोई नमूना नकली या निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा पेश कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार अब तक 420 नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें 250 खाद के नमूने विभिन्न फैक्ट्रियों के अलग-अलग बैचों से, 68 खाद के नमूने जिले की दुकानों से तथा 102 बीज के नमूने विभिन्न बीज विक्रेताओं से लिए गए हैं। विभाग का कहना है कि खरीफ सीजन में खाद और बीज की मांग बढ़ने के साथ नकली एवं अमानक सामग्री की बिक्री की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जिलेभर में निरीक्षण कर नियमित रूप से सैंपल लिए जा रहे हैं। यह विशेष अभियान 15 जुलाई तक जारी रहेगा। कृषि विभाग ने गत साल भी सालभर में बीज के 503, खााद फैक्ट्रीयों से खाद के 900 और 64 कीटनाशकों के नमूने लेकर जांच के लिए विभाग की प्रयोगशाला में भेजे, जहां से 13 नमूने अमानक पाए गए। शहर व जिले में करीब 850 निजी दुकानों के साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियां व क्रय-विक्रय सहकारी समितियां किसानों को खरीफ की बुवाई के लिए खाद-बीज की बिक्री कर रही है। किसान यहां से खाद के साथ ही बीज भी खरीद रहे है। ऐसे में उनके साथ कोई धोखा नहीं हो जाए, इसे देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारी लगातार खाद-बीच के नमूने ले रहे हैं। साथ ही अमानक खाद और बीज नहीं रखने की हिदायत भी दी जा रही है। निजी दुकानों के साथ ही सहकारी समितियां विक्रय करती है खाद-बीज

श्रीजी जायन्ट्स ग्रुप की नई कार्यकारिणी ने ली शपथ

ब्यावर| जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन फेडरेशन-9 के तहत जायन्ट्स ग्रुप ऑफ श्रीजी ब्यावर का वर्ष 2026-27 का पदस्थापना समारोह हुआ। संस्था अध्यक्ष जान्हवी भारवानी ने बताया कि केन्द्रीय कमेटी सदस्य देवेन्द्र गेलड़ा मुख्य अतिथि रहे। फेड-9 अध्यक्ष कुसुम जैन मौजूद रहीं। यूनिट डायरेक्टर डॉ. फूल कौर मुंद्रा विशिष्ट अतिथि रहीं। अतिथियों ने अध्यक्ष जान्हवी भारवानी के साथ नवगठित कार्यकारिणी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि देवेंद्र गैलरा ने श्रीजी ग्रुप के सामाजिक, सेवा व जनकल्याण के कामों के बारे में बताया। प्रदेश अध्यक्ष कुसुम जैन ने नई टीम से आगामी कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा की। फूल कौर मूंदड़ा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में महेंद्र छाजेड़, सुरेश रांका, हरीश सांखला, दमयंती जयपाल, दीक्षा आनन्दानी, नरेश भारवानी, विक्रम सोनी सहित अन्य मौजूद रहे।

अब अस्पताल ही पोर्टल पर अपलोड करेगा दस्तावेज:कैंसर मरीजों को 30 हजार से महंगी दवा की मंजूरी ऑनलाइन; अब मेडिकल बोर्ड के लिए चक्कर खत्म

राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA ) की लापरवाही के चलते पिछले तीन माह से आरजीएचएस में कैंसर मरीजों के लिए बनी नई गाइडलाइन भारी पड़ रही है। ऐसे में कैंसर मरीज दवा के लिए दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है। स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेन्सी की ओर से नई गाइडलाइन के तहत कैंसर की 30 हजार से अधिक की दवा के लिए मेडिकल बोर्ड की ऑफलाइन अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था। इसके कारण न केवल कैंसर मरीजों बल्कि उनके परिवार पर भी चिंता की लकीरें साफ दिख रही थी। अब कैंसर मरीजों की परेशानियों को देखते हुए कैंसर मरीजों को मेडिकल बोर्ड की अनुमति के लिए इधर-उधर चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। अब ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाया है। इसके तहत अस्पताल को ही मरीजों के सारे दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करना पड़ेगा। जांच के बाद मरीजों को ऑनलाइन ही दवा की अनुमति मिल जाएगी। दरअसल, स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेन्सी ने राजस्थान गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम के तहत नई गाइडलाइन के अनुसार 30 हजार रुपए से अधिक कीमत वाली दवा के लिए मेडिकल बोर्ड से ऑफलाइन अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था, जिसके कारण मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा था। अभी तक बोर्ड बनाने से लेकर रिपोर्ट लेने के लिए मरीजों और उनके परिजनों को चक्कर काटना पड़ रहा था। ये मिलेगा फायदा : दवा की अनुमति के लिए ऑफलाइन की बजाय ऑनलाइन सुविधा होने से समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं मरीजों को केस कहां लंबित है, उसकी जानकारी भी रहेगी। विभाग की ओर से रोज मॉनिटरिंग की जाएगी। ये ही नहीं हर सप्ताह समीक्षा कर आ रही दिक्कतों का समाधान भी होगा। भास्कर विश्लेषण- इनमें मेडिकल बोर्ड की अनुमति मेडिकल बोर्ड की अनुमति के लिए पोर्टल बनाया है, जिससे अस्पताल प्रशासन को मरीजों के दस्तावेज अपलोड करने होंगे। मरीजों को जयपुर नहीं आना पड़ेगा। ऑफलाइन पत्राचार नहीं करना पड़ेगा। -हरजीलाल अटल, सीईओ, राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी

घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ा:डीजीसीए की सख्ती बेअसर : ऑफ-सीजन में भी उदयपुर से हवाई किराया दोगुना, दिवाली के रिकॉर्ड भी ध्वस्त

उदयपुर सहित देश-दुनिया के नागरिक इस वक्त एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। डीजीसीए के सख्त निर्देशों के बावजूद हवाई टिकटों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उदयपुर में आगामी पर्यटन सीजन सितंबर से शुरू होकर मार्च 2027 तक चलेगा। फिलहाल शहर में न बड़ा त्योहार है, न पर्यटकों की भारी आवक, इसके बावजूद घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ चुका है। एयरलाइंस कंपनियों के डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के आगे रेगुलेटर बेअसर साबित हो रहा है। अभी सामान्य दिनों का किराया पिछले साल के दीपावली सेलिब्रेशन जैसे पीक सीजन वाली दरों को भी पीछे छोड़ चुका है। उदयपुर-जयपुर रूट पर आम दिनों में टिकट 5 से 8 हजार में मिल जाती थी, वह आज 7 से 15 हजार तक बिक रही है। इसी तरह दिल्ली और मुंबई जैसे मुख्य रूटों पर सामान्य दिनों की बुकिंग 20,500 से 21,500 रुपए के पार जा चुकी है। ग्राउंड रियलिटी : बिना किसी वजह के कृत्रिम महंगाई का खेल सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि मौजूदा ऑफ-सीजन किराया त्योहारों के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर रहा है। पिछले साल दीपावली के भारी रश के दौरान उदयपुर-दिल्ली का अधिकतम किराया 14,500 रुपए गया था, जो आज सामान्य दिनों में 21,500 रु. तक है। यही स्थिति मुंबई रूट की है जहां दिवाली पर किराया 17,500 रु. था, लेकिन आज बिना किसी वजह के यह 20,500 रु. पर है। स्थानीय कारोबारियों और गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में यात्रा करने के लिए जेबें खाली करनी पड़ रही हैं। इनका आरोप है कि विमान कंपनियों ने कथित तौर पर साठगांठ करके कृत्रिम रूप से सीटें कम दिखाई हैं ताकि डायनेमिक प्राइसिंग को ट्रिगर किया जा सके, जिससे टिकट की दरें अचानक दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं। ऐसे समझें जेब पर डाका (रूटवार आंकड़े) सख्त रेगुलेशन समस्या का हल
एविएशन कारोबारी अशोक जोशी के अनुसार रेगुलेटर (डीजीसीए) के निर्देशों का असर बाजार पर नहीं दिख रहा है। एयरलाइंस कंपनियां बेलगाम हो चुकी हैं। बे-सीजन में भी उदयपुर से दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे व्यस्त रूटों पर किराया 100% तक बढ़ाना ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ यानी मनमाने किराए की वसूली है। जब इमरजेंसी या विशेष सीजन नहीं है, तब भी किराए का 21 हजार पार कर जाना यह साबित करता है कि एयरलाइंस के मुनाफाखोरी वाले ऐल्गोरिद्म पर रेगुलेटर का नियंत्रण नहीं रह गया है। इस समस्या का हल सख्त रेगुलेशन है। सरकार को हवाई किराए की एक ऊपरी सीमा (अपर फेयर कैप) को दोबारा सख्ती से लागू करना होगा और उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाना होगा।

कानून व्यवस्था पर बैठक; मुख्यमंत्री ने अफसरों को जमकर फटकारा:कहा-प्रदेश में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, अगर हुआ तो IG-SP जिम्मेदार

प्रदेश की कानून व्यवस्था और अपराध कंट्रोल को लेकर सोमवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को खूब फटकार लगाई। सीएम ने पुलिस अफसरों को सीधी चेतावनी दी कि अब किसी जिले में अपराध हुआ तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित आईजी और एसपी की मानी जाएगी। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग व पुलिस अधिकारियों को दो टूक कहा कि प्रदेश में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपराधियों के खिलाफ ऐसी प्रभावी और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे बदमाशों की रूह कांप उठे। गोगुंदा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस भी जारी किया गया। उन्होंने अलवर, श्रीगंगानगर और भरतपुर में हाल में हुई आपराधिक घटनाओं को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा। मुख्यमंत्री बोले कि सभी रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षक एनडीपीएस, गैंगस्टर और संगठित अपराध के मामलों की खुद मॉनिटरिंग करें। नतीजे नहीं आए तो जवाबदेही तय होगी। प्रदेश के मुखिया एक-एक एसपी से अपराधों पर सवाल पूछते रहे, अफसर निरुत्तर रह गए 6 महीने के अखबार देखकर सवाल-जवाब : कानून-व्यवस्था बैठक के दौरान सीएम भजन लाल ने पिछले 6 माह में अखबार में छपी खबरों के आधार संबंधित जिलों के एसपी और आईजी से सवाल किए। भरतपुर एसपी से बोले-आधे घंटे में क्यों नहीं पकड़े अपराधी? : इस दौरान उन्होंने भरतपुर में हाल ही में व्यापारियों पर हुई फायरिंग के मामले में एसपी से सवाल पूछा तो जवाब मिला कि हमने 24 घंटे में अपराधियों को पकड़ लिया। इस पर सीएम बोले वारदात क्यों हुई और आधे घंटे में क्यों नही पकड़े गए। साइबर क्राइम में देशभर में बदनामी करा रहे अलवर-डीग : इसके बाद अलवर और डीग जिला एसपी से दोनों में बढ़ते साइबर ठगों पर सवाल करते हुए पूछा, कार्रवाई क्यों नहीं करते। दोनों जिले राष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी में आगे चल रहे हैं, दोनों जिलों की वजह से राजस्थान की राष्ट्रीय स्तर पर साख खराब हो रही है। सवाईमाधोपुर के कलेक्टर-एसपी मिलकर रोकें अवैध खनन : अवैध खनन पर चर्चा के दौरान सीएम ने सवाई माधोपुर कलेक्टर-एसपी को मिलकर खनन रोकने की बात कही और साथी सवाई माधोपुर एसडीएम ऑफिस के पास पड़ी बजरी को तुरंत डिस्पोज करने के निर्देश दिए।

उदयपुर में मोडिफाई तीन स्लीपर बसों को किया सीज:जजों और आरटीओं की संयुक्त कार्रवाई, 9 बसों के बनाए चालान

अवैध रूप से संचालित और अनधिकृत रूप से मोडिफाई करने वाली स्लीपर/लक्जरी बसों के खिलाफ आज उदयपुर के खेलगांव चौराहा पर कार्रवाई की गई। इसमें 3 लक्ज़री स्लीपर बसें सीज, 9 बसों पर 1 लाख 20 हज़ार का जुर्माना भी लगाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर एवं परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के निर्देश पर सुरक्षित परिवहन के नागरिकों के अधिकार की रक्षा करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। सुखेर थाना क्षेत्र में खेलगांव चौराहा पर संयुक्त निरीक्षण में कार्रवाई की गई। इसके तहत 20 बसों की जांच की गई। इनमें से 9 बसों के खिलाफ विभिन्न नियमों के उल्लंघन के तहत चालान बनाए गए और करीब एक लाख बीस हज़ार का जुर्माना ज़रिए चालान लगाया गया। बसों में अनियमितताएं और अनधिकृत बदलाव पाए जाने पर 3 बसों को मौके पर ही सीज कर दिया गया। इस दौरान अपर जिला न्यायाधीश राहुल चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार जोशी, जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड और आरटीओ इंस्पेक्टर राजेंद्र दन्तसुलिया, तेजपाल, घनश्याम मीणा मौजूद रहे।
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