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घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ा:डीजीसीए की सख्ती बेअसर : ऑफ-सीजन में भी उदयपुर से हवाई किराया दोगुना, दिवाली के रिकॉर्ड भी ध्वस्त

उदयपुर सहित देश-दुनिया के नागरिक इस वक्त एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। डीजीसीए के सख्त निर्देशों के बावजूद हवाई टिकटों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उदयपुर में आगामी पर्यटन सीजन सितंबर से शुरू होकर मार्च 2027 तक चलेगा। फिलहाल शहर में न बड़ा त्योहार है, न पर्यटकों की भारी आवक, इसके बावजूद घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ चुका है। एयरलाइंस कंपनियों के डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के आगे रेगुलेटर बेअसर साबित हो रहा है। अभी सामान्य दिनों का किराया पिछले साल के दीपावली सेलिब्रेशन जैसे पीक सीजन वाली दरों को भी पीछे छोड़ चुका है। उदयपुर-जयपुर रूट पर आम दिनों में टिकट 5 से 8 हजार में मिल जाती थी, वह आज 7 से 15 हजार तक बिक रही है। इसी तरह दिल्ली और मुंबई जैसे मुख्य रूटों पर सामान्य दिनों की बुकिंग 20,500 से 21,500 रुपए के पार जा चुकी है। ग्राउंड रियलिटी : बिना किसी वजह के कृत्रिम महंगाई का खेल सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि मौजूदा ऑफ-सीजन किराया त्योहारों के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर रहा है। पिछले साल दीपावली के भारी रश के दौरान उदयपुर-दिल्ली का अधिकतम किराया 14,500 रुपए गया था, जो आज सामान्य दिनों में 21,500 रु. तक है। यही स्थिति मुंबई रूट की है जहां दिवाली पर किराया 17,500 रु. था, लेकिन आज बिना किसी वजह के यह 20,500 रु. पर है। स्थानीय कारोबारियों और गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में यात्रा करने के लिए जेबें खाली करनी पड़ रही हैं। इनका आरोप है कि विमान कंपनियों ने कथित तौर पर साठगांठ करके कृत्रिम रूप से सीटें कम दिखाई हैं ताकि डायनेमिक प्राइसिंग को ट्रिगर किया जा सके, जिससे टिकट की दरें अचानक दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं। ऐसे समझें जेब पर डाका (रूटवार आंकड़े) सख्त रेगुलेशन समस्या का हल
एविएशन कारोबारी अशोक जोशी के अनुसार रेगुलेटर (डीजीसीए) के निर्देशों का असर बाजार पर नहीं दिख रहा है। एयरलाइंस कंपनियां बेलगाम हो चुकी हैं। बे-सीजन में भी उदयपुर से दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे व्यस्त रूटों पर किराया 100% तक बढ़ाना ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ यानी मनमाने किराए की वसूली है। जब इमरजेंसी या विशेष सीजन नहीं है, तब भी किराए का 21 हजार पार कर जाना यह साबित करता है कि एयरलाइंस के मुनाफाखोरी वाले ऐल्गोरिद्म पर रेगुलेटर का नियंत्रण नहीं रह गया है। इस समस्या का हल सख्त रेगुलेशन है। सरकार को हवाई किराए की एक ऊपरी सीमा (अपर फेयर कैप) को दोबारा सख्ती से लागू करना होगा और उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाना होगा।

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