3 साल में तीसरा हादसा:दुर्गानर्सरी तिराहे पर 50 साल पुराने नाले पर 30 फीट सड़क धंसी, कार भी फंसी
शहर के बीचोबीच दुर्गानर्सरी तिराहे पर रविवार देर रात को 50 साल पुराने नाले का 30 फीट का हिस्सा जमीन में धंस गया। इसमें एक कार भी फंस गई। गनीमत रही कि रात होने के कारण कोई वाहन नहीं थे और जनहानि टल गई। तीन साल में यह तीसरा हादसा है। नाले की जर्जर हालत ने नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए है। पहले दो कारें नाले में समा गईं, फिर सड़क धंस गई और अब 4 फीट का अंदर सड़क धंस गई है। हर बार निगम सिर्फ अस्थायी मरम्मत तक सीमित रहा। शक्तिनगर स्थित अंबामाता मंदिर से दुर्गा नर्सरी चौराहे तक पुराने नाले के पुनर्निर्माण के लिए निगम पहले ही करीब 3 करोड़ रुपए का टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी कर चुका है। निर्माण एजेंसी दो-चार दिन में काम शुरू करने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही नाले ने फिर जवाब दे दिया। अब मंगलवार से पुनर्निर्माण शुरू किया जाएगा। अगस्त 2024 में निगम ने 16 लाख रुपए खर्च कर नाला व सड़क की मरम्मत की थी। लेकिन, 50 साल पुराने नाले की कमजोर संरचना को बदलने का निर्णय समय पर नहीं लिया गया। ऐसे में हालात और बिगड़ते रहे। नाले की आरसीसी स्लैब के भीतर लगे सरिए पूरी तरह जंग खा चुके हैं, ऐसे में वह सड़क और वाहनों का भार नहीं झेल पा रहे है। इसका नतीजा यह रहा कि सड़क बार-बार नाले में धंस रही है। ऐसे निगम अब नाले के पुनर्निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपए का काम शुरू किया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर यह फैसला पहले लिया गया होता तो ये हादसे बार-बार नहीं होते। अब एहतियात : गड्ढे के पास बेरिकेड्स और होमगार्ड लगाए, रास्ता वनवे किया शक्ति नगर से आयड़ नदी तक 800 मीटर का नाला बना है। दुर्गानर्सरी चौराहे पर राडाजी मंदिर के पास अशोक नगर रोड के मुड़ाव पर 30 फीट लंबा हिस्सा जमीन में धंस गया। ऊपर ही खड़ी कार भी आधी अंदर लटक गई। चौराहे मौजूद यातायात पुलिसकर्मियों ने तुरंत यातायात को डायवर्ट किया और निगम को सूचना दी। निगम अधिकारियों ने मौका निरीक्षण किया और गड्ढे के आस-पास बेरिकेड्स लगवा दिए। रात के समय सावधानी के लिए होमगार्ड लगाए गए। साथ ही मार्ग को वनवे कर दिया गया है। ये दो हादसे पहले हो चुके समय पर जांच जरूरी : शहर के पुराने आरसीसी नालों की तय अंतराल पर तकनीकी जांच नहीं होने से ऐसे हादसों का खतरा लगातार बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार 40-50 वर्ष पुराने ढांचों की नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट, स्लैब की भार वहन क्षमता की जांच और सरियों में जंग का परीक्षण किया जाना चाहिए। भारी यातायात वाले मार्गों पर यह प्रक्रिया और अधिक जरूरी मानी जाती है। समय रहते कमजोर हिस्सों की पहचान कर उनका पुनर्निर्माण कर दिया जाए तो सड़क धंसने, यातायात बाधित होने और जनहानि जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है। इससे बार-बार होने वाली अस्थायी मरम्मत पर होने वाला अतिरिक्त सरकारी खर्च भी कम किया जा सकता है।

