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गणेशोत्सव एवं अन्नपूर्णा गणेश मंदिर प्रबंधन को लेकर फिर गहराया विवाद

टोंक | श्री अन्नपूर्णा गणेशजी, बालाजी प्रन्यास समिति और श्री आनंदम् संस्था के बीच गणेश मंदिर परिसर के प्रबंधन और 2026 के गणेश महोत्सव के आयोजन अधिकार को लेकर विवाद फिर सामने आया है। विवाद का एक प्रमुख बिंदु मंदिर के मुख्य द्वार के पास बनी भोजनशाला, संत आश्रम और विश्राम गृह की चाबियों को लेकर है। प्रन्यास समिति के संरक्षक कैलाशपुरी ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि 3 अगस्त 2025 को दोनों पक्षों के बीच हुए लिखित समझौते का पालन नहीं किया जा रहा। कैलाशपुरी के अनुसार समझौते में तय हुआ था कि 2026 का गणेश महोत्सव प्रन्यास समिति के तत्वावधान में होगा और परिसर में बने निर्माणों की चाबियां समिति को सौंपी जाएंगी। उन्होंने कहा कि अब तक चाबियां नहीं दी गईं। उनका आरोप है कि आनंदम् संस्था इस वर्ष भी स्वयं महोत्सव कराने की तैयारी कर रही है। कैलाशपुरी ने कहा कि समाधान नहीं होने पर आमरण अनशन का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। कैलाशपुरी ने यह भी कहा कि समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर आनंदम् संस्था से सहयोग लिया जा सकता था, लेकिन आयोजन का अधिकार प्रन्यास समिति के पास रहना था। उन्होंने दावा किया कि मंदिर परिसर की सजावट और अन्य व्यवस्थाएं भी समिति की ओर से किए जाने पर सहमति बनी थी। समिति ने आरोप लगाया कि आनंदम् संस्था गणेश महोत्सव के नाम पर चंदा एकत्र करती है, लेकिन उसका हिसाब समिति को नहीं दिया जाता। प्रन्यास समिति के मीडिया प्रभारी प्रेम रघुवंशी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य मंदिर परिसर पर नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने कैलाशपुरी पर मंदिर संपत्ति हड़पने के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कैलाशपुरी परिवार की 16वीं पीढ़ी मंदिर सेवा से जुड़ी है। वहीं आनंदम् संस्था के महामंत्री राजेश मूमिया ने प्रन्यास समिति के आरोपों को खारिज किया। मूमिया ने कहा कि 2025 का समझौता केवल उसी वर्ष के आयोजन तक सीमित था। उन्होंने दावा किया कि भोजनशाला और अन्य निर्माण जनसहयोग से हुए हैं और संस्था केवल उनकी देखरेख कर रही है। उनके अनुसार चाबियां किसी व्यक्ति को नहीं दी जा सकतीं और आवश्यकता होने पर केवल सरकार को सौंपी जा सकती हैं। मूमिया ने यह भी कहा कि सोरण रोड स्थित नगर परिषद की भूमि पर कथित अतिक्रमण को प्रशासन ने संस्था की शिकायत पर हटाया था। उन्होंने वन विभाग के केटल गार्ड कक्ष का ताला तोड़कर कब्जा करने और सुरक्षा दीवार तोड़कर दुकान संचालित कराने जैसे आरोप भी लगाए। दोनों पक्षों के दावों के बीच मंदिर परिसर के प्रबंधन, निर्माणों के नियंत्रण और महोत्सव आयोजन अधिकार को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आज हाई रिस्क गर्भवतियों की होगी जांच

टोंक | प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत शनिवार को जिले के जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ डॉक्टर जांच करेंगे। अभियान के दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली महिलाओं की विशेष स्क्रीनिंग कर आवश्यक उपचार व परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. शैलेन्द्र सिंह चौधरी ने बताया कि अभियान की तैयारियों को लेकर जिलेभर में सेक्टर बैठकें आयोजित की गईं। स्वास्थ्य कर्मियों को जरूरी निर्देश दिए गए। आशा सहयोगिनी, एएनएम और सीएचओ के जरिए हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों तक लाया जाएगा। उनकी जांच कराई जाएगी। जरूरतमंद महिलाओं को रेफरल, निःशुल्क परिवहन, जननी सुरक्षा योजना और अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी। सीएमएचओ डॉ. चौधरी ने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए कि जिले की कोई भी गर्भवती महिला प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) से वंचित न रहे। हर गर्भवती की कम से कम चार एएनसी जांच सुनिश्चित की जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान की जाए। नियमित फॉलोअप किया जाए। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जुड़वां गर्भ व अन्य जटिल मामलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। जरूरी जांच समय पर कराई जाए। संस्थागत प्रसव, रेफरल, 104 एम्बुलेंस व सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए। पीसीटीएस पोर्टल पर शत-प्रतिशत व त्रुटिरहित डेटा दर्ज करना सुनिश्चित किया जाए।

गुरु पूर्णिमा मनाने की जिम्मेदारी तय की

करवर. खेड़ी गांव स्थित खेमजी महाराज मंदिर ट्रस्ट समिति की देखरेख में खेड़ी, सहण, शिवपुरा, नोहरा, शिवदानपुरा, हरनापुर और बिहारीपुरा के पंचों की बैठक हुई, जिसमें गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाने के लिए जिम्मेदारियां तय की गईं। महोत्सव की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। गुरु पूजन और महाप्रसादी की तैयारी पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट समिति अध्यक्ष शिवप्रसाद विजयवर्गीय ने की। समिति का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। पदाधिकारियों ने बताया कि 28 जुलाई को भजन संध्या और जागरण होगा।

हाईवे पर सफर महंगा:5 टोल प्लाजा पर आज से नई दरें, 5 से 20 रुपए तक बढ़े, रात 12 बजे से होगी लागू

संभाग में शनिवार रात से हाईवे पर सफर करना महंगा होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (उदयपुर) ने 5 प्रमुख टोल प्लाजा पर टैक्स बढ़ा दिया है। इनमें एनएच-14, एनएच-76, एनएच-58 (विस्तार), एनएच-158 (विस्तार) व एनएच-48 (पुराना एनएच-8) शामिल हैं। नई दरें रात 12 बजे से लागू होंगी। टोल टैक्स में 5 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। मासिक पास में 20 से 30 रु. का इजाफा किया गया है। इससे निजी व व्यावसायिक, दोनों तरह के वाहनों का खर्च बढ़ेगा। लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 20 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों को राहत मिली टोल के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को राहत दी गई है। उनके गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए 2026-27 का मासिक पास 360 रुपए का होगा। पात्र गैर-व्यावसायिक वाहनों का वार्षिक पास 3075 रुपए का बनेगा। इन टोल पर बढ़ी दरें (नोट: व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग-अलग नई दरें लागू होंगी।)

गलत बिलिंग रोकने के लिए सत्यापन अपने पास रखा:5.99 लाख उपभोक्ताओं पर पानी के 340 करोड़ रुपए बाकी, 4 करोड़ में निजी फर्म को बिलिंग का ठेका

राजधानी जयपुर में पानी की बिलिंग व्यवस्था अब एक साल के लिए निजी फर्म के हवाले होगी। बेंगलुरु की रूद्र इंटरप्राइजेज को मीटर रीडिंग, बिल तैयार करने, बिल प्रिंटिंग, बिल वितरण और एमआईएस रिपोर्ट तैयार करने का ठेका दिया है। इसके लिए फर्म को 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। यदि एजेंसी का काम संतोषजनक रहा तो ठेके की अवधि छह माह बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि बिलिंग का काम निजी एजेंसी को सौंपने के बावजूद विभाग ने मीटर रीडिंग पर नियंत्रण अपने पास रखा है। निर्देश दिए गए हैं कि निजी एजेंसी को केवल विभाग की ओर से सत्यापित मीटर रीडिंग का ही रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। जिन क्षेत्रों में विभागीय कर्मचारी पहले से मीटर रीडिंग कर रहे हैं, वहां उनका कार्य पूर्ववत जारी रहेगा और ऐसे मामलों में निजी एजेंसी को मीटर रीडिंग के नाम पर अलग से कोई भुगतान नहीं होगा। चयनित एजेंसी पहले दो माह में शहर के सभी चालू और बंद मीटरों का भौतिक सत्यापन करेगी, इसके बाद ही नियमित बिलिंग शुरू होगी। बिलिंग से पहले मीटर रीडिंग का सत्यापन होगा जयपुर में 5.99 लाख जल उपभोक्ता हैं। शहर की प्रतिदिन पानी की मांग 8200 लाख लीटर है, जबकि जलदाय विभाग 7500 लाख लीटर पानी की ही आपूर्ति कर पा रहा है। यानी रोजाना करीब 700 लाख लीटर पानी की कमी बनी हुई है। उपभोक्ताओं पर विभाग का करीब 340 करोड़ रुपए बकाया भी लंबित है। पिछले कुछ वर्षों से गलत मीटर रीडिंग, औसत बिल और बिल वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। बिलिंग का कार्य रूद्र इंटरप्राइजेज, बेंगलुरु को सौंपा है। एजेंसी एक वर्ष तक कार्य करेगी और काम संतोषजनक रहने पर छह माह का एक्सटेंशन देने पर विचार किया जाएगा। साथ ही बिलिंग से पहले मीटर रीडिंग का विभागीय सत्यापन अनिवार्य रहेगा।
-अजय सिंह राठौड़, एडिशनल चीफ इंजीनियर, जयपुर सर्किल

एक पेड़, ,एक जिंदगी के लिए महाभियान शुरू, पौधे लगाए

टोंक| पर्यावरण का महाभियान ‘एक पेड़, एक जिंदगी’ के तहत दैनिक भास्कर की ओर से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांधी नगर की हरे कृष्णा कॉलोनी स्थित विवेकानंद खेल मैदान में पौधारोपण हुआ। इस मौके पर पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी संकल्प लिया गया। 21 पौधे लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिदिन इस अभियान के तहत पौधारोपण किया जाएगा। इस मौके पर शिक्षाविद रमेशकाला, सुमन काला, इंदिरा देवी, लोकेश धाकड़, जोधराज सिंह, आलोक, जितेश, लक्षिता, अवनी, कोमल आदि मौजूद रहे। उन्होंने भास्कर के अभियान की सराहना की। इस मौके पर चंपा, मोगरा, अनार, आम, जामुन, नीम, सीताफल, पपीता, तुलसी आदि के पौधे लगाए गए।

2.44 करोड़ का बीज निगम घूसकांड:चार्जशीट पेश होने से पहले भास्कर में; 4 नए आरोपी बनाए, संगठित गिरोह चला रहा था निदेशक जुगल किशोर

प्रदेश में राज्य बीज निगम के बहुचर्चित 2.44 करोड़ रुपए के रिश्वत कांड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। एसीबी इस माह के अंत तक चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन संबंधी औपचारिकताएं अंतिम दौर में हैं। चालान पेश होने के बाद एसीबी जांच का दूसरा चरण शुरू करेगी, जिसमें अब तक सामने आए चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। एसीबी की जांच में सामने आया कि बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर के संरक्षण में संगठित गिरोह की तरह काम हो रहा था, जिसमें अलग-अलग तरह से वसूली हो रही थी। मामले में सुनील सेतिया छापे की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री संचालक या संबंधित लोगों से संपर्क करता था और जुगल किशोर सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क कराने व मामले में मदद करने की बात कहता था। गिरोह में लाइजनर का काम करने वाले अन्य लोग भी हैं। एसीबी ने 7 जून को राजस्थान राज्य बीज निगम में करोड़ों रुपए के रिश्वत नेटवर्क का खुलासा किया था। कार्रवाई के दौरान तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई, उनके करीबी स्वतंत्र बिश्नोई, फलौदी विधायक के तत्कालीन निजी सहायक गणपत बिश्नोई, किरण कपाड़िया, सुनील सेतिया और सतपाल के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जांच के दौरान मुख्य आरोपियों को पहले पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। इसके बाद अदालत से दो दिन का अतिरिक्त रिमांड लेकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई, जिसमें पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। पूछताछ, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर एसीबी ने रिश्वत के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं। जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपए के लेन-देन का पूरा सिस्टम संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान एसीबी ने जुगल किशोर के ठिकानों और बस के जरिए भेजी जा रही नकदी सहित करीब 2.44 करोड़ रुपए बरामद किए थे। 60 लाख की कहानी अब भी अधूरी… जांच में एसीबी के सामने यह तथ्य आया कि रिश्वत के सौदे में करीब 60 लाख रुपए गणपत बिश्नोई के हिस्से में गए थे। हालांकि पूछताछ और तलाशी के बावजूद यह राशि बरामद नहीं हो सकी। एसीबी को संदेह है कि रकम को अलग-अलग लोगों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया। सूत्रों के अनुसार चालान पेश होने के बाद एसीबी चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। इनमें बीज निगम के तत्कालीन निदेशक के लिए कथित रूप से लाइजनिंग करने वाला एक व्यक्ति, जोधपुर निवासी रोशनी, तथा जांच के दौरान सामने आए दो अन्य लोग शामिल हैं। एसीबी का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद 60 लाख रुपए के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आ सकती हैं।

भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत श्रद्धालुओं को कराई कुल्फी व शीतल जल सेवा

भास्कर न्यूज | टोंक जिला मुख्यालय पर निकाली गई भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा का विश्वकर्मा जांगिड़ समाज महिला संगठन ने जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा सहित मातृ शक्ति के साथ पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। संगठन की ओर से रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं व भक्तों के लिए कुल्फी और शीतल जल सेवा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भगवान श्री जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथयात्रा में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई गई। जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दौरान सीमा जांगिड़, किरण जांगिड़, चंदा, आशा, शिमला, सुशीला, बीना, पूजा, सोहनी सहित विश्वकर्मा जांगिड़ समाज महिला संगठन की अनेक महिलाओं ने सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।

नारी जन जागृति संस्थान के स्थापना दिवस गौशाला छप्पन भोग आज, रक्तदान कल

ब्यावर |नारी जन जागृति संस्थान अपने 8वें स्थापना दिवस पर शनिवार को मसूदा रोड स्थित गौशाला में सुबह 7 बजे संस्थान की ओर से गौ माताओं के लिए 56 भोग का आयोजन होगा। संस्थान की ओर से 19 जुलाई को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक रेड आर्मी की ओर से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित होगा।

साइबर ठगी 400 गुना बढ़ी:2018 में 3 केस, अब तक 1229, जबकि 10 लाख से ज्यादा के केस ही दर्ज किए

राजधानी में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2018 में साइबर थाने में केवल 3 मुकदमे दर्ज हुए थे। इसके बाद 8 साल में 1229 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। यानी केसों का बोझ 400 गुना तक पहुंच गया, लेकिन साइबर थाना अब भी पुराने संसाधनों के कही भरोसे है। चार कमरों के थाने में तैनात अधिकांश पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच के केवल 2-3 दिन के शॉर्ट टर्म कोर्स किए हैं। एक भी स्थायी तकनीकी विशेषज्ञ नहीं है। जबकि साइबर ठग रोज नई तकनीक ला रहे हैं। ठगी की रकम कई बैंक खातों, म्यूल अकाउंट और डिजिटल वॉलेट से कुछ ही मिनटों में अलग-अलग राज्यों या देशों तक पहुंच रही है। वीपीएन और फर्जी आईपी एड्रेस से अपराधी की लोकेशन और क्रिप्टोकरेंसी से रकम को ट्रैक करना तक मुश्किल है। ऐसे में डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ, नेटवर्क एनालिस्ट, आईपी ट्रैकिंग एक्सपर्ट, मोबाइल-लैपटॉप डेटा रिकवरी विशेषज्ञ, बैंकिंग ट्रांजेक्शन एनालिस्ट, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन एनालिस्ट और सोशल मीडिया इंटेलिजेंस टीम की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने हाल ही दो प्रोग्रामर और एक सहायक प्रोग्रामर को अस्थायी रूप से लगाया है। 5 लाख से ज्यादा की ठगी पर केस, 10 लाख से ज्यादा के ही दर्ज कर रहे नियमों के अनुसार 5 लाख रुपए से अधिक की ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच साइबर थाने को करनी चाहिए। लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के कारण जयपुर साइबर थाना 10 लाख रुपए से अधिक की ठगी के मामलों को ही जांच के लिए ले रहा है। ऐसे में सवाल यह भी है कि 10 लाख रुपए से कम ठगी वाले पीड़ित कहां जाएं? वहीं 5 लाख रुपए से कम साइबर ठगी के केस संबंधित थानों में दर्ज किए जाते हैं। ऐसे मामलों की तकनीकी जांच और अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। लॉकअप में वॉशरूम नहीं, रात में आरोपियों को विधायकपुरी थाने भेजना पड़ता है