पहली बार कैमरे पर नकली नोट गिरोह:1 लाख के बदले 10 लाख के नोट, दावा- एटीएम भी नहीं पकड़ सकता
पहली बार कैमरे पर देखिए आपके पर्स तक नकली नोट पहुंचने वाले गैंग के चेहरे। इंस्टाग्राम की एक रील से शुरू हुई इन्वेस्टिगेशन नकली नोटों के उस सिंडीकेट तक ले गई, जो रील्स में काउंटिंग मशीन में डालकर दावा करते हैं- ये नोट न मशीन पकड़ पाएगी न एटीएम। रील में मोबाइल नंबर भी दिए हुए थे। रिपोर्टर ने ग्राहक बनकर कॉन्टेक्ट किया। 1 लाख रुपए के बदले 10 लाख के नकली नोटों की डील ऑफर हुई। वीडियो कॉल पर पहले कैश चेक कराया गया, फिर 40 मिनट तक हम पर नजर रखी। नकली नोट के 3 सैंपल दिए। टीम ने डील टाल दी तो कई बाइक और कारों से पीछा किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहला मोबाइल नंबर: पहले महाराष्ट्र के लिए कहा, फिर अलवर बुलाया रिपोर्टर ने 722****572 नंबर पर मैसेज किया- कितने में कितने दोगे? दूसरे दिन रिप्लाई आया- 1 लाख के 10 लाख मिलेंगे। ऑल इंडिया मार्केट ATM और बैंक डिपॉजिट हो जाएंगे। हैंड टू हैंड महाराष्ट्र के अकोला आना पड़ेगा। एडवांस 10 हजार, उसके बाद ही डिलीवरी होगी। पूरा फर्स्ट क्वालिटी का माल रहेगा। बेस्ट क्वालिटी का पेपर रहेगा। तीसरे दिन वीडियो कॉल में रुपए देखे, फिर गैंग के दूसरे आदमी से कॉन्टैक्ट कराया अलवर के लिए निकलने पर रिपोर्टर ने माफिया को मैसेज किया। इसके बाद माफिया ने वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल में माफिया ने अपना कैमरा बंद कर रखा था। उसने रुपए दिखाने के लिए कहा। रिपोर्टर ने एक लाख रुपए का बंडल दिखाया। उसे रुपए के बंडल पर विश्वास नहीं हुआ तो सही तरीके से दिखाने के लिए कहा। बोला- ये तो 50 हजार रुपए हैं। रिपोर्टर ने कहा- 1 लाख रुपए ही हैं। गिनकर ले लेना। पूरी संतुष्टि होने के बाद माफिया ने रिपोर्टर को इंतजार करने और किसी और को भेजने की बात कही। उसने रिपोर्टर की फोटो लेकर अपने साथियों को भेज दिया। काफी देर तक कोई नहीं आया तो रिपोर्टर ने दोबारा माफिया को काॅल किया… इसके बाद 772****583 नंबर से कॉल आया थोड़ी देर बाद उसी नंबर से दोबारा कॉल आया 40 मिनट तक बिठाए रखा, भास्कर टीम पर रखी नजर रिपोर्टर ने अपनी लोकेशन भेज दी। इसके बाद अलवर के एक पेट्रोल पंप के सामने चाय के ठेले के पास खड़ा हो गया। रिपोर्टर लोकेशन पर नहीं मिला तो गैंग के सदस्य ने कॉल किया और लोकेशन पूछी। रिपोर्टर ने पंप के सामने चाय पीने की बात कही। दोनों रिपोर्टर 40 मिनट तक वहीं बैठे रहे। कोई कॉल नहीं आया। इस दौरान बहुत से युवक कार, बाइक और पैदल वहां से गुजरे। आभास हो गया कि हम पर नजर रखी जा रही है। रिपोर्टर को पैदल बुलाया, नकली नोट के सैंपल दिए शाम को करीब 6 बजे उस युवक का फिर से कॉल आया। वो पहले से ही हमारे आसपास घूम रहा था। पुलिस साथ में नहीं होने का विश्वास होने पर उसने दूर से ही हमें इशारा किया। कार छोड़कर पैदल ही सीधे आने के लिए कहा। रिपोर्टर पैदल ही युवक से मिलने के लिए निकल गया। करीब 500 कदम की दूरी तय करने के बाद एक प्लाॅट के पास खड़े युवक ने रिपोर्टर को आवाज लगाई। यह युवक नकली नोट के सैंपल लेकर आया था। युवक ने रिपोर्टर को एक पैकेट दिया। पैकेट में नकली नोट के 3 सैंपल थे। एक 500 का और दो 100 रुपए के। उसके पास पानी की एक बोतल भी थी और एक ओसवाल साबुन का पैकेट। इसके बाद युवक ने नकली नोट पर पानी और साबुन लगाया। नोट लाल होने लगा और रंग उतरने लगा। लगातार भास्कर टीम का पीछा करते रहे इसके बाद रिपोर्टर नोट चेक करने का बहाना बनाकर वहां से निकल गए। भास्कर टीम की कार निकलते ही चार–पांच बाइक व कारें पीछा करने लग गईं। भास्कर टीम काफी देर तक अलवर में घूमती रही तो गैंग के सदस्य ने कॉल किया- नोट चेक क्यों नहीं कर रहे? वो बार–बार फोन कर रहा था। रिपोर्टर करीब एक घंटे तक अलवर शहर में इधर–उधर अपनी कार घुमाता रहा। बाद में पुलिस की सख्ती का बहाना कर डील को रोक लिया और अगले दिन बात करने की बात कही। रिपोर्टर ने जब पुलिस का बहाना बनाया तो युवक ने कोई भी परेशानी नहीं आने का दावा किया। इतना ही नहीं अलवर के बाहर तक छोड़कर आने की भी बात कही। रिपोर्टर ने पकड़े जाने का डर बताया और उस दिन के लिए डील को टाल दिया। इस पर गिरोह के सदस्य ने अलवर से बाहर दौसा बॉर्डर तक नकली नोट सप्लाई करने का दावा किया। आईजी बोले- असली जैसे लग रहे नोट भास्कर ने मामले में रेंज आईजी राहुल प्रकाश से बात की। उन्होंने कहा- नकली नोट के नाम पर लोगों को ठगने का काम भी चल रहा है। पुलिस ने दौसा में एक गिरोह पकड़ा था। उससे भारी संख्या में नकली नोट बरामद किए थे। जो तीन नोट दिखाए हैं, यह देखने में असली ही लग रहे हैं। बैंक में चेक कराने पर ही सच सामने आएगा। डिस्क्लेमर : इस इन्वेस्टिगेशन का मकसद नकली नोटों के सिंडिकेट का सच सामने लाना था। इस दौरान भास्कर टीम ने न ही गिरोह से नकली नोट लिए और न ही असली नोट दिए। गिरोह ने 3 नकली नोट बतौर सैंपल दिए थे। भास्कर ने वो तीनों नोट पुलिस को सौंप दिए। पार्ट-2 में कल पढ़िए : नकली नोट में कैसे डालते गांधीजी का वाटरमार्क-सिल्वर लाइन, गैंग के प्रमुख किरदार

