शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट:जयपुर, जोधपुर, कोटा की आर्थिक सेहत का बनेगा रिपोर्ट कार्ड; रोजगार-उद्योग, जनसंख्या जैसे आंकड़ों से बनेंगी विकास योजनाएं

राजस्थान के तीन शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा को अब आबादी या भौगोलिक विस्तार से नहीं, बल्कि आर्थिक क्षमता, रोजगार सृजन, महिला उद्यमिता और उद्योग-व्यापार की वास्तविक तस्वीर के आधार पर आंका जाएगा। शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट के तहत इनकी आर्थिक प्रोफाइल तैयार की गई है। इससे सरकार को पहली बार यह स्पष्ट आधार मिलेगा कि किस शहर की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर टिकी है। कहां रोजगार की संभावना अधिक और किन क्षेत्रों में निवेश या सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। बता दें, शहरों के लिए ऐसी यह रिपोर्ट पहली बार तैयार की जा रही है। केंद्रीय राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अनिगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) 2025 के आंकड़ों का उपयोग कर शहर-स्तरीय आकलन तैयार करने की पहल की है। पहली बार देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 शहरों (जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या के आधार पर) की एक व्यापक सांख्यिकीय रूपरेखा में आकलन किया गया है। जयपुर में 48.49 हजार प्रतिष्ठानों से 1 लाख को रोजगार रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में लगभग 48.49 हजार प्रतिष्ठान और 1.01 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां प्रति प्रतिष्ठान सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) करीब 4.68 लाख रुपए तथा सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 55 फीसदी है। जोधपुर में प्रति प्रतिष्ठान जीवीए लगभग 3.89 लाख और कोटा में 2.59 लाख रुपए है। तीनों शहरों में सेवा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। सरकार का उद्देश्य शहरों की आर्थिक ताकत और कमजोरियों की पहचान कर विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। अभी अधिकांश सरकारी आंकड़े राज्य या जिला स्तर तक सीमित रहते थे, जिससे शहर-विशेष की चुनौतियों और संभावनाओं का सटीक आकलन कठिन था। नई व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी। भविष्य में इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय करना आसान होगा कि किस शहर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएं, कहां व्यापारिक अधोसंरचना बढ़ाई जाए, किस क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम चलें और किन शहरों में महिला उद्यमिता को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए। इससे सरकारी निवेश और बजट का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। रिपोर्ट कार्ड से यह फायदा होगा सरकार क्या चाहती है? पहली बार विकास के लिए आर्थिक संकेतकों को पैमाना बनाना बेहतर है। दूसरे शहरों की योजनाएं भी इसी आधार पर बने। -एनके जैन, अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

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