विजयवर्गीय बोले- ढाई साल में सिर्फ असहयोग और उपेक्षा मिली:सीएम को लिखा- आवाज उठाना मजबूरी; दिग्विजय का ट्वीट- आपकी पीड़ा मैं समझ रहा हूं

मध्य प्रदेश के सीनियर मिनिस्टर कैलाश विजयवर्गीय की सरकार से नाराजगी एक बार फिर सामने आई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग संभाल रहे विजयवर्गीय ने इस बार सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चिट्‌ठी लिखी है। विजयवर्गीय ने लिखा है कि पिछले ढाई साल से उन्हें असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यदि इंदौर के विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो जनता की आवाज को सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी मजबूरी होगी। विजयवर्गीय ने पत्र में मास्टर प्लान में देरी, इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम को लेकर आपत्ति, एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के विभाजन, पीथमपुर में सुविधाओं की कमी और सिंहस्थ के कामों में इंदौर की अनदेखी जैसे मुद्दे उठाए हैं। 20 जून की इस चिट्‌ठी के साथ उन्होंने पहले लिखे गए पत्र भी लगाए हैं, जिनमें इंदौर के मास्टर प्लान और मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का नाम इंदौर केंद्रित रखने की मांग की गई थी। हालांकि, मीडिया ने इस बारे में जब सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा- पता नहीं, ये जानकारी आपको कहां से मिली। उधर, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- आपका दर्द व पीड़ा मैं समझ रहा हूं। विजयवर्गीय ने पत्र में ये मुद्दे उठाए इंदौर को न्यायोचित हक नहीं मिल पा रहा मुख्यमंत्री यादव को लिखे पत्र में विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के मुखिया और इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते उन्हें सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें लगातार असहयोग और उपेक्षा ही मिली। उनके विभाग से जुड़े स्थानांतरण भी कई बार उनकी जानकारी के बिना कर दिए जाते हैं। इंदौर के विकास की गति बढ़ाने की बात तो दूर, शहर को उसका न्यायोचित हक भी नहीं मिल पा रहा है। मास्टर प्लान अटका, पहले भी लिखे पत्र विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर का मास्टर प्लान करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका है। विभागीय और मुख्य सचिव स्तर पर भी कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक इसे जारी नहीं किया गया। पहले भी इस संबंध में पत्र लिखा था, लेकिन न जवाब मिला और न ही कोई चर्चा हुई। मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम पर आपत्ति पत्र में विजयवर्गीय ने इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है और मेट्रोपॉलिटन रीजन की हर चर्चा इंदौर केंद्रित रही है, लेकिन अधिसूचना में इसका नाम “उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन” कर दिया गया। इस पूरे रीजन में इंदौर का हिस्सा शत-प्रतिशत है जबकि उज्जैन का हिस्सा करीब 59 प्रतिशत है। RGPV विभाजन में इंदौर की अनदेखी विजयवर्गीय ने RGPV को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में इकाइयां प्रस्तावित की गई हैं, लेकिन 1952 से स्थापित इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) को नजरअंदाज किया गया। इंदौर में 50 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, इसके बावजूद यहां इकाई स्थापित करने का अवसर नहीं दिया गया। पीथमपुर को नहीं मिली सुविधाएं विजयवर्गीय ने लिखा कि पीथमपुर में 650 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) और 176 से अधिक बड़ी इंडस्ट्रीज हैं, लेकिन यहां राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर जैसी सुविधाएं लंबे समय से लंबित हैं। नए विक्रमपुरी उज्जैन औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं विकसित की जा रही हैं जबकि पीथमपुर की उपेक्षा हो रही है। सिंहस्थ में इंदौर की अनदेखी नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराने और सिंहस्थ के कामों में इंदौर को शामिल नहीं किए जाने पर भी असंतोष जताया है। उन्होंने जल संकट के दौरान इंदौर शहर को विशेष राहत नहीं मिलने की बात भी पत्र में लिखी है। तन्खा बोले- फिर तो जबलपुर में बगावत होनी चाहिए मंत्री विजयवर्गीय के पत्र को लेकर राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि यदि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर की उपेक्षा से आहत हैं, तो जबलपुर और पूरे महाकौशल क्षेत्र में तो बगावत की स्थिति होनी चाहिए। ये खबर भी पढ़ें… विजयवर्गीय बोले- संघ में अच्छे लोगों की कमी मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा- संघ में लोगों की भीड़ तो हो गई है, लेकिन अच्छे लोगों की कमी है। पहले अच्छे इंसान थे, अब ऐसे इंसानों की संघ में कमी होती जा रही है। संगठन बढ़ रहा है, विचारधारा भी बढ़ रही है, लेकिन अच्छे लोग नहीं होंगे तो इस विचारधारा का महत्व क्या है। पढे़ं पूरी खबर…

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