बहन पर टिप्पणियां करता था जगन, इसलिए मार डाला:मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला हत्यारा विष्णु; मर्डर से पहले साथ बैठकर खाना खाया
प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सोमवार को उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब जेल के अंदर बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसी की सेल में गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मर्डर उसी सेल में बंद भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने किया है। हत्या से पहले विष्णु और जगन ने साथ बैठकर खाना खाया था। इसके बाद सेल में साथ में लूडो भी खेला था। इसी दौरान विष्णु ने मौका पाकर तौलिए से गला घोंटकर जगन को मार डाला। प्रारंभिक पूछताछ में विष्णु ने बताया- जगन गुर्जर मेरी बहन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इसलिए मैंने उसे मारने का प्लान कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। शक न हो, इसलिए मैं जगन के साथ सामान्य व्यवहार करता रहा। उधर, घटना सामने आते ही जेल प्रशासन, पुलिस और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जेल की सुरक्षा अभेद्य मानी जाती है, वहां एक बंदी ने दूसरे बंदी की हत्या कर दी और किसी को भनक तक नहीं लगी। वार्ड नंबर-2, ब्लॉक-4, सेल नंबर-5… यहीं हुआ कत्ल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-4 की सेल नंबर-5 में डकैत जगन गुर्जर और कुलदीप जघीना हत्याकांड का आरोपी विष्णु एक साथ बंद थे। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब रोजाना की तरह सेल खोली गई तो ब्लॉक के अन्य बंदी बाहर निकलने लगे। इसी दौरान विष्णु भी मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला, जबकि जगन अपनी जगह लेटा था। शुरुआत में किसी को शक नहीं हुआ। कुछ बंदियों ने आवाज लगाई, “जग्गू दादा… आज अभी तक उठे नहीं, बाहर क्यों नहीं आए?” लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तभी विष्णु ने जोर से कहा- “कोई पास मत जाना… मैंने इसे मार दिया है।” उसकी बात सुनते ही जेल में अफरा-तफरी मच गई। बंदियों ने तुरंत जेल स्टाफ को सूचना दी। कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो जगन गुर्जर बेसुध पड़ा मिला। सीनियर अधिकारियों और डॉक्टरों को बुलाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने जगन को मृत घोषित कर दिया। मोबाइल जैमर बना सूचना देने में बाधा
सूत्रों के अनुसार, जेल परिसर में लगे हाई पावर मोबाइल जैमर के कारण अधिकारियों से तत्काल संपर्क नहीं हो सका। कई कर्मचारियों को जेल परिसर से करीब 200 से 300 मीटर दूर जाकर फोन करना पड़ा, तब जाकर अधिकारियों तक सूचना पहुंची। बताया जा रहा है कि सुबह से ही नेटवर्क की समस्या बनी हुई थी, जिससे इंटरनेट सेवा भी प्रभावित थी। हत्या से पहले साथ खाना खाया, सेल साफ की और लूडो भी खेला
प्रारंभिक जांच में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। सूत्रों के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे दोनों बंदियों ने साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर अपनी सेल की सफाई की। विष्णु पानी लेकर आया तो जगन झाड़ू लगाता रहा, फिर जगन पानी लाया और विष्णु ने सफाई की। दोनों के बीच किसी तरह के विवाद के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बाद पैर की तकलीफ के चलते जगन गुर्जर इंजेक्शन लगवाने गया। कुछ देर बाद लौटकर आया तो दोनों ने सेल के अंदर बैठकर लूडो खेलना शुरू कर दिया। आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में जगन की हत्या हो जाएगी। दवा लेने का बहाना…पीछे से तौलिए से दबा दिया गला
सूत्रों के अनुसार, लूडो खेलते समय विष्णु ने कहा- मुझे दवा लेनी है। वह जगन के पीछे टंगी थैली के पास गया। इसी दौरान उसने वहां रखा तौलिया उठाया और पीछे से अचानक जगन का गला कस दिया। जब तक जगन संभल पाता, उसकी सांसें थम चुकी थीं। हत्या के बाद विष्णु ने वारदात में इस्तेमाल किया गया तौलिया ऊपर चल रहे पंखे पर फेंक दिया और शव से कुछ दूरी पर जाकर आराम से लेट गया। दोपहर 3 बजे सेल खुलने तक किसी को हत्या की भनक तक नहीं लगी। पूछताछ में बोला- बहन पर टिप्पणी करता था, इसलिए मार डाला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसने प्रारंभिक पूछताछ में अधिकारियों से कहा- जगन गुर्जर लगातार मेरा मजाक उड़ाता था। वह कहता था कि “तू क्या डॉन बनेगा, डकैत का नाम हमने कमाया है, तेरे से कुछ नहीं होगा।” इसके साथ ही जगन मेरी बहन को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इन बातों से मैं लंबे समय से आहत था और मन ही मन जगन को मारने का फैसला कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। जगन का भाई भी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद
सूत्रों के अनुसार, जगन गुर्जर का सगा भाई पप्पू गुर्जर भी इसी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। वह वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-1 की सेल नंबर-6 में रखा गया था। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर उसका वार्ड और ब्लॉक बदल दिया गया। दोनों भाइयों को कभी-कभार ही मिलने दिया जाता था, क्योंकि कई बार उनके बीच भी विवाद हो जाता था। 92 गैंगस्टर, 4 वार्ड और 24 सेल वाली जेल
जानकारी के अनुसार, अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में चार वार्ड है। प्रत्येक वार्ड में अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं और हर ब्लॉक में 6 सेल हैं। इस तरह कुल 24 सेल हैं। प्रत्येक सेल में अधिकतम तीन बंदियों को रखा जाता है। वर्तमान में यहां करीब 92 गैंगस्टर और कुख्यात अपराधी बंद है। वार्ड नंबर-2 के इसी ब्लॉक में जघीना हत्याकांड के कई आरोपी भी बंद बताए जा रहे हैं। हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा सवालों के घेरे में
तीन-स्तरीय सुरक्षा, चौबीसों घंटे निगरानी और हाई सिक्योरिटी व्यवस्था के बावजूद जेल के अंदर एक बंदी ने दूसरे बंदी की हत्या कर दी। ये घटना जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर हत्या की साजिश कब बनी, वारदात के दौरान किसी को भनक क्यों नहीं लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, अब इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। जगन गुर्जर के मर्डर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें 1. 15-18 कैदियों के सामने डकैत जगन गुर्जर का मर्डर:नाश्ते के समय विवाद हुआ, 11 बजे एक बैरक में डाल दिया; आरोपी बोला-परेशान करता था अजमेर हाईसिक्योरिटी जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने हत्या कर दी। हार्डकोर बंदी विष्णु सिंह और जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। विष्णु ने तौलिए से गला दबाकर हत्या कर दी। पढ़ें पूरी खबर 2. अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या:कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी ने तौलिए से गला घोंटा, साथ में लूडो खेला था अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को डकैत जगन गुर्जर की हत्या हो गई। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। पढ़ें पूरी खबर

