जोधपुर में कवि शैलेश लोढ़ा की बेटी की शादी होगी:तीन दिन तक चलेंगे कार्यक्रम; कवि और बॉलीवुड सितारे भी आएंगे

कवि और अभिनेता शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा की शादी 6 जुलाई को जोधपुर में होगी। आज शाम से शादी की रस्में शुरू हो गई हैं। ‘संस्कृति स्वर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पहुंचे। वे पचपदरा से सीधे जोधपुर के होटल पहुंचे। यहां सीएम ने लोढ़ा परिवार से मुलाकात की और वर-वधू को आशीर्वाद दिया। स्वरा और शाश्वत ‘उम्मेद भवन पैलेस’ में ही सात फेरे लेंगे। शादी समारोह में शामिल होने के लिए मेहमानों का आना शुरू हो चुका है। सभी को ‘उम्मेद भवन पैलेस’ में ठहराया गया है, जहां उनका पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वरा लोढ़ा लेखिका हैं शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं। अपनी निजी जिंदगी को काफी प्राइवेट रखती हैं। स्वरा अपनी मां की तरह ही एक लेखिका हैं। उन्होंने अपनी मां डॉ. स्वाति लोढ़ा के साथ मिलकर ’54 Reasons Why Parents Suck!’ नाम की किताब लिखी है। शादी समारोह में शामिल होंगे कई वीआईपी गेस्ट समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव, अभिनेता राकेश बेदी, कृष्णा अभिषेक, सेलो कंपनी के प्रदीप राठौड़, पीकेएमजी के चेयरमैन पंकज कर्णावट, श्री अधिकारी ब्रदर्स (SAB Group) के संस्थापक मार्कंड अधिकारी, सीनियर पत्रकार सुधीर चौधरी, ब्रजेश सिंह और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा समेत कई बॉलीवुड हस्तियां, कवि और साहित्यकार हिस्सा लेंगे। अब जानिए उस होटल की खासियत, जहां होगी शादी

सुसाइड के प्रयास में गर्दन की नस-दबी, चीखने लगा युवक:अस्पताल में हिंसक हुआ; रस्सियों से बांधकर उदयपुर ले गए

बांसवाड़ा में सुसाइड करने फंदे पर लटक रहे युवक को परिजनों ने बचा लिया। उसके जैसे-तैसे अस्पताल ले गए। होश में आते ही युवक हिंसक हो गया, लोगों को पीटने पर उतारु हो गया और कूद-फांद करने लगा। उसकी ऐसी हालत देख डॉक्टरों ने उसे उदयपुर रेफर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, रस्सी से गर्दन की दिमागी नस दबी है ऐसे में युवक हिंसक हो गया और अजीब हरकतें कर रहा है। अस्पताल में अजीब हरकतें करने लगा बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ थाना इलाके में 25 साल के युवक ने अज्ञात कारणों से घर में ही फंदा लगाने की कोशिश की। घर वालों को इसका मालूम चला तो वे युवक को बचाने दौड़े और रस्सी से नीचे उतारा। इसके बाद MG अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिक उपचार दिया, जिससे युवक की जान तो बच गई, लेकिन, होश आते ही युवक अजीब हरकतें करने लगा। तस्वीरों में देखें मौके पर क्या हुआ… ऑक्सीजन की कमी एमजी हॉस्पिटल के डॉक्टर हरीश चरपोटा ने बताया- फांसी लगाने से गर्दन से ब्रेन में जाने वाली नसों में खून व ऑक्सीजन की कमी से यह होता है। इस मरीज में भी यही लक्षण थे। दिमाग तक होने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई रुक गई। ​ हाथ-पैर बांधकर उदयपुर ले गए वह अजीबोगरीब और हिंसक हरकतें करने लगा। परिजनों ने उसे संभालने की काफी कोशिश की, लेकिन जब युवक पूरी तरह बेकाबू हो गया। जानकारी के अनुसार, इसके बाद परिजनों ने उसके हाथ और पैर बांध दिए। इसके बाद उसे उदयपुर ले गए।

कोटा के मंडाना व इटावा में बारिश:मानसून एंट्री के तीसरे दिन शहर में 10 मिनट रिमझिम बरसात, उमस बढ़ी, जानिए आगे कैसा रहेगा मौसम

मानसून एंट्री के तीसरे दिन कोटा शहर, मंडाना व इटावा में बारिश हुई। दोपहर तक मंडाना में बादल छाए रहे। ढाई बजे करीब मौसम बदला। मंडाना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में 30 मिनट बरसात हुई। जबकि इटावा में शाम करीब 4 बजे आधे घंटे तक रिमझिम बारिश हुई। शहर के कुछ इलाकों में रात साढ़े 8 बजे करीब रिमझिम बारिश हुई। करीब 10-15 मिनट बारिश का दौर चला। सड़के गीली हो गई। इस हल्की बारिश से मौसम सुहाना हो गया लम्बे इंतजार के बाद बारिश होने से लोगों को राहत मिली। इससे पहले कोटा शहर में आज लगातार तीसरे भी आसमान में बादल व काली घटाएं छाए रहे। तापमान में 2 डिग्री बढ़ने से लोग गर्मी व उमस परेशान हैं और बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार को अधिकतम तापमान 35. 2 डिग्री व न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। कोटा में मानसून ने 2 जुलाई को दस्तक दी थी, लेकिन दो दिनों तक बादल छाए रहने के बावजूद बरसे नहीं और दोनों दिन सूखे ही बीत गए। मौसम विभाग ने 5 जुलाई को कोटा सहित बूंदी व बारां में आंधी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जबकि 6 जुलाई के लिए यलो अलर्ट जारी किया है साथ ही तापमान में गिरावट की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, हाड़ौती संभाग में फिलहाल मानसून की सक्रियता थोड़ी कमजोर है, लेकिन अगले तीन-चार दिनों में यहां अच्छी बारिश होने की पूरी संभावना है। कोटा के मौसम से जुड़ी PHOTOS… ———————————- ये खबर भी पढ़े कोटा में 7-साल बाद फिर 7-दिन लेट आया मानसून:पहले सप्ताह में तेज बारिश की संभावना; जून में 4 साल में सबसे कम बारिश कोटा में मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। आमतौर पर कोटा में मानसून 25 जून को प्रवेश करता है, लेकिन इस साल 7 दिन लेट हो गया है। 2019 में भी इसकी एंट्री 2 जुलाई को हुई थी और इस साल भी 2 जुलाई को ही आया है। वहीं, साल 2025 से तुलना करें तो मानसून इस साल मानसून 14 दिन देरी से आया है। खबर पढ़े

कटारिया बोले- 2045 तक उदयपुर की झीलें नहीं होंगी खाली:पंजाब के राज्यपाल ने देवास परियोजना का लिया जायजा; 2028 तक प्रोजेक्ट हो सकता है पूरा

उदयपुर में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने देवास-III और देवास-IV पेयजल प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद वर्ष 2045 तक उदयपुर की झीलों के खाली रहने की स्थिति नहीं बनेगी। उन्होंने बताया कि देवास प्रोजेक्ट का कार्य तेजी से चल रहा है और इसके वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है। 2029 से झीलों में इससे पानी आने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट को उदयपुर की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की लागत 1700 करोड़ रूपए है। कटारिया ने शनिवार को अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट की अलग-अलग साइट को देखा। उन्होंने सबसे पहले गोगुंदा के उंडीथल पहुंचकर वहां चल रहे टनल के काम को देखा। फिर उन्होंने नाल गांव पहुंचकर वहां बन रहे डैम के काम को बारीकी से समझा। उदयपुर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है देवास प्रोजेक्ट इस मौके पर कटारिया ने कहा कि देवास प्रोजेक्ट उदयपुर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। इसके पूरा होने से शहर को लंबे समय तक पीने का साफ और पर्याप्त पानी मिल सकेगा। शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली पिछोला, स्वरूप सागर और फतहसागर जैसी झीलों का जलस्तर हमेशा बना रहेगा। झीलों में पानी रहने से यहां का पर्यावरण सुधरेगा और पर्यटन व्यवसाय को नई मजबूती मिलेगी। राज्यपाल कटारिया ने काम में आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह काम शुरू तो हो गया, लेकिन फॉरेस्ट की क्लीयरेंस में फरवरी 2024 से लेकर जून 2026 तक बहुत कोशिशें करनी पड़ी। वो खुद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव से मिले, तब जाकर काम आगे बढ़ पाया। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद 2045 तक खाली नहीं रहेंगी झीलें कटारिया ने कहा कि देवास प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह पानी जब उदयपुर को मिलेगा तो 2045 तक झीलें कभी खाली नहीं रहेंगी। आने वाले 20 सालों की पेयजल डिमांड के हिसाब से फिलहाल यह प्रोजेक्ट बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जब भी अप्रैल-मई के महीनों में झीलों में पानी की जरूरत होती है, तो डैम के पानी से झीलों को भर लेते हैं। यह सिस्टम अगर पूरे राजस्थान में कहीं है तो वह केवल और केवल उदयपुर में ही है। उदयपुर से लेकर चितौडगढ़ और आगे बीसलपुर तक यह पानी जाता है। ऐसे में यह पानी सिर्फ हमें ही नहीं, बल्कि आगे के सब लोगों को भी मिलेगा और उनकी पानी की किल्लत दूर होगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह पूर्व सीएम मोहनलाल सुखाड़िया का अधूरा सपना था। 2028 तक पूरा हो सकता है प्रोजेक्ट का काम प्रोजेक्ट पूरा होने के समय को लेकर राज्यपाल ने कहा कि वैसे तो अधिकारी 2028 तक यह काम पूरा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह मुख्य रूप से टनल का काम है, इसलिए थोड़ा टिपिकल है। डैम तो जल्दी खड़ा हो जाएगा, लेकिन टनल के काम में जमीन के अंदर कई प्रकार की बाधाएं आती हैं। चट्टान किस तरह की आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल टनल की रोजाना 7 मीटर खुदाई हो रही है। खुदाई करने वाली कंपनी का टारगेट है कि हर महीने करीब 700 मीटर तक खुदाई हो जाए। इस दौरान कटारिया के साथ शहर विधायक ताराचंद जैन, गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, बीजेपी के देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविन्द्र श्रीमाली, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, अतुल चंडालिया भी मौजूद थे। देवास प्रोजेक्ट के इस महत्वपूर्ण दौरे पर गोगुन्दा उपखण्ड अधिकारी जगदीश सिंह, तहसीलदार प्रवीण सैनी, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता विरेन्द्र सागर, अधीक्षण अभियंता मनोज जैन, अधीक्षण अभियंता क्वालिटी कंट्रोल राजकुमार, अधिशाषी अभियंता बाबूलाल, कनिष्ठ अभियंता भव्या ने पूरे प्रोजेक्ट को विस्तार से बताया।
2029 तक पूरा होगा 1690 करोड़ का यह प्रोजेक्ट देवास थर्ड एवं फोर्थ की अनुमानित लागत 1690.55 करोड़ है। यह प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा किया जाना है। इससे 1000 MCFT(Million Cubic Feet) वार्षिक जल अपवर्तन उदयपुर शहर की झीलों में किया जा सकेगा। परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग(PHED) से जारी हो चुकी है। बांध निर्माण का 396.93 करोड़ रुपए का काम भोपाल और टनल निर्माण कार्य का 432.74 करोड़ रुपए का काम हैदराबाद की कंपनी को दिया गया है। उदयपुर की पेयजल आपूर्ति मांग पर देवास प्रोजेक्ट का काम हुआ था शुरू उदयपुर की तत्कालीन पेयजल आपूर्ति मांग सुनिश्चित करने 1973-74 में देवास- प्रथम (गोराणा बांध) का निर्माण किया गया, जिसकी सकल क्षमता 120 MCFT है। 2011 में उदयपुर शहर की पेयजल मांग अनुसार देवास सेकेंड प्रोजेक्ट बनाया गया। इसके अंतर्गत ही कुल क्षमता 85 MCFT क्षमता वाला मादड़ी बांध बनाया गया। इससे निकलने वाली 1.21 किलोमीटर की सुरंग को आकोदड़ा की मुख्य सुरंग से जोड़ा गया। देवास सेकेंड के अंतर्गत 302 MCFT क्षमता का आकोदड़ा बांध का निर्माण किया गया। इससे 11.05 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कर बांध से उदयपुर शहर की पिछोला झील में 550 MCFT वार्षिक जल अपवर्तन की योजना बनाई गई। यह परियोजना 2015 में पूरी हो गई। वीडियो – ताराचंद गवारिया।

आर्मी, वायुसेना, नेवी के बाद स्पेस बनेगा नया युद्धक्षेत्र:राजस्थान सीमा पर सैटेलाइट्स से किए थे ड्रोन ट्रैक; भारत का बड़ा दांव, 52 नए सैटेलाइट नेटवर्क

भारत 2025 से 2029 के बीच स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS-III) प्रोग्राम के तहत 52 नए निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसी दौरान ऑपरेशन सिंदूर, NavIC नेटवर्क, जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन दिखा रही हैं कि भारत की सैन्य रणनीति में स्पेस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन का मतलब ऐसी गाइडलाइन है, जो बताती है कि युद्ध या शांति के समय तीनों सेनाएं मिलकर अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का प्रभावी और सुरक्षित उपयोग कैसे करें। इसका असर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर भी दिखाई दिया था। युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी। हालांकि स्पेस बेस्ड सर्विलांस के तहत लॉन्च सैटेलाइट की कड़ी मॉनिटरिंग से सभी हमलों को नाकाम किया गया। साथ ही दुश्मन के रडार सिस्टम को भी ध्वस्त कर दिया गया था। इसी वजह से भारत युद्ध के मोर्च पर आगे रहा था। सैन्य अधिकारियों, स्पेस एक्सपर्ट और पूर्व सैन्य कमांडरों का मानना है कि जमीन, समुद्र और हवा के साथ अब स्पेस भी देश की सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बन चुका है। आज के समय में युद्ध सिर्फ सीमा पर तैनात सैनिकों और हथियारों से नहीं जीते जाते। स्पेस आधारित सिस्टम तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… स्पेस भी युद्ध का नया मैदान एक्सपट्‌र्स मानते हैं कि भविष्य के युद्ध साइबर और स्पेस तक पहुंच चुके हैं। इसी दिशा में भारत ने जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन जारी की है। डिफेंस स्पेस एजेंसी को और मजबूत बनाया है। 52 नए निगरानी सैटेलाइट वाले SBS-III प्रोग्राम पर काम शुरू कर दिया है। भारतीय नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन और फाइटर पायलट अभिजीत भूते कहते हैं- स्पेस तेजी से चौथे युद्धक्षेत्र के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय के सैन्य ऑपरेशनों में इसकी भूमिका लगातार बढ़ेगी।
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में स्पेस और सैटेलाइट सिस्टम कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह ऑपरेशन मुख्य रूप से नेटवर्क-सेंट्रिक रणनीति पर आधारित था। सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी, नेविगेशन और टारगेटिंग सपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई। सीमा पार बड़ी संख्या में सैनिक भेजने के बजाय भारतीय सशस्त्र बलों ने दूर से सटीक हमले करने की अपनी क्षमता दिखाई। पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के विशेषज्ञ सलाहकार एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) बताते हैं कि आधुनिक सेनाएं दुश्मन देशों के निगरानी सैटेलाइट पर भी नजर रखती हैं। इसके आधार पर वे अपने अहम हथियारों और सैन्य संसाधनों की जगह बदल सकती हैं या दुश्मन को भ्रमित करने के लिए डिकॉय भी तैनात कर सकती हैं। इन सभी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसे नेटवर्क से जोड़ा जाता है। इससे सैटेलाइट, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और जमीन पर लगे रडार से मिलने वाली जानकारी एक ही जगह पहुंचती है। इसके बाद तेजी से फैसले लेकर ऑपरेशन को अंजाम देना आसान हो जाता है। ये सभी सिस्टम भारतीय सेनाओं को दुश्मन पर नजर रखने, आपस में संपर्क बनाए रखने, रास्ता बताने, टारगेट पहचानने और ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद करते हैं। भूते के अनुसार सिर्फ सैटेलाइट की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि असली बात यह है कि सभी सैटेलाइट मिलकर सेना को कितनी ताकत और कितनी बेहतर क्षमता देते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन और सैटेलाइट की भूमिक IN-SPACe के एक्सपर्ट ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अब युद्ध सिर्फ सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि रियल टाइम जानकारी, ड्रोन और सैटेलाइट के दम पर भी लड़े जाते हैं। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर इस दौरान अहम ऑपरेशनल जोन बने। भारतीय सेना ने SkyStriker कामिकेज़ ड्रोन और लंबी दूरी के टोही ड्रोन की मदद से पाकिस्तान के भीतर मौजूद 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए। राजस्थान में स्पेस की क्या भूमिका रही? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान का बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्र सबसे अहम सैन्य मोर्चों में शामिल रहा। इन सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, ड्रोन हमलों का समय रहते पता लगाने और सेना तक रियल टाइम जानकारी पहुंचाने में स्पेस आधारित सिस्टम की बड़ी भूमिका रही। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने राजस्थान सीमा की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर सेक्टर में सबसे ज्यादा गतिविधियां देखी गईं। अकेले राजस्थान सेक्टर में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई। इन खतरों से निपटने के लिए ऑपरेशन के दौरान ISRO के 400 से अधिक वैज्ञानिक और कम से कम 10 रणनीतिक सैटेलाइट 24 घंटे लगातार काम करते रहे। इन सैटेलाइट्स ने भारतीय सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी, सुरक्षित संचार और सटीक लोकेशन उपलब्ध कराई। इन्हीं स्पेस आधारित सिस्टम की मदद से सेना दुश्मन के ड्रोन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकी और समय रहते जवाबी कार्रवाई कर अधिकांश ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। अब जानें कैसे स्पेस बना युद्धक्षेत्र …… 1. सैटेलाइट से तैयार हुई पूरी रणनीति पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के एक्सपर्ट एडवाइजर एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) के अनुसार, किसी भी आधुनिक सैन्य ऑपरेशन में कई तरह के स्पेस सिस्टम एक साथ काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सैन्य इंटेलिजेंस तैयार करने के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी को एयरक्राफ्ट, ड्रोन, यूएवी और अन्य उपलब्ध जानकारियों के साथ जोड़कर पूरी रणनीति और ऑपरेशनल प्लान तैयार किया जाता है। इसलिए आधुनिक सैन्य इंटेलिजेंस केवल अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों (IMINT) पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि कई खुफिया स्रोतों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर मल्टी-इंटेलिजेंस (Multi-INT) और ऑल-सोर्स (All-Source) सिस्टम के रूप में काम करती है। 2. कार्टोसैट और RISAT ने रखी लगातार नजर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पेस आधारित सिस्टम ने भारतीय सेना को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराई। ISRO के कार्टोसैट और RISAT जैसे सैटेलाइट लगातार दुश्मन के ड्रोन और अन्य गतिविधियों पर नजर रखते रहे। इन सैटेलाइट्स से मिली रियल टाइम ट्रैकिंग और मैपिंग के आधार पर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसका सबसे बड़ा असर भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में देखने को मिला। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने इन सीमावर्ती इलाकों की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, लेकिन भारत ने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और काउंटर-यूएएस (C-UAS) तकनीक की मदद से उनके नेविगेशन और संचार सिस्टम को जाम कर दिया। इसके कारण अधिकांश ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर गिर गए। 3. सीमा में घुसने से पहले ही रोके गए हमले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में घुसपैठ की सभी कोशिशों को भारतीय क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने से पहले ही विफल कर दिया गया।
4. अब और मजबूत हुई सीमा सुरक्षा मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत के स्वदेशी स्पेस संसाधन प्रभावी और भरोसेमंद हैं। उन्होंने कहा कि देश के पास अपनी स्वतंत्र और लगातार निगरानी की क्षमता होना बेहद जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के बाद भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी ड्रोन रोधी क्षमता को और मजबूत किया है। अब सीमा पर विशेष बाज बटालियन और समर्पित ड्रोन स्क्वाड्रन तैनात किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी ड्रोन खतरे का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। पहले जानकारी मिलना ही सबसे बड़ी ताकत पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स से जुड़े कमांडर (रिटायर्ड) अरुण रविंद्रनाथन का कहना है कि आज के युद्ध में सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि सही समय पर मिलने वाली जानकारी होती है। टारगेट चुनने, सैन्य ऑपरेशन को कंट्रोल करने, रास्ता बताने, सुरक्षित संपर्क बनाए रखने और युद्ध के दौरान तेजी से फैसले लेने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दुश्मन पर नजर रखने के लिए इमेजिंग और ऑप्टिकल सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। ये बहुत साफ तस्वीरें और वीडियो भेजते हैं, जिनकी मदद से दुश्मन के ठिकानों, सैनिकों की आवाजाही और हथियारों की तैनाती पर लगातार नजर रखी जा सकती है। वहीं सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सैटेलाइट दुश्मन के रेडियो, रडार और संचार नेटवर्क से निकलने वाले सिग्नल पकड़ते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दुश्मन क्या तैयारी कर रहा है और उसकी आगे की योजना क्या हो सकती है। सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक वाले सैटेलाइट बादलों, घने कोहरे या रात के अंधेरे में भी काम कर सकते हैं। इनकी मदद से जमीन पर मौजूद वाहनों, बंकरों और दूसरी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। एक साथ कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे भविष्य के युद्ध मेजर जनरल एस. वी. पी. सिंह (रिटायर्ड) के अनुसार, आज के युद्ध पहले की तरह अलग-अलग चरणों में नहीं लड़े जाते। अब जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और स्पेस में एक साथ कार्रवाई होती है। अंतरिक्ष और रक्षा सैटेलाइट के एकीकरण से भारत “मल्टी-फ्रंट वॉर” यानी एक साथ कई मोर्चों पर होने वाले युद्ध में बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट की मदद से सेना की अलग-अलग इकाइयों के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा की जा सकती है। इससे लक्ष्य चूकने की संभावना कम हो जाती है और ‘फ्रेंडली फायर’ यानी गलती से अपनी ही सेना पर हमला होने का खतरा भी घटता है। मेजर जनरल सिंह के अनुसार, कार्टोसैट और रिसैट जैसे रडार सैटेलाइट अंतरिक्ष से 24/7 यानी दिन-रात और हर मौसम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। ये सैटेलाइट एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) जैसे संवेदनशील इलाकों में सैनिकों के जमावड़े और अन्य गतिविधियों को लगातार ट्रैक करते रहते हैं। इसके अलावा, कुछ अंतरिक्ष आधारित सिस्टम दुश्मन की मिसाइल लॉन्चिंग का समय रहते पता लगा लेते हैं, जिससे त्वरित बचाव और जवाबी कार्रवाई संभव हो पाती है।
सिर्फ तस्वीर नहीं, उसका सही मतलब समझना ज्यादा जरूरी धनंजय खोत का कहना है कि भारतीय रक्षा सैटेलाइट, जैसे कार्टोसैट और रिसैट, हाई रेजोल्यूशन मैप और थर्मल तस्वीरें उपलब्ध कराते हैं। इन जानकारियों की मदद से ड्रोन ऑपरेटर उड़ान का रास्ता तय करते हैं, इलाके की स्थिति को समझते हैं और जमीन पर मौजूद संभावित लक्ष्यों की सटीक पहचान कर पाते हैं। हालांकि, केवल सैटेलाइट से तस्वीरें मिल जाना ही काफी नहीं होता। खोत के अनुसार, सबसे मुश्किल और सबसे जरूरी काम उन तस्वीरों और जानकारियों का सही विश्लेषण करना होता है। उन्होंने बताया कि पैनक्रोमैटिक, मल्टीस्पेक्ट्रल, हाइपरस्पेक्ट्रल, इन्फ्रारेड और थर्मल इमेजरी की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी इलाके में नई इमारत बन रही है या नहीं, बंकर तैयार किए जा रहे हैं या नहीं, सैनिकों और हथियारों की तैनाती में कोई बदलाव हुआ है या नहीं और कहीं किसी ढांचे को छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई है। हाल ही में राजस्थान के पोकरण, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन से जुड़े कई सैन्य अभ्यास भी किए गए हैं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए ड्रोन भी सैटेलाइट और स्पेस आधारित सेवाओं से जुड़े थे। संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत में क्या है? 2025 में संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाद जारी संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत ने पहली बार औपचारिक रूप से स्पेस को युद्ध के एक अलग क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया। इसमें स्पेस को जमीन, समुद्र, हवा और साइबर के साथ एक पूर्ण सैन्य क्षेत्र माना गया है। इस सिद्धांत में विशेष रूप से मल्टी डोमेन वारफेयर, स्पेस आधारित ISR ऑपरेशन, स्पेस संसाधनों की सुरक्षा, एकीकृत कमांड सिस्टम और स्पेस क्षमताओं की लगातार उपलब्धता पर जोर दिया गया है। यह ढांचा 2019 में स्थापित डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) की भूमिका को भी आगे बढ़ाता है। भारत सरकार ने स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS) फेज-III परियोजना के तहत 2025 से 2029 के बीच 52 अतिरिक्त निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बनाई है। मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार प्रस्तावित SBS-III कॉन्स्टेलेशन का उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगभग लगातार निगरानी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी क्षेत्र की दो तस्वीरों के बीच जो समय का अंतर होता है, उसे कम करना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। पाकिस्तान, चीन और बढ़ती स्पेस प्रतिस्पर्धा भारत की स्पेस रणनीति ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पाकिस्तान और चीन के बीच स्पेस सहयोग लगातार बढ़ रहा है। धनंजय खोत ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले कई वर्षों में लगभग छह सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। पाकिस्तान पहले अपनी निगरानी जरूरतों के लिए चीन और अन्य मित्र देशों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर था। अब वह अपनी स्वतंत्र स्पेस क्षमता विकसित करना चाहता है। पाकिस्तान का उद्देश्य भारतीय इलाकों पर नजर रखना और खुफिया जानकारी जुटाना है। हाल ही में जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला ने कहा कि भारत वर्ष 2001 से सैन्य सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है और सैन्य स्पेस संरचना के मामले में काफी आगे है। सैटेलाइट की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी
मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि भविष्य की चुनौती केवल नए सैटेलाइट हासिल करना नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि युद्ध के दौरान वे सुरक्षित रहें और लगातार काम करते रहें। इसी कारण दुनिया भर की सेनाएं स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA), स्पेस डोमेन अवेयरनेस (SDA), सैटेलाइट सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर तेजी से नए स्पेस संसाधन उपलब्ध कराने जैसी क्षमताओं पर ध्यान दे रही हैं। निजी कंपनियां और स्टार्टअप भी बने सहयोगी धनंजय खोत ने बताया कि भारत का निजी स्पेस सेक्टर भी अब रक्षा से जुड़ी क्षमताओं में योगदान दे रहा है। कई निजी कंपनियां और स्टार्टअप्स डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई संस्थानों ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर सुरक्षा एजेंसियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद की है। स्पेस उद्योग विशेषज्ञ सुब्बु वेंकटाचलम का मानना है कि मजबूत डिफेंस स्पेस क्षमता केवल सेना या सरकारी संस्थानों के भरोसे विकसित नहीं की जा सकती। भविष्य में सरकार, निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार भारत के सामने केवल सैटेलाइट लॉन्च करने की चुनौती नहीं है। उतना ही जरूरी है कि उन्हें डिजाइन किया जाए, निर्मित किया जाए, लॉन्च किया जाए और अपने दम पर संचालित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत स्पेस क्षमता तभी विकसित होगी जब पूरे स्पेस सेक्टर में लगातार निवेश, तकनीकी विकास और औद्योगिक भागीदारी बढ़ेगी।

CM हेल्पलाइन में शिकायत करने पर बुजुर्ग का मर्डर:UP के झोलाछाप डॉक्टर ने 5 को पीटा, मासूम को भी नहीं छोड़ा; चीखता-चिल्लाता रहा परिवार

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में CM हेल्पलाइन में शिकायत करने पर यूपी के झोलाछाप डॉक्टर ने बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतक की पत्नी, बेटा, बहू और 5 साल के नाती को भी बेरहमी से पीटा गया। परिवार चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन आरोपियों ने किसी को नहीं छोड़ा। मोहनगढ़ पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान कंचनपुरा गांव निवासी घनसू प्रजापति (60) के रूप में हुई है। घायलों में उनकी पत्नी, बेटा, बहू और 5 साल का नाती शामिल हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए… शिकायत करने पर घर पहुंचकर हमला परिजनों के अनुसार, 1 जुलाई की रात आरोपी प्रकाश कुशवाहा अपने 4 साथियों के साथ घर पहुंचा। उसने कहा कि CM हेल्पलाइन में मेरी शिकायत क्यों की गई। शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और धमकी दी। इसके बाद विवाद बढ़ा और आरोपियों ने घनसू प्रजापति पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए परिवार के सदस्यों को भी पीटा गया। आरोपियों ने पत्नी, बेटे, बहू और 5 साल के नाती को भी नहीं छोड़ा। सभी को एक-एक कर पीटा गया। परिवार चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन आरोपी लगातार मारपीट करते रहे। बुजुर्ग की मौके पर मौत, शव फेंककर भागे हमले में घनसू प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई। बाकी चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट से परिवार चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन आरोपियों ने पिटाई कम नहीं की। वारदात के बाद आरोपी रात में घर के सामने शव फेंककर फरार हो गए। गांव वालों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। अलग-अलग ठिकानों से 5 आरोपियों की गिरफ्तारी जतारा एसडीओपी अभिषेक गौतम ने बताया कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई। आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। टीम ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। वारदात में शामिल सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में मास्टरमाइंड प्रकाश कुशवाहा (36) और चंद्रभान कुशवाहा (42) ललितपुर (UP) के रहने वाले हैं। अन्य आरोपी खुशीराम यादव (48), रामराजा यादव (25) और विद्याधर यादव (58) मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के निवासी हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने जेल भेज दिया है। ………………………. यह खबर भी पढ़ें भोपाल में प्रेमी संग भागी पत्नी, पति ने किया सुसाइड भोपाल के निशातपुरा में रहने वाले एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड से पहले एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने मौत के लिए पत्नी और उसके प्रेमी को जिम्मेदार बताया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों के हवाले कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…

CI पर महिला ने रेप का आरोप लगाया, लाइन हाजिर:बेटे के एक्सीडेंट मामले में जान-पहचान हुई थी; पुलिस अधिकारी बोला- लग्जरी लाइफ की शौकीन, ब्लैकमेल कर रही

महिला ने पुलिस अधिकारी CI पर 5 साल तक देह शोषण का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि वो अपने बेटे के एक्सीडेंट के क्लेम को लेकर पुलिस अधिकारी के पास पहुंची थी। इस दौरान जान-पहचान हुई और पुलिस अधिकारी ने उसका रेप किया। वहीं पुलिस अधिकारी ने आरोपों को गलत बताया है, कहा- वह अपने मदद करने वालों को ही फंसाने का काम करती है। वह लग्जरी लाइफ की शौकीन है और मुझे भी इसके लिए ब्लैकमेल कर रकम ऐंठना चाहती है। 16 जून को महिला श्रीगंगानगर एसपी के सामने पेश हुई थी। इसके बाद 25 जून को FIR दर्ज की गई। 30 जून को CI को लाइन हाजिर कर दिया। एसपी ने जांच पूरी होने तक CI को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं जांच अधिकारी का कहना है कि महिला ने पहले भी जोधपुर के 5 थानों में ऐसे ही मामले दर्ज करवा रखे हैं। जिन पर FR लग चुकी है। बेटे के एक्सीडेंट क्लेम में मदद मांगने गई थी महिला का आरोप है- अधिकारी पहले जोधपुर में SI के पोस्ट पर तैनात थे। 2019 में जोधपुर में महिला के बेटे का एक्सीडेंट में मौत हो गई थी क्लेम प्रकरण को लेकर वह 2021 में जोधपुर में तैनात थाना SI के पास गई थी। इसके बाद दोनों की जान पहचान हो गई और पुलिस अधिकारी ने महिला के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए। आरोप है कि पुलिस लाइन के क्वार्टर में भी 1 साल तक देह शोषण किया। पुलिस अधिकारी बोले- वह ब्लैकमेल कर रही अधिकारी में मामले को लेकर अपना पक्ष रखा है- महिला ब्लैकमेल कर रही है। वह अपने मददगारों को फंसा कर नजदीकियां बढ़ाती है। इसके बाद फिर पैसे ऐंठने के लिए इमोशनल ब्लैकमेलिंग करती है। महिला लग्जरी होटलों में आती-जाती है और लग्जरी लाइफ की शौकीन है। ‘पहले भी मामले दर्ज करवा झूठे निकले’ पुलिस अधिकारी ने कहा- महिला के उसके परिवार से भी संबंध थे। वह उनके घर आती-जाती थी। यहां तक कि बेटे की शादी और पारिवारिक कार्यक्रमों में भी आई थीं। महिला ने रुपए भी उधार लिए हुए हैं। जब उन्होंने रुपए मांगे तो महिला ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। महिला ने पहले भी कई लोगों के खिलाफ रेप के मामले दर्ज कराए हैं, जो जांच में झूठे पाए गए। 3 मामलों में एफआर लग चुकी जांच अधिकारी ने बताया- महिला ने इससे पहले भी जोधपुर के माता का थान, मंडोर और बनाड़ थाने में भी रेप करने के मामले में दर्ज कराए हैं। इन मामलों में एफआर लग चुकी है। महिला के बयान होने बाकी हैं। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। अब तक 5 मामले दर्ज करवा चुकी

सीनियर टीचर भर्ती के 886 पद घटाए:अब 9 हजार 651 पदों के लिए होगी परीक्षा; 12 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने सीनियर टीचर भर्ती के 886 पद घटा दिए गए है। अब यह भर्ती कुल 9,651 पदों पर की जाएगी। इस परीक्षा में 12 लाख तीस हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन किया है। पूर्व में ये भर्ती 10537 पदों पर होनी थी। 12 से 18 जुलाई 2026 तक होने वाली ये परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। विषयवार पदों की नवीनतम संख्या के संबंध में आयोग ने शुद्धि-पत्र जारी कर दिया है। विज्ञापन की शेष शर्तें पहले की तरह ही यथावत रहेंगी। विस्तृत सूचना एवं शुद्धि-पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर खंड पीठ में आज परीक्षा को स्थगित करने और फॉर्म री-ओपन करने के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान- आयोग सचिव ने कोर्ट में बताया कि विज्ञापन जारी करने की तिथि को प्रभावी नियमों के अनुसार भर्ती के अंतर्गत मूल पदों में अधिकतम 50 प्रतिशत तक की ही वृद्धि की जा सकती है। इससे पहले जारी शुद्धि-पत्र संख्या 10/2026-27 के जरिए पदों की संख्या बढ़ाकर 10,537 कर दी गई थी, जो कि 50 प्रतिशत से अधिक थी। इसको संशोधित करते हुए इस भर्ती के अन्तर्गत नियमानुसार 50 प्रतिशत तक की ही वृद्धि करते हुए पद भरे जाएंगे। इसके लिए शुद्धि-पत्र जारी कर पदों की संशोधित संख्या को अधिसूचित कर दिया जाएगा। शुद्धि-पत्र जारी कोर्ट में सुनवाई के बाद आयोग की ओर से शुद्धि-पत्र संख्या 11/2026-27 जारी भी कर दिया गया है, जिसके तहत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाए गए अतिरिक्त पदों को हटाकर अब कुल पद 9,651 अधिसूचित किए गए हैं। वर्गवार वर्गीकरण जल्द जारी करेंगे इस भर्ती का मूल विज्ञापन (संख्या 07/2025-26) पिछले साल 17 जुलाई 2025 को 10 विषयों के कुल 6,500 पदों के लिए जारी किया गया था। इसके लिए 19 अगस्त से 17 सितंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। बाद में माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार पदों को बढ़ाकर पहले 10,537 किया गया था, जिसे नियमानुसार पुनः संशोधित कर 9,651 किया गया है। वर्गवार वर्गीकरण जल्द जारी किया जाएगा। अलग-अलग सब्जेक्ट की परीक्षाओं को चार ग्रुप में बांटा ग्रुप A- इसमें सोशल साइंस विषय है। इसके अभ्यर्थियों की 12 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सोशल साइंस की परीक्षा होगी। ग्रुप B- इसमें हिंदी विषय है। इस सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की 13 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक हिंदी की परीक्षा होगी। ग्रुप C- इसमें साइंस और संस्कृत सब्जेक्ट है। इन विषयों के सभी अभ्यर्थियों की 14 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक साइंस विषय की परीक्षा होगी। 15 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक संस्कृत विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी। ग्रुप D- इसमें गणित, इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी, सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट रखे गए हैं। इन सब्जेक्ट के सभी अभ्यर्थियों की 16 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक गणित विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 17 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक इंग्लिश और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक उर्दू विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। 18 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक पंजाबी और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी।

गहलोत बोले-रिफाइनरी के इतिहास की सीएम को जानकारी नहीं है:मदन राठौड़ का पलटवार, कहा- 'रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें गहलोत'

रिफाइनरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच सियासी वार पलटवार का दौर शुरू हो गया है। सीएम भजनलाल शर्मा के बयान पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- ‘सीएम को रिफाइनरी के इतिहास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।’ गहलोत ने एक्स पर कांग्रेस राज के दौरान रिफाइनरी शिलान्यास की तस्वीरें भी शेयर की हैं। इस पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- ‘गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें।’ गहलोत और राठौड़ दोनों ने अपने एक्स पर वार पलटवार किए। देखिए, गहलोत की शेयर की गई ये 2 PHOTOS गहलोत बोले- रिफाइनरी को लेकर सीएम को गलत जानकारी पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सीएम पर पलटवार करते हुए एक्स पर लिखा- मुख्यमंत्री पूर्व में रिफाइनरी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर गलत बयान दे चुके हैं। मुख्यमंत्री को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें। गहलोत ने लिखा- मुख्यमंत्री को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास साल 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है। इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई। रिफाइनरी के लिए एचपीसीएल को राजी करना चुनौतीपूर्ण काम था गहलोत ने लिखा- राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए ‘हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। सामान्यत: रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, लेकिन एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह ‘एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड’ (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष का गहलोत के बयान पर पलटवार मदन राठौड़ बोले- गहलोत साहब,रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें मदन राठौड़ ने एक्स पर लिखा- ‘कागजी शिलान्यास बनाम धरातल का विकास।’ गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें। राजस्थान की जनता भ्रामक बयानों और चुनावी स्टंट का अंतर अच्छी तरह जानती है। 2013 में चुनाव से ठीक दो महीने पहले बिना बजट, बिना जमीन और बिना पर्यावरण मंजूरी के केवल वोट बैंक के लिए पत्थर लगाना विकास नहीं, राजनीतिक छलावा था।
कांग्रेस राज में एचपीसीएल से एमओयू पर प्रदेश पर बोझ था मदन राठौड़ ने लिखा- पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हितों को ताक पर रखकर एचपीसीएस से जो एमओयू किया था, वह राजस्थान पर भारी वित्तीय बोझ था। 2014 में भाजपा सरकार ने कड़ा मोलभाव कर राज्य के हजारों करोड़ रुपए बचाए और जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका वास्तविक ‘कार्यारंभ’ कराया। काम की कछुआ चाल के जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं राठौड़ ने लिखा- लागत बढ़ने का रोना रोने वाले याद रखें कि 2018 से 2023 के बीच अपनी आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण इस प्रोजेक्ट को अटकाने, लटकाने और भटकाने का काम किसने किया? काम की कछुआ चाल के असली जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं। हमारी डबल इंजन सरकार कागजी पत्थरों पर नहीं, धरातल पर काम करने में विश्वास रखती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पचपदरा रिफाइनरी का काम अब पूरी पारदर्शिता और तीव्र गति से पूरा होकर जल्द राजस्थान की प्रगति का नया आधार बनेगा।

'बोर्ड लगा देने को उद्घाटन नहीं कहा जा सकता':राज्यवर्धन बोले- शिलान्यास हुआ तो रिफाइनरी शुरू क्यों नही हुई, 2400 को नियुक्ति पत्र सौंपे

प्रदेश के हर छोर पर विकास हो रहा है। डबल इंजन सरकार की ताकत से पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी लग गई है। ये बात शनिवार को दौसा जिला प्रभारी व उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने टाउन हॉल में आयोजित जिला स्तरीय रोजगार उत्सव कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए कही। पूर्व सीएम गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा- यदि 2013 में शिलान्यास हो गया था, तो फिर रिफाइनरी काम क्यों नहीं कर रही थी। केवल बोर्ड लगा देने को उद्घाटन नहीं कहा जा सकता, जब रिफाइनरी काम करना शुरू करती है तो उसे उद्घाटन कहा जाता है। उन्होंने कहा- इसके अलावा फैक्ट्रियों में अन्य प्रोडक्ट का उत्पादन होगा। कार्यक्रम में 2400 नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना मंत्री राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना लगाते हुए कहा- भाजपा सरकार केवल घोषणा करने और नारे लगाने में विश्वास नहीं करती बल्कि जिस कार्य का शिलान्यास करती है, उसका उद्घाटन भी हम ही करते हैं। उन्होंने आगे कहा- हमारी सरकार पूर्व की तरह होटल में बंद रहने और अपने ही विधायकों को पकड़ने वाली सरकार नहीं है। हममें जनता के हितों के लिए काम करने की प्रतिबद्धता है। 50 हजार युवाओं को दिए नियुक्ति पत्र मंत्री राठौड़ ने कहा- प्रदेश के कई हिस्सों में पानी की समस्याओं का भी तेजी से समाधान हो रहा है। 50 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं। जयपुर शहर में बेहतर ट्रांसपोर्टेशन के लिए मेट्रो फेस-टू का शिलान्यास किया गया है। प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है कि साधारण व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके इसके लिए सुविधाओं में विस्तार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भाजपा सरकार विकास के सभी मार्ग प्रशस्त कर रही है। राठौड़ ने कहा- यह काम अभी ओर गति पकड़ेगा। जब जनता के आशीर्वाद से सरकार बार-बार रिपीट होती है तो काम करने की क्षमता कई गुना तेजी से बढ़ जाती है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने में राजस्थान का बहुत अहम रोल रहेगा। 8 लोगों की मौत पर बोले राठौड़ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 8 लोगों की मौत के मामले में मंत्री राठौड़ ने कहा- एक्सप्रेस-वे के निर्माण संबंधी कमियों को लेकर सम्बंधित ठेकेदार पर कार्रवाई होगी। भाजपा सरकार करप्शन रहित जीरो टॉलरेंस वाली हैं। वहीं दौसा की पेयजल समस्या के सवाल पर मंत्री ने कहा- जल संसाधन मंत्री के नेतृत्व में तत्परता से काम किया जा रहा है। यहां के लोगों ने पानी के लिए वर्षों से इंतजार किया है, वह अब महीनों में रह गया है। नवनियुक्त कार्मिकों को सौंपे नियुक्ति पत्र इससे पहले राज्यसभा सांसद डॉ. अलका सिंह गुर्जर, लालसोट विधायक रामबिलास मीणा, कलेक्टर डॉ. सौम्या झा और एसपी पीयूष दीक्षित ने अलग-अलग विभागों के नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। कलेक्टर ने बताया कि 2400 युवाओं को आमंत्रित किया गया था। ये रहे मौजूद आयोजन को राज्य स्तरीय रोजगार उत्सव से भी वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया था। जहां सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुना। इस दौरान जिला परिषद सीईओ बिरदीचंद गंगवाल, एएसपी शंकरलाल मीणा, एएमई एलसी मीणा, प्रदेश प्रवक्ता प्रिया मीणा, भाजपा नेता सिकंदर वधावन, शहर अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।