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अलवर में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की 92 हजार बोतलें-केन जब्त:4 दिन में 4 शहरों से सवा लाख बोतलें सीज; विभाग ने कहा- बच्चों-महिलाओं के लिए नुकसानदायक

राजस्थान में एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बेची जा रही ‘स्टिंग’, ‘रेड बुल’ पर स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। राजधानी जयपुर सहित अलवर, कोटा और बीकानेर से 4 दिन में 1 लाख 34 हजार बोतल-कैन जब्त किए गए हैं। विभाग के अनुसार- ये कैफीनेटेड ड्रिंक हैं, जिसे एनर्जी ड्रिंक बताकर बेचा जा रहा है। विभाग के अनुसार- युवाओं की ओर से आजकल इन एनर्जी ड्रिंक का ज्यादा उपयोग किया जाता है। इससे उन्हें उनकी हेल्थ पर गलत असर पड़ने की संभावना है। अलवर जिले में ‘स्टिंग’ (Sting) एनर्जी ड्रिंक की करीब 92 हजार बोतलें और केन बुधवार को सीज की गईं। सीएमएचओ अलवर की फूड सेफ्टी टीम ने मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (MIA) स्थित पेप्सी बनाने वाली कंपनी ‘वरुण बेवरेजेस लिमिटेड’ के गोदाम (प्लॉट नंबर 208) पर छापा मारा। गोदाम से 250 ML की करीब 62 हजार बोतलें और 180 ML की करीब 30 हजार 200 केन सीज किए गए। अलवर में पहली बार किसी एनर्जी ड्रिंक ब्रांड पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। टीम ने मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवाए हैं। विभाग के अनुसार- एनर्जी ड्रिंक पर लिखी जानकारी भ्रामक है। इसकी रिपोर्ट 14 दिनों में आएगी। बता दें कि इन एनर्जी ड्रिंक में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। गर्भवती महिला, लेक्टेटिंग मदर और बच्चों के लिए यह नुकसानदायक हो सकती है। डिब्बे और बोतल पर लिखी जानकारी गुमराह करने वाली फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता ने बताया- विभाग को शिकायत मिली थी कि इस एनर्जी ड्रिंक की पैकिंग पर केफेनेटेड बेवरेज स्टिंग एनर्जी लिखा है। इस पर स्टीमूलेट्स माइंड, एर्नजाइजेस बॉडी, सेम ग्रेट टेस्ट आदि भ्रामक सूचनाओं की शिकायत है। इसी शिकायत के आधार पर तुरंत एक्शन लेते हुए गोदाम में मौजूद स्टॉक को सीज किया गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। मेवात क्षेत्र में सबसे ज्यादा खपत, रोजाना हजारों की बिक्री अलवर जिले और खासकर मेवात क्षेत्र में इन दिनों एनर्जी ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ी है। युवाओं के बीच इसके बढ़ते क्रेज के कारण रोजाना हजारों की संख्या में इसकी खपत हो रही है। बाजार में कई कंपनियों की एनर्जी ड्रिंक धड़ल्ले से बिक रही हैं। इसके चलते अब विभाग अलर्ट मोड पर है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता, जयसिंह यादव और अशोक लखेरा सहित विभाग के अन्य सदस्य मौजूद थे। टीम ने कहा- मिलावटखोरों और भ्रामक जानकारी देकर सामान बेचने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। कोटा: अधिकारी बोले- गलत प्रचार किया जा रहा कोटा में खाद्य विभाग की टीम ने मंगलवार को स्टिंग एनर्जी ड्रिंक और एड्रीनलीन रश एनर्जी ड्रिंक के खिलाफ कार्रवाई की थी। अधिकारियों का कहना है कि इन्हें एनर्जी ड्रिंग बताकर बेचा जा रहा है। जो गलत प्रचार की श्रेणी में आता है। ये कैफीनेटेड ड्रिंक हैं। यह कार्रवाई चम्बल इंडस्ट्रियल एरिया में एक संस्थान से कैफेनेटेड बेवरेज स्टिंग एनर्जी रेड और येलो के 9570 और एड्रीनलीन रश एनर्जी ड्रिंक के 3840 समेत कुल 13,410 बोतलें/कैन सीज किए थे। बीकानेर: कोल्ड ड्रिंक ‘रेड बुल’ के 608 कैन सीज बीकानेर के रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र स्थित मैसर्स बोथरा एंड संस के गोदाम से मंगलवार को रेड बुल ड्रिंक के 608 कैन सीज किए गए। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कैफिनेटेड बेवरेज रेड बुल के नमूने लिए गए। विभाग के अनुसार- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इन कैफिनेटेड बेवरेज के लेबल पर स्टिम्युलेट्स माइंड, एनर्जाइज बॉडी, एनर्जी ड्रिंक या स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे दावों का उल्लेख गलत प्रचार की श्रेणी में माना है। इन अधिक कैफीन युक्त पेय पदार्थ से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों के हेल्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जयपुर: स्टिंग एनर्जी के गोदाम से 32 हजार 292 बोतलें सीज फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की सेंट्रल टीम ने जयपुर में मैसर्स अंजली इंटरप्राइजेज पद्मावती कॉलोनी निर्माण नगर पर “स्टिंग एनर्जी” कैफिनेटेड बेवरेज स्टॉक 5 जुलाई को जब्त किया। यहां से 32 हजार 292 स्टिंग एनर्जी ड्रिंक बोतलें सीज की गई थीं।

मां के लिव-इन-पार्टनर की बेटे ने की हत्या, VIDEO:मृतक चिल्लाता रहा- मैंने कुछ नहीं किया, गुजरात के राजकोट की घटना

गुजरात के राजकोट जिले के जेतपुर शहर में मां के 12 साल पुराने लिव-इन रिश्ते से नाराज बेटे ने बीच सड़क पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर व्यक्ति की हत्या कर दी। आरोपी ने दौड़ाकर मृतक के शरीर पर चाकू के 6 वार किए। इस दौरान मृतक मदद की गुहार लगाकर चिल्लाता रहा कि मैंने कुछ नहीं किया है, लेकिन आरोपी उस पर चाकुओं के वार करता गया। आरोपी उसे घायल हालत में छोड़कर फरार हो गया था, जिसे मंगलवार की देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। CCTV में वारदात की 3 तस्वीरें… मजदूरी करता था मृतक पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक कमलेश वाघेला पेशे से मजदूर था और इसी इलाके में रहता था। वह आरोपी की मां के साथ पिछले 12 सालों से लिव-इन रिलेशन में था। वायरल CCTV फुटेज के ऑडियो में सुनाई देता है कि घायल कमलेश वाघेला आसपास मौजूद लोगों से अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है. साथ ही वह आरोपी जयंत वाघेला से भी रहम की अपील करता दिखाई देता है। कमलेश कहता है-मैंने किसी का कुछ नहीं किया है। वहीं, जवाब में जयंत कहता है- मैंने तुम्हें मना किया था कि नहीं। CCTV फुटेज में जयंत के साथ एक अन्य व्यक्ति भी दिखाई दे रहा है। वह व्यक्ति कौन है, इसे लेकर भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मां के साथ रहना पसंद नहीं था पुलिस की पूछताछ में जयन वाघेला ने बताया कि उसे कमलेशभाई वाघेला का उसकी मां के साथ रहना पसंद नहीं था। वह पहले भी कई बार उसे समझाइश दे चुका था कि वह उसकी मां से मिलने घर न आया करे। लेकिन वाघेला इसके बाद भी हर कभी उसके घर आ जाया करता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कमलेश और आरोपी की मां नीता पिछले 12 साल से लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह रहे थे। इस दौरान मृतक कमलेश वाघेला ने नीता की बेटी की भी शादी करवाई थी। वहीं, नीता के अन्य दो बेटे राजकोट के कोठारिया इलाके में रहते हैं। इन्हीं में से एक जयंत ने कमलेश की हत्या की। —————– ये खबर भी पढ़ें… एक पति, दो लिव इन पार्टनर, फिर मर्डर:भाई को फोन पर कहा था- वो धमकी दे रहा है 11 साल पहले सात फेरे लेकर नई जिंदगी शुरू की। दो बच्चों की मां बनी, लेकिन वक्त के साथ रिश्ते बदलते चले गए। पति से अलग होकर उसी के दोस्त से शादी कर ली। वहां भी रिश्ता नहीं टिक पाया तो दूसरे पति के रिश्तेदार के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगी। पूरी खबर पढ़ें…

माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा – ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

क्या आप भी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक कंप्यूटर के सामने बैठकर डेस्क जॉब करते हैं? अगर हां, तो परप्लेक्सिटी एआई के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का दावा आपको चौंका सकता है। श्रीनिवास का कहना है कि यह 9 से 5 की डेस्क जॉब इंसानी काम का कोई स्वाभाविक विकास नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स द्वारा तैयार की गई एक बेहद सफल बिजनेस स्ट्रैटजी थी। हाल ही में मशहूर पॉडकास्ट ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ में बातचीत के दौरान श्रीनिवास ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सॉफ्टवेयर बेचने के लिए जानबूझकर ‘आधुनिक ऑफिस वर्कर’ का कॉन्सेप्ट तैयार किया था। श्रीनिवास ने कहा, ‘माइक्रोसॉफ्ट ने ऑफिस वर्कर की इस पूरी अवधारणा को सिर्फ इसलिए खड़ा किया क्योंकि वे अपना ऑफिस सॉफ्टवेयर बेचना चाहते थे। बिल गेट्स का मिशन ही यही था कि हर डेस्क पर एक पीसी (कंप्यूटर) हो और लोग उससे चिपके रहें।’ उन्होंने आगे बताया कि दिनभर डेस्क पर बैठकर स्क्रीन को घूरते रहने वाले इस वर्क कल्चर को सुनियोजित तरीके से नीचे से ऊपर तक तैयार किया गया था। सीईओ श्रीनिवास का यह दावा सुनकर पॉडकास्ट के होस्ट जो रोगन भी हैरान रह गए। रोगन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वाह! इस तरह की लाइफस्टाइल बहुत ही हालिया चीज है जिसे हम सबने अब सामान्य मान लिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले में सटीक निशाना लगाया।’ परप्लेक्सिटी प्रमुख श्रीनिवास ने समझाया कि इस रणनीति के तहत कॉरपोरेट जगत में आने से पहले ही पीढ़ियों को माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादों का आदी बनाया गया। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि हम सभी को बचपन से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल का इस्तेमाल करना सिखाया गया। एक बार जब आप यह सीख गए, तो आप किसी ऐसी कंपनी में काम करने के लिए तैयार हो गए जिसके डेस्क पर पीसी हो और जो माइक्रोसॉफ्ट को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के पैसे दे रही हो।’ स्कूलों और शुरुआती कॉरपोरेट कल्चर में वर्ड और एक्सेल को अनिवार्य बनाकर माइक्रोसॉफ्ट ने मुनाफे का एक कभी न खत्म होने वाला चक्र तैयार कर लिया। गेट्स का मकसद जॉब्स की तरह कंप्यूटिंग को सुंदर बनाना नहीं था – सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने बिल गेट्स के आक्रामक कॉरपोरेट विजन की तुलना एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स से की। उन्होंने कहा कि जहां स्टीव जॉब्स का ध्यान सुंदर, आकर्षक और आसान मशीनें बनाने पर था, वहीं माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना था। श्रीनिवास ने कहा, ‘जैसा स्टीव जॉब्स सोचते थे। उन्हें सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर बेचने की परवाह थी, क्योंकि ज्यादा सॉफ्टवेयर बेचने से ही आप अमीर बनते हैं।’

जोधपुर में ISIS के हैंडलर के घर NIA का छापा:बैंक के डॉक्यूमेंट और बाइक जब्त; सोशल मीडिया ग्रुप से युवाओं का ब्रेनवॉश करता था

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) आंध्र प्रदेश की टीम ने बुधवार को आतंकी संगठन ISIS के हैंडलर जीशान (19) के घर छापेमारी की। सुबह 10 बजे NIA की टीम जोधपुर के नई सड़क इलाके में जीशान के घर पहुंची। एजेंसी के अफसरों ने दोपहर 2 बजे तक घर के कोने-कोने को खंगाला। अधिकारियों ने जीशान की बैंक डिटेल्स, उसके खर्चों और हाल के महीनों में घर आने-जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई और डॉक्यूमेंट जब्त किए। आरोपी की बुलेट बाइक को भी जब्त किया। दरअसल, जीशान सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश करता था। उसे 24 मार्च को आंध्र प्रदेश की ATS टीम और राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब देखिए, NIA के कार्रवाई से जुड़ी PHOTOS… युवाओं का ब्रेनवॉश करता था आरोपी जोधपुर के सदर बाजार थानाधिकारी मानक राम बिश्नोई ने बताया- मार्च में आंध्र प्रदेश की ATS टीम ने जोधपुर में नई सड़क के पास से जीशान को पकड़ा था। जांच में सामने आया कि वह सोशल मीडिया पर ‘बेनेक्स’ (BENX) नाम का ग्रुप चला रहा था। इसके जरिए वह युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़कर उनकी भर्ती करता था। मामले में एटीएस के बाद अब NIA जांच कर रही है। बुधवार को NIA टीम यहां पहुंची और उसके घर की तलाशी ली। इस्तेमाल की जाने वाली एक बाइक को भी थाने लाकर जब्त कर लिया गया है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, टीम की अगली कार्रवाई के बारे में अभी जानकारी नहीं है। हालांकि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों से भी पूछताछ हो सकती है। एग्जाम पास कर बना ग्रुप एडमिन शुरुआती जांच में यह साफ हो गया था कि जीशान बेहद शातिर तरीके से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सक्रिय था। देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। जीशान ने कट्‌टरपंथी ग्रुप ‘BENX’ का एडमिन बनने के लिए बाकायदा एक ऑनलाइन परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसे ISIS की विचारधारा और जिहादी सामग्री फैलाने की जिम्मेदारी दी गई। वह सोशल मीडिया के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। उनका ब्रेनवॉश कर आतंकी नेटवर्क में शामिल करता था। … आरोपी जीशान से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. जोधपुर में आतंकी संगठन ISIS का हैंडलर पकड़ा:एग्जाम पास कर बना ग्रुप एडमिन, युवाओं का ब्रेनवॉश करता था; दो संदिग्ध भी पकड़े जोधपुर में आतंकी संगठन ISIS से जुड़े हैंडलर को पुलिस ने पकड़ा है। आरोपी युवक के फोन से ISIS से जुड़े संदिग्ध वीडियो बरामद हुए हैं, जिन्हें वह सोशल मीडिया ग्रुप में शेयर कर युवाओं का ब्रेनवॉश कर कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ता था। (पढ़ें पूरी खबर) 2. आतंकी जीशान ISIS के लिए युवाओं की भर्ती करता था:दुनिया में शरिया स्थापित करने का कंटेंट दिखाता; आंध्र प्रदेश पुलिस ट्रेन से लेकर रवाना जोधपुर में आंध्र प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में आए जीशान (19) से पूछताछ की गई। वह आतंकी संगठन ISISI से जुड़ा हुआ था। पूछताछ में सामने आया कि वह अपने हैंडलर के इशारे पर नए लड़कों को ISIS में भर्ती करने के लिए जिम्मेदारी संभालता था। (पढ़ें पूरी खबर)

यूपी में रिटायर्ड ARTO के घर 13kg सोना,9kg चांदी मिली:विजिलेंस के छापे में हीरे भी मिले; दीवारों-पैकेटों में छिपाया था 1.62 करोड़ कैश

यूपी में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर विजिलेंस ने छापा मारा। करीब 26 घंटे चली छापेमारी में ललित कुमार के लखनऊ आवास से 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और हीरे के आभूषण बरामद किए हैं। जिनकी कीमत 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। तलाशी के दौरान टीम को करीब 1.62 करोड़ रुपए कैश भी मिला, जो उसने पैकेटों में दीवार और अलग-अलग कमरों में छिपाकर रखे थे। 15 जगहों पर मकान, फ्लैट और खेती की जमीनों के दस्तावेज भी मिले हैं। विजिलेंस ने बरामद संपत्ति की कुल कीमत करीब 35 करोड़ रुपए बताई है। छापेमारी और बरामदगी से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… आगरा में तैनाती के समय केस दर्ज हुआ था आरोपी ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली में सेंगहो कोठी के रहने वाले हैं। विजिलेंस विभाग के अनुसार, ललित कुमार के खिलाफ 2024 में कानपुर में तैनाती के दौरान करप्शन की शिकायत की गई थी। उस वक्त वह आरटीओ ऑफिस में संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) यानी रीजनल इंस्पेक्टर टेक्निकल थे। शिकायत के आधार पर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने 11 सितंबर, 2024 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन को जांच की अनुमति दी। इसके बाद उनके आय और संपत्ति के स्रोतों की विस्तृत जांच शुरू की गई। कमाई से 73.6 प्रतिशत अधिक खर्च, नहीं दे सके जवाब जांच में सामने आया कि ललित कुमार की कुल कमाई 93.26 लाख रुपए थी, जबकि चल और अचल संपत्तियों की खरीद, रखरखाव और अन्य मदों पर उनका कुल खर्च 1.61 करोड़ रुपये पाया गया। इस तरह उन्होंने अपनी वैध कमाई से 68.66 लाख रुपये, यानी करीब 73.6 प्रतिशत अधिक खर्च किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अतिरिक्त खर्च और संपत्ति के संबंध में ललित कुमार कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। इसके बाद उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। लखनऊ में विजिलेंस ने छापा मारा वर्तमान में ललित कुमार लखनऊ के अलीगंज में चंद्रलोक कॉलोनी स्थित सी-143 आवास में रहते हैं। आगरा से रिटायर हुए थे। 7 जुलाई को कोर्ट से वारंट लेकर विजिलेंस टीम दोपहर 12 बजे ललित कुमार के आवास पहुंची। आवास के चप्पे-चप्पे को खंगाला गया। इस दौरान टीम को घर के अलग-अलग हिस्सों में पैकेट बनाकर छिपाए गए करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपए नकद बरामद हुए। विजिलेंस टीम ने क्या-क्या बरामद किया? 20 करोड़ के सोना-चांदी और गहने: 13 किलो सोना और करीब 9 किलो चांदी बरामद हुई, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। लखनऊ, नोएडा और बाराबंकी में करोड़ों की संपत्तियां: लखनऊ के अलीगंज, वृंदावन योजना, इस्माइलगंज, मोहनलालगंज और बालकगंज समेत कई इलाकों में मकान, प्लॉट और कृषि भूमि के दस्तावेज मिले। इसके अलावा नोएडा में दो फ्लैट की बुकिंग और बाराबंकी व रायबरेली में भी जमीन के कागजात बरामद हुए। इन अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपए बताई गई है। कारें, रिवॉल्वर, एक करोड़ से ज्यादा का निवेश मिला: टोयोटा इनोवा और हुंडई i20 कार, एक रिवॉल्वर तथा बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में एक करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के दस्तावेज भी मिले हैं। घर की साज-सज्जा और महंगे घरेलू सामान पर भी भारी खर्च किए जाने के सबूत मिले हैं। ——————— यह खबर भी पढ़िए:- सपा के पूर्व विधायक के लखनऊ-झांसी ठिकानों पर ED रेड: अखिलेश का निशाना, बोले- जहां चढ़ावा चोरी का माल, वहां छापे नहीं मारते अखिलेश यादव के करीबी और सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के ठिकानों पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 जगहों पर छापा मारा। झांसी में सपा नेता के आवास समेत 5 ठिकानों और लखनऊ के 2 फ्लैटों पर छापेमारी चल रही है। ईडी की टीम सुबह 7 बजे पूर्व विधायक के ठिकानों पर पहुंची। पढ़ें पूरी खबर…

डीबी अस्पताल में करंट से मजदूर की मौत:ठेकेदार पर सुरक्षा उपकरण नहीं देने का आरोप, केस दर्ज; मुआवजा देने की मांग

गवर्नमेंट डीबी अस्पताल में बिजली का काम करते समय करंट लगने से एक मजदूर की मौत हो गई। इस मामले में अब एक नया मोड़ आया है। मृतक के ताऊ ने बिजली ठेकेदार के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया है। जांच अधिकारी कोतवाली थाने के एसआई बलवंत राम ने बताया कि डाब डीडवाना निवासी पप्पूराम नायक ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार उनका भतीजा ओमप्रकाश नायक (19) करीब एक साल से डीबी अस्पताल में बिजली ठेकेदार के लिए मजदूरी कर रहा था और उसे प्रतिमाह 15 हजार रुपए बैंक खाते में मिलते थे। सोमवार शाम को ओमप्रकाश डीबी अस्पताल में बिजली का काम कर रहा था, तभी उसे हाई वोल्टेज लाइन का करंट लगा। साथी मजदूरों ने तुरंत उसे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के दूसरे दिन भी मजदूर के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है। परिजन ठेकेदार से उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं और आरएलपी व नायक समाज के पदाधिकारी भी मॉर्च्युरी पहुंचे हैं। परिजनों ने बताया कि घटना वाले दिन ठेकेदार ने उन्हें फोन कर चूरू के डीबी अस्पताल आने और पोस्टमार्टम की कार्रवाई करवाने की सूचना दी थी। चूरू पहुंचने पर परिजनों को पता चला कि ठेकेदार ने ओमप्रकाश को बिजली का काम करते समय सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए थे, जिसके कारण उसकी मौत हुई। आरएलपी के पदाधिकारी व नायक समाज के लोग पहुंचे
हादसे की सूचना के बाद बुधवार सुबह आरएलपी पदाधिकारी व नायक समाज के लोग अस्पताल में मॉर्च्युरी के सामने पहुंचे। जहां आरएलपी व नायक समाज के लोगों ने बिजली ठेकेदार के द्वारा मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की बात कहीं गई, जबकि परिजनों के अनुसार ठेकेदार बुधवार को अपने गांव चला गया हैं। आरएलपी के विजय पूनिया, देवेश चौधरी, संदीप कपूरिया, डाब सरपंच लोकेश बेनीवाल, नायक समाज के अध्यक्ष रामेश्वर लाल नायक ने बताया कि बिजली ठेकेदार के द्वारा उचित मुआवजा मृतक के परिजनों को मिलना चाहिए। अन्यथा आरएलपी व नायक समाज की ओर से प्रदर्शन किया जाएगा।

सवाई माधोपुर में ग्रामीणों ने थाने पर किया प्रदर्शन:मामला दर्ज कराने के तीन दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से नाराज थे

सवाई माधोपुर में तीन दिन पहले दर्ज मामले को लेकर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को थाने पर विरोध-प्रदर्शन किया। दरअसल, एक गांव में 3 दिन पहले कुछ लोगों के खिलाफ एक युवती को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और अपहरण करने का मामला दर्ज कराया था। जिस पर नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर लोगों में आक्रोश है। युवती का अपहरण करने का आरोप ग्रामीणों ने बताया- थाने में पीड़ित पक्ष की ओर से रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसमें उसने बताया कि 22 वर्षीय कॉलेज स्टूडेंट है। वह इंटर्नशिप कर रही थी। पीड़ित पक्ष के अनुसार दो युवक पिछले कई दिनों से युवती की रैकी कर रहे थे। परिजनों का आरोप- बहला फुसलाकर अपहरण किया 5 जुलाई को आरोपियों ने युवती को बहला फुसलाकर उसका अपहरण कर लिया और उसे अज्ञात स्थान पर ले गए हैं। जिसे लेकर पीड़ित पक्ष ने रिपोर्ट देकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को समय पर रिपोर्ट देने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीणों को थाने पर प्रदर्शन किया गया। इस मामले में SHO महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया- मामले में गुमशुदगी की दर्ज कर ली गई थी। जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

UK की व्हिस्की-कारें भारत में 7 दिन बाद सस्ती मिलेंगी:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होगा; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर 7 दिन बाद सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले दोनों देशों के बिजनेस और कंपनियों के पास तैयारी करने के लिए अब सिर्फ एक महीने से भी कम बचा है। भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत करेगा।” सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 6: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।

भीलवाड़ा में सड़कों पर उतरे सराफा कारोबारी:शहर में आधा सराफा बाजार बंद रहा, बोले- टूटी सड़कों के कारण ग्राहकों ने आना बंद किया

भीलवाड़ा शहर का सराफा बाजार आज बंद रहा, लोगों ने पिछले लंबे समय से सड़क निर्माण नहीं होने और उनका व्यापार प्रभावित होने के चलते विरोध प्रदर्शन किया और अपनी दुकानें बंद रखी। लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने नालियों की सफाई करने और सड़क चौड़ी करने के नाम पर उनके दुकान की बाहर लगी पट्टियों और नालियों को तोड़ दिया, लेकिन उनकी मरम्मत का कार्य पिछले 6 महीने से अधूरा पड़ा है। कई बार नगर निगम और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत करने के बाद भी जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आज मजबूरी में उन्हें अपना व्यापार और बाजार बंद रखकर विरोध करना पड़ा है। इस दौरान करीब 2 घंटे तक बाजार बंद रहे और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया, बाद में नगर निगम अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और आश्वासन के बाद आक्रोशित लोगों ने बाजार खोला। 6 महीने से सड़कें टूटी हुई व्यापारी ने बताया कि करीब 6 महीने पहले जिला प्रशासन ने सराफा बाजार में अतिक्रमण हटाने के नाम पर हमारी दुकान के बाहर बनी नालियों को तोड़ दिया, रैंप को तोड़ा, साथ ही दुकान के अंदर आने के लिए लगी सीढ़ियां भी तोड़ दी। हमारी दुकान के बाहर लगे बोर्ड और होर्डिंग को हटाया गया, फिर भी हम लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कार्रवाई में सहयोग किया। हम लोगों ने खुद से हमारे अतिक्रमण हटाए, जिससे सड़क थोड़ी चौड़ी हो सके और नालियों में कचरा जाम ना हो। दुकान पर कई मशीनें खराब हो गई व्यापारियों ने कहा- इतना सब कुछ करने के बाद भी आज 6 महीने से हमारे यहां नालियां नहीं बन पाई, रोड नहीं बन पाए। इसके चलते हमारा व्यापार प्रभावित हो रहा है, इस बाजार में आने वाले लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, इसके कारण लोग यहां तक नहीं आ पा रहे हैं। सोने-चांदी और सराफा का कारोबार होने के चलते हमारे इलेक्ट्रॉनिक कांटे और अन्य कई उपकरण धूल मिट्टी लगने से खराब हो गए हैं। अब भी सड़क नहीं बनी तो आंदोलन करेंगे व्यापारियों का कहना है कि हमने कई बार नगर निगम और कलेक्टर कार्यालय जाकर शिकायत भी की, लेकिन अब तक भी कोई समाधान नहीं हुआ है। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और कभी भी बारिश के चलते बाजार और सड़क और ज्यादा खराब होंगे और समस्या भी बढ़ेगी। इसी के विरोध स्वरूप आज हमने सराफा बाजार को और हमारी दुकानों को बंद रखा है हमारी मांग है कि शीघ्र सड़क बनाकर हमें राहत प्रदान की जाए, अन्यथा आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया।

उदयपुर में कलेक्ट्रेट के बाहर आंगनबाड़ी कर्मचारियों का प्रदर्शन:सेंटर पर ताला लगाने की दी चेतावनी; राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग

राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्राम साथिनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंगनबाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को सरकार और विभाग के सामने रख रहे हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। अखिल राजस्थान महिला और बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने उदयपुर में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। मानदेय में वृद्धि समेत कई मांगों का समाधान नहीं संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष लक्ष्मी खैर ने बताया कि विभाग ने उन्हें 10 से 15 दिनों में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था। इसमें नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि और ग्रेच्युटी पेंशन जैसे बड़े मुद्दों पर नीतिगत निर्णय लेने की बात कही गई थी। वार्ता के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकारी अनदेखी से नाराज होकर संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अब भी मांग पूरी नहीं होने पर पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कर्मी कार्य बहिष्कार करेंगे। 9 महीने का मानदेय बकाया कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों का एक मांग-पत्र भी जारी किया है। इसमें सबसे प्रमुख मांग कुम्हेर (जिला डीग) परियोजना में ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद करने और पिछले कार्यकाल का ऑडिट कराने की है। इस परियोजना के कर्मचारियों का पिछले 9 महीनों का मानदेय बकाया है, जिसे तुरंत भुगतान करने की मांग की गई है। इसके अलावा कोटा चेचट परियोजना समेत कई अन्य जगहों पर भी 1 साल से भुगतान अटका हुआ है। गैर-आईसीडीएस काम करवाना बंद करें आंगनबाड़ी कर्मियों ने मांग की है कि उनसे बीएलओ, चुनाव कार्य, जनगणना और सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-आईसीडीएस काम करवाना पूरी तरह बंद किया जाए। इसके साथ ही बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार सेवा मुक्त हो चुके कर्मियों को 1 अप्रैल 2025 से ग्रेच्युटी का भुगतान तुरंत आदेश जारी कर किया जाए। पेंशन, मानदेय वृद्धि और मानदेय का एरियर की मांग संगठन की मांग है कि जब तक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाता, तब तक कोर्ट के फैसले के आधार पर कम से कम 20 से 25 हजार रुपए न्यूनतम मजदूरी दी जाए। रिटायरमेंट पर एक मुश्त 10 लाख रुपए नकद और पेंशन की सुविधा मिले, जो आखिरी मानदेय के 50 फीसदी से कम न हो। साथ ही मध्य प्रदेश की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने और बकाया एरियर देने की भी मांग उठाई गई है। आंगनबाड़ी सेंटर का भवन किराया भी भरने को मजबूर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन किराए का भुगतान भी पिछले 1 साल से विभाग ने नहीं किया है। इस वजह से कई कार्यकर्ता अपनी जेब से किराया भरने को मजबूर हैं। इसके अलावा 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने और महिला पर्यवेक्षकों के खाली पदों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भरने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।