झालावाड़ पीजी कॉलेज में सीटें बढ़ाने की मांग:एबीवीपी ने 25 फीसदी वृद्धि को लेकर प्रिंसिपल से लगाई गुहार

झालावाड़ पीजी कॉलेज में सीटें बढ़ाने की मांग की गई है। एबीवीपी की नगर इकाई ने सीटों में 25 प्रतिशत वृद्धि की मांग करते हुए प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपा है। नगर सह मंत्री प्रियांशु पाटीदार ने बताया कि हर साल हजारों छात्र कॉलेज में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। सीटों की कमी के कारण बड़ी संख्या में योग्य और मेधावी छात्रों को निराशा हाथ लगती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सीटों में वृद्धि करना समय की मांग है। भाग संयोजक गरिमा मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रत्येक छात्र का अधिकार है। उन्होंने कहा कि केवल सीटों की कमी के कारण किसी भी छात्र को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कॉलेज प्रशासन से छात्रों के हित में सकारात्मक पहल करने और शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन सौंपते समय विशाल, लक्ष्यराज, कुणाल, माफिज सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। नशे से दूरी सफलता की कुंजी: डॉ. रश्मी गुप्ता झालावाड़ में नशामुक्त भारत अभियान के तहत बीएससी नर्सिंग कॉलेज में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाना और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. रश्मी गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि तनाव पर नियंत्रण और नशे से दूरी ही सफलता की कुंजी है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में युवाओं को शिक्षा, करियर और सामाजिक अपेक्षाओं से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने जोर दिया कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और संतुलित जीवनशैली अपनाकर तनाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों का बेहतर सामना करता है और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से खुद को दूर रख पाता है। कार्यशाला में डॉ. गुप्ता ने छात्राओं को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और उसके परिवार व समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है। उन्होंने युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का एक प्रमुख कारण ‘पियर प्रेशर’ यानी साथियों का दबाव बताया। कई बार युवा अपने मित्रों या समूह में स्वीकार्यता पाने के लिए नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जो बाद में गंभीर समस्या बन सकता है। डॉ. गुप्ता ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें और किसी भी प्रकार के दबाव में आकर गलत आदतों को न अपनाएं। उन्होंने तनाव प्रबंधन के लिए नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, सकारात्मक संवाद और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह भी दी। इस कार्यक्रम में नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य मनोज गोस्वामी, उप-प्राचार्य कृष्ण कुमार नागर सहित सुनील सुमन, विपिन निगम, जितेंद्र कुमार, दीपक नागर, कन्हैयालाल मीणा, दिनेश चौहान, हिमानी राठौर, महेश कुमार, प्रवीण मेहरा, प्रतीक नागर तथा कॉलेज के समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में सभी उपस्थितजनों ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाकर ही स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त समाज का निर्माण संभव है।

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