बस में आग लगने की घटना पर मॉक ड्रिल:बचाव कार्यों का अभ्यास किया, कलेक्टर-एसपी ने लिया जायजा

कोटपूतली जिले के मोलाहेड़ा क्षेत्र में जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा विभाग ने एक संयुक्त मॉक ड्रिल की। इसका उद्देश्य किसी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए त्वरित और प्रभावी राहत-बचाव कार्यों की तैयारियों का परीक्षण करना था। यह ड्रिल वाहन में आग लगने की एक काल्पनिक घटना पर आधारित थी। मॉक ड्रिल के दौरान, सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार कार्रवाई शुरू की। इसमें आग पर नियंत्रण, प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी, यातायात प्रबंधन, वाहन में फंसे लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू, घायलों को प्राथमिक उपचार और एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाना शामिल था। बस के गैस टैंकर से टकराने की घटना का दृश्य बनाया इस मॉक ड्रिल में एक यात्री बस के गैस टैंकर से टकराने और फिर बिजली के पोल से टकराकर नीचे गिरने का काल्पनिक परिदृश्य बनाया गया था। इस स्थिति में लगभग 10 लोग घायल हुए, जिन्हें समय रहते निकालकर जिला अस्पताल बीडीएम पहुंचाया गया। इस अभ्यास में कोई वास्तविक जनहानि नहीं हुई। संसाधनों और विभाग की तैयारियां देखी इस अभ्यास के दौरान जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता और जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मॉक ड्रिल की विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया और संबंधित विभागों की तैयारियों, संसाधनों की उपलब्धता तथा समन्वित कार्यप्रणाली का जायजा लिया। जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सड़क पर किसी भी वाहन में आग लगने या अन्य आपात स्थिति में सबसे पहले घटनास्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बनाकर अनावश्यक भीड़ को दूर रखा जाए। साथ ही, तत्काल पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा विभाग को सूचना दी जाए। उन्होंने वाहन चालकों को वाहनों का नियमित तकनीकी निरीक्षण कराने, अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) अनिवार्य रूप से रखने और ज्वलनशील सामग्री के सुरक्षित परिवहन के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम बनाए रखते हुए संबंधित विभागों के निर्देशों का पालन करना चाहिए, जिससे जनहानि और संपत्ति की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

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