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पूर्व NSG कमांडो ड्यूटी पर ड्रग्स की तस्करी करता था:छुट्‌टी पर घर आते समय लाता था खेप; जेल भी जा चुका, बना रखी थी कई कंपनियां

ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व NSG कमांडो ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। आरोपी ड्यूटी पर रहते हुए भी नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर आते समय नशे की खेप लेकर आता था। इसके कारण कोई शक नहीं करता था। पुलिस ने आरोपी को शनिवार को कोर्ट में पेश कर 12 दिन की रिमांड पर लिया है। डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया-आरोपी रतनसिंह ने कई फर्में भी बना रखी थीं। अंदेशा है कि अवैध तस्करी की कमाई के पैसों को इधर-उधर करने के लिए उसने कंपनियां बना रखी थीं। सूत्रों के मुताबिक आरोपी सोलर से लेकर जल जीवन मिशन में भी पाइप का ठेका ले रखा था। असम राइफल्स में रहने के दौरान हुआ तस्कर से संपर्क डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया- आरोपी की ड्यूटी असम राइफल्स में थी। इसके चलते वह नॉर्थ ईस्ट के तस्करों के संपर्क में आ गया। जब ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर आता था तो थोड़ी बहुत खेप अपने साथ भी लेकर आ जाता था। ड्रग्स के साथ पकड़ा गया था डीसीपी ने बताया- आरोपी रतनसिंह साल 2008 में असम राइफल्स में भर्ती हुआ था। इसके बाद साल 2017 में एनएसजी में चला गया। 2021 में नागालैंड में ब्राउन शुगर पकड़े जाने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे एनएसजी ने निकाल दिया था। खास बात यह कि आरोपी 40 दिन तक जेल में रहा। जेल से बाहर आते ही फिर से मादक पदार्थ तस्करी शुरू कर दी थी। मादक पदार्थ की खेप आरोपी मणिपुर की तरफ से ही लेकर आता था। पूछताछ में आरोपी ने बताया- आमतौर पर नशीले पदार्थ की खेप ट्रेन के जरिए लेकर आता था। यहां लाने के बाद उसे लोकल नेटवर्क के जरिए सप्लाई कर देता था। एजेंसियां पूछताछ में जुटी इधर, आरोपी के पास से 1 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपए कैश मिलने के चलते इनकम टैक्स और अन्य एजेंसियों भी अब उससे पूछताछ करेगी। लग्जरी बना रखा था मकान जोधपुर पुलिस ने 16 जुलाई को देर रात बनाड़ स्थित पूर्व NSG कमांडो के घर पर कार्रवाई की थी। कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी लग्जरी लाइफ जी रहा था। बंगले में कई आलीशान निर्माण भी करवाए हुए थे। लेकिन मकान बाहर से साधारण नजर आता है। छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से 1 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपए की नकदी और 8 किलो अफीम का दूध भी बरामद हुआ था। …. ये भी पढ़ें… पूर्व NSG कमांडो के घर से 1.06 करोड़ कैश मिला:जोधपुर में 6 करोड़ का मकान बना रखा; छापे में 8 किलो अफीम का दूध भी बरामद जोधपुर पुलिस ने NSG में कमांडो रहे रतनसिंह को ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया है। बनाड़ थाना पुलिस टीम ने गुरुवार देर रात पूर्व NSG कमांडो के घर पर छापा मारा। पुलिस को देख रतनसिंह ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। (पूरी खबर पढ़ें)

ट्रांसपोर्टर से बना तस्कर, एक साल बाद गिरफ्तार:घर आने की सूचना पर ANTF ने पकड़ा; 10 हजार का इनाम था

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में NDPS एक्ट के मामले में पिछले एक साल से फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी आरोपी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने चित्तौड़गढ़ से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान गंगरार थाना क्षेत्र के सुवाणिया गांव निवासी किशनलाल (27) पुत्र भगवानालाल गाडरी के रूप में हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी अपने घर आया हुआ है। इसके बाद एएनटीएफ ने पहले उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और फिर उसके घर पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसकी तलाश मध्यप्रदेश पुलिस लगातार कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में डोडा-पोस्त की तस्करी से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। उसके साथ काम करने वाले अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकता है। नीमच पुलिस ने घोषित कर रखा था इनाम महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया- किशनलाल के खिलाफ मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। कार्रवाई के दौरान वह फरार हो गया था और करीब एक साल तक पुलिस के हाथ नहीं लगा। लगातार फरार रहने के कारण नीमच पुलिस अधीक्षक ने उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। एएनटीएफ को हाल ही में सूचना मिली कि आरोपी अपने गांव स्थित घर आया है। टीम ने सूचना की पुष्टि करने के बाद उसके घर और आसपास निगरानी रखी। सही समय मिलने पर पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पकड़ने के दौरान उसे भागने का कोई मौका नहीं मिला। ट्रांसपोर्ट के काम से शुरू हुआ अपराध का सफर पुलिस जांच के अनुसार- किशनलाल पहले चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट का काम करता था। वह माल लेकर जाने वाले ट्रकों को गुजरात भेजता था। आरोप है कि वहां कुछ दलालों के साथ मिलकर ट्रकों को कटवा देता था और बाद में ट्रक मालिकों को यह कहता था कि ट्रक चोरी हो गया है। शुरुआत में किसी को उस पर शक नहीं हुआ, लेकिन जब कई ट्रकों के साथ एक जैसी घटनाएं होने लगीं तो ट्रक मालिकों ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अलग-अलग ट्रक मालिकों ने उसके खिलाफ ट्रकों की हेराफेरी और खुर्द-बुर्द करने के करीब आठ मामले दर्ज कराए। इन मामलों में कार्रवाई के बाद उसे जेल जाना पड़ा। जेल से बाहर आते ही तस्करी में उतर गया पुलिस के मुताबिक किशनलाल के अपराध की दिशा जेल जाने के बाद बदल गई। जेल में उसकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने ट्रांसपोर्ट का पुराना काम छोड़ दिया और डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। पहले उसने दूसरे तस्करों के साथ मिलकर काम किया और फिर धीरे-धीरे अपना अलग नेटवर्क तैयार कर लिया। पुलिस का कहना है कि उसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के तस्करों से संपर्क बढ़ाए और अवैध मादक पदार्थों की खरीद, परिवहन और सप्लाई का काम शुरू कर दिया। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बनाया सप्लाई नेटवर्क जांच में सामने आया है कि आरोपी मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से डोडा-पोस्त की खेप मंगवाकर राजस्थान के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करता था। इस पूरे काम में उसके साथ कई अन्य तस्कर भी जुड़े हुए थे, जो माल की ढुलाई और वितरण में मदद करते थे। पुलिस के अनुसार इस अवैध कारोबार से आरोपी ने लाखों रुपए कमाए। इसी दौरान उसके खिलाफ नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज हुआ। पुलिस कार्रवाई तेज होने के बाद वह फरार हो गया और लगातार ठिकाने बदलता रहा। पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किशनलाल की गिरफ्तारी सिर्फ एक फरार आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं है। अब जांच एजेंसियों का फोकस उसके पूरे नेटवर्क पर है। उससे यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था, डोडा-पोस्त की खेप कहां से आती थी, किन रास्तों से राजस्थान पहुंचाई जाती थी और किन जिलों में इसकी सप्लाई होती थी।

मनियां सीएचसी पर 134 गर्भवती महिलाओं की जांच:पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत लगा शिविर, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की स्क्रीनिंग

धौलपुर जिले के मनियां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में कुल 134 गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई, जिसमें दवा वितरण और हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) की स्क्रीनिंग भी शामिल थी। मरीजों को पौष्टिक आहार भी वितरित किया गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. आर. के. यादव ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसी लक्ष्य के साथ शिविर में सामान्य प्रसव पूर्व जांचों के अलावा जटिल गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग की गई, ताकि समय पर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। शिविर के दौरान कुल 134 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की गई। इनमें से 54 महिलाओं को ‘मां वाउचर’ योजना का लाभ प्रदान किया गया, जबकि 37 महिलाओं की हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) के लिए स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिविर में पोषण जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अस्पताल स्टाफ और स्थानीय समाजसेवियों ने मिलकर गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को फल, दूध और बिस्किट वितरित किए। इस दौरान उन्हें संतुलित आहार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इस शिविर को सफल बनाने में चिकित्सा प्रभारी डॉ. आर. के. यादव, डॉ. विनीत गर्ग, डॉ. मयंक मित्तल, नर्सिंग ऑफिसर रामावतार कुशवाह, नीरज कुमारी सहित सीएचसी के समस्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

सोलर पैनल होंगे सस्ते:प्रति किलोवाट 12 हजार रुपए तक कम होगी रेट, जानें- सरकार ने क्यों लिया फैसला

सोलर लगवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर हैं। केंद्र सरकार ने डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता लागू करने के आदेश को 6 महीने के लिए वापस ले लिया है। इससे प्रति किलोवाट लागत 12 हजार रुपए तक कम हो जाएगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को एक नया आदेश जारी किया है। इसके तहत अब 31 दिसंबर 2026 तक नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस प्रोजेक्ट्स को नॉन-डीसीआर (Non-DCR) मॉड्यूल के जरिए भी कमीशन (चालू) करने की अनुमति दे दी गई है। सरकार के इस फैसले से अब अगले छह महीनों तक कंपनियां और उपभोक्ता अपने पुराने स्टॉक में रखे मॉड्यूल का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे अटके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे सकेंगे। देशभर में अटक गए थे हजारों प्रोजेक्ट्स सरकार ने 1 जून से यह नियम लागू किया था कि बिना ALMM (अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स) वाले सोलर मॉड्यूल से बने प्रोजेक्ट्स को ग्रिड कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। इसके कारण देशभर में हजारों रूफटॉप और ओपन एक्सेस सोलर प्रोजेक्ट्स का काम बीच में ही अटक गया था, जिससे उपभोक्ताओं और वेंडर्स दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
3 किलोवाट का सोलर सिस्टम 40 हजार रुपए तक हुआ था महंगा डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता लागू होने के बाद बाजार में इनकी भारी किल्लत हो गई थी, जिससे कीमतें बढ़ गई थीं। पहले जहां नॉन-डीसीआर मॉड्यूल 15 से 16 रुपए प्रति वाट की दर से मिल रहे थे, वहीं डीसीआर मॉड्यूल के दाम बढ़कर सीधे 30 से 32 रुपए प्रति वॉट तक पहुंच गए थे। इसका सीधा असर ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के लाभार्थियों पर पड़ा। इसके चलते 3 किलोवॉट का घरेलू रूफटॉप सोलर सिस्टम 35 से 40 हजार रुपए तक महंगा हो गया, यानी प्रति किलोवाट लागत में करीब 12 हजार रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस खर्च के कारण कई उपभोक्ताओं ने अपने नए प्रोजेक्ट टाल दिए और वेंडर्स के पुराने ऑर्डर भी बीच में ही अटक गए। घरों पर ढांचे तैयार, पर पैनल गायब राजस्थान में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 2200 से ज्यादा वेंडर्स पंजीकृत हैं, जिनमें से करीब 800 वेंडर्स अकेले जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में कार्यरत हैं। डीसीआर मॉड्यूल की कमी के कारण प्रदेश में हजारों घरेलू और कमर्शियल सोलर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए। स्थिति यह हो गई थी कि कई घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए लोहे के स्ट्रक्चर (ढांचे) तो तैयार हो गए, लेकिन मॉड्यूल की सप्लाई न होने से पैनल नहीं लग पाए। वेंडर्स का कहना है कि सप्लाई रुकने से ग्राहकों के साथ उनके विवाद बढ़ने लगे, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में भी हजारों मेगावाट के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट अधर में लटक गए। लंबे समय के लिए चाहिए स्थायी समाधान राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने इंडस्ट्री की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए छह महीने की जो राहत दी है, उससे पहले से रुके हुए कई सोलर प्रोजेक्ट्स अब पूरे हो सकेंगे। इससे वेंडर्स और उपभोक्ताओं दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में अभी भी सोलर सेल का घरेलू उत्पादन मांग के अनुरूप बहुत कम है। इसलिए, सोलर इंडस्ट्री को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को लंबे समय के लिए कोई व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।

झालावाड़ में 1 घंटे चला 'आदर्श ट्रैफिक जोन':नियम तोड़ने वालों पर पुलिस ने की सख्त कार्रवाई, एक बाइक जब्त

झालावाड़ शहर में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शनिवार शाम को पुलिस ने ‘आदर्श ट्रैफिक जोन’ अभियान चलाया। मामा-भांजा सर्किल से मूर्ति तिराहे तक एक घंटे चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन ड्राइवरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। अभियान में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, तेज गति से वाहन चलाने, मोबाइल पर बात करने और सीट बेल्ट नहीं लगाने सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के चालान काटे गए। इस कार्रवाई से कई वाहन ड्राइवरों में हड़कंप मच गया और कुछ लोग पुलिस से बचने के लिए रास्ता बदलते भी दिखे। ट्रैफिक एएसआई आशीष ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में शनिवार शाम 5 से 6 बजे तक एक घंटे का यह विशेष ‘आदर्श ट्रैफिक जोन’ अभियान चलाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान एक बाइक सवार के पास ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन की आरसी नहीं मिलने पर उसकी बाइक जब्त कर ली गई। पुलिस ने आमजन से अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करने और हेलमेट का उपयोग करने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के दौरान ट्रैफिक एसआई हरीश कुमार, एएसआई कुंदन, राधेश्याम मालव, भीम सिंह सहित कई ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद थे।

उदयपुर में रक्तदान शिविर सहित कई सेवा कार्य होंगे:प्रो. विजय श्रीमाली की पुण्यतिथि पर 21 जुलाई को होंगे सेवा कार्य, पोस्टर का विमोचन

शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली की आठवीं पुण्यतिथि पर 21 जुलाई को प्रोफेसर विजय श्रीमाली फाउंडेशन की ओर से रक्तदान, पौधारोपण और भोजन सेवा सहित विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शनिवार को टाइगर हिल स्थित संस्कार भवन में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के पोस्टर का विमोचन किया गया। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों से इस सेवा अभियान में भागीदारी की अपील की गई। रक्तदान शिविर में जुड़ने का किया आह्वान फाउंडेशन के जतिन श्रीमाली ने बताया कि पुण्यतिथि के अवसर पर कार्यक्रमों की शुरुआत 21 जुलाई को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक संस्कार भवन, टाइगर हिल में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर से होगी। इसके बाद बड़गांव स्थित नटराज किड्स प्लेनेट में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं शाम को महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए भोजन सेवा का आयोजन कर प्रो. श्रीमाली को पुष्पांजलि दी जाएगी। पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में फाउंडेशन के जतिन श्रीमाली, ओमशंकर श्रीमाली, डॉ. देवेंद्र श्रीमाली, गणेश श्रीमाली, जमनालाल ओझा, भूपेंद्र श्रीमाली, ललित त्रिवेदी, भावप्रकाश दशोत्तर, दिनेश श्रीमाली, निशांत श्रीमाली सहित कई सदस्य मौजूद रहे। सभी ने आमजन से रक्तदान शिविर में भाग लेकर मानव सेवा के इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। फाउंडेशन पदाधिकारियों ने बताया कि प्रो. विजय श्रीमाली का जीवन शिक्षा, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सेवा कार्य समाज में परोपकार, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन खत्म:सोमवार से काम पर लौटेंगी, 6 मांगों पर बनी लिखित सहमति

राजस्थान के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जयपुर निदेशालय में शासन सचिव के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। शासन सचिव और प्रतिनिधिमंडल के बीच लिखित समझौता होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है। सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सोमवार से अपने काम पर लौटेंगी। बैठक में अलवर जिला अध्यक्ष लतेश कुमारी और तहसील महामंत्री आशा शर्मा सहित प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य शामिल हुए। लतेश कुमारी ने कहा- लंबे संघर्ष के बाद प्रशासन के साथ लिखित समझौता हुआ है। हमारी लगभग सभी जायज मांगें मान ली गई हैं। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही हम अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा करते हैं। सोमवार से सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ अपना कार्यभार संभाल लेंगे।

धर्मांतरण कराने राजस्थान से बाहर भेजे जा रहे थे बच्चे:गिरोह ने फ्री पढ़ाई का लालच दिया; गोवा में रेलवे पुलिस ने 7 बच्चों को छुड़ाया

फ्री शिक्षा के बहाने गरीब और आदिवासी बच्चों का धर्मांतरण कराने के लिए राजस्थान से बाहर ले जाने का मामला सामने आया है। गिरोह इन बच्चों को बस से अहमदाबाद और फिर ट्रेन से गोवा लेकर पहुंचा था। गिरोह गोवा से बच्चों को तमिलनाडु ले जाने वाला था, लेकिन उससे पहले ही रेलवे पुलिस ने छुड़ा लिया। गिरोह से छुड़ाए गए बच्चों में 2 लड़कियां और 5 लड़के शामिल हैं, जिनकी उम्र 7 से 12 साल के बीच है। गोवा की बाल कल्याण समिति की सूचना पर उदयपुर से पुलिस और बाल कल्याण समिति की टीम गोवा पहुंची और शनिवार को सभी बच्चों को उदयपुर लेकर आई। धर्मांतरण के मामले को लेकर उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। सांसद ने मामले की एनआईए, सीबीआई और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से जांच की मांग की है। झाड़ोल तहसील के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं बच्चे गिरोह से छुड़ाए गए सभी बच्चे उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। बच्चों ने पूछताछ में बताया कि वे झाड़ोल में भी चर्च जाया करते थे। 15 जुलाई को गिरोह के सदस्य बच्चों को बस से अहमदाबाद और फिर ट्रेन से गोवा लेकर पहुंचे थे। गोवा में एक साथ इतने बच्चों को देखकर किसी ने रेलवे पुलिस को सूचना दे दी थी। इस पर रेलवे पुलिस ने बच्चों को रेस्क्यू कर लिया। पूछताछ में बच्चों ने झाड़ोल के गांवों की जानकारी दी तो गोवा की बाल कल्याण समिति ने उदयपुर पुलिस और बाल कल्याण समिति को सूचना दी। कई बच्चों को पहले भी तमिलनाडु भेज चुका गिरोह जांच में सामने आया कि गिरोह पहले भी उदयपुर संभाग से कई बच्चों को तमिलनाडु भेजा जा चुका है। इनमें से 15 बच्चों की जानकारी तो साफ तौर पर मिल चुकी है। उदयपुर लाए जाने के बाद अब इन बच्चों, उनके माता-पिता और ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है। बाल कल्याण समिति और पुलिस की जांच के बाद ही बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा जाएगा। मामले की जानकारी मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री सुंदर कटारिया और उनकी टीम भी बाल कल्याण समिति पहुंची। पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर उच्च अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सांसद ने सीबीआई जांच की मांग की मामले को लेकर उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को लेटर लिखा है। सांसद ने लिखा- इस पूरे खेल के पीछे कथित ईसाई मिशनरियों और एक बड़े नेटवर्क का हाथ सामने आ रहा है। उन्होंने मामले की गंभीरता, बहुस्तरीय साजिश और डिजिटल लेन-देन की आशंका को देखते हुए इसकी जांच के लिए एसआईटी के गठन की मांग की है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हो सके। फ्री पढ़ाई का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेजता है गिरोह सांसद डॉ. रावत ने बताया- उदयपुर संभाग के कानुवाड़ा, बिछीवाड़ा और कलिंजरा जैसे इलाकों में ऐसे 15 से ज्यादा मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों के जागरूक होने और विरोध बढ़ने के बाद इस गिरोह ने अपना तरीका बदल लिया है। अब ये बच्चों को बहला-फुसलाकर और फ्री पढ़ाई का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं, ताकि वहां चुपचाप उनका धर्मांतरण किया जा सके और उन्हें अपनी मूल संस्कृति से अलग किया जा सके।

लोगों ने जाने अपनी समस्याओं के हल:वैश्य महिला संस्था और मानसी क्लब की दो दिवसीय एक्जिबीशन का समापन

वैश्य महिला संस्था और मानसी क्लब की ओर से शनिवार को सेंट्रल पार्क के सामने स्थित बैंक्विट हॉल में एक्जिबीशन आयोजित की गई। एक्जिबीशन में आने वालों को ज्योतिषाचार्य बबीता आसावा और डॉ. सारिका औदिच्य ने ज्योतिष संबंधी सवालों के जवाब दिए। इस अवसर पर लोगों ने हस्तरेखा, प्रश्न कुंडली, रेकी, टेरोकार्ड आदि विधा से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उपाय जाने। दो दिवसीय एक्जिबीशन में कई तरह के स्टॉल्स लगाए गए।

रिश्तेदारों ने युवक का नाक और कान काटे:लाठियों से पीट-पीटकर हाथ-पैर तोड़े; आवाज सुनकर पड़ोसी आए तो भाग निकले हमलावर

जैसलमेर में पुरानी रंजिश को लेकर रिश्तेदारों ने चाकू से युवक का नाक और कान काट दिए। इसके बाद लाठियों से पीट-पीटकर एक हाथ और एक पैर तोड़ डाला। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो सभी हमलावर वहां से भाग चुके थे। युवक लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ा था। उसको गंभीर हालत में नाचना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया। मामला नाचना थाना इलाके के पांचे का तला गांव का है। आरोपी फरार, पुलिस जांच में जुटी थानाधिकारी सुमेर दान ने बताया- दायम खां पुत्र मोहम्मद खान निवासी पांचे का तला, सरहद चक 5 केआरएम पर शनिवार को उसी के रिश्तेदारों ने हमला कर दिया। युवक को गंभीर हालत में नाचना सीएचसी लाया गया था। यहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजनों ने 3 नामजद समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दी है। इसमें अजीज खां, नजीर खां, पिसरान, बक्सु खान अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। घटना के बाद से आरोपी फरार है। इनकी तलाश की जा रही है। चाकू से नाक और कान काटे परिजनों ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि दायम खां अपने खेत पर काम कर रहा था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और पारिवारिक विवाद को लेकर अजीज खां, नजीर खां पिसरान और बक्सु खान लाठियां और चाकू लेकर आए। उनके साथ अन्य लोग भी थे। इन लोगों ने दायम खां को पकड़ लिया और मारपीट करने लगे। आरोपियों ने चाकू से दायम का नाक और कान काट डाले। इसके बाद लाठियों से पीट-पीटकर कर एक हाथ और एक पैर तोड़ डाला। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन हमलावर फरार हो गए। ये खबर भी पढ़ें भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष समेत 9 को उम्रकैद:मूंछों पर ताव देते हुए कोर्ट से निकले दोषी; चुनावी रंजिश में भांजे का किया था मर्डर अलवर में चुनावी रंजिश में हत्या के मामले में कोर्ट ने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह समेत 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद शनिवार को सभी दोषी कोर्ट परिसर से मूंछों पर ताव देते हुए बाहर निकले। (पूरी खबर पढ़ें)