ट्रांसपोर्टर से बना तस्कर, एक साल बाद गिरफ्तार:घर आने की सूचना पर ANTF ने पकड़ा; 10 हजार का इनाम था
मध्यप्रदेश के नीमच जिले में NDPS एक्ट के मामले में पिछले एक साल से फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी आरोपी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने चित्तौड़गढ़ से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान गंगरार थाना क्षेत्र के सुवाणिया गांव निवासी किशनलाल (27) पुत्र भगवानालाल गाडरी के रूप में हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी अपने घर आया हुआ है। इसके बाद एएनटीएफ ने पहले उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और फिर उसके घर पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसकी तलाश मध्यप्रदेश पुलिस लगातार कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में डोडा-पोस्त की तस्करी से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। उसके साथ काम करने वाले अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकता है। नीमच पुलिस ने घोषित कर रखा था इनाम महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया- किशनलाल के खिलाफ मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। कार्रवाई के दौरान वह फरार हो गया था और करीब एक साल तक पुलिस के हाथ नहीं लगा। लगातार फरार रहने के कारण नीमच पुलिस अधीक्षक ने उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। एएनटीएफ को हाल ही में सूचना मिली कि आरोपी अपने गांव स्थित घर आया है। टीम ने सूचना की पुष्टि करने के बाद उसके घर और आसपास निगरानी रखी। सही समय मिलने पर पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पकड़ने के दौरान उसे भागने का कोई मौका नहीं मिला। ट्रांसपोर्ट के काम से शुरू हुआ अपराध का सफर पुलिस जांच के अनुसार- किशनलाल पहले चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट का काम करता था। वह माल लेकर जाने वाले ट्रकों को गुजरात भेजता था। आरोप है कि वहां कुछ दलालों के साथ मिलकर ट्रकों को कटवा देता था और बाद में ट्रक मालिकों को यह कहता था कि ट्रक चोरी हो गया है। शुरुआत में किसी को उस पर शक नहीं हुआ, लेकिन जब कई ट्रकों के साथ एक जैसी घटनाएं होने लगीं तो ट्रक मालिकों ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अलग-अलग ट्रक मालिकों ने उसके खिलाफ ट्रकों की हेराफेरी और खुर्द-बुर्द करने के करीब आठ मामले दर्ज कराए। इन मामलों में कार्रवाई के बाद उसे जेल जाना पड़ा। जेल से बाहर आते ही तस्करी में उतर गया पुलिस के मुताबिक किशनलाल के अपराध की दिशा जेल जाने के बाद बदल गई। जेल में उसकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने ट्रांसपोर्ट का पुराना काम छोड़ दिया और डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। पहले उसने दूसरे तस्करों के साथ मिलकर काम किया और फिर धीरे-धीरे अपना अलग नेटवर्क तैयार कर लिया। पुलिस का कहना है कि उसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के तस्करों से संपर्क बढ़ाए और अवैध मादक पदार्थों की खरीद, परिवहन और सप्लाई का काम शुरू कर दिया। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बनाया सप्लाई नेटवर्क जांच में सामने आया है कि आरोपी मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से डोडा-पोस्त की खेप मंगवाकर राजस्थान के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करता था। इस पूरे काम में उसके साथ कई अन्य तस्कर भी जुड़े हुए थे, जो माल की ढुलाई और वितरण में मदद करते थे। पुलिस के अनुसार इस अवैध कारोबार से आरोपी ने लाखों रुपए कमाए। इसी दौरान उसके खिलाफ नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज हुआ। पुलिस कार्रवाई तेज होने के बाद वह फरार हो गया और लगातार ठिकाने बदलता रहा। पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किशनलाल की गिरफ्तारी सिर्फ एक फरार आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं है। अब जांच एजेंसियों का फोकस उसके पूरे नेटवर्क पर है। उससे यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था, डोडा-पोस्त की खेप कहां से आती थी, किन रास्तों से राजस्थान पहुंचाई जाती थी और किन जिलों में इसकी सप्लाई होती थी।

