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राजस्थान हाईकोर्ट के जजों के लिए नए नियम लागू:रिटायरमेंट या ट्रांसफर पर जज सस्ती दरों में खरीद सकेंगे फर्नीचर-इलेक्ट्रॉनिक सामान; गद्दे, कालीन, पर्दे मुफ्त ले जाने की अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने जजों के लिए पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत जजों को रिटायरमेंट या ट्रांसफर के समय सरकारी फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान तय ‘डेप्रिसिएटेड वैल्यू’ (मूल्यह्रास दर) पर खरीदने का विकल्प दिया गया है। इतना ही नहीं, जजों को साल में एक बार पॉलिशिंग, ड्राई क्लीनिंग और सर्विसिंग की सुविधा भी मिलेगी। साथ ही, जल्द खराब होने वाली सामग्री के लिए उन्हें अब कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इसके लिए राज्य में जजों के आधिकारिक आवास और आवासीय कार्यालयों में उपलब्ध सुख-सुविधाओं, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रखरखाव तथा उनके निपटान को लेकर नए नियम प्रभावी कर दिए गए हैं। पूरा सिस्टम हाईकोर्ट की एक विशेष जजों की समिति की देखरेख में काम करेगा, जिसे समय-समय पर सामान के प्रतिस्थापन और सूची में बदलाव करने का अधिकार होगा। प्रशासनिक आदेश रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा की ओर से जारी किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को रोकना और जजों के सेवानिवृत्त या स्थानांतरित होने के समय पुरानी वस्तुओं को जमा कराने तथा उनके रखरखाव से जुड़ी प्रशासनिक असुविधाओं को समाप्त करना है। क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत? आमतौर पर जब कोई जज सेवानिवृत्त होता था या ट्रांसफर होता था, तब उसके आवास का सारा सामान सरकारी स्टोर में जमा करा दिया जाता था। लंबे समय तक स्टोर में बंद रहने के कारण ये सामग्रियां बेकार हो जाती थीं। इसके अलावा, नए नियुक्त होने वाले जज भी इन पुराने इस्तेमाल किए गए सामानों को लेने से कतराते थे। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। दरअसल, कुछ वर्ष पहले मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में यह विचार रखा गया था कि सेवानिवृत्त होने वाले जजों को उनके उपयोग में आने वाले फर्नीचर और अन्य सामान को बुक वैल्यू पर खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। वरिष्ठता के आधार पर खरीद का मौका लागत का कम से कम 15% दाम
नियमों के तहत जिन सामग्रियों पर स्टार मार्क लगा है (जैसे गद्दे, कालीन, पर्दे, बेडशीट, क्रॉकरी, वैक्यूम क्लीनर आदि), उन्हें पेरिशेबल (जल्दी खराब होने वाली) वस्तुएं माना गया है। जजों को सेवानिवृत्ति या ट्रांसफर के समय ये सामान बिना किसी भुगतान के अपने साथ ले जाने की अनुमति होगी। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में सामान की न्यूनतम कीमत उसकी मूल खरीद लागत के 15% से कम नहीं आंकी जाएगी। शेष | पेज 7 सामग्रियों का वर्गीकरण और लाइफ स्पैन टिकाऊ फर्नीचर: डाइनिंग टेबल, सोफा सेट, बेड, अलमारी, ड्रेसिंग टेबल, राइटिंग टेबल आदि का जीवनकाल 4 वर्ष तय किया गया है। वहीं, गैर-टिकाऊ फर्नीचर जैसे गद्दे, कालीन, पर्दे, सूटकेस तथा प्लास्टिक/केन का फर्नीचर का जीवनकाल 2 से 4 वर्ष रखा गया है। डोरमैट, डस्टबिन और तौलिये आदि का जीवनकाल 1 से 2 वर्ष तय किया गया है। टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एसी, फ्रिज, पंखे और डीप फ्रीजर का जीवनकाल 6 वर्ष तय किया गया है। टीवी, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, कंप्यूटर, लैपटॉप, गीजर तथा इन्वर्टर-बैटरी की लाइफ 5 वर्ष रखी गई है। मिक्सर-ग्राइंडर, वाटर प्यूरीफायर और इंडक्शन का जीवनकाल 3 वर्ष होगा। वहीं, गैर-टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे रूम हीटर, इंसेक्ट किलर, टेबल लैंप और हेयर ड्रायर आदि की लाइफ 1 से 2 वर्ष निर्धारित की गई है।

वर्षों पुराना सहखातेदारी भूमि विवाद सहमति से हुआ समाप्त

ग्रामीण सेवा शिविरों के तहत ग्राम पंचायत भूरी पहाड़ी में शिविर में वर्षों से लंबित एक महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को राहत दी गई। शिविर में परिवादी रूगनाथ पुत्र बजरंगा मीना एवं हरि पुत्र बजरंगा मीना के मध्य सहखातेदारी कृषि भूमि के विभाजन का मामला प्रस्तुत किया गया। यह विवाद लंबे समय से लंबित था, जिससे दोनों पक्षों को राजस्व अभिलेखों एवं भूमि उपयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में उपस्थित खण्डार उपखण्ड के नायब तहसीलदार पुष्कर सिंह ने दोनों पक्षों की सहमति से प्रकरण का त्वरित परीक्षण कर सहखातेदारी भूमि के विभाजन की कार्रवाई मौके पर ही पूर्ण की गई। संबंधित खाता संख्या 352, कुल रकबा 22.16 बीघा भूमि का विधिवत बंटवारा कर आदेश की प्रति दोनों पक्षों को शिविर में ही उपलब्ध करा दी गई। इस त्वरित कार्रवाई से वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ तथा दोनों पक्षों ने राज्य सरकार की ग्रामीण सेवा शिविर पहल की सराहना करते हुए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिविरों के माध्यम से आमजन की समस्याओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी समाधान संभव हो रहा है।

बुरे काम का बुरा नतीजा:घूसखोर कम्प्यूटर ऑपरेटर को ज्योतिष ने कहा- संकट आने वाला है सोना-चांदी-तांबे की अंगूठी पहनी, रिश्वत के ट्रैप से नहीं बच सका

चार महीने पहले ज्योतिषी ने चेताया था ‘संकट आने वाला है।’ बचने का उपाय पूछा तो सोना-चांदी और तांबे की अंगूठी पहनने की सलाह मिली। नगर निगम के कम्प्यूटर ऑपरेटर राकेश कुमार चौधरी ने तीनों अंगूठियां पहन भी लीं, लेकिन रिश्वत का खेल नहीं छोड़ा। नतीजा, मैरिज सर्टिफिकेट बनाने की एवज में 12,500 रुपए की रिश्वत लेते एसीबी ने उसे और जन्म-मृत्यु-विवाह पंजीयन रजिस्ट्रार विक्रम सिंह बारेठ को ट्रैप कर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में राकेश ने कबूल किया कि वह हर मैरिज सर्टिफिकेट के बदले शादी कराने वाले पुरोहितों से दो से तीन हजार रुपए लेता था। एक दिन में पांच से छह शादियों के सर्टिफिकेट जारी होते थे। एसीबी को राकेश के मोबाइल में पंजीयन अधिकारी विक्रम सिंह से लेन-देन की चैट भी मिली है। साहब, गरीब लोग शादी करवाने आते हैं… रकम कम करवा दीजिए ट्रैप कार्रवाई से पहले पुरोहित रजिस्ट्रार विक्रम सिंह से मिला। उसने कहा कि मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर ली जा रही रिश्वत बहुत ज्यादा है। नीचे कर्मचारी पहले ही पैसे ले लेते हैं। गरीब लोग शादी करवाने आते हैं, वे इतनी राशि देने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए रकम कम करवा दीजिए। इस पर रजिस्ट्रार ने पूछा कि उसकी बात किससे होती है। पुरोहित ने राकेश कुमार का नाम बताया। रजिस्ट्रार ने भरोसा दिलाया कि शाम तक राकेश का फोन आ जाएगा और राशि इतनी कम कर दी जाएगी कि दोबारा कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शाम को राकेश का फोन आया। उसने कहा कि अब तक जारी हुए सभी सर्टिफिकेट के ढाई-ढाई हजार रुपए प्रति सर्टिफिकेट देने होंगे। आगे से प्रति सर्टिफिकेट एक हजार रुपए देने होंगे। रजिस्ट्रार ने चैट डिलीट की, राकेश के मोबाइल ने पूरा राज खोल दिया जांच के दौरान पंजीयन रजिस्ट्रार एवं सांख्यिकी अधिकारी विक्रम सिंह ने अपने मोबाइल से राकेश के साथ हुई लेन-देन की पूरी चैट डिलीट कर दी थी, लेकिन एसीबी ने जब राकेश के दो मोबाइल खंगाले तो विक्रम सिंह के साथ लेन-देन का ब्योरा मिल गया। रिश्वत की राशि फोन-पे और पेटीएम से ली जाती थी। भुगतान के स्क्रीन शॉट वाट्सएप पर साझा किए जाते थे। पूछताछ में विक्रम सिंह ने पहले कहा कि राकेश उनके यहां कर्मचारी ही नहीं है और करीब डेढ़ महीने पहले नौकरी छोड़ चुका है, लेकिन राकेश के मोबाइल से मिले रिकॉर्ड ने इस दावे की पोल खोल दी। इसके बाद एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने 7 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

मामोनी में मोबाइल नेटवर्क ठप, 10 डायल पर लगती है एक कॉल

कस्बे सहित आसपास के खांडा सहरोल, बिची, मोहनपुर गांवों के ग्रामीण कई महीनों से मोबाइल नेटवर्क की समस्या झेल रहे हैं। कॉल ड्रॉप हो रहे हैं। इंटरनेट बंद रहता है। इमरजेंसी में भी संपर्क नहीं हो पा रहा। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि 5जी, 4जी के नाम पर 2जी भी नहीं चल रहा। ग्रामीणों के मुताबिक 10 बार डायल करने पर 1 बार कॉल कनेक्ट होती है। कॉल बीच में कट जाती है। इंटरनेट ठप होने से ऑनलाइन क्लास रुक गई है। यूपीआई पेमेंट नहीं हो रहे। आधार अपडेट का काम भी अटका है। गांव से 1 किमी दूर टॉवर है, जिसके चलते घर के अंदर नेटवर्क नहीं आता। हल्की बारिश में सभी कंपनियों के सिग्नल गायब हो जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत छात्रों को हो रही है। ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे। क्लास मिस हो रही है। किसानों को मंडी भाव देखने में परेशानी है। पीएम किसान, ई-केवाईसी नहीं कर पा रहे। महिलाएं 108, 100 जैसी इमरजेंसी सेवाओं पर कॉल नहीं कर पा रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट ठप होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है।

सरकार से प्रस्ताव रद्द, पर कब्जा बरकरार:20 बीघा चारागाह में भाजपा विधायक बैरवा और बेटे गौशाला चला रहे, इसमें 1 भी गाय नहीं

शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा ने हाइवे किनारे गौशाला दिखाकर 20 बीघा चारागाह को कब्जे में ले लिया है। जमीन के चारों ओर तारबंदी कर निर्माण किया गया है। बिजली कनेक्शन भी है। जहां गौशाला दिखाई गई, वहां भास्कर रिपोर्टर पहुंचा तो एक भी गाय नहीं दिखी। अफसरों ने शाहपुरा तहसील के आराजी नंबर 2543, रकबा 78.68 हेक्टेयर चारागाह में से 5 हेक्टेयर जमीन आवंटन का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि तीन साल गौशाला संचालन का नियम होने से राजस्व विभाग से प्रस्ताव खारिज हो गया, लेकिन मौके पर कब्जा बरकरार है। जिस देव गौशाला सेवा संस्थान के नाम से जमीन आवंटन का प्रस्ताव है, उसमें विधायक लालाराम बैरवा सचिव हैं। छोटा बेटा चिनार देवतवाल अध्यक्ष है। बड़ा बेटा जतिन देवतवाल कोषाध्यक्ष है। विधायक का निजी सहायक हुकमचंद कुमावत उपाध्यक्ष है। दिशांक गर्ग और राहुल बोहरा को सदस्य बनाया है। संस्था में सभी को समाजसेवी दिखा रखा है। फाइल चलने की रफ्तार भी देखिए। देव गौशाला सेवा संस्थान शाहपुरा को सहकारिता विभाग ने 21 अगस्त 2025 को रजिस्टर्ड किया। इसके चार माह में फाइल तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के पास होते हुए राजस्व विभाग तक पहुंच गई। आमलीकला का प्रस्ताव भेजा, चलती फाइल में जमीन बदली शाहपुरा तहसीलदार ने 11 सितंबर 2025 को एसडीओ को देव गौशाला सेवा संस्थान को आमलीकला में आराजी नंबर 485, 3734/473 के रकबा 1.4720, 6.05 में किस्म बारानी में दो हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की। यह जमीन बिलानाम दर्ज है। इसे एसडीएम शाहपुरा ने 15 सितंबर 2025 को कलेक्टर को भेजा। पटवारी व गिरदावर ने भी इसी जमीन का प्रस्ताव भेजा। यह फाइल जमीन आवंटन के लिए चल ही रही थी। इसी फाइल में अचानक एक लेटर जोड़ दिया गया। शेष | इसमें जमीन को बदलकर माताजी का खेड़ा के पास चंबल चौराहे के आगे बता दिया गया। यह जमीन शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे के पास है। मौके पर बिजली का अस्थायी कनेक्शन है, जो विधायक के बेटे चिनार के नाम से है। कनेक्शन के ही एक विवाद में बिजली विभाग के एक एक्सईएन को भी एपीओ किया गया। राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीणा के अनुसार, गौशाला राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 और राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1960 के अधीन रजिस्ट्रीकृत होने तथा गौशाला का तीन वर्ष से संचालित होना आवश्यक है। यह शर्तें पूरी नहीं होने से आवंटन खारिज कर दिया गया। चारागाह में आवंटन हो सकता है, इसमें छूट आई थी। यह विशेष प्रकरण था, इसलिए हमने प्रस्ताव बनाकर भेजा। सरकार को जो सही लगा, वह किया।
भीमराज परिहार, तहसीलदार गायें दूसरी जगह शिफ्ट कर रखी हैं : विधायक गौशाला आवंटन का प्रस्ताव आपने भिजवाया है, पर मौके पर एक भी गाय नहीं है?
हां, प्रक्रिया चल रही है। तैयारी हवा में थोड़े होगी, मौके पर कुछ तो करना ही पड़ेगा। गायें दूसरी जगह हैं। ट्रस्ट में बेटा अध्यक्ष, दूसरा कोषाध्यक्ष और आप सचिव हैं?
कमेटी तो बदलती रहती है। हम गलत काम नहीं कर रहे हैं। बेटा गौसेवा में रुचि रखता है। दुर्गापुरा गौशाला, जयपुर में भी जुड़ा है। पत्नी भी जयपुर में गौशाला से जुड़ी है। मैं संघ में गौसेवा का दायित्व देखता हूं। हमारा मकसद यही है कि प्रभावी व्यक्ति होते हैं तो काम जल्दी सफल हो जाता है। पहले आमलीकला का प्रस्ताव भेजा था, अब बदल गया?
सरकार ने चारागाह में गौशाला की छूट दी थी। इसमें तीन साल का नियम है। फिलहाल आवंटन नहीं हो पाया। हमने सभी जगह इसका रजिस्ट्रेशन कराया है। कौन-सा प्रकरण है, मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है। मौका देखना पड़ेगा। एक प्रस्ताव भेजा था। कलेक्टर के यहां से क्या हुआ, मुझे पता नहीं है।
सुनील मीणा, एसडीएम शाहपुरा

आदेश 3 माह का, आवंटन एक माह का, राशन दुकानों पर रोज बढ़ रही तकरार

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत जुलाई में ही अगस्त और सितंबर का गेहूं भी वितरित करने के मुख्यालय के आदेश ने जिले की राशन व्यवस्था को असमंजस में डाल दिया है। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के 58,463 राशन कार्डों से जुड़े 2 लाख 34 हजार 288 लाभार्थी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने 2 जुलाई को आदेश जारी कर अगस्त और सितंबर के लिए आवंटित गेहूं का वितरण जुलाई के वितरण के साथ-साथ करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पोस मशीन और ऑनलाइन पोर्टल पर भी आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जिले की अधिकांश उचित मूल्य दुकानों को अभी तक केवल जुलाई का ही गेहूं आवंटित हुआ है। दूसरी ओर पोस मशीन में अगस्त व सितंबर का वितरण करने का विकल्प भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में लाभार्थी तीन माह का राशन लेने दुकानों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन दुकानदारों के पास अतिरिक्त स्टॉक नहीं होने से उन्हें सिर्फ जुलाई का गेहूं ही दिया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि रोजाना राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं और डीलरों के बीच बहस और नोकझोंक हो रही है। विभाग ने 2 जुलाई को जारी आदेश में पहले जारी किए गए 11 जून के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अगस्त और सितंबर के लिए आवंटित गेहूं का वितरण जुलाई के साथ ही किया जाए, ताकि समय पर उठाव और वितरण पूरा हो सके। आदेश में सभी जिलों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने और पोस मशीन में आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। मशीन में विकल्प, लेकिन गोदाम खाली : राशन डीलरों का कहना है कि विभाग ने तकनीकी व्यवस्था तो पहले ही कर दी। पोस मशीन में अगस्त और सितंबर का विकल्प खुल गया है, लेकिन गोदाम से केवल जुलाई का गेहूं ही मिला है। ऐसे में मशीन में विकल्प दिखाई देने के बावजूद वितरण संभव नहीं है। डीलरों के अनुसार, जैसे ही उपभोक्ता अंगूठा लगाते हैं, मशीन में तीनों माह का विकल्प दिखाई देता है। इससे लाभार्थियों को लगता है कि तीन माह का राशन उपलब्ध है। जब दुकानदार उन्हें बताते हैं कि अतिरिक्त स्टॉक नहीं आया है तो कई लोग इसे बहाना समझते हैं और विवाद की स्थिति बन जाती है। उचित मूल्य दुकान संचालकों का कहना है कि विभाग के आदेश का पालन करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना आवंटन के तीन माह का वितरण कैसे किया जाए। उनका कहना है कि यदि गोदाम से जुलाई, अगस्त और सितंबर तीनों माह का स्टॉक एक साथ मिलता तो उसी दिन से तीन माह का गेहूं वितरित कर दिया जाता। फिलहाल उनके पास केवल जुलाई का स्टॉक है। डीलरों का कहना है कि अतिरिक्त आवंटन कब मिलेगा, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। लाभार्थी रोज सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन दुकानदारों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। शहरी क्षेत्र में 20,708 राशन कार्ड व 88,333 लाभार्थी। ग्रामीण क्षेत्र 37 हजार 755 राशन कार्ड, 1 लाख 45 हजार 955 लाभार्थी। कुल राशन कार्ड 58 हजार 463, कुल लाभार्थी 2 लाख 34 हजार 288 है। वहीं जुलाई माह गेहूं आवंटन शहरी क्षेत्र के लिए 4 लाख 39 हजार 950 किलोग्राम व ग्रामीण क्षेत्र के लिए 7 लाख 34 हजार 550 किलोग्राम सहित कुल आवंटन 11,74,500 किलोग्राम (11.74 लाख किलो) हुआ है।

पुलिस का वन-टू का फोर:बदमाशों को खोजने निकली पुलिस नंबर बढ़ाने की होड़ में अपार्टमेंट से स्टूडेंट्स, बुजुर्ग व युवतियों को उठा लाई

संदिग्धों की निगरानी और चेकिंग के लिए चलाया गया एरिया डोमिनेशन अभियान बुधवार को खोह नागोरियान इलाके में पुलिस के डिटेंशन में बदल गया। बदमाशों और ड्रग्स माफिया से कनेक्शन खंगालने के लिए शुरू हुए अभियान में पुलिस एक ही अपार्टमेंट पर टूट पड़ी। यहां से 100 से ज्यादा लोगों को सुबह-सुबह फ्लैटों से उठाकर बसों में भरकर थाने ले आई। इनमें मेडिकल स्टूडेंट्स, बुजुर्ग और 3 युवतियां भी शामिल थीं। थाने पहुंचने के बाद अप्रोच का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ लोगों को परिचितों और जानकारों के पहुंचने पर छोड़ दिया गया। बचे 94 लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। शाम होते-होते सभी की जमानत हो गई, लेकिन कई छात्र और किराएदार 12 घंटे तक थाने में भूखे-प्यासे बैठे रहे। जमानत के लिए वकीलों की फीस भी देनी पड़ी। स्टूडेंट बोला- दोस्त के यहां रुका था, उठा ले गए खोह नागोरियान में संचालित मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक छात्र ने बताया उसका क्लासमेट गिरनार अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहता है। मंगलवार शाम मिलने बुलाया था। रात को खाना खाने के बाद वहीं रुक गया। फ्लैट में 4 दोस्त सो रहे थे। बुधवार सुबह 6 बजे पुलिसकर्मियों ने सभी के नाम पूछे और उसी हालत में नीचे ले जाकर बस में बैठा दिया। सभी को थाने ले गए। कारण पूछने पर पुलिसकर्मियों ने धमकाया। सभी से कागजों पर साइन कराए गए और अंगूठे के निशान भी लिए गए। सवाल : सूची संदिग्धों की थी, रेड पूरे अपार्टमेंट पर क्यों? एजीटीएफ ने पुलिस से कुछ संदिग्धों की सूची साझा की थी। कुछ नाम कमिश्नरेट स्तर पर तैयार किए गए थे। सवाल यह है कि पुलिस के पास सूची थी तो बुजुर्गों, युवतियों और छात्रों को क्यों उठाया? पुलिस; गिग वर्कर्स पर हमले और बिना वेरिफिकेशन किराएदारों की जांच की पुलिस का कहना है कि इलाके में गिग वर्कर्स पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही थीं। बिना वेरिफिकेशन रह रहे लोगों की जांच के लिए एरिया डोमिनेशन किया गया। संदिग्ध गतिविधियों और शांति भंग की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। आरोप; वेरिफिकेशन के नाम पर दहशत फैलाई पुलिस ने जांच के नाम पर सामान्य किराएदारों को भी संदिग्धों जैसा व्यवहार झेलने पर मजबूर किया। कई लोगों के किराएनामे होने के बावजूद उन्हें थाने ले जाया गया। उनका कहना है कि पुलिस को दस्तावेज मांगने थे तो सोसायटी या मकान मालिकों से रिकॉर्ड लिया जा सकता था, लेकिन सुबह-सुबह पूरे अपार्टमेंट में दहशत फैला दी गई।

क्षतिग्रस्त पुलिया ने बढ़ाई वाहन चालकों की मुश्किलें

राजपुर| कस्बे के समीप तेलनी गांव से हाड़ौता गांव की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर स्थित नाले की पुलिया लंबे समय से क्षतिग्रस्त हो रही है। इस कारण ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हर साल बारिश में पुलिया पर बड़ा गड्ढा हो जाता है। फिलहाल लोग पुलिया की एक साइड से तो निकल जाते हैं, लेकिन भारी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। जिम्मेदार अधिकारी पुलिया की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं हैं। क्षेत्र के भगवान सिंह मेहता, गजानंद मेहता और कन्हैयालाल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण हादसा होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से पुलिया की मरम्मत कराने की मांग की है।

रेवाड़ी-रींगस की 2 स्पेशल ट्रेनों की बढ़ाई ट्रिप:10 से 14 जुलाई तक अतिरिक्त चक्कर बढ़ाए गए, खाटू श्याम जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत

हरियाणा के रेवाड़ी, नारनौल, अटेली, कुंड और आसपास के क्षेत्रों के रेल यात्रियों के लिए राहतभरी खबर है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और अतिरिक्त यात्री यातायात को देखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने आज से रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी मार्ग पर चलने वाली 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों की संचालन अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे खाटूश्यामजी और रींगस की ओर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। जिसका लाभ दक्षिणी हरियाणा के लोगों विशेषकर गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले को होगा। आज से ये ट्रेन लगाएगी अतिरिक्त फेरे उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि गाड़ी संख्या 09633/09634 रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी स्पेशल रेलसेवा का संचालन आगे भी जारी रहेगा। यह ट्रेन रेवाड़ी से 10 जुलाई और 13 जुलाई 2026 को 2 अतिरिक्त ट्रिप संचालित करेगी। वहीं, रींगस से 11 जुलाई और 14 जुलाई 2026 को 2 अतिरिक्त फेरे लगाए जाएंगे। इस ट्रेन का भी किया गया विस्तार इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09637/09638 रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी स्पेशल रेलसेवा की संचालन अवधि का भी विस्तार किया गया है। यह ट्रेन रेवाड़ी से 10 जुलाई और 13 जुलाई 2026 को2 अतिरिक्त ट्रिप चलाएगी। जबकि रींगस से भी 10 जुलाई और 13 जुलाई 2026 को 2 अतिरिक्त ट्रिप संचालित की जाएंगी। भीड़ को देखते लिया निर्णय रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त फेरे चलाने का उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और त्योहारों व धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए यात्रा को सुगम बनाना है। खाटू श्याम जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत इन ट्रेनों के संचालन से दक्षिण हरियाणा के यात्रियों को रींगस और खाटूश्यामजी की यात्रा के लिए बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन के समय और संचालन की जानकारी रेलवे के अधिकृत माध्यमों से अवश्य प्राप्त कर लें, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

रास्ते के विवाद में युवक पर जानलेवा हमला किया:जयपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा, पिता ने मर्डर का मामला दर्ज करवाया

सीकर के सदर थाना क्षेत्र में रास्ते के विवाद को लेकर आधा दर्जन लोगों ने एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। जयपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान घायल युवक की मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। मृतक के पिता की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। घटना सदर थाना इलाके में गुरुवार सुबह की है। 44 वर्षीय सनाकत अली पर रोशन ठेकेदार, खादिम, तौफीक सहित अन्य लोगों ने अचानक हमला कर दिया। आरोपियों ने खेती में काम आने वाले किसी तीखे औजार (कृषि उपकरण) से सनाकत के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए। इस हमले में सनाकत गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए सीकर के एसके (SK) अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें जयपुर रेफर कर दिया। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में तोड़ा दम जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में इलाज के दौरान सनाकत अली ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद पुलिस की मौजूदगी में जयपुर में ही उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। सनाकत अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। विदेश से नौकरी छोड़कर आए थे विदेश की नौकरी छोड़ गांव में करने लगे थे खेती ग्रामीणों ने बताया कि मृतक सनाकत अली पहले विदेश में नौकरी करते थे। कुछ समय पहले ही वह विदेश की नौकरी छोड़कर अपने वतन वापस लौटे थे और गांव में ही रहकर खेती-बाड़ी का काम करने लगे थे। लेकिन रास्ते के इस खूनी विवाद ने उनके हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।