सरकार से प्रस्ताव रद्द, पर कब्जा बरकरार:20 बीघा चारागाह में भाजपा विधायक बैरवा और बेटे गौशाला चला रहे, इसमें 1 भी गाय नहीं
शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा ने हाइवे किनारे गौशाला दिखाकर 20 बीघा चारागाह को कब्जे में ले लिया है। जमीन के चारों ओर तारबंदी कर निर्माण किया गया है। बिजली कनेक्शन भी है। जहां गौशाला दिखाई गई, वहां भास्कर रिपोर्टर पहुंचा तो एक भी गाय नहीं दिखी। अफसरों ने शाहपुरा तहसील के आराजी नंबर 2543, रकबा 78.68 हेक्टेयर चारागाह में से 5 हेक्टेयर जमीन आवंटन का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि तीन साल गौशाला संचालन का नियम होने से राजस्व विभाग से प्रस्ताव खारिज हो गया, लेकिन मौके पर कब्जा बरकरार है। जिस देव गौशाला सेवा संस्थान के नाम से जमीन आवंटन का प्रस्ताव है, उसमें विधायक लालाराम बैरवा सचिव हैं। छोटा बेटा चिनार देवतवाल अध्यक्ष है। बड़ा बेटा जतिन देवतवाल कोषाध्यक्ष है। विधायक का निजी सहायक हुकमचंद कुमावत उपाध्यक्ष है। दिशांक गर्ग और राहुल बोहरा को सदस्य बनाया है। संस्था में सभी को समाजसेवी दिखा रखा है। फाइल चलने की रफ्तार भी देखिए। देव गौशाला सेवा संस्थान शाहपुरा को सहकारिता विभाग ने 21 अगस्त 2025 को रजिस्टर्ड किया। इसके चार माह में फाइल तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के पास होते हुए राजस्व विभाग तक पहुंच गई। आमलीकला का प्रस्ताव भेजा, चलती फाइल में जमीन बदली शाहपुरा तहसीलदार ने 11 सितंबर 2025 को एसडीओ को देव गौशाला सेवा संस्थान को आमलीकला में आराजी नंबर 485, 3734/473 के रकबा 1.4720, 6.05 में किस्म बारानी में दो हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की। यह जमीन बिलानाम दर्ज है। इसे एसडीएम शाहपुरा ने 15 सितंबर 2025 को कलेक्टर को भेजा। पटवारी व गिरदावर ने भी इसी जमीन का प्रस्ताव भेजा। यह फाइल जमीन आवंटन के लिए चल ही रही थी। इसी फाइल में अचानक एक लेटर जोड़ दिया गया। शेष | इसमें जमीन को बदलकर माताजी का खेड़ा के पास चंबल चौराहे के आगे बता दिया गया। यह जमीन शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे के पास है। मौके पर बिजली का अस्थायी कनेक्शन है, जो विधायक के बेटे चिनार के नाम से है। कनेक्शन के ही एक विवाद में बिजली विभाग के एक एक्सईएन को भी एपीओ किया गया। राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीणा के अनुसार, गौशाला राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 और राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1960 के अधीन रजिस्ट्रीकृत होने तथा गौशाला का तीन वर्ष से संचालित होना आवश्यक है। यह शर्तें पूरी नहीं होने से आवंटन खारिज कर दिया गया। चारागाह में आवंटन हो सकता है, इसमें छूट आई थी। यह विशेष प्रकरण था, इसलिए हमने प्रस्ताव बनाकर भेजा। सरकार को जो सही लगा, वह किया।
भीमराज परिहार, तहसीलदार गायें दूसरी जगह शिफ्ट कर रखी हैं : विधायक गौशाला आवंटन का प्रस्ताव आपने भिजवाया है, पर मौके पर एक भी गाय नहीं है?
हां, प्रक्रिया चल रही है। तैयारी हवा में थोड़े होगी, मौके पर कुछ तो करना ही पड़ेगा। गायें दूसरी जगह हैं। ट्रस्ट में बेटा अध्यक्ष, दूसरा कोषाध्यक्ष और आप सचिव हैं?
कमेटी तो बदलती रहती है। हम गलत काम नहीं कर रहे हैं। बेटा गौसेवा में रुचि रखता है। दुर्गापुरा गौशाला, जयपुर में भी जुड़ा है। पत्नी भी जयपुर में गौशाला से जुड़ी है। मैं संघ में गौसेवा का दायित्व देखता हूं। हमारा मकसद यही है कि प्रभावी व्यक्ति होते हैं तो काम जल्दी सफल हो जाता है। पहले आमलीकला का प्रस्ताव भेजा था, अब बदल गया?
सरकार ने चारागाह में गौशाला की छूट दी थी। इसमें तीन साल का नियम है। फिलहाल आवंटन नहीं हो पाया। हमने सभी जगह इसका रजिस्ट्रेशन कराया है। कौन-सा प्रकरण है, मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है। मौका देखना पड़ेगा। एक प्रस्ताव भेजा था। कलेक्टर के यहां से क्या हुआ, मुझे पता नहीं है।
सुनील मीणा, एसडीएम शाहपुरा

