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वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से आमजन हो रहे हैं परेशान

खरवा में पिछले लंबे समय से मुख्य मार्गों, यहां तक कि बस स्टैंड चौराहे और आसपास, अस्थायी अतिक्रमण है। अव्यवस्थित रूप से सड़क के बीच खड़े दोपहिया और भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से न केवल वाहनों को, बल्कि पैदल आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी परेशानी हो रही है। इन्हीं जगहों पर सड़क किनारे सब्जी बेचने वाली महिलाओं पर भी दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इन्हीं मार्गों से एसडीएम से लेकर राजनीति से जुड़े लोग भी गुजरते हैं, मगर प्रशासन किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहा है। – नरेंद्र पाल पदावत

राजस्थान-पेपरलीक सरगना के पिता को 20 करोड़ का बजरी ठेका:4 साल से फरार है सुरेश ढाका; SOG ने आरोपी के घर, खान पर की छापेमारी

वरिष्ठ अध्यापक और सब इंस्पेक्टर भर्ती सहित पेपर लीक के 10 मामलों में फरार सुरेश ढाका को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) चार साल से तलाश रही है। इस बीच खान विभाग ने ढाका की फरारी के 14 महीने में ही पिता को 20 करोड़ रुपए का बजरी खनन का ठेका दे दिया। ब्यावर में इस ठेके पर दो महीने पहले खनन चालू हुआ और बजरी का बड़ा स्टॉक किया गया है। ढाका के घर दबिश देने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद शर्मा के नेतृत्व में एसओजी की टीम ने गुरुवार को खनन ठेके पर छापामारी की। SOG को खनन में पेपरलीक का पैसा लगा होने का शक एसओजी पड़ताल कर रही है कि खनन में ढाका परिवार के साथ और कौन-कौन शामिल हैं? आशंका है कि पर्दे के पीछे और लोग हो सकते हैं। अब एसओजी जांच कर रही है कि इसमें सुरेश ढाका का पेपर लीक का पैसा तो नहीं लगा है। वहीं, खनन लीज दिए जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के करीब दस गांव विरोध में उतर आए। 2024 में ठेका, दिसंबर 25 में खनन की मंजूरी 1 लाख के इनामी ढाका के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जयपुर में कोचिंग सेंटर के बहाने से पेपर लीक करने वाले सुरेश ढाका का नाम वर्ष 2022 में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती में आया था। उदयपुर में सुखेर और बेकरिया में पेपर लीक गिरोह पकड़े जाने पर भूमिका सामने आई। वह तभी से फरार है। सरकार ने गोपालपुरा बाइपास पर संचालित कोचिंग सेंटर ध्वस्त कर दिया। इसके बाद एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया। ढाका एसआई, जेईएन सहित भर्ती के दस मामले में आरोपी है। एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि एसओजी ने ढाका के खिलाफ 3 जुलाई 2026 को ही एमएचए से लुक आउट सर्कुलर जारी कराया है। कौन है पेपरलीक का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड सुरेश ढाका सांचौर के अचलपुर गांव का रहने वाला सुरेश ढाका सामान्य परिवार से ही था। सुरेश ने आठवीं तक की पढ़ाई गांव के ही स्कूल में की। इसके बाद जालोर में दसवीं और बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई की। उसने बीए की पढ़ाई जोधपुर से की। वहां से उसने कम्प्यूटर साइंस में डिग्री भी ली। यूनिवर्सिटी में सुरेश के साथ पढ़ने वाले दोस्तों ने बताया कि उसके पास कई बार बस में किराया देने के लिए भी रुपए नहीं होते थे। कई बार दोस्त ही उसका किराया भरते थे और खाना खिलाते थे। मनी लॉड्रिंग में पकड़ा गया तो मुंबई से भाग कर आया ढाका के मामा महाराष्ट्र के पुणे में बिजनेस करते थे। मामा के साथ सुरेश भी मुंबई चला गया था। वहां जाकर ट्रेडिंग का बिजनेस शुरू कर दिया। सुरेश विदेशों से हवाला के जरिए रुपए मंगवाकर कंवर्ट करने का काम करता था। मुंबई में मनी लॉड्रिंग की जांच शुरू हुई तो सुरेश का नाम आया। मनी लॉड्रिंग में सुरेश ने काफी रुपए कमा लिए थे। वहां पकड़ा गया तो बाद में मुंबई से 2016 में भाग कर जयपुर आ गया। यूथ कांग्रेस की साइट्स हैक कर चुका 2019 में यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन वोटिंग शुरू हुई थी। सुरेश ने यूथ कांग्रेस की वेबसाइट को हैक कर लिया। इसके बाद सुरेश ने यूथ कांग्रेस के कई नेताओं से संपर्क किया और वोट बढ़ाकर चुनाव जिताने के बदले 1 से 2 लाख रुपए मांगे। हालांकि, वेबसाइट हैक होने का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने चुनाव रोक दिया था। जून में कर ली थी पेपर लीक की प्लानिंग सुरेश ढाका, सुरेश बिश्नोई और भूपेंद्र सारण ग्रेड सेकेंड पेपर लीक के लिए जून 2022 से ही प्लानिंग करने लगे थे। पेपर सॉल्व कराने के लिए टीचर्स और एमबीबीएस डॉक्टर को पकड़ा। इन्हें रुपए का लालच देकर सिर्फ पेपर सॉल्व कराने की डील की गई थी। सूत्रों का कहना है कि 10-10 लाख रुपए एडवांस में ही पेपर सॉल्व करने के लिए दिए गए थे। जीके के पेपर से

बनास नदी से अवैध बजरी परिवहन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त, चालक फरार

बहरावंडा खुर्द | पुलिस ने बनास नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन एवं परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बजरी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की है। कार्रवाई के दौरान चालक पुलिस को देखकर वाहन छोड़कर खेतों की ओर फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि तड़के गश्त के दौरान पादड़ा घाटा की ओर जाते समय एक आइशर 485 ट्रैक्टर-ट्रॉली संदिग्ध अवस्था में दिखाई दी। पुलिस टीम को देखकर चालक ट्रैक्टर को वापस मोड़कर बनास नदी की ओर भागने लगा। पीछा करने पर ट्रैक्टर नदी किनारे कीचड़ में फंस गया, जिसके बाद चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रॉली की जांच की तो उसमें करीब 10 टन बनास नदी की बजरी भरी मिली। दरअसल चालक ट्रॉली में रेत भरकर और उस पर हरे रंग की मेटी डालकर ले जा रहा था,पुलिस ने जब ट्रैक्टर ट्रॉली पकड़ी तो अवैध बजरी का खुलासा हुआ। पुलिस को चालक से बजरी के खनन एवं परिवहन का कोई वैध अनुज्ञापत्र नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने बजरी सहित ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया। जब्ती की कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से कराई गई। जब्त ट्रैक्टर का पंजीयन नंबर RJ 25 RD 0544 बताया गया है, जबकि ट्रॉली बिना नंबर की है। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ाएं सृजन का आधार होती हैं : सागर

भास्कर न्यूज | बारां समाज की व्यवस्थाओं से पीड़ित होकर व्यक्ति कलम उठाता है। यही पीड़ाएं सृजन का आधार बनती हैं। समाज की विसंगतियों से सुधार की उम्मीद पैदा होती है। इसी से कबीर जैसे रचनाकार जन्म लेते हैं। पीड़ित व्यक्ति के हृदय में कवि जन्म लेता है। कवि पीड़ा के निराकरण की दिशा में लिखता है। इससे कविता बनती है। कविता समाज को सही दिशाबोध देती है। यह बात रामावतार सागर ने ओम साहू की तीसरी पुस्तक ‘आजादी के बाद’ के विमोचन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह में भी उन्हीं पीड़ाओं का वर्णन है। इसमें समाज की विसंगतियों पर चोट और समाधान के प्रयास भी दिए गए हैं। साहित्य रसिक समिति सारस ने ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह का विमोचन समारोह आयोजित किया। जिसकी अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने की। मुख्य अतिथि राजकीय महाविद्यालय कोटा के हिंदी विभाग के आचार्य रामावतार सागर थे। विशिष्ट अतिथि साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश जलजला, अभिभाषक परिषद अध्यक्ष ओम भारद्वाज थे। संचालन श्याम अंकुर ने किया। समारोह की शुरूआत पूजा-अर्चना से हुई। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। नाथूलाल निर्भय ने काव्य वंदना प्रस्तुत की। पुरोधा कवि के रूप में दुष्यंत कुमार की गजल का वाचन बृजभूषण चतुर्वेदी ब्रजेश ने किया। अतिथियों का स्वागत अंकित शर्मा, कृष्णकांत शर्मा, योगेश गुर्जर, राजेश नागर, संपतराम मेहरा ने किया। कृति और कृतिकार का परिचय मयंक सोलंकी ने दिया। उन्होंने बताया कि ‘वक्त के साथ’ और ‘मुझे मत मारो’ के बाद ओम साहू की तीसरी कृति ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह के रूप में आई है। यह कृति राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत साहित्यगार जयपुर से प्रकाशित हुई है। साहित्य लिखना और पढ़ना जरूरी जगदीश जलजला ने कहा कि हृदय का हाहाकार कवि के चिंतन पटल पर अंकित होता है। साहित्यिक भाषा में समाज के सामने आता है। समाज को दिशा देता है। मूल्यों को बनाए रखने के लिए साहित्य लिखना जरूरी है। साहित्य पढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि साहित्य में विविध विधाओं को समाहित करने का गुण होता है। ओम भारद्वाज ने कहा कि कवि विविध विषयों पर अपने विचार लेखनी से उठाता है। समाज का मार्गदर्शन करता है। प्रद्युम्न वर्मा ने कहा कि कवि अपनी लेखनी से समाज को दिशाबोध देता है। यह भागीरथी कार्य है। उन्होंने कहा कि व्यंग्यकार ओम साहू की कृति में राष्ट्र वंदना, समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य की भाषा भी मिलेगी। इसके बाद काव्य गोष्ठी हुई। शिव जोशी वरुणेश, हरि अग्रवाल, भैरवलाल भास्कर, मयंक सोलंकी, बद्रीलाल दिव्य, शकुंतला कुंतल, पीयूष परिंदा, सोनू सुरीला, नाथूलाल निर्भय, अश्विनी त्रिपाठी ने काव्य पाठ किया। समारोह में कोटा और बारां के साहित्यकार, साहू परिवार के सदस्य, मंगलम विहार के लोग आदि मौजूद थे।

शिविर में राजस्व विभाग ने बंटबारा, सीमाज्ञान व नामांतरण खोले

गदरेटा | कसेमलीफाटक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किया गया। जिसमें ग्राम पंचायत प्रशासक अजुद्धीबाई, एडीएम जब्बर सिंह, एसडीएम सुनील झिंगोनिया, नायब तहसीलदार मोहनलाल पंकज, प्रगति प्रसार अधिकारी दीपक मीणा, समाज कल्याण विभाग मामराज सहित अलग-अलग विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। शिविर में ग्रामीणों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वहीं जमीन में नाम शुद्धि का एक परिवाद आया। राजस्व विभाग ने शिविर के दौरान ही नाम शुद्धि कर दी। ग्राम पंचायत ने आबादी भूमि के पट्टे की जानकारी दी। वीबीजीरामजी योजना की जानकारी दी। पशुपालन विभाग ने पशु बीमा पॉलिसी बनाई। सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने पेंशन सत्यापन किया। पालनहार योजना के कार्ड बनाए। राजस्व विभाग ने बंटबारा, सीमाज्ञान, नामांतरण खोले। फार्मर आईडी बनाई। कृषि विभाग ने तार बंधी, पाइप लाइन, कृषि यंत्र के आवेदन लिए।

राजस्थान हाईकोर्ट के जजों के लिए नए नियम लागू:रिटायरमेंट या ट्रांसफर पर जज सस्ती दरों में खरीद सकेंगे फर्नीचर-इलेक्ट्रॉनिक सामान; गद्दे, कालीन, पर्दे मुफ्त ले जाने की अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने जजों के लिए पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत जजों को रिटायरमेंट या ट्रांसफर के समय सरकारी फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान तय ‘डेप्रिसिएटेड वैल्यू’ (मूल्यह्रास दर) पर खरीदने का विकल्प दिया गया है। इतना ही नहीं, जजों को साल में एक बार पॉलिशिंग, ड्राई क्लीनिंग और सर्विसिंग की सुविधा भी मिलेगी। साथ ही, जल्द खराब होने वाली सामग्री के लिए उन्हें अब कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इसके लिए राज्य में जजों के आधिकारिक आवास और आवासीय कार्यालयों में उपलब्ध सुख-सुविधाओं, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रखरखाव तथा उनके निपटान को लेकर नए नियम प्रभावी कर दिए गए हैं। पूरा सिस्टम हाईकोर्ट की एक विशेष जजों की समिति की देखरेख में काम करेगा, जिसे समय-समय पर सामान के प्रतिस्थापन और सूची में बदलाव करने का अधिकार होगा। प्रशासनिक आदेश रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा की ओर से जारी किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को रोकना और जजों के सेवानिवृत्त या स्थानांतरित होने के समय पुरानी वस्तुओं को जमा कराने तथा उनके रखरखाव से जुड़ी प्रशासनिक असुविधाओं को समाप्त करना है। क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत? आमतौर पर जब कोई जज सेवानिवृत्त होता था या ट्रांसफर होता था, तब उसके आवास का सारा सामान सरकारी स्टोर में जमा करा दिया जाता था। लंबे समय तक स्टोर में बंद रहने के कारण ये सामग्रियां बेकार हो जाती थीं। इसके अलावा, नए नियुक्त होने वाले जज भी इन पुराने इस्तेमाल किए गए सामानों को लेने से कतराते थे। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। दरअसल, कुछ वर्ष पहले मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में यह विचार रखा गया था कि सेवानिवृत्त होने वाले जजों को उनके उपयोग में आने वाले फर्नीचर और अन्य सामान को बुक वैल्यू पर खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। वरिष्ठता के आधार पर खरीद का मौका लागत का कम से कम 15% दाम
नियमों के तहत जिन सामग्रियों पर स्टार मार्क लगा है (जैसे गद्दे, कालीन, पर्दे, बेडशीट, क्रॉकरी, वैक्यूम क्लीनर आदि), उन्हें पेरिशेबल (जल्दी खराब होने वाली) वस्तुएं माना गया है। जजों को सेवानिवृत्ति या ट्रांसफर के समय ये सामान बिना किसी भुगतान के अपने साथ ले जाने की अनुमति होगी। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में सामान की न्यूनतम कीमत उसकी मूल खरीद लागत के 15% से कम नहीं आंकी जाएगी। शेष | पेज 7 सामग्रियों का वर्गीकरण और लाइफ स्पैन टिकाऊ फर्नीचर: डाइनिंग टेबल, सोफा सेट, बेड, अलमारी, ड्रेसिंग टेबल, राइटिंग टेबल आदि का जीवनकाल 4 वर्ष तय किया गया है। वहीं, गैर-टिकाऊ फर्नीचर जैसे गद्दे, कालीन, पर्दे, सूटकेस तथा प्लास्टिक/केन का फर्नीचर का जीवनकाल 2 से 4 वर्ष रखा गया है। डोरमैट, डस्टबिन और तौलिये आदि का जीवनकाल 1 से 2 वर्ष तय किया गया है। टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एसी, फ्रिज, पंखे और डीप फ्रीजर का जीवनकाल 6 वर्ष तय किया गया है। टीवी, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, कंप्यूटर, लैपटॉप, गीजर तथा इन्वर्टर-बैटरी की लाइफ 5 वर्ष रखी गई है। मिक्सर-ग्राइंडर, वाटर प्यूरीफायर और इंडक्शन का जीवनकाल 3 वर्ष होगा। वहीं, गैर-टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे रूम हीटर, इंसेक्ट किलर, टेबल लैंप और हेयर ड्रायर आदि की लाइफ 1 से 2 वर्ष निर्धारित की गई है।

वर्षों पुराना सहखातेदारी भूमि विवाद सहमति से हुआ समाप्त

ग्रामीण सेवा शिविरों के तहत ग्राम पंचायत भूरी पहाड़ी में शिविर में वर्षों से लंबित एक महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को राहत दी गई। शिविर में परिवादी रूगनाथ पुत्र बजरंगा मीना एवं हरि पुत्र बजरंगा मीना के मध्य सहखातेदारी कृषि भूमि के विभाजन का मामला प्रस्तुत किया गया। यह विवाद लंबे समय से लंबित था, जिससे दोनों पक्षों को राजस्व अभिलेखों एवं भूमि उपयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में उपस्थित खण्डार उपखण्ड के नायब तहसीलदार पुष्कर सिंह ने दोनों पक्षों की सहमति से प्रकरण का त्वरित परीक्षण कर सहखातेदारी भूमि के विभाजन की कार्रवाई मौके पर ही पूर्ण की गई। संबंधित खाता संख्या 352, कुल रकबा 22.16 बीघा भूमि का विधिवत बंटवारा कर आदेश की प्रति दोनों पक्षों को शिविर में ही उपलब्ध करा दी गई। इस त्वरित कार्रवाई से वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ तथा दोनों पक्षों ने राज्य सरकार की ग्रामीण सेवा शिविर पहल की सराहना करते हुए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिविरों के माध्यम से आमजन की समस्याओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी समाधान संभव हो रहा है।

बुरे काम का बुरा नतीजा:घूसखोर कम्प्यूटर ऑपरेटर को ज्योतिष ने कहा- संकट आने वाला है सोना-चांदी-तांबे की अंगूठी पहनी, रिश्वत के ट्रैप से नहीं बच सका

चार महीने पहले ज्योतिषी ने चेताया था ‘संकट आने वाला है।’ बचने का उपाय पूछा तो सोना-चांदी और तांबे की अंगूठी पहनने की सलाह मिली। नगर निगम के कम्प्यूटर ऑपरेटर राकेश कुमार चौधरी ने तीनों अंगूठियां पहन भी लीं, लेकिन रिश्वत का खेल नहीं छोड़ा। नतीजा, मैरिज सर्टिफिकेट बनाने की एवज में 12,500 रुपए की रिश्वत लेते एसीबी ने उसे और जन्म-मृत्यु-विवाह पंजीयन रजिस्ट्रार विक्रम सिंह बारेठ को ट्रैप कर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में राकेश ने कबूल किया कि वह हर मैरिज सर्टिफिकेट के बदले शादी कराने वाले पुरोहितों से दो से तीन हजार रुपए लेता था। एक दिन में पांच से छह शादियों के सर्टिफिकेट जारी होते थे। एसीबी को राकेश के मोबाइल में पंजीयन अधिकारी विक्रम सिंह से लेन-देन की चैट भी मिली है। साहब, गरीब लोग शादी करवाने आते हैं… रकम कम करवा दीजिए ट्रैप कार्रवाई से पहले पुरोहित रजिस्ट्रार विक्रम सिंह से मिला। उसने कहा कि मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर ली जा रही रिश्वत बहुत ज्यादा है। नीचे कर्मचारी पहले ही पैसे ले लेते हैं। गरीब लोग शादी करवाने आते हैं, वे इतनी राशि देने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए रकम कम करवा दीजिए। इस पर रजिस्ट्रार ने पूछा कि उसकी बात किससे होती है। पुरोहित ने राकेश कुमार का नाम बताया। रजिस्ट्रार ने भरोसा दिलाया कि शाम तक राकेश का फोन आ जाएगा और राशि इतनी कम कर दी जाएगी कि दोबारा कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शाम को राकेश का फोन आया। उसने कहा कि अब तक जारी हुए सभी सर्टिफिकेट के ढाई-ढाई हजार रुपए प्रति सर्टिफिकेट देने होंगे। आगे से प्रति सर्टिफिकेट एक हजार रुपए देने होंगे। रजिस्ट्रार ने चैट डिलीट की, राकेश के मोबाइल ने पूरा राज खोल दिया जांच के दौरान पंजीयन रजिस्ट्रार एवं सांख्यिकी अधिकारी विक्रम सिंह ने अपने मोबाइल से राकेश के साथ हुई लेन-देन की पूरी चैट डिलीट कर दी थी, लेकिन एसीबी ने जब राकेश के दो मोबाइल खंगाले तो विक्रम सिंह के साथ लेन-देन का ब्योरा मिल गया। रिश्वत की राशि फोन-पे और पेटीएम से ली जाती थी। भुगतान के स्क्रीन शॉट वाट्सएप पर साझा किए जाते थे। पूछताछ में विक्रम सिंह ने पहले कहा कि राकेश उनके यहां कर्मचारी ही नहीं है और करीब डेढ़ महीने पहले नौकरी छोड़ चुका है, लेकिन राकेश के मोबाइल से मिले रिकॉर्ड ने इस दावे की पोल खोल दी। इसके बाद एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने 7 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

मामोनी में मोबाइल नेटवर्क ठप, 10 डायल पर लगती है एक कॉल

कस्बे सहित आसपास के खांडा सहरोल, बिची, मोहनपुर गांवों के ग्रामीण कई महीनों से मोबाइल नेटवर्क की समस्या झेल रहे हैं। कॉल ड्रॉप हो रहे हैं। इंटरनेट बंद रहता है। इमरजेंसी में भी संपर्क नहीं हो पा रहा। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि 5जी, 4जी के नाम पर 2जी भी नहीं चल रहा। ग्रामीणों के मुताबिक 10 बार डायल करने पर 1 बार कॉल कनेक्ट होती है। कॉल बीच में कट जाती है। इंटरनेट ठप होने से ऑनलाइन क्लास रुक गई है। यूपीआई पेमेंट नहीं हो रहे। आधार अपडेट का काम भी अटका है। गांव से 1 किमी दूर टॉवर है, जिसके चलते घर के अंदर नेटवर्क नहीं आता। हल्की बारिश में सभी कंपनियों के सिग्नल गायब हो जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत छात्रों को हो रही है। ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे। क्लास मिस हो रही है। किसानों को मंडी भाव देखने में परेशानी है। पीएम किसान, ई-केवाईसी नहीं कर पा रहे। महिलाएं 108, 100 जैसी इमरजेंसी सेवाओं पर कॉल नहीं कर पा रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट ठप होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है।

सरकार से प्रस्ताव रद्द, पर कब्जा बरकरार:20 बीघा चारागाह में भाजपा विधायक बैरवा और बेटे गौशाला चला रहे, इसमें 1 भी गाय नहीं

शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा ने हाइवे किनारे गौशाला दिखाकर 20 बीघा चारागाह को कब्जे में ले लिया है। जमीन के चारों ओर तारबंदी कर निर्माण किया गया है। बिजली कनेक्शन भी है। जहां गौशाला दिखाई गई, वहां भास्कर रिपोर्टर पहुंचा तो एक भी गाय नहीं दिखी। अफसरों ने शाहपुरा तहसील के आराजी नंबर 2543, रकबा 78.68 हेक्टेयर चारागाह में से 5 हेक्टेयर जमीन आवंटन का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि तीन साल गौशाला संचालन का नियम होने से राजस्व विभाग से प्रस्ताव खारिज हो गया, लेकिन मौके पर कब्जा बरकरार है। जिस देव गौशाला सेवा संस्थान के नाम से जमीन आवंटन का प्रस्ताव है, उसमें विधायक लालाराम बैरवा सचिव हैं। छोटा बेटा चिनार देवतवाल अध्यक्ष है। बड़ा बेटा जतिन देवतवाल कोषाध्यक्ष है। विधायक का निजी सहायक हुकमचंद कुमावत उपाध्यक्ष है। दिशांक गर्ग और राहुल बोहरा को सदस्य बनाया है। संस्था में सभी को समाजसेवी दिखा रखा है। फाइल चलने की रफ्तार भी देखिए। देव गौशाला सेवा संस्थान शाहपुरा को सहकारिता विभाग ने 21 अगस्त 2025 को रजिस्टर्ड किया। इसके चार माह में फाइल तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के पास होते हुए राजस्व विभाग तक पहुंच गई। आमलीकला का प्रस्ताव भेजा, चलती फाइल में जमीन बदली शाहपुरा तहसीलदार ने 11 सितंबर 2025 को एसडीओ को देव गौशाला सेवा संस्थान को आमलीकला में आराजी नंबर 485, 3734/473 के रकबा 1.4720, 6.05 में किस्म बारानी में दो हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की। यह जमीन बिलानाम दर्ज है। इसे एसडीएम शाहपुरा ने 15 सितंबर 2025 को कलेक्टर को भेजा। पटवारी व गिरदावर ने भी इसी जमीन का प्रस्ताव भेजा। यह फाइल जमीन आवंटन के लिए चल ही रही थी। इसी फाइल में अचानक एक लेटर जोड़ दिया गया। शेष | इसमें जमीन को बदलकर माताजी का खेड़ा के पास चंबल चौराहे के आगे बता दिया गया। यह जमीन शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे के पास है। मौके पर बिजली का अस्थायी कनेक्शन है, जो विधायक के बेटे चिनार के नाम से है। कनेक्शन के ही एक विवाद में बिजली विभाग के एक एक्सईएन को भी एपीओ किया गया। राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीणा के अनुसार, गौशाला राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 और राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1960 के अधीन रजिस्ट्रीकृत होने तथा गौशाला का तीन वर्ष से संचालित होना आवश्यक है। यह शर्तें पूरी नहीं होने से आवंटन खारिज कर दिया गया। चारागाह में आवंटन हो सकता है, इसमें छूट आई थी। यह विशेष प्रकरण था, इसलिए हमने प्रस्ताव बनाकर भेजा। सरकार को जो सही लगा, वह किया।
भीमराज परिहार, तहसीलदार गायें दूसरी जगह शिफ्ट कर रखी हैं : विधायक गौशाला आवंटन का प्रस्ताव आपने भिजवाया है, पर मौके पर एक भी गाय नहीं है?
हां, प्रक्रिया चल रही है। तैयारी हवा में थोड़े होगी, मौके पर कुछ तो करना ही पड़ेगा। गायें दूसरी जगह हैं। ट्रस्ट में बेटा अध्यक्ष, दूसरा कोषाध्यक्ष और आप सचिव हैं?
कमेटी तो बदलती रहती है। हम गलत काम नहीं कर रहे हैं। बेटा गौसेवा में रुचि रखता है। दुर्गापुरा गौशाला, जयपुर में भी जुड़ा है। पत्नी भी जयपुर में गौशाला से जुड़ी है। मैं संघ में गौसेवा का दायित्व देखता हूं। हमारा मकसद यही है कि प्रभावी व्यक्ति होते हैं तो काम जल्दी सफल हो जाता है। पहले आमलीकला का प्रस्ताव भेजा था, अब बदल गया?
सरकार ने चारागाह में गौशाला की छूट दी थी। इसमें तीन साल का नियम है। फिलहाल आवंटन नहीं हो पाया। हमने सभी जगह इसका रजिस्ट्रेशन कराया है। कौन-सा प्रकरण है, मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है। मौका देखना पड़ेगा। एक प्रस्ताव भेजा था। कलेक्टर के यहां से क्या हुआ, मुझे पता नहीं है।
सुनील मीणा, एसडीएम शाहपुरा