सीमावर्ती जिलों में मस्जिद व मदरसों पर कार्रवाई का विरोध:चोपदार ने सरकार को घेरा, बोले-आस्था और संवैधानिक अधिकारों पर उठ रहे सवाल
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश अध्यक्ष एमडी चोपदार ने जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर समेत सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, मजारों और मदरसों पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द की परंपरा रही है, वहां धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की जा रही कार्रवाई चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। चोपदार ने कहा कि मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को चुनिंदा रूप से हटाया जाना केवल भवनों को तोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि इससे लाखों लोगों की धार्मिक आस्था और संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान इन सीमावर्ती इलाकों में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों ने मिलकर देश की रक्षा में योगदान दिया था। ऐसे में स्थानीय नागरिकों की निष्ठा और धार्मिक भावनाओं पर संदेह पैदा करने वाली किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि संवेदनशील मामलों में अचानक नोटिस जारी कर कुछ ही घंटों के भीतर वर्षों पुराने ढांचों को ध्वस्त किए जाने से प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यह कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष जांच के आधार पर हो रही है या फिर किसी राजनीतिक दबाव के तहत की जा रही है। चोपदार ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि किसी भी कार्रवाई से पहले पारदर्शी जांच, स्थानीय समुदायों की सुनवाई और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल किसी भी समुदाय की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का हिस्सा होते हैं और इनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण ही सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से भी अपील की कि सीमावर्ती जिलों में चल रही कार्रवाई की समीक्षा कराई जाए और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। चोपदार ने कहा कि देश और उसकी सुरक्षा सर्वोपरि है तथा संविधान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष भी उठाया गया है। उनके अनुसार, कांग्रेस अल्पसंख्यकों के साथ किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी और लोकतांत्रिक एवं कानूनी माध्यमों से लोगों की आस्था तथा थार की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

