मगरमच्छ हाथ खा गया फिर भी हिम्मत नहीं हारा:चंबल नदी में 15 मिनट तक लड़ता रहा, आंख पर मुक्के मारकर बचाई जान
करौली जिले में किसान को मगरमच्छ चंबल नदी में खींच ले गया। किसान का दाहिना हाथ मगरमच्छ के जबड़े में था। 30-40 फीट अंदर नदी में खींच ले गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। बाएं हाथ से वह मगरमच्छ की आंख पर 15 मिनट तक लगातार वार करता रहा और अपनी जान बचा ली। इस दौरान चीख-पुकार सुनकर दो ग्रामीण पहुंचे और लाठी-डंडों से हमला कर मगरमच्छ को भगा दिया। सूचना मिलते ही आसपास के लोग पहुंचे और गंभीर रूप से घायल पशुपालक का करौली जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। किसान का एक हाथ मगमच्छ खा गया है। मामला करणपुर क्षेत्र में चंबल नदी के धूसई घाट का रविवार दोपहर 2:30 बजे का है। धूसई गांव निवासी पूरण मीणा बकरियों को पानी पिलाने गए थे। इसी दौरान मगरमच्छ ने हमला कर दिया। बकरियों को पानी पिलाने गया था किसान धूसई गांव निवासी किसान पूरण मीणा (55) पुत्र रामफूल मीणा दोपहर में अपनी बकरियों को पानी पिलाने के लिए चंबल नदी के धूसई घाट पर गए थे। इसी दौरान प्यास लगने पर वह नदी किनारे पानी भरने के लिए बैठ गए, तभी अचानक मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया। हाथ जबड़े में दबोचकर गहरे पानी में खींच ले गया मगरमच्छ पूरण मीणा ने बताया- मगरमच्छ ने मेरे दाहिने हाथ को जबड़े में दबोच लिया। मुझे नदी में करीब 30 से 40 फीट अंदर गर्दन तक गहरे पानी में खींच ले गया। जान पर बन आने के बावजूद मैं हिम्मत नहीं हारा और लगातार मगरमच्छ से संघर्ष करता रहा। संघर्ष के दौरान मेरा बायां हाथ मगरमच्छ की आंख तक पहुंच गया। मैंने पूरी ताकत से उसकी आंख पर वार किया और साथ ही मदद के लिए जोर-जोर से आवाज लगाई। मेरी चीख सुनकर पास में मौजूद मोतीलाल और प्यारेलाल दौड़कर आए। ग्रामीणों की बहादुरी से बची जान दोनों ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से मगरमच्छ पर हमला शुरू कर दिया। करीब 15 मिनट तक चले संघर्ष के बाद आंख और शरीर पर चोट लगने से मगरमच्छ ने पूरण का हाथ छोड़ दिया और वापस नदी में चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने घायल पूरण को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला। प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर घटना के बाद ग्रामीण पूरण मीणा को करणपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉ. रामराज मीणा और डॉ. महेश मीणा ने प्राथमिक इलाज किया। गंभीर चोट को देखते हुए उन्हें करौली जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

