नवनेरा परियोजना में अधिग्रहित भूमि पर खेती प्रतिबंधित:किसानों को चेतावनी, बुवाई की तो होगी कार्रवाई; 7 गांवों में काम शुरू
बूंदी जिले में नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना के तहत अधिग्रहित सात गांवों की जमीन पर अब किसान खेती नहीं कर सकेंगे। प्रशासन ने सार्वजनिक सूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि अधिग्रहित भूमि पर जुताई, बुवाई या फसल बोने पर फसल को होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित किसान की होगी। प्रशासन ने हिदायत दी है कि सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ राजकीय कार्रवाई भी की जाएगी। सात गांवों की भूमि परियोजना के लिए अधिग्रहित राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीआईयू) कोटा के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि नवनेरा बैराज के डिलीवरी सिस्टर्न से मेज एनीकट तक फीडर निर्माण के लिए गुहाटा, कोटाखुर्द, लबान, दहीखेड़ा, डपटा, रामगंज और खरायता गांवों की भूमि अधिग्रहित की गई है। भूमि अर्जन अधिनियम-2013 के तहत 28 मई 2025 को अवार्ड जारी किया जा चुका है। अधिकांश किसानों को मिल चुका मुआवजा परियोजना से प्रभावित अधिकांश किसानों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जबकि शेष किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुआवजा प्राप्त कर चुके या मुआवजे की प्रक्रिया में शामिल सभी किसान अधिग्रहित भूमि पर किसी भी प्रकार की कृषि गतिविधि नहीं कर सकेंगे। जुताई-बुवाई करने पर किसान खुद होंगे जिम्मेदार प्रशासन के अनुसार अधिग्रहित भूमि पर जुताई, बुवाई, खाद-बीज डालना या फसल उगाने जैसे कार्य प्रतिबंधित हैं। यदि इसके बावजूद कोई किसान खेती करता है और निर्माण कार्य के दौरान उसकी फसल को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं संबंधित हितधारी की होगी। ऐसे मामलों में किसी प्रकार का नुकसान दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्देशों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई विभाग ने बताया कि किसानों को पहले भी इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है। अब सार्वजनिक सूचना जारी कर दोबारा चेतावनी दी गई है कि सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी राजकीय कार्रवाई की जाएगी

