स्कॉलरशिप में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, 20 कॉलेज-इंस्टीट्यूट बैन:स्टूडेंट्स के नाम पर फर्जी डॉक्यूमेंट भेजे, कई संस्थान शुरू भी नहीं हुए
राज्य सरकार ने पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में करोड़ों की हेराफेरी और घोटाले में शामिल देशभर के 20 कॉलेज और इंस्टीट्यूट को बैन कर दिया। इनमें राजस्थान के 16 और दूसरे राज्यों के चार कॉलेज शामिल हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने गड़बड़ी में शामिल संस्थाओं के भेजे गए स्कॉलरशिप के आवेदनों को खारिज कर दिया है। इनमें कई कॉलेजों ने पोर्टल पर स्टूडेंट्स के नाम पर फर्जी डॉक्यूमेंट अपलोड किए। वहीं कई कॉलेज ऐसे भी हैं, जो चालू नहीं थे। स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन आवेदनों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभाग ने 6 इंस्टीट्यूट पर परमानेंट और 14 पर 3 से 5 साल तक का प्रतिबंध लगाया है। इनमें दो मेडिकल कॉलेज भी हैं। विभाग ने नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के नारायणा मेडिकल कॉलेज और जबलपुर (मध्य प्रदेश) के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज पर 5 साल तक के लिए बैन लगाया है। फर्जीवाड़े में शामिल इंस्टीट्यूट पर अब FIR भी दर्ज करवाई जाएगी। अब स्कॉलरशिप के लिए नहीं कर पाएंगे आवेदन सरकार की कार्रवाई के बाद अब ये संस्थान स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। इनके लॉग-इन आईडी बैन कर दिए गए हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने जांच में दोषी पाई गई संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई के अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। जानें संस्थाओं ने कैसे की गड़बड़ी संस्थाओं ने पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए फर्जी दस्तावेज अपलोड कर भेजे जो स्टूडेंट पात्र नहीं थे, उनके नाम से भी स्कॉलरशिप उठाई, दोबारा भी आवेदन कई मामलों में ऐसे स्टूडेंट के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के आवेदन भेजे गए, जो पात्र नहीं थे। कई आवेदन ऐसे भी थे, जो पहले उसी कोर्स में स्कॉलरशिप ले चुके थे। जो कोर्स स्कॉलरशिप के लिए पात्र नहीं था, उसके भी आवेदन मंजूर करके भेजे गए। कॉलेज-संस्था चल नहीं रही, स्कॉलरशिप के आवेदन भेजे कई कॉलेज, संस्थान पूरी तरह चालू भी नहीं हुए थे, लेकिन उनके यहां से भी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के आवेदन विभाग के पोर्टल से भेजे गए। चंदेल प्राइवेट ITI, गुरुकृपा महाविद्यालय पूरी तरह से शुरू नहीं हुए थे, लेकिन इन्होंने भी आवेदन भेजे। विभाग की जांच में फर्जीवाड़ा साबित, करोड़ों की स्कॉलरशिप हड़पी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में फर्जीवाड़ा करने वाली संस्थाओं के खिलाफ जांच में भारी गड़बड़ियां पाई गई थीं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने गड़बड़ी वाली संस्थाओं को नोटिस देकर पक्ष रखने के लिए तलब किया। कई संस्थाओं के प्रतिनिधि पक्ष रखने के लिए विभाग के सामने नहीं पहुंचे। वहीं जिन संस्थानों के प्रतिनिधि विभाग के पास पहुंचे, उनका जवाब संतोषजनक नहीं माना गया। जांच समितियों की रिपोर्ट, जिला अधिकारी की रिपोर्ट और पोर्टल के डेटा विश्लेषण के आधार पर विभाग ने माना कि इन संस्थानों ने मिलीभगत और षड्यंत्र के तहत सरकार को गुमराह करने का प्रयास किया है। इसके बाद 20 संस्थाओं पर बैन लगाने का फैसला किया गया। दो बार जांच करवाई, दोनों बार गड़बड़ी साबित पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में फर्जीवाड़े की दो बार जांच करवाई गई। दोनों बार फर्जीवाड़ा साबित हुआ। मामले की जांच के लिए विभाग ने पहली बार 24 अप्रैल 2025 को समिति बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट 19 मई 2025 को साैंप दी। वहीं मामले की गहराई से जांच के लिए 30 मई 2025 को दूसरी जांच कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने 13 जून 2025 को रिपोर्ट सौंपी थी। दोनों जांच कमेटियों की रिपोर्ट में भारी गड़बड़ियों की पुष्टि हुई।

