स्टूडेंट जीरो, पढ़ाने के लिए 9 टीचर:राजस्थान में ऐसे 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल, हिंदी मीडियम भी शुरू करने की तैयारी
राजस्थान के 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या बहुत कम है। कई स्कूलों में छात्रों से ज्यादा टीचर है, जबकि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां एक भी स्टूडेंट नहीं पढ़ रहा है। इन हालात को देखते हुए राज्य सरकार अब इन स्कूलों में अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम भी शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों से सात दिन में विस्तृत रिपोर्ट और प्रस्ताव मांगे गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को भी एडमिशन मिलेगा और स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ सकेगी। इन स्कूलों की कम छात्र संख्या में भी फर्जी नामांकन की आशंका है। कई बार स्कूलों में सिर्फ टीचर के पद को बचाये रखने के लिए भी छात्रों के फर्जी नाम लिख दिए जाते हैं। ऐसे में इन सभी स्कूलों में फर्जी नामांकन की जांच की जा रही है। ऐसे तीन सौ स्कूलों में जमे हैं टीचर शिक्षा विभाग ने ऐसे करीब 300 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की सूची तैयार की है, जहां छात्र संख्या 50 से कम है, जबकि स्टाफ 10 से 15 तक है। कई स्कूलों में एक शिक्षक को पढ़ाने के लिए औसतन 10 छात्र भी नहीं मिल रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों से प्रस्ताव मांगे हैं कि इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के साथ हिन्दी माध्यम भी शुरू किया जाए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और छात्र संख्या बढ़ाई जा सके। बंद होंगे या फिर विलय सरकार ने फिलहाल इन स्कूलों को बंद करने या दूसरे स्कूलों में विलय करने के बजाय हिन्दी माध्यम शुरू करने का विकल्प चुना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों को भी इन स्कूलों में एडमिशन का अवसर मिलेगा और खाली पड़ी शैक्षणिक क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। ये कैसा प्रवेशोत्सव ? शिक्षा विभाग हर साल नया सत्र शुरू होते ही प्रवेशोत्सव मनाता है। इन तीन सौ स्कूलों में अधिकांश की संख्या बढ़ने के बजाय घट गई है। ऐसे में प्रवेशोत्सव महज औपचारिक रह गए हैं, जिसमें स्कूल में छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास नहीं होते।

