गेहूंखेड़ी आयुर्वेदिक अस्पताल में 'ग्रीन क्लिनिक' तैयार:औषधीय पौधे बता रहे बीमारियों के प्राकृतिक उपचार का तरीका

झालावाड़ जिले के अकलेरा उपखंड की ग्राम पंचायत गेहूंखेड़ी स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में एक हर्बल गार्डन विकसित किया गया है। यह गार्डन ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य शिक्षा का केंद्र बन गया है, जहां छोटी-मोटी बीमारियों के लिए प्राकृतिक उपचार की जानकारी दी जा रही है। अस्पताल परिसर में तैयार इस हर्बल गार्डन में तुलसी, अर्जुन, हरसिंगार, पत्थरचट्टा, मीठा नीम, पपीता, सप्तपर्णी और एलोवेरा सहित कई औषधीय पौधे लगाए गए हैं। प्रत्येक पौधे के पास हिंदी और अंग्रेजी में नेम प्लेट लगी है, जिससे आम व्यक्ति और छात्र आसानी से पौधे की पहचान और उसके औषधीय गुणों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। घरों में भी औषधीय पौधे लगाने के लिए कर रहे प्रेरित
आयुर्वेद विभाग का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत उन्हें अपने घरों में भी औषधीय पौधे लगाकर सामान्य बीमारियों का प्राथमिक स्तर पर उपचार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि अनावश्यक रूप से अस्पताल आने की जरूरत कम हो। आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. सोनिका मीणा ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों और ग्रामीणों को हर्बल गार्डन का भ्रमण कराकर प्रत्येक पौधे के औषधीय उपयोग के बारे में विस्तार से बताया जाता है। उदाहरण के तौर पर एलोवेरा का गूदा जलने या त्वचा संबंधी सामान्य समस्याओं में लाभदायक माना जाता है। लोगों में औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ रही
डॉ. मीणा ने बताया कि तुलसी और नीम का काढ़ा सर्दी, खांसी और जुकाम में राहत पहुंचाने में सहायक हो सकता है, जबकि अर्जुन की छाल हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि लोगों में औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और कई ग्रामीण अपने घरों में भी ऐसे पौधे लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
विभाग का प्रयास है कि आयुर्वेद की परंपरागत ज्ञान-परंपरा को जन-जन तक पहुंचाकर लोगों को प्राकृतिक और सरल स्वास्थ्य विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

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