डिप्रेशन के कारण बाल खाने लगी 20 साल की युवती:25 किलो रह गया था वजन; ऑपरेशन कर निकाला 62 सेंटीमीटर लंबा बालों का गुच्छा

बाड़मेर में 20 साल की युवती डिप्रेशन के कारण सिर के बाल खाने लग गई थी। उसके घर वालों को इसके बारे में पता तक नहीं चला। लगातार 2 साल तक निगले गए बाल पेट में जमा होते रहे और समय के साथ एक सॉलिड गुच्छे का रूप ले लिया। इसके कारण अचानक युवती का वजन 20 किलो घटकर 25 किलो रह गया। साथ ही पेट फूलकर दर्द होने लगा। इस पर परिजन उसे बाड़मेर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने जांच की तो पेट में गांठ का पता चला। इस पर जोधपुर एम्स रेफर कर दिया गया। जोधपुर में दोबारा जांच की गई तो सामने आया कि युवती के पेट में बालों का बड़ा गुच्छा (गैस्ट्रिक ट्राइकोबेजोअर) है। एम्स में डॉक्टर्स की टीम ने युवती का ऑपरेशन किया और पेट से 62 सेंटीमीटर लंबा बालों का गुच्छा निकाला। बाड़मेर में जांच के दौरान पता चला था पेट में गांठ
एम्स के सर्जन डॉ. महेंद्र लोढ़ा ने बताया- 10 दिन पहले युवती की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। इस पर परिजन उसे बाड़मेर हॉस्पिटल ले गए। जांच में उसके पेट में गांठ का पता चला। इसके बाद परिजन बच्ची को एम्स लेकर आए। यहां जांच में सामने आया कि उसके पेट में बालों का गुच्छा है। डॉ. महेंद्र लोढ़ा ने बताया- बालों का ये गुच्छा पेट से आगे बढ़कर छोटी आंत के प्रारंभिक भाग (प्रॉक्सिमल जेजुनम) तक फैला हुआ था। इसके कारण मरीज को लंबे समय से पेट दर्द रहने के साथ ही भूख में कमी आने लगी थी। उसका वजन करीब 20 किलो तक कम हो गया और खून की कमी आ गई। 7 दिन पहले युवती का ऑपरेशन किया गया। करीब डेढ़ घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद पेट से 62 सेंटीमीटर लंबा बालों का गुच्छा निकाला गया। इसके बाद मरीज की तबीयत में सुधार हुआ और 3 दिन पहले उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। ट्राइकोबेजोअर एक दुर्लभ स्थिति
डॉ. लोढ़ा ने बताया- युवती जिस बीमारी (ट्राइकोटिलोमेनिया) से ग्रसित थी, उसमें बाल निगलने की आदत काफी रेयर है। इसमें व्यक्ति द्वारा निगले गए बाल पेट में जमा होते रहते हैं और समय के साथ एक सॉलिड गुच्छे का रूप ले लेते हैं। जब यह बालों का गुच्छा पेट से निकलकर छोटी आंत तक फैल जाता है, तो इस स्थिति को रैपुंजेल सिंड्रोम कहा जाता है। उन्होंने बताया- ये सिंड्रोम 100 से 1000 लोगों में से किसी एक को होता है। ऑपरेशन टीम में ये डॉक्टर शामिल थे
ऑपरेशन टीम में सर्जन डॉ. महेंद्र लोढ़ा के साथ डॉ. भारत (एनेस्थेटिस्ट), डॉ. तेजपाल, डॉ. वैशाली, डॉ. गदाधर, डॉ. प्रशांत, डॉ. निशांत, डॉ. साहिल जैन, डॉ. ध्रुव रोहेला और नर्सिंग ऑफिसर गजानंद, कोमल भी शामिल थे।

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