अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस विशेष:कभी शराब ने तबाह की जिंदगी, अब 1500 से ज्यादा युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकाला

कभी शराब की लत ने उन्हें परिवार, समाज और खुद की नजरों में गिरा दिया था। जॉन्डिस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे नरपत सिंह चौहान के सामने जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा था। लेकिन भतीजी के एक मासूम सवाल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वही नरपत सिंह न केवल खुद नशे से मुक्त हैं, बल्कि अपने आरोग्य सेवा संस्थान उदयपुर के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाल चुके हैं। 26 जून अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा सकता है। बदलाव की तीन कहानियां, जो उम्मीद जगाती हैं नरपत सिंह बताते हैं कि नशे से बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उनके संस्थान से जुड़ी कई कहानियां आज बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं और लोगों को नई दिशा दे रही हैं। भतीजी के एक सवाल ने बदल दी जिंदगी नरपत सिंह बताते हैं कि तीन माह की उम्र में पिता का साया उठ गया था। युवावस्था में तनाव दूर करने के लिए शुरू हुई शराब की आदत धीरे-धीरे गंभीर लत बन गई। जॉन्डिस और लिवर संबंधी बीमारियों के बीच नशामुक्ति केंद्र में उपचार के दौरान भतीजी के सवाल-“काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?”-ने उन्हें झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए नशा छोड़ने का संकल्प लिया।

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