70 करोड़ का फर्जीवाड़ा:खाद की जगह मिट्टी बेच दी; SIT ने आरोपी माना, CID-CB से क्लीन चिट
कृषि विभाग ने 5 साल में सरकारी टेंडरों के जरिए 70 करोड़ की घटिया खाद खपा डाली। 29 सैंपल फेल हुए तो मामले का खुलासा हुआ। साल 2021 में करधनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच तीन एडिशनल एसपी और एसआईटी ने की। तीनों ने आरोप को सही माना। इसके बाद चौथी बार जांच सीआईडी-सीबी को दी गई। सीआईडी-सीबी ने मामले को सिविल नेचर का बताते हुए 3 जून को क्लीन चिट दे दी। वर्ष 2011 से 2016 के बीच इस फर्म ने कृषि विभाग के टेंडरों में 70 करोड़ की खाद सप्लाई की थी। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जब कृषि विभाग ने इस खाद की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाई, तो 29 नमूने अमानक (फेल) पाए गए। विभाग ने जालसाजी पकड़े जाने पर निर्माता कंपनी, वितरक, विक्रेता और कागजी क्वालिटी कंट्रोलर आनंदी लाल के खिलाफ 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 मुकदमे दर्ज करवा दिए। एफआर में साफ लिखा कि किस आधार पर रिपोर्ट दी
सीआईडी-सीबी के एडिशनल एसपी नानगराम का कहना है कि एफआर देना आईओ की राय है। इसे अफसरों ने सही माना है। कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है। एफआर में साफ है कि किस आधार पर यह रिपोर्ट दी गई है। भास्कर इनसाइट – नौकरी मांगने आए युवक के दस्तावेज पर फर्जी शपथ पत्र झोटवाड़ा निवासी आनंदी ने 2011 में विद्याधर नगर स्थित रॉयल केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था। कंपनी के हरवेंद्र माथुर, कलीम अहमद और गिर्राज ने शैक्षणिक और निवास संबंधी दस्तावेज रख लिए। आनंदी को नौकरी तो नहीं दी गई, लेकिन उसके नाम से क्वालिटी कंट्रोलर का शपथ पत्र दे दिया। नमूने जांच में फेल होने पर 29 केस दर्ज हुए। तब मामला खुला। फैक्ट्री का कारोबार 20 से 22 करोड़ रुपए तक आरोपी कलीम अहमद ने 14 जून 2025 को पूछताछ में बताया था कि फैक्ट्री का कारोबार 20-22 करोड़ रहा। पूरा माल कोऑपरेटिव एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बेचा जाता था। फिलहाल, सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका लंबित है। इसके बावजूद सीआईडी-सीबी द्वारा मामले में एफआर लगाना सवालों में है। 9 अफसरों ने 5 साल में मामले की जांच की, तीन ने केस ही छोड़ दिया था जांच सीआईडी-सीबी कर चुकी है; कृषि विभाग का इस मामले से कोई संबंध नहीं है : संयुक्त निदेशक इस पूरे मामले की जांच पहले ही सीआईडी-सीबी कर चुकी है। विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दोनों पक्षों के बीच आपसी विवाद का मामला है, कृषि विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है। -विनोद कुमार गेरा, संयुक्त निदेशक (खाद-बीज सप्लाई), कृषि आयुक्तालय, जयपुर

